नई दिल्ली, 29 अप्रैल: ऑटोमोबाइल टायर इंडस्ट्री ने सरकार से कच्चे माल पर अस्थायी कस्टम ड्यूटी राहत की मांग की है। Automotive Tyre Manufacturers Association (ATMA) ने कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव (West Asia crisis) के कारण सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ सकता है, जिससे उत्पादन लागत और उपलब्धता दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
किन कच्चे माल पर मांगी गई राहत?
ATMA ने सरकार को दिए गए प्रतिनिधित्व में कई अहम इनपुट्स पर अस्थायी कस्टम ड्यूटी छूट की मांग की है, जिनमें शामिल हैं:
- पॉलिएस्टर/नायलॉन टायर कॉर्ड फैब्रिक
- बीड वायर (Bead Wire)
- स्टील टायर कॉर्ड
- कार्बन ब्लैक
- प्रोसेसिंग ऑयल्स
- पेट्रोकेमिकल आधारित केमिकल्स
ये सभी सामग्री टायर निर्माण में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
सप्लाई चेन पर क्यों बढ़ा दबाव?
ATMA के अनुसार, पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और संघर्ष का असर वैश्विक व्यापार मार्गों और कच्चे माल की सप्लाई पर पड़ रहा है।
- शिपिंग और लॉजिस्टिक्स में देरी
- कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
- आयात लागत में बढ़ोतरी
- सप्लाई अनिश्चितता
इन कारणों से भारतीय टायर उद्योग पर लागत दबाव बढ़ सकता है।
सरकार के हालिया कदम का स्वागत
Automotive Tyre Manufacturers Association ने सरकार द्वारा हाल ही में दिए गए राहत कदमों की सराहना भी की है।
सरकार ने कुछ कच्चे माल जैसे:
- सिंथेटिक रबर
- कुछ रेज़िन्स
पर 30 जून 2026 तक अस्थायी कस्टम ड्यूटी छूट दी है, जिसे उद्योग ने सकारात्मक कदम बताया है।
टायर इंडस्ट्री के लिए क्यों अहम है यह मांग?
भारत का टायर उद्योग ऑटोमोबाइल और एक्सपोर्ट सेक्टर का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- कच्चे माल की लागत सीधे उत्पादन लागत को प्रभावित करती है
- वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखना जरूरी है
- ऑटो सेक्टर की मांग से जुड़ी इंडस्ट्री
इसलिए ATMA का कहना है कि ड्यूटी राहत से उद्योग को स्थिरता मिलेगी।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव जारी रहता है, तो:
- कच्चे माल की कीमतें और बढ़ सकती हैं
- सरकार को और राहत उपायों पर विचार करना पड़ सकता है
- घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की जरूरत बढ़ेगी
निष्कर्ष
Automotive Tyre Manufacturers Association की यह मांग दर्शाती है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का असर सीधे भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर पड़ रहा है। यदि सरकार कस्टम ड्यूटी राहत देती है, तो टायर उद्योग को लागत स्थिरता और सप्लाई चेन सुरक्षा मिल सकती है।
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