ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय अंकुर सचदेवा की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस की उम्मीद में ऑस्ट्रेलिया पहुंचे अंकुर का अनुभव उनकी उम्मीदों से बिल्कुल अलग रहा। एक बड़े ऑस्ट्रेलियाई बैंक में काम के दौरान उन्हें ऑफिस टाइम खत्म होने के बाद भी लगातार फोन और काम के दबाव का सामना करना पड़ता था। आखिरकार बढ़ते तनाव और परिवार को समय न दे पाने की वजह से उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला किया।
अंकुर सचदेवा ने सोशल मीडिया पर अपनी कहानी साझा करते हुए बताया कि उनके मैनेजर अक्सर ऑफिस के घंटों के बाद भी उनसे काम करवाते थे। लगभग हर काम को ‘अर्जेंट’ बताकर उसी दिन पूरा करने का दबाव बनाया जाता था। इस वजह से उनके लिए नौकरी और निजी जिंदगी के बीच संतुलन बनाना मुश्किल होता चला गया।
वर्क-लाइफ बैलेंस के लिए ऑस्ट्रेलिया आए थे
विदेश जाकर नौकरी करने वाले कई भारतीय बेहतर सैलरी के साथ-साथ बेहतर जीवनशैली और काम-काज के बीच संतुलन की उम्मीद करते हैं। अंकुर सचदेवा भी इसी सोच के साथ ऑस्ट्रेलिया आए थे। हालांकि, नौकरी शुरू करने के बाद उन्हें लगातार काम के दबाव का सामना करना पड़ा।
अंकुर ने इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में कहा कि वह वर्क-लाइफ बैलेंस के लिए ऑस्ट्रेलिया आए थे, लेकिन जिस तरह की परिस्थितियों का उन्हें सामना करना पड़ा, उसे वह आगे नहीं झेल सकते थे। उन्होंने अपने पोस्ट में अपनी पिछली नौकरी छोड़ने की वजह अपने ‘टॉक्सिक भारतीय मैनेजर’ को बताया।
ऑफिस टाइम के बाद भी आते थे फोन
अंकुर के मुताबिक, उनके मैनेजर ऑफिस का समय खत्म होने के बाद भी उन्हें कॉल करते थे। कॉल पर किसी काम को ‘अर्जेंट’ बताते हुए उसी दिन पूरा करने के लिए कहा जाता था। उनका कहना था कि मैनेजर उनसे अपना काम भी करवाते थे और लगभग हर जिम्मेदारी को तत्काल पूरा करने की उम्मीद रखते थे।
लगातार बढ़ते काम के दबाव का असर उनकी निजी जिंदगी पर भी पड़ा। अंकुर के लिए परिवार के साथ समय बिताना मुश्किल हो गया था। खासतौर पर उनका नवजात बच्चा था और वह उसके साथ ज्यादा समय बिताना चाहते थे।
उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा आया जब वह मुश्किल से अपने परिवार के साथ समय निकाल पा रहे थे। इसी स्थिति ने उन्हें नौकरी बदलने के बारे में गंभीरता से सोचने पर मजबूर किया।
नौकरी छोड़ना आसान फैसला नहीं था
नौकरी छोड़ने का फैसला अंकुर के लिए आसान नहीं था। उस समय जॉब मार्केट भी बहुत अच्छा नहीं था और उन्हें ज्यादा इंटरव्यू कॉल नहीं मिल रहे थे। ऐसे में पुरानी नौकरी छोड़ना आर्थिक और करियर के लिहाज से जोखिम भरा फैसला हो सकता था।
हालांकि, उन्हें आखिरकार एक नई नौकरी का अवसर मिला। अंकुर ने बताया कि उन्हें एक इंटरव्यू कॉल आया और उनका चयन हो गया। नई भूमिका उनके लिए इसलिए भी खास थी क्योंकि यह एक अच्छी पोस्ट थी और उनके करियर को आगे बढ़ाने का मौका देती थी।
अब ऑस्ट्रेलियाई सरकार के लिए कर रहे हैं काम
पुरानी नौकरी छोड़ने के बाद अंकुर ने नई कंपनी जॉइन की और अब वह मैनेजर के पद पर काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक, वर्तमान में वह ऑस्ट्रेलियाई सरकार के लिए काम कर रहे हैं।
इस बदलाव ने उनकी कहानी को और दिलचस्प बना दिया है। जिस व्यक्ति ने अपने मैनेजर के व्यवहार और काम के दबाव से परेशान होकर नौकरी छोड़ी, वही अब खुद एक मैनेजर की भूमिका में है। सोशल मीडिया यूजर्स ने इसी पहलू को लेकर भी उनसे सवाल किए हैं।
सोशल मीडिया पर यूजर्स ने दी सलाह
अंकुर की कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई यूजर्स ने ऑफिस के समय के बाद कर्मचारियों से काम कराने की संस्कृति पर चिंता जताई।
कुछ लोगों ने अंकुर को सलाह दी कि मैनेजर बनने के बाद वह अपनी टीम के साथ वैसा व्यवहार न करें, जैसा उन्हें अपनी पिछली नौकरी में झेलना पड़ा था। एक यूजर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अब उनके जूनियर भी शायद इसी तरह की शिकायत कर सकते हैं, लेकिन साथ ही उन्हें अपनी टीम के लिए अच्छा और सपोर्टिव मैनेजर बनने की शुभकामनाएं दीं।
एक अन्य यूजर ने कहा कि अंकुर को इस चक्र को तोड़ना चाहिए और अपनी टीम के सदस्यों को बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस देना चाहिए। कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि ऑफिस के समय के बाद लगातार काम का दबाव केवल किसी एक देश की समस्या नहीं है, बल्कि कई जगहों पर कर्मचारियों को इसका सामना करना पड़ता है।
अंकुर की कहानी क्यों बनी चर्चा का विषय?
अंकुर सचदेवा की कहानी सिर्फ नौकरी छोड़ने तक सीमित नहीं है। इसमें विदेश में बेहतर जीवन की उम्मीद, काम का बढ़ता दबाव, परिवार के लिए समय निकालने की चुनौती और सही अवसर मिलने पर करियर बदलने का फैसला—इन सभी पहलुओं की झलक मिलती है।
उनका अनुभव यह भी दिखाता है कि अच्छी सैलरी या विदेश में नौकरी मिलने के बावजूद अगर काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन नहीं बन पा रहा हो, तो लंबे समय में इसका असर व्यक्ति और उसके परिवार दोनों पर पड़ सकता है।
अंकुर ने मुश्किल परिस्थिति के बावजूद नई नौकरी का अवसर मिलने तक इंतजार किया और अंततः ऐसी भूमिका हासिल की, जहां वह अब मैनेजर के तौर पर काम कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर उन्हें मिली प्रतिक्रियाओं से साफ है कि उनकी कहानी ने वर्क-लाइफ बैलेंस और मैनेजर के व्यवहार को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।


