Share Market Outlook: 10 से 14 अगस्त के बीच भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इस सप्ताह निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, भारत और अमेरिका के महंगाई आंकड़ों तथा कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। इसके अलावा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की गतिविधियां और रुपये की चाल भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती है।
घरेलू शेयर बाजार ने पिछले सप्ताह उतार-चढ़ाव के बीच बढ़त के साथ कारोबार खत्म किया था। अब नए सप्ताह में कई बड़े आर्थिक और वैश्विक संकेतक सामने आने वाले हैं। ऐसे में बाजार में किसी एक दिशा में तेज चाल के बजाय खबरों के आधार पर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर
भारतीय शेयर बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतें हमेशा एक महत्वपूर्ण संकेतक रही हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल महंगा होने पर देश के आयात बिल, रुपये की स्थिति और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
विश्लेषकों के मुताबिक, इस सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों में होने वाली हलचल बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकती है। खासतौर पर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की स्थिति में क्रूड की कीमतों में अचानक तेजी देखने को मिल सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर उन कंपनियों पर भी पड़ सकता है जिनकी लागत सीधे तौर पर ऊर्जा कीमतों से जुड़ी है। वहीं, ऑयल एवं गैस सेक्टर की कुछ कंपनियों के शेयरों में अलग-अलग प्रभाव देखने को मिल सकता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बाजार की नजर
विश्लेषकों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक घटनाक्रम इस सप्ताह बाजार के लिए बड़ा ट्रिगर रहेंगे। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) से जुड़े घटनाक्रमों पर निवेशकों की नजर रहेगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां किसी भी तरह का तनाव या आपूर्ति बाधित होने की आशंका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकती है।
संपदा प्रौद्योगिकी कंपनी एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) पोनमुडी आर के अनुसार, इस सप्ताह बाजार पर पश्चिम एशिया की स्थिति और अमेरिका के जुलाई के मुद्रास्फीति आंकड़ों का खासा असर रह सकता है।
उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम लगातार बदल रहे हैं और बाजार इस मोर्चे पर आने वाली खबरों को बेहद करीब से देखेगा।
12 अगस्त को आएगा भारत का CPI महंगाई डेटा
घरेलू मोर्चे पर निवेशकों के लिए 12 अगस्त बेहद महत्वपूर्ण दिन रहेगा। इस दिन भारत के जुलाई महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़े जारी किए जाएंगे।
महंगाई के आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों के नजरिए से भी महत्वपूर्ण हैं। यदि महंगाई अनुमान से कम रहती है तो बाजार में सकारात्मक धारणा बन सकती है, जबकि उम्मीद से ज्यादा महंगाई बाजार के लिए चिंता का कारण बन सकती है।
रिलायंस ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा के अनुसार, घरेलू निवेशकों की नजर जुलाई के CPI और थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़ों के साथ-साथ विदेशी मुद्रा भंडार के ताजा आंकड़ों पर रहेगी।
इन आंकड़ों से देश में महंगाई के रुख और बाहरी क्षेत्र की स्थिति का संकेत मिलेगा।
14 अगस्त को WPI के आंकड़े होंगे जारी
भारत में 14 अगस्त को जुलाई के थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़े जारी होंगे। CPI के बाद बाजार के लिए यह दूसरा महत्वपूर्ण घरेलू आर्थिक डेटा होगा।
WPI आंकड़े मुख्य रूप से थोक स्तर पर वस्तुओं की कीमतों में बदलाव को दर्शाते हैं। इसलिए CPI और WPI दोनों के आंकड़े बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।
यदि दोनों आंकड़े बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप रहते हैं, तो निवेशकों को घरेलू अर्थव्यवस्था और महंगाई के मोर्चे पर राहत मिल सकती है। इसके विपरीत, महंगाई में अप्रत्याशित तेजी बाजार में दबाव बढ़ा सकती है।
अमेरिका का CPI और PPI भी रहेगा अहम
भारतीय बाजार केवल घरेलू आंकड़ों से प्रभावित नहीं होगा। इस सप्ताह अमेरिका के महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े भी जारी होने हैं।
12 अगस्त को अमेरिका के जुलाई CPI और 13 अगस्त को PPI के आंकड़े सामने आएंगे। अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों का असर वहां की मौद्रिक नीति की उम्मीदों पर पड़ता है, जिसका प्रभाव दुनियाभर के शेयर बाजारों पर देखने को मिलता है।
अमेरिका में महंगाई के आंकड़े उम्मीद से अधिक आने पर ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं को लेकर बाजार की धारणा बदल सकती है। इससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर और विदेशी निवेश के प्रवाह पर असर पड़ सकता है। इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव भारतीय इक्विटी बाजार पर भी पड़ सकता है।
FPI निवेश से बाजार को मिला सहारा
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की गतिविधियां भी इस सप्ताह महत्वपूर्ण रहेंगी। अगस्त के पहले सप्ताह में FPI ने भारतीय शेयर बाजार में 12,921 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया।
विदेशी निवेशकों की खरीदारी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाती है। हालांकि, वैश्विक बाजारों में किसी बड़े बदलाव, डॉलर में मजबूती या भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर विदेशी निवेशकों का रुख तेजी से बदल भी सकता है।
इसलिए आने वाले दिनों में FPI के आंकड़े और उनकी खरीद-बिक्री की दिशा बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकती है।
HAL, टाटा मोटर्स समेत इन कंपनियों के नतीजे
इस सप्ताह कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बाजार में शेयर आधारित हलचल बढ़ा सकते हैं। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (HAL), भारत फोर्ज, ग्रासिम इंडस्ट्रीज और टाटा मोटर्स सहित कई कंपनियां वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी करेंगी।
निवेशकों की नजर केवल कंपनियों के मुनाफे और रेवेन्यू पर नहीं होगी, बल्कि प्रबंधन के आउटलुक, मार्जिन, ऑर्डर बुक, मांग की स्थिति और आगे की ग्रोथ गाइडेंस पर भी रहेगी।
किसी बड़ी कंपनी के अनुमान से बेहतर या कमजोर नतीजे आने पर संबंधित शेयर में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसका असर कभी-कभी पूरे सेक्टर के शेयरों पर भी पड़ता है।
पिछला सप्ताह कैसा रहा?
पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार ने उतार-चढ़ाव के बावजूद सकारात्मक प्रदर्शन किया। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 404.53 अंक यानी 0.51 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का निफ्टी 187.05 अंक यानी 0.76 प्रतिशत मजबूत हुआ।
बाजार में वायदा एवं विकल्प (F&O) शेयरों के लिए नई क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) व्यवस्था, भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को लेकर चर्चा रही।
स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट के शोध प्रमुख संतोष मीणा के अनुसार, पिछले सप्ताह नई समापन नीलामी व्यवस्था पहली बार लागू होना बाजार के प्रमुख घटनाक्रमों में शामिल रहा। हालांकि, व्यापक आर्थिक मोर्चे पर आने वाले आंकड़ों के कारण नया सप्ताह भी महत्वपूर्ण रहने वाला है।
10 से 14 अगस्त के बीच बाजार की दिशा किन बातों से तय होगी?
| प्रमुख ट्रिगर | तारीख | बाजार पर संभावित असर |
|---|---|---|
| भारत CPI महंगाई | 12 अगस्त | ब्याज दर और महंगाई की उम्मीदों पर असर |
| अमेरिका CPI | 12 अगस्त | Fed की नीति और ग्लोबल मार्केट सेंटीमेंट |
| अमेरिका PPI | 13 अगस्त | अमेरिकी महंगाई का संकेत |
| भारत WPI महंगाई | 14 अगस्त | घरेलू महंगाई का व्यापक संकेत |
| कच्चा तेल | पूरे सप्ताह | महंगाई, रुपया और आयात बिल पर असर |
| पश्चिम एशिया तनाव | पूरे सप्ताह | क्रूड और जोखिम वाली परिसंपत्तियों पर असर |
| FPI गतिविधियां | पूरे सप्ताह | बाजार में लिक्विडिटी और सेंटीमेंट |
| कंपनियों के Q1 नतीजे | पूरे सप्ताह | शेयर और सेक्टर आधारित उतार-चढ़ाव |
निवेशकों को किस बात का ध्यान रखना चाहिए?
10 से 14 अगस्त के बीच बाजार में कई बड़े ट्रिगर एक साथ मौजूद रहेंगे। ऐसे में निवेशकों को केवल एक खबर या एक आर्थिक आंकड़े के आधार पर बाजार की दिशा का अनुमान लगाने से बचना चाहिए।
कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेजी, पश्चिम एशिया में तनाव, अमेरिकी महंगाई के आंकड़े और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार में अस्थिरता बढ़ा सकती हैं। वहीं, उम्मीद से बेहतर घरेलू आर्थिक आंकड़े और कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजे बाजार को सहारा दे सकते हैं।
कुल मिलाकर, 10 से 14 अगस्त का सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए डेटा और ग्लोबल घटनाक्रम से प्रभावित रहने वाला है। निवेशकों को CPI, WPI, अमेरिकी महंगाई आंकड़ों, क्रूड ऑयल और पश्चिम एशिया की स्थिति पर नजर रखनी होगी। इसके साथ ही कंपनियों के तिमाही नतीजे खास शेयरों में तेजी या गिरावट का कारण बन सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यहां शेयर बाजार से जुड़ी जानकारी दी गई है, निवेश की सलाह नहीं। NewsJagran किसी भी तरह के निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले अपने सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से सलाह जरूर लें।


