BCCI Centre of Excellence: भारतीय क्रिकेट में लगातार बढ़ती चोटों ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की चिंता बढ़ा दी है। बेंगलुरु स्थित BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) में इस समय कम से कम 10 इंटरनेशनल क्रिकेटर अपनी चोटों से उबरने और रिहैबिलिटेशन के लिए मौजूद हैं। खिलाड़ियों की बढ़ती चोटों के बीच IPL के दौरान उन पर पड़ने वाले टीम और वित्तीय दबाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ खिलाड़ी चोटिल होने के बावजूद IPL में अपनी फ्रेंचाइजी के लिए खेलते रहे। लगातार क्रिकेट खेलने और चोट के बावजूद मैदान पर उतरने की वजह से खिलाड़ियों की समस्या और गंभीर हो गई। अब ऐसे खिलाड़ियों को फिटनेस हासिल करने और पूरी तरह मैदान पर वापसी के लिए BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में रिहैबिलिटेशन से गुजरना पड़ रहा है।
भारत के पूर्व क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण फिलहाल दो साल के कॉन्ट्रैक्ट पर बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख हैं। उन्होंने सेंटर की व्यवस्था और टीम के काम करने के तरीके का बचाव करते हुए कहा है कि CoE को केवल चोटिल खिलाड़ियों के रिहैब सेंटर के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
CoE में कम से कम 10 इंटरनेशनल खिलाड़ी कर रहे रिहैब
बेंगलुरु स्थित BCCI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में इस समय भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के कई खिलाड़ी अपनी फिटनेस हासिल करने में जुटे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम 10 इंटरनेशनल खिलाड़ी छोटी या गंभीर चोटों से उबरने के लिए यहां इलाज और रिहैबिलिटेशन करा रहे हैं।
न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि IPL के दौरान कुछ बड़े खिलाड़ी चोटिल होने के बावजूद मैदान पर उतरते रहे। IPL में फ्रेंचाइजी के लिए खेलने और टीम से जुड़े दबाव के अलावा खिलाड़ियों के लिए आर्थिक पहलू भी महत्वपूर्ण होता है।
ऐसे में कई बार खिलाड़ी पूरी तरह फिट नहीं होने के बावजूद मुकाबलों में खेलते हैं। इसका असर बाद में उनकी चोट और रिकवरी पर पड़ सकता है।
चोट के बावजूद IPL खेलने का बढ़ रहा दबाव
भारतीय क्रिकेटरों का शेड्यूल पिछले कुछ वर्षों में काफी व्यस्त रहा है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के अलावा खिलाड़ियों का एक बड़ा हिस्सा IPL में भी लंबे समय तक खेलता है। इसके बाद उन्हें टेस्ट, वनडे या टी20 इंटरनेशनल सीरीज के लिए राष्ट्रीय टीम में शामिल होना पड़ सकता है।
सूत्र के मुताबिक, IPL के दौरान टीम और पैसों से जुड़े दबाव के कारण कुछ खिलाड़ी चोट के बावजूद खेलते हैं। इसके बाद जब चोट गंभीर हो जाती है तो उन्हें BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में भेजा जाता है।
लगातार क्रिकेट खेलने का असर खास तौर पर उन खिलाड़ियों पर अधिक पड़ सकता है, जो लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल रहे हैं। उम्र बढ़ने के साथ चोट से पूरी तरह उबरने में भी अधिक समय लग सकता है।
यही वजह है कि खिलाड़ियों के वर्कलोड मैनेजमेंट और फिटनेस पर BCCI, टीम मैनेजमेंट और चयनकर्ताओं की नजर लगातार बनी हुई है।
बुमराह और साई सुदर्शन श्रीलंका दौरे से बाहर
हाल में जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन के श्रीलंका दौरे से बाहर होने के बाद खिलाड़ियों की फिटनेस और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के कामकाज को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
पहले ऐसी खबरें सामने आई थीं कि दोनों खिलाड़ी श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों में से कम से कम एक मुकाबले में खेल सकते हैं। हालांकि, बाद में दोनों को दौरे से बाहर कर दिया गया।
बुमराह भारतीय टीम के सबसे महत्वपूर्ण तेज गेंदबाजों में से एक हैं और उनके वर्कलोड को लेकर पहले भी काफी चर्चा होती रही है। दूसरी ओर, साई सुदर्शन ने हाल के समय में भारतीय टीम में अपनी जगह मजबूत की है। ऐसे में उनका उपलब्ध नहीं होना टीम के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
इन खिलाड़ियों के मामले ने चयनकर्ताओं और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बीच तालमेल को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, CoE की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर टीम मैनेजमेंट और मेडिकल स्टाफ के बीच लगातार बातचीत होती है।
VVS लक्ष्मण हैं सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख
भारत के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण फिलहाल बेंगलुरु स्थित BCCI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उन्हें दो साल का कॉन्ट्रैक्ट मिला हुआ है।
मार्च 2025 में नितिन पटेल के जाने के बाद से सेंटर का स्पोर्ट्स साइंस विभाग स्थायी प्रमुख के बिना चल रहा है। ऐसे में CoE की मेडिकल और स्पोर्ट्स साइंस व्यवस्था को लेकर भी ध्यान बना हुआ है।
इसी बीच BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने रविवार को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दौरा किया और मीडिया से बातचीत की। खिलाड़ियों की चोटों और सेंटर की भूमिका को लेकर लगातार हो रही चर्चा के बीच उनका दौरा भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लक्ष्मण ने CoE का किया बचाव
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की भूमिका पर उठ रहे सवालों के बीच वीवीएस लक्ष्मण ने इसकी व्यवस्था का बचाव किया। उन्होंने कहा कि CoE को केवल खिलाड़ियों की चोट और रिहैबिलिटेशन से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
लक्ष्मण के मुताबिक, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्देश्य क्रिकेटरों को बेहतर बनाने में मदद करना है और इसकी भूमिका एक सामान्य रिहैब सेंटर से काफी बड़ी है।
उन्होंने कहा कि CoE में चोटों के मामले में ‘दोष’ जैसे शब्द का इस्तेमाल करना उचित नहीं है, क्योंकि इससे किसी एक व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराने का संदेश जाता है।
लक्ष्मण ने CoE, पुरुष और महिला दोनों टीमों के मैनेजमेंट तथा दोनों टीमों के SSM स्टाफ के बीच बेहतर तालमेल होने की बात भी कही। उनके अनुसार, खिलाड़ियों की फिटनेस और स्वास्थ्य को लेकर बातचीत लगातार और आसानी से होती है।
खिलाड़ियों की फिटनेस बनी BCCI के लिए बड़ी चुनौती
भारतीय क्रिकेट में चोटों की बढ़ती संख्या अब सिर्फ खिलाड़ियों के लिए ही नहीं, बल्कि चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट के लिए भी बड़ी चुनौती बन रही है।
एक खिलाड़ी के चोटिल होने का असर सीधे टीम संयोजन पर पड़ता है। खासकर तब, जब चोट किसी प्रमुख बल्लेबाज, तेज गेंदबाज या ऑलराउंडर को लगी हो। ऐसे में चयनकर्ताओं को अंतिम समय में टीम में बदलाव करना पड़ सकता है।
इसके अलावा खिलाड़ियों का लगातार व्यस्त शेड्यूल भी वर्कलोड मैनेजमेंट को मुश्किल बनाता है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और IPL के बीच संतुलन बनाना अब भारतीय क्रिकेट के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है।
BCCI के सामने चुनौती यह है कि खिलाड़ियों को पर्याप्त आराम भी मिले और वे महत्वपूर्ण मुकाबलों के लिए उपलब्ध भी रहें। वहीं फ्रेंचाइजी क्रिकेट में खिलाड़ियों की भूमिका और आर्थिक हितों को भी पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
क्या IPL के शेड्यूल पर फिर उठेंगे सवाल?
खिलाड़ियों की बढ़ती चोटों के बीच एक बार फिर IPL और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के व्यस्त कार्यक्रम पर बहस शुरू हो सकती है। लंबे टूर्नामेंट, लगातार यात्रा, मैचों के बीच कम अंतर और इसके बाद अंतरराष्ट्रीय सीरीज—इन सभी का असर खिलाड़ियों के शरीर पर पड़ता है।
हालांकि, हर चोट के लिए केवल IPL को जिम्मेदार ठहराना भी सही नहीं होगा। क्रिकेट में चोट लगने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें खिलाड़ी का वर्कलोड, फिटनेस स्तर, मैचों की संख्या, यात्रा और चोट का इतिहास शामिल हैं।
फिलहाल BCCI का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन खिलाड़ियों की फिटनेस बहाल करने और उन्हें सुरक्षित तरीके से मैदान पर वापस लाने में अहम भूमिका निभा रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि BCCI खिलाड़ियों के वर्कलोड और चोटों को कम करने के लिए क्या अतिरिक्त कदम उठाता है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में खिलाड़ियों की चोट और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से जुड़ी जानकारी उपलब्ध रिपोर्टों और सूत्रों के हवाले से दी गई है। चोट की स्थिति और टीम में वापसी का अंतिम फैसला BCCI और संबंधित मेडिकल टीम की फिटनेस रिपोर्ट पर निर्भर करता है।


