नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों पांच देशों के विदेश दौरे पर हैं और इस यात्रा के अंतिम चरण में वह इटली पहुंच चुके हैं। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने मोदी के सम्मान में रात्रिभोज का आयोजन किया और उन्हें रोम के ऐतिहासिक कोलोसियम का भ्रमण भी कराया। दोनों नेताओं की मुलाकात सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि तेजी से मजबूत होते भारत-इटली संबंधों का संकेत भी मानी जा रही है।
आज भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है जबकि इटली आठवें स्थान पर है। लेकिन अगर करीब 30 साल पीछे जाएं तो तस्वीर बिल्कुल अलग थी। 1995 में परचेजिंग पावर पैरिटी (PPP) के आधार पर भारत और इटली की अर्थव्यवस्था लगभग बराबरी पर थी। दोनों देशों की जीडीपी करीब 1.3 ट्रिलियन डॉलर के आसपास थी। अब हालात ऐसे हैं कि भारत इटली से कई गुना आगे निकल चुका है।
30 साल में भारत ने कैसे बनाई बड़ी बढ़त?
1990 के दशक में भारत आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत कर रहा था जबकि इटली पहले से विकसित यूरोपीय अर्थव्यवस्था माना जाता था। उस समय बहुत कम लोगों ने सोचा होगा कि आने वाले तीन दशकों में भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो जाएगा। 2025 में PPP आधार पर भारत की जीडीपी बढ़कर 17.26 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है। दूसरी ओर इटली की अर्थव्यवस्था 3.78 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है। इसका मतलब है कि पिछले 30 वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था लगभग 13 गुना बढ़ी, जबकि इटली की अर्थव्यवस्था करीब तीन गुना ही बढ़ सकी।
भारत की इस तेज़ ग्रोथ के पीछे कई बड़े कारण माने जाते हैं। इनमें आर्थिक सुधार, डिजिटल क्रांति, मैन्युफैक्चरिंग विस्तार, सर्विस सेक्टर की मजबूती, बढ़ती घरेलू खपत और युवा आबादी प्रमुख हैं। आईटी सेक्टर, स्टार्टअप इकोसिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार दी है।
PPP में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकॉनमी
परचेजिंग पावर पैरिटी यानी PPP एक ऐसा पैमाना है जिससे अलग-अलग देशों में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों की तुलना की जाती है। इस आधार पर देखा जाए तो भारत चीन और अमेरिका के बाद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।
PPP का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इससे किसी देश की वास्तविक खरीद क्षमता का अंदाजा मिलता है। भारत में कम लागत पर ज्यादा उत्पादन और सेवाएं उपलब्ध होने की वजह से PPP के हिसाब से भारतीय अर्थव्यवस्था काफी मजबूत दिखाई देती है।
नॉमिनल GDP में भी भारत ने बनाई जगह
अगर नॉमिनल GDP यानी मौजूदा डॉलर मूल्य के हिसाब से तुलना करें तो भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। फोर्ब्स और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आंकड़ों के मुताबिक भारत लगभग 4.13 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ दुनिया में पांचवें स्थान पर है। वहीं इटली करीब 2.54 ट्रिलियन डॉलर के साथ आठवें नंबर पर बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ वर्षों में भारत जापान और जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।
प्रति व्यक्ति आय में इटली अब भी काफी आगे
हालांकि कुल अर्थव्यवस्था के आकार में भारत आगे निकल चुका है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय के मामले में तस्वीर अलग है। इटली की प्रति व्यक्ति आय करीब 43 हजार डॉलर से अधिक है जबकि भारत में यह लगभग 2,800 डॉलर के आसपास है।
इसकी सबसे बड़ी वजह आबादी है। इटली की कुल आबादी लगभग 6 करोड़ है जबकि भारत की आबादी 1.46 अरब से अधिक है। बड़ी आबादी के कारण भारत की कुल GDP तो तेजी से बढ़ती है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय को ऊपर ले जाने में अधिक समय लगता है। इसके बावजूद भारत में तेजी से बढ़ता मध्यम वर्ग, शहरीकरण और डिजिटल अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों में प्रति व्यक्ति आय को मजबूत कर सकते हैं।
भारत-इटली व्यापारिक संबंध क्यों हैं अहम?
इटली यूरोपीय यूनियन के बड़े औद्योगिक देशों में शामिल है और भारत के लिए रणनीतिक व्यापारिक साझेदार माना जाता है। यूरो जोन में इटली भारत का चौथा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है।
साल 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 14.25 अरब यूरो तक पहुंच गया। इसमें भारत से इटली को निर्यात 8.55 अरब यूरो रहा जबकि भारत का इटली से आयात 5.7 अरब यूरो रहा। खास बात यह है कि 1988 से व्यापार संतुलन लगातार भारत के पक्ष में बना हुआ है।
भारत मुख्य रूप से इटली को इंजीनियरिंग सामान, टेक्सटाइल, ऑटो कंपोनेंट, केमिकल्स और फार्मा उत्पाद निर्यात करता है। वहीं इटली से मशीनरी, लग्जरी उत्पाद, औद्योगिक उपकरण और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े सामान आयात किए जाते हैं।
2029 तक 20 अरब यूरो व्यापार का लक्ष्य
भारत और इटली ने आने वाले वर्षों में आपसी व्यापार को और बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। दोनों देशों ने 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक पहुंचाने का टारगेट तय किया है।
इटली ने अपनी नई ग्लोबल ट्रेड स्ट्रैटजी में भारत को प्राथमिकता वाले देशों में शामिल किया है। इसका बड़ा कारण यह है कि भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता बड़ा बाजार बन चुका है। यूरोपीय कंपनियां चीन पर निर्भरता कम करने के लिए भारत की ओर तेजी से देख रही हैं।
रक्षा, टेक्नोलॉजी और ऊर्जा में बढ़ सकता है सहयोग
विशेषज्ञों का मानना है कि मोदी और मेलोनी की मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा, ग्रीन एनर्जी, सेमीकंडक्टर, AI और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सहयोग बढ़ सकता है। इटली यूरोप का बड़ा औद्योगिक देश है जबकि भारत तेजी से उभरता मैन्युफैक्चरिंग हब बन रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच साझेदारी आने वाले समय में और मजबूत हो सकती है।
भारत की तेजी से बदलती वैश्विक स्थिति
करीब तीन दशक पहले भारत और इटली आर्थिक ताकत के मामले में लगभग बराबर थे। लेकिन आज भारत न सिर्फ दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है बल्कि वैश्विक राजनीति और व्यापार में भी उसकी भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इटली यात्रा सिर्फ एक राजनयिक दौरा नहीं, बल्कि उस बदलते वैश्विक संतुलन की तस्वीर भी है जिसमें भारत अब उभरती नहीं बल्कि स्थापित आर्थिक शक्ति के रूप में देखा जा रहा है।
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