Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार के कारोबार के दौरान शुरुआती तेजी अचानक दबाव में बदल गई। सुबह बढ़त के साथ कारोबार शुरू करने वाले Sensex और Nifty 50 ने अपनी शुरुआती बढ़त गंवा दी और लाल निशान में पहुंच गए। सेंसेक्स अपने इंट्रा-डे हाई से करीब 484 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी 50 भी 24,300 के ऊपर जाने के बाद फिसलकर 24,200 के नीचे आ गया।
बाजार में गिरावट के पीछे सबसे बड़ा दबाव सरकारी बैंकों यानी PSU Banks के शेयरों में देखने को मिला। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव, ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली और India VIX में तेजी ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। हालांकि, व्यापक बाजार में गिरावट बहुत ज्यादा नहीं रही और मिडकैप-स्मॉलकैप इंडेक्स मामूली बढ़त बनाए हुए थे।
शुरुआती तेजी के बाद अचानक पलटा बाजार
सोमवार को घरेलू शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत की थी। कारोबार के शुरुआती दौर में खरीदारी के चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों तेजी में थे। सेंसेक्स इंट्रा-डे में 248.57 अंक चढ़कर 77,789.40 के स्तर तक पहुंच गया था। वहीं निफ्टी 50 भी 61 अंक की बढ़त के साथ 24,313 के स्तर तक पहुंचा।
लेकिन ऊपरी स्तरों पर टिकने के बजाय बाजार में बिकवाली बढ़ने लगी। इसके बाद सेंसेक्स अपने डे हाई से 483.84 अंक टूटकर 77,305.56 तक आ गया। इसी तरह निफ्टी भी अपने ऊपरी स्तर से 139.25 अंक फिसलकर 24,173.75 तक पहुंच गया।
दोपहर 12:01 बजे के आसपास सेंसेक्स 212.63 अंक यानी 0.27% की गिरावट के साथ 77,328.20 पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी 50 भी 66.40 अंक यानी 0.27% टूटकर 24,185.60 पर था।
यानी बाजार में शुरुआती तेजी के बाद निवेशकों ने ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिसका असर प्रमुख इंडेक्स पर साफ दिखाई दिया।
Share Market Crash की 4 बड़ी वजहें
1. अमेरिका-ईरान तनाव ने बढ़ाई बाजार की चिंता
भारतीय शेयर बाजार पर दबाव की एक प्रमुख वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। ईरान की ओर से यह चेतावनी दी गई है कि अगर अमेरिका उसके खिलाफ कथित आर्थिक युद्ध जारी रखता है, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी से तेल के निर्यात को रोकने जैसे कदम उठा सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण रास्ता है। ऐसे में यहां किसी तरह का व्यवधान पैदा होने की आशंका भी कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों के लिए चिंता बढ़ा सकती है।
भारत अपनी जरूरत के एक बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है। इसलिए अगर जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज उछाल आता है, तो इससे भारत के इंपोर्ट बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव की खबरों का असर घरेलू इक्विटी बाजार पर भी दिखाई देता है।
2. PSU Banks में तेज बिकवाली
सोमवार के कारोबार में सरकारी बैंकों के शेयरों में बिकवाली बाजार की सबसे बड़ी कमजोरी में से एक रही। निफ्टी PSU Bank इंडेक्स में 1% से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली।
शुरुआती कारोबार में बाजार को संभालने की कोशिश IT सेक्टर ने की थी। निफ्टी IT इंडेक्स एक समय 1% से ज्यादा ऊपर चला गया था। हालांकि, ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली के कारण इसकी बढ़त बाद में काफी कम हो गई।
इसके उलट PSU Banks में बिकवाली का दबाव ज्यादा रहा। सरकारी बैंकों के बाद हैवीवेट प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में भी कमजोरी आई। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में करीब आधे फीसदी की गिरावट ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनाया।
इसके अलावा Nifty FMCG में भी आधे फीसदी से अधिक की फिसलन देखने को मिली। बैंकिंग और FMCG जैसे बड़े सेक्टरों में कमजोरी आने से प्रमुख इंडेक्स की शुरुआती बढ़त टिक नहीं सकी।
3. ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली
बाजार में शुरुआती तेजी के बाद कई शेयरों में निवेशकों को मुनाफा वसूलने का मौका मिला। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों सुबह के कारोबार में ऊंचे स्तर पर पहुंचे थे।
ऐसे में शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स और निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली शुरू हुई। जब किसी इंडेक्स में लगातार खरीदारी के बाद ऊपरी स्तरों पर बिकवाली बढ़ती है, तो तेजी कमजोर पड़ सकती है।
सोमवार को भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। शुरुआत में मजबूत खरीदारी के बावजूद बाजार ऊपरी स्तरों पर टिक नहीं पाया और धीरे-धीरे बिकवाली हावी होती गई।
4. India VIX में आया उछाल
बाजार की अस्थिरता यानी Volatility को मापने वाला India VIX भी सोमवार के कारोबार में महत्वपूर्ण संकेत दे रहा था।
शुरुआती कारोबार में India VIX गिरकर 11 के नीचे चला गया था। एक समय यह 10.32 के स्तर तक पहुंच गया। लेकिन जैसे-जैसे बाजार में बिकवाली बढ़ी, VIX में भी तेजी देखने को मिली।
दोपहर के आसपास India VIX करीब 2.18% की बढ़त के साथ 11.44 पर था।
India VIX में तेजी आम तौर पर इस बात का संकेत देती है कि बाजार में शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव बढ़ने की आशंका है। वहीं VIX में गिरावट बाजार में अपेक्षाकृत कम अस्थिरता की ओर इशारा करती है।
इसलिए VIX का 10.32 से बढ़कर 11.44 के आसपास पहुंचना यह बताता है कि शुरुआती तेजी के बाद बाजार में अनिश्चितता बढ़ी और निवेशकों की सतर्कता भी बढ़ी।
Midcap और Smallcap में स्थिति कैसी रही?
बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव जरूर दिखा, लेकिन व्यापक बाजार की तस्वीर पूरी तरह कमजोर नहीं थी। शुरुआती बढ़त गंवाने के बाद Nifty Midcap 100 और Nifty Smallcap 100 में मामूली बढ़त बनी हुई थी।
इससे संकेत मिलता है कि बिकवाली का दबाव फिलहाल मुख्य रूप से बड़े और हैवीवेट शेयरों में ज्यादा दिखाई दे रहा था। हालांकि, अगर प्रमुख इंडेक्स में गिरावट आगे बढ़ती है तो इसका असर व्यापक बाजार पर भी पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए ऐसे समय में सिर्फ इंडेक्स की चाल देखने के बजाय अलग-अलग सेक्टर और कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर रखना महत्वपूर्ण हो जाता है।
IT सेक्टर ने संभालने की कोशिश की, लेकिन नहीं मिली ज्यादा मदद
सोमवार के शुरुआती कारोबार में IT सेक्टर बाजार के लिए सहारा बनता नजर आया। निफ्टी IT इंडेक्स में एक समय 1% से अधिक की तेजी थी। लेकिन ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली शुरू होने के बाद IT इंडेक्स की बढ़त काफी कम हो गई।
इससे बाजार की दिशा बदलने के लिए IT सेक्टर को पर्याप्त सपोर्ट नहीं मिल सका। दूसरी तरफ PSU Banks, प्राइवेट बैंक और FMCG में कमजोरी ने प्रमुख इंडेक्स पर दबाव बढ़ा दिया।
निवेशकों को आगे किन संकेतों पर नजर रखनी चाहिए?
मौजूदा माहौल में निवेशकों की नजर मुख्य रूप से अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और बैंकिंग शेयरों पर रहेगी।
अगर जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ता है और क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज उछाल आता है, तो इससे बाजार की चिंता बढ़ सकती है। वहीं बैंकिंग शेयरों में बिकवाली जारी रहने पर Sensex और Nifty पर दबाव बना रह सकता है।
दूसरी तरफ अगर अंतरराष्ट्रीय बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बनी रहती है, तो बाजार गिरावट के बाद फिर से संभलने की कोशिश कर सकता है।
फिलहाल सोमवार के कारोबार से यही संकेत मिल रहा है कि ऊपरी स्तरों पर निवेशक सतर्क हैं और तेजी के दौरान मुनाफावसूली करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। ऐसे में बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
निवेशकों के लिए जरूरी बात
शेयर बाजार में किसी एक दिन की तेजी या गिरावट को देखकर जल्दबाजी में निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। खासकर जब बाजार में जियोपॉलिटिकल तनाव और सेक्टोरल बिकवाली जैसी कई चुनौतियां एक साथ मौजूद हों।
निवेशकों को कंपनी के फंडामेंटल, वैल्यूएशन, सेक्टर की स्थिति और अपनी जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर ही निवेश का फैसला लेना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख शेयर बाजार की गतिविधियों और उपलब्ध बाजार आंकड़ों की जानकारी देने के उद्देश्य से है। इसमें किसी भी शेयर या सिक्योरिटी को खरीदने या बेचने की सलाह नहीं दी गई है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


