महाराष्ट्र में एक ऐसे कथित ‘गॉडमैन’ का मामला सामने आया है, जिसने आस्था और अंधविश्वास का सहारा लेकर महिलाओं का यौन शोषण किया। खुद को ज्योतिषी और आध्यात्मिक शक्ति का मालिक बताने वाला Ashok Kharat अब पुलिस हिरासत में है और उसके खिलाफ कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी महिलाओं को डराने और नियंत्रित करने के लिए “दिव्य शक्तियों” का दावा करता था और धमकी देता था कि अगर उसकी बात नहीं मानी गई तो वह उनके परिवार के सदस्यों की मौत करा सकता है या उन्हें बदनाम कर देगा। यह मामला केवल एक व्यक्ति के अपराध तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में फैले अंधविश्वास और उसके दुरुपयोग पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।
मामला कैसे सामने आया और क्या हैं आरोप
यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब एक विवाहित महिला ने मार्च में आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। महिला का आरोप था कि आरोपी ने तीन साल तक उसका लगातार बलात्कार किया। इस शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की, जिसमें कई और चौंकाने वाले खुलासे सामने आए।
जांच में पता चला कि आरोपी के खिलाफ कुल 12 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से आठ मामले महिलाओं के यौन शोषण से जुड़े हैं। ये मामले मुख्य रूप से महाराष्ट्र के Ahilya Nagar और Nashik शहरों में दर्ज किए गए हैं।
SIT जांच में सामने आया खौफनाक तरीका
इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जिसकी अगुवाई आईपीएस अधिकारी Tejaswi Satpute कर रही हैं। उन्होंने बताया कि आरोपी एक तय तरीके से महिलाओं को निशाना बनाता था।
SIT के अनुसार:
- आरोपी पहले पीड़ितों और उनके परिवार का विश्वास जीतता था
- फिर उन्हें किसी “दुर्भाग्य” या खतरे का डर दिखाता था
- इसके बाद वह “उपाय” के नाम पर अजीबोगरीब अनुष्ठान करता था
इन अनुष्ठानों में पत्थर, इमली के बीज जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता था, ताकि पीड़ितों को यह यकीन हो जाए कि उसके पास कोई विशेष शक्ति है। इसी डर और विश्वास के मिश्रण का फायदा उठाकर आरोपी महिलाओं का शोषण करता था और उनसे पैसे भी वसूलता था।
गवाहों और पीड़ितों के बयान
अब तक SIT लगभग 30 गवाहों और पीड़ितों के बयान दर्ज कर चुकी है। जांच अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में पीड़ित महिलाएं लंबे समय तक डर और सामाजिक दबाव के कारण सामने नहीं आ पाईं।
यह भी सामने आया है कि आरोपी पीड़ितों को धमकी देता था कि अगर उन्होंने किसी को बताया, तो वह उनके परिवार को नुकसान पहुंचा सकता है या उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा खराब कर देगा। इसी वजह से कई पीड़ित चुप रहने को मजबूर थीं।
आर्थिक अनियमितताओं की भी जांच
मामला सिर्फ यौन शोषण तक सीमित नहीं है। जांच में वित्तीय गड़बड़ियों के संकेत मिलने के बाद Enforcement Directorate ने भी जांच शुरू कर दी है।
जांच एजेंसियां आरोपी की:
- संपत्तियों
- जमीन से जुड़े लेन-देन
- बैंक ट्रांजेक्शन
की जांच कर रही हैं, जिससे यह पता लगाया जा सके कि उसने किस तरह से अवैध तरीके से संपत्ति जुटाई।
साइबर कार्रवाई: आपत्तिजनक कंटेंट हटाया गया
इस मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया, जब पीड़ितों से जुड़े आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। SIT की साइबर टीम ने इस पर तेजी से कार्रवाई की।
अधिकारियों के अनुसार:
- 4,650 से अधिक लिंक हटाए गए
- 451 सोशल मीडिया अकाउंट स्थायी रूप से बंद किए गए
- इस मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया
यह कदम पीड़ितों की पहचान और गरिमा की रक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
समाज में अंधविश्वास का खतरनाक असर
यह मामला एक बड़े सामाजिक मुद्दे को उजागर करता है — अंधविश्वास और उसका दुरुपयोग। आरोपी ने “दिव्य शक्ति” का दावा करके लोगों के डर और विश्वास का फायदा उठाया।
विशेषज्ञों का मानना है कि:
- शिक्षा और जागरूकता की कमी
- सामाजिक दबाव
- और धार्मिक आस्था का अंधा पालन
ऐसे मामलों को बढ़ावा देते हैं।
राजनीतिक विवाद भी हुआ शुरू
गिरफ्तारी के बाद आरोपी की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिनमें वह कुछ नेताओं के साथ नजर आ रहा था। इसके बाद इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया और राज्य में बहस शुरू हो गई।
हालांकि, जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है that उनका focus केवल तथ्यों और सबूतों के आधार पर कार्रवाई करना है।
पुलिस की अपील और आगे की जांच
SIT प्रमुख Tejaswi Satpute ने नागरिकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और किसी भी तरह के अंधविश्वास में न फंसें। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे मामलों के प्रति जागरूक होना होगा ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
फिलहाल आरोपी पुलिस हिरासत में है और जांच जारी है। आने वाले दिनों में और भी खुलासे होने की संभावना है।
निष्कर्ष
अशोक खरात का मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि समाज के उस कमजोर पहलू को उजागर करता है, जहां अंधविश्वास और डर का इस्तेमाल करके लोगों का शोषण किया जाता है।
यह जरूरी है कि:
- लोग जागरूक बनें
- कानून का सख्ती से पालन हो
- और पीड़ितों को न्याय मिले
ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति “दिव्य शक्ति” के नाम पर इस तरह के अपराध करने की हिम्मत न कर सके।
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