Gold & Silver Price Outlook: अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर नरम रुख, कमजोर अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और भारत में आने वाला त्योहारी एवं शादी का सीजन सोने-चांदी की कीमतों को मजबूत सपोर्ट दे सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, 2026 के अंत तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत $4,800 से $5,000 प्रति औंस तक पहुंच सकती है, जबकि चांदी $85 से $90 प्रति औंस का स्तर छू सकती है।
सोने और चांदी की कीमतों को लेकर ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में तेजी की उम्मीद बढ़ रही है। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति, अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, डॉलर की चाल और भारत में बढ़ने वाली फिजिकल डिमांड पर है। इन सभी फैक्टर्स के बीच कीमती धातुओं के लिए आउटलुक फिलहाल सकारात्मक नजर आ रहा है।
मेटल रिसर्च एजेंसी ‘मेटल्स फोकस’ के सीनियर कंसलटेंट हर्षल बरोट के अनुसार, 2026 के अंत तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत $4,800 से $5,000 प्रति औंस तक पहुंच सकती है। वहीं, चांदी के लिए भी लंबी अवधि में $85 से $90 प्रति औंस का अनुमान जताया गया है।
सोने के लिए $4,000 का स्तर बना मजबूत सपोर्ट
ग्लोबल मार्केट में सोने के लिए $4,000 प्रति औंस का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना जा रहा है। इसका मतलब है कि अगर कीमतों में बीच-बीच में गिरावट आती भी है, तो इस स्तर के आसपास खरीदारी का सपोर्ट मिलने की संभावना बनी रह सकती है।
हालांकि, तेजी के दौरान $4,500 प्रति औंस के आसपास सोने को कुछ प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है। इसके बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा मैक्रोइकोनॉमिक परिस्थितियां सोने के पक्ष में हैं और लंबी अवधि का ट्रेंड सकारात्मक बना रह सकता है।
सोने को आमतौर पर आर्थिक और वित्तीय अनिश्चितता के समय सुरक्षित निवेश के तौर पर देखा जाता है। ऐसे में ब्याज दरों, बॉन्ड यील्ड, डॉलर और वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव का असर इसकी कीमतों पर सीधे दिखाई देता है।
फेडरल रिजर्व का नरम रुख सोने के लिए क्यों है अच्छा?
सोने की कीमतों के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति बेहद महत्वपूर्ण है। कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों और करेंसी तथा बॉन्ड मार्केट में जारी उतार-चढ़ाव के बीच बाजार में यह धारणा मजबूत हुई है कि फेडरल रिजर्व आक्रामक तरीके से ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने की स्थिति में नहीं है।
अगर फेड इस साल ब्याज दरों में एक बार बढ़ोतरी करता भी है, तो बाजार इसे जरूरी नहीं कि किसी नए लंबे सख्त मौद्रिक नीति चक्र की शुरुआत के रूप में देखे।
कम ब्याज दरों या ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद आमतौर पर सोने के लिए सकारात्मक मानी जाती है। इसकी वजह यह है कि जब ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड पर दबाव आता है, तो बिना ब्याज वाले एसेट यानी सोने की आकर्षकता बढ़ सकती है।
यही कारण है कि आने वाले महीनों में अमेरिकी महंगाई, रोजगार, GDP और फेड अधिकारियों के बयानों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
भारत में त्योहार और शादी का सीजन देगा बड़ा सपोर्ट
भारत दुनिया के प्रमुख सोना उपभोक्ता बाजारों में शामिल है। यहां त्योहारी सीजन और शादियों के दौरान सोने की मांग में सामान्य तौर पर तेजी देखने को मिलती है।
इस बार सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तरों के आसपास रहने के बावजूद ज्वेलरी इंडस्ट्री के सेंटिमेंट में सुधार देखने को मिला है। ऊंची कीमतों की वजह से भले ही ज्वेलरी की बिक्री की मात्रा पर दबाव आया हो, लेकिन रिटेलर्स और मैन्युफैक्चरर्स आने वाले महीनों को लेकर ज्यादा आशावादी नजर आ रहे हैं।
हाल में हुए ज्वेलरी इंडस्ट्री इवेंट्स में मैन्युफैक्चरर्स को मिले ऑर्डर्स पिछले साल की तुलना में काफी मजबूत बताए गए हैं। कुछ कारोबारियों ने इसे कोविड महामारी के बाद की सबसे मजबूत मांग में से एक बताया है।
साल की पहली छमाही में सुस्त रही मांग
चालू कैलेंडर वर्ष की शुरुआती दो तिमाहियों में भारत में सोने की मांग अपेक्षाकृत सुस्त रही। इसका एक बड़ा कारण रिकॉर्ड ऊंची कीमतें रही हैं।
जब सोना महंगा होता है तो ग्राहक कई बार कम वजन की ज्वेलरी खरीदते हैं या खरीदारी को कुछ समय के लिए टाल देते हैं। लेकिन यदि कीमतें एक निश्चित दायरे में स्थिर रहती हैं, तो उपभोक्ताओं के लिए खरीदारी का फैसला लेना आसान हो सकता है।
इसी वजह से साल के दूसरे हिस्से में सोने के इंपोर्ट और घरेलू खरीदारी में रिकवरी की उम्मीद की जा रही है। त्योहारी और शादी का सीजन इस मांग को और मजबूत कर सकता है।
चांदी भी दिखा सकती है जोरदार तेजी
सोने के अलावा चांदी पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। मेटल्स फोकस के अनुमान के मुताबिक, लंबी अवधि में चांदी $85 से $90 प्रति औंस के स्तर तक पहुंच सकती है।
हालांकि, छोटी अवधि में चांदी का प्रदर्शन सोने की तुलना में कुछ कमजोर रह सकता है। चांदी की कीमत केवल निवेश मांग से प्रभावित नहीं होती, बल्कि इंडस्ट्रियल डिमांड भी इसके लिए महत्वपूर्ण है।
सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में चांदी के इस्तेमाल की वजह से इसकी कीमतों पर ग्लोबल इंडस्ट्रियल एक्टिविटी का भी असर पड़ता है।
चांदी की सप्लाई और इंपोर्ट कोटा बन सकता है चुनौती
भारत में चांदी की उपलब्धता आने वाले समय में कीमतों के लिए महत्वपूर्ण फैक्टर बन सकती है। भारतीय कारोबारियों के लिए उपलब्ध चांदी का इंपोर्ट कोटा सामान्य सीजनल मांग की तुलना में कम रहने से घरेलू बाजार में सप्लाई पर दबाव पड़ सकता है।
जुलाई में सप्लाई से जुड़ी बाधाओं के कारण चांदी का प्रीमियम बढ़कर करीब $6.50 प्रति औंस तक पहुंच गया था। हालांकि, बाद में इसमें कमी आई और यह लगभग $2.50 प्रति औंस के आसपास आ गया।
अगर इंपोर्ट से जुड़ी दिक्कतें आगे भी बनी रहती हैं, तो घरेलू बाजार में चांदी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। दूसरी तरफ, मजबूत मांग और सीमित सप्लाई कीमतों को सपोर्ट भी दे सकती है।
क्या सोना सच में 2026 में $5,000 तक पहुंच सकता है?
विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोने की कीमत $4,800-$5,000 प्रति औंस तक पहुंच सकती है। हालांकि, यह एक अनुमान है और वास्तविक कीमत कई वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
सोने की कीमत को प्रभावित करने वाले प्रमुख फैक्टर्स में अमेरिकी फेड की ब्याज दर नीति, डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक निवेश मांग शामिल हैं।
इसके अलावा भारत और चीन जैसे बड़े बाजारों में फिजिकल गोल्ड डिमांड भी कीमतों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?
सोने और चांदी में तेजी की संभावना के बावजूद निवेशकों को केवल किसी एक कीमत के अनुमान के आधार पर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। कीमती धातुओं में भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
आने वाले समय में निवेशकों को खास तौर पर इन संकेतकों पर नजर रखनी चाहिए:
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति
- अमेरिकी महंगाई और रोजगार के आंकड़े
- डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड
- केंद्रीय बैंकों की गोल्ड खरीदारी
- भारत में त्योहारी और शादी की मांग
- सोने और चांदी के इंपोर्ट से जुड़े नियम
- ग्लोबल इंडस्ट्रियल डिमांड और चांदी की सप्लाई
Gold-Silver Price Outlook: आगे क्या?
कुल मिलाकर, मौजूदा संकेत सोने और चांदी के लिए सकारात्मक बने हुए हैं। सोने के लिए $4,000 का स्तर मजबूत सपोर्ट और $4,500 के आसपास का स्तर एक महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस जोन हो सकता है। वहीं, 2026 के अंत तक $4,800-$5,000 का अनुमान सोने में लंबी अवधि की संभावित तेजी की ओर इशारा करता है।
चांदी के मामले में $85-$90 प्रति औंस का अनुमान है, लेकिन इसकी कीमत पर सप्लाई और इंडस्ट्रियल डिमांड का प्रभाव अधिक महत्वपूर्ण रह सकता है।
फिर भी यह याद रखना जरूरी है कि ये विशेषज्ञों के अनुमान हैं, गारंटीड कीमतें नहीं। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव होने पर सोने और चांदी का आउटलुक भी बदल सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध बाजार अनुमानों और विशेषज्ञों के विचारों पर आधारित है। सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव हो सकता है और किसी भी निवेश में बाजार जोखिम शामिल रहता है। निवेश का फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें। NewsJagran किसी व्यक्ति को किसी खास निवेश में पैसा लगाने की सलाह नहीं देता।


