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Reading: CBDT का बड़ा अभियान: 2.57 लाख करोड़ के बकाया कर की वसूली के लिए देशभर में बनेगी विशेष टीमें
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CBDT का बड़ा अभियान: 2.57 लाख करोड़ के बकाया कर की वसूली के लिए देशभर में बनेगी विशेष टीमें

Namam Sharma
Last updated: 2026/05/09 at 11:08 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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8 Min Read
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केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) वित्त वर्ष 2026-27 में बकाया कर वसूली को लेकर बड़ा अभियान शुरू करने जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार विभाग करीब 2.57 लाख करोड़ रुपये की लंबित कर मांगों की वसूली पर फोकस करेगा।

Contents
किन मामलों पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस?संपत्तियों का पता कैसे लगाएगा विभाग?कर विभाग किन लोगों पर रखेगा नजर?पिछले वर्ष कितनी अपीलों का हुआ निपटारा?कितनी घटी लंबित अपीलें?सरकार ने कितना रखा है प्रत्यक्ष कर संग्रह लक्ष्य?पिछले वर्ष कितना रहा कर संग्रह?क्यों अहम माना जा रहा यह अभियान?कर अनुपालन पर क्यों बढ़ रहा फोकस?सीईआरएसएआइ डाटाबेस क्यों महत्वपूर्ण?बड़े करदाताओं की निगरानी क्यों बढ़ रही?अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ सकता है असर?आगे क्या हो सकता है?डिजिटल निगरानी से कैसे बदल रहा टैक्स सिस्टम?ईमानदार करदाताओं के लिए क्यों अहम है यह अभियान?सरकार के राजस्व लक्ष्य के लिए क्यों जरूरी है वसूली?उच्च मूल्य वाले मामलों पर क्यों बढ़ा फोकस?तकनीक आधारित जांच क्यों हो रही मजबूत?सीईआरएसएआइ डाटाबेस क्यों अहम माना जा रहा?कर अनुपालन बढ़ाने पर क्यों है जोर?अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ सकता है असर?लंबित कर मामलों को कम करना क्यों जरूरी?आगे क्या हो सकता है?

इसके लिए देशभर में विशेष टीमें बनाई जाएंगी, जो बड़े बकाया मामलों और गैर-अनुपालन करने वाले करदाताओं पर नजर रखेंगी।

किन मामलों पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस?

अधिकारियों के अनुसार इस अभियान में शीर्ष 10 हजार बड़े बकाया कर मामलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विशेष टीमें ऐसे मामलों की निगरानी करेंगी जहां लंबे समय से कर वसूली लंबित है।


संपत्तियों का पता कैसे लगाएगा विभाग?

रिपोर्ट्स के अनुसार कर विभाग बकायेदारों की संपत्तियों और सुरक्षित परिसंपत्तियों का पता लगाने के लिए सीईआरएसएआइ डाटाबेस का इस्तेमाल कर सकता है। यह डाटाबेस बंधक और संपत्ति से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराता है।


कर विभाग किन लोगों पर रखेगा नजर?

अधिकारियों के अनुसार विभाग बड़े करदाताओं, उच्च मूल्य वाले मामलों और गैर-अनुपालन करने वाले करदाताओं की विशेष निगरानी करेगा।

इसके अलावा छूट और कटौतियों के दावों की भी जांच की जा सकती है।


पिछले वर्ष कितनी अपीलों का हुआ निपटारा?

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान CBDT ने 2.24 लाख अपीलों का निपटारा किया। इन अपीलों से संबंधित विवादित कर मांग करीब 8.27 लाख करोड़ रुपये बताई गई है।


कितनी घटी लंबित अपीलें?

रिपोर्ट्स के अनुसार लंबित कर अपीलों की संख्या 5.40 लाख से घटकर 4.95 लाख तक आ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कर विवाद निपटान प्रक्रिया में तेजी आई है।


सरकार ने कितना रखा है प्रत्यक्ष कर संग्रह लक्ष्य?

केंद्रीय बजट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रत्यक्ष कर संग्रह का लक्ष्य 26.97 लाख करोड़ रुपये रखा गया है।


पिछले वर्ष कितना रहा कर संग्रह?

वित्त वर्ष 2025-26 में शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 23.4 लाख करोड़ रुपये रहा।

यह पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 5.1 प्रतिशत अधिक बताया गया है। हालांकि यह संशोधित अनुमान से लगभग 81 हजार करोड़ रुपये कम रहा।


क्यों अहम माना जा रहा यह अभियान?

विशेषज्ञों के अनुसार सरकार राजकोषीय स्थिति मजबूत रखने और कर अनुपालन बढ़ाने पर जोर दे रही है।

इसी वजह से बड़े बकाया मामलों की वसूली को प्राथमिकता दी जा रही है।


कर अनुपालन पर क्यों बढ़ रहा फोकस?

पिछले कुछ वर्षों में सरकार डिजिटल निगरानी, डेटा विश्लेषण और तकनीक आधारित कर प्रशासन पर तेजी से काम कर रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कर चोरी और गैर-अनुपालन मामलों पर नियंत्रण मजबूत हो सकता है।


सीईआरएसएआइ डाटाबेस क्यों महत्वपूर्ण?

सीईआरएसएआइ प्रणाली के जरिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों के पास गिरवी रखी गई संपत्तियों का रिकॉर्ड उपलब्ध रहता है।

विशेषज्ञों के अनुसार इससे बकायेदारों की परिसंपत्तियों का पता लगाने में मदद मिल सकती है।


बड़े करदाताओं की निगरानी क्यों बढ़ रही?

अधिकारियों के अनुसार उच्च मूल्य वाले लेनदेन और बड़े करदाताओं की निगरानी बढ़ाई जा रही है ताकि कर संग्रह लक्ष्य हासिल किया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में डेटा आधारित जांच और ज्यादा मजबूत हो सकती है।


अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ सकता है असर?

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार बेहतर कर वसूली से सरकार की राजस्व स्थिति मजबूत हो सकती है।

इससे बुनियादी ढांचा, कल्याण योजनाओं और सरकारी निवेश के लिए संसाधन बढ़ सकते हैं।


आगे क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कर विभाग तकनीक आधारित निगरानी और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम का ज्यादा इस्तेमाल कर सकता है।

इसके साथ ही बड़े बकाया मामलों में सख्त वसूली कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

डिजिटल निगरानी से कैसे बदल रहा टैक्स सिस्टम?

विशेषज्ञों के अनुसार सरकार डेटा विश्लेषण और डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए टैक्स प्रशासन को लगातार मजबूत बना रही है। उच्च मूल्य वाले लेनदेन, बैंकिंग रिकॉर्ड और वित्तीय गतिविधियों की निगरानी अब पहले के मुकाबले ज्यादा तकनीक आधारित हो गई है।


ईमानदार करदाताओं के लिए क्यों अहम है यह अभियान?

विशेषज्ञों का मानना है कि बकाया कर वसूली बढ़ने से टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत हो सकती है। इससे नियमित रूप से कर चुकाने वाले ईमानदार करदाताओं के बीच भरोसा बढ़ने की उम्मीद है।


सरकार के राजस्व लक्ष्य के लिए क्यों जरूरी है वसूली?

बेहतर टैक्स कलेक्शन सरकार को बुनियादी ढांचा, कल्याण योजनाओं और विकास परियोजनाओं पर खर्च बढ़ाने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार मजबूत कर राजस्व किसी भी अर्थव्यवस्था की वित्तीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।


उच्च मूल्य वाले मामलों पर क्यों बढ़ा फोकस?

कर विभाग अब उन मामलों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है जहां बड़ी रकम लंबे समय से बकाया है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे वसूली प्रक्रिया को तेज करने और लंबित मामलों को कम करने में मदद मिल सकती है।


तकनीक आधारित जांच क्यों हो रही मजबूत?

सरकार पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल कर प्रशासन को तेजी से बढ़ावा दे रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा विश्लेषण और डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम कर चोरी के मामलों की पहचान को आसान बना सकते हैं।


सीईआरएसएआइ डाटाबेस क्यों अहम माना जा रहा?

सीईआरएसएआइ डाटाबेस के जरिए बंधक और संपत्ति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की जा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे बकायेदारों की परिसंपत्तियों का पता लगाने में कर विभाग को मदद मिल सकती है।


कर अनुपालन बढ़ाने पर क्यों है जोर?

सरकार लगातार कर आधार बढ़ाने और गैर-अनुपालन को कम करने पर फोकस कर रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार बेहतर कर अनुपालन से सरकारी राजस्व में स्थिरता लाई जा सकती है।


अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ सकता है असर?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत कर वसूली से सरकार की वित्तीय स्थिति बेहतर हो सकती है। इससे सार्वजनिक निवेश, बुनियादी ढांचा विकास और सामाजिक योजनाओं के लिए ज्यादा संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं।


लंबित कर मामलों को कम करना क्यों जरूरी?

लंबे समय तक लंबित रहने वाले कर विवाद न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर दबाव बढ़ाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि तेज निपटान और वसूली प्रक्रिया से कर प्रशासन ज्यादा प्रभावी बन सकता है।


आगे क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में तकनीक आधारित टैक्स निगरानी और ज्यादा सख्त हो सकती है। इसके साथ ही बड़े कर बकायेदारों के खिलाफ जांच और वसूली अभियानों में तेजी देखने को मिल सकती है।

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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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