Sensex-Nifty closes red: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त मांग और कमजोर ग्लोबल संकेतों के बीच घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को भारी दबाव देखने को मिला। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए। कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 500 अंक तक फिसल गया, जबकि निफ्टी भी 24,450 के नीचे चला गया। बाजार में बिकवाली का असर इतना व्यापक रहा कि बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप एक ही कारोबारी सत्र में करीब ₹2.53 लाख करोड़ घट गया।
Sensex-Nifty closes red: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार की शुरुआत से ही उतार-चढ़ाव देखने को मिला। दिन बढ़ने के साथ कुछ प्रमुख सेक्टर्स में बिकवाली तेज हो गई और इसका दबाव बेंचमार्क इंडेक्स पर दिखाई दिया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने दिन के दौरान अपने अहम स्तरों से नीचे फिसलते हुए कारोबार किया और आखिर में आधे फीसदी के आसपास की गिरावट के साथ बंद हुए।
बाजार में सबसे ज्यादा दबाव एफएमसीजी, मेटल, रियल्टी, बैंकिंग और ऑटो शेयरों पर दिखाई दिया। इन सेक्टर्स के कई बड़े शेयरों में मुनाफावसूली और बिकवाली के कारण इंडेक्स कमजोर रहे। हालांकि, कुछ चुनिंदा आईटी और कंज्यूमर शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार की गिरावट कुछ हद तक सीमित रही।
सेंसेक्स 388 अंक टूटा, निफ्टी 24,472 पर बंद

कारोबारी सत्र के अंत में बीएसई सेंसेक्स 388.19 अंक यानी 0.49 फीसदी की गिरावट के साथ 78,154.25 अंक पर बंद हुआ। दिन के दौरान सेंसेक्स में एक समय 494.18 अंक तक की गिरावट देखने को मिली और यह 78,048.26 अंक के इंट्रा-डे लो तक पहुंच गया।
इसी तरह एनएसई निफ्टी भी दबाव में रहा। निफ्टी 112.10 अंक यानी 0.46 फीसदी टूटकर 24,471.70 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान निफ्टी का निचला स्तर 24,429.25 अंक रहा। यानी इंट्रा-डे में निफ्टी अपने क्लोजिंग लेवल की तुलना में काफी नीचे तक फिसल गया था।
बाजार में यह गिरावट ऐसे समय देखने को मिली जब निवेशक ग्लोबल संकेतों, अमेरिकी नीतिगत रुख और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़े घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त मांगों को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता ने भी बाजार के सेंटीमेंट पर असर डाला।
दिनभर बाजार में क्यों रही कमजोरी?
गुरुवार के कारोबार में निवेशकों का रुख सतर्क रहा। ग्लोबल मार्केट से मिले मिश्रित संकेतों के बीच घरेलू बाजार में भी खरीदारी का भरोसा कमजोर दिखाई दिया। बाजार के कुछ प्रमुख सेक्टर्स में लगातार बिकवाली होने से इंडेक्स पर दबाव बढ़ता गया।
खासकर एफएमसीजी और मेटल शेयरों में कमजोरी ने बाजार को प्रभावित किया। इसके अलावा रियल्टी इंडेक्स में भी एक फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। बैंकिंग और ऑटो शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका से जुड़े घटनाक्रम बाजार के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख से निवेशकों के बीच कारोबारी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता को लेकर चिंता बढ़ी। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाले एसेट्स में अपनी पोजीशन को लेकर अधिक सतर्क नजर आए।
निवेशकों की दौलत ₹2.53 लाख करोड़ घटी
शेयर बाजार में आई इस गिरावट का सीधा असर निवेशकों की कुल संपत्ति पर भी पड़ा। बीएसई पर लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप पिछले कारोबारी सत्र में ₹4,95,30,513.66 करोड़ था।
गुरुवार के कारोबार के बाद यह घटकर ₹4,92,77,117.52 करोड़ रह गया। यानी एक ही कारोबारी सत्र में बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में ₹2,53,396.14 करोड़ की कमी आई।
इसका मतलब है कि बाजार में गिरावट के दौरान निवेशकों की कुल संपत्ति में करीब ₹2.53 लाख करोड़ की कमी हुई। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि मार्केट कैप में होने वाली कमी को सीधे-सीधे निवेशकों के खाते से निकली रकम नहीं माना जाता। शेयरों की कीमतों में बदलाव के कारण कंपनियों के बाजार मूल्य में कमी या बढ़ोतरी होती है।
सेंसेक्स के सिर्फ 5 शेयरों में रही तेजी
सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में गुरुवार को सिर्फ पांच शेयर हरे निशान में बंद हुए, जबकि ज्यादातर शेयरों में गिरावट रही। बाजार की कमजोर धारणा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इंडेक्स के अधिकांश शेयरों पर बिकवाली का दबाव बना रहा।
सेंसेक्स में जोमैटो की पैरेंट कंपनी एटरनल (Eternal), इंफोसिस और टाइटन उन शेयरों में शामिल रहे जिनमें दिन के अंत में मजबूती देखने को मिली। इन शेयरों में खरीदारी ने बाजार की गिरावट को कुछ हद तक संभालने का प्रयास किया।
दूसरी तरफ अल्ट्राटेक सीमेंट, एक्सिस बैंक और इंडिगो में अपेक्षाकृत ज्यादा कमजोरी रही। इन प्रमुख शेयरों में गिरावट ने सेंसेक्स पर अतिरिक्त दबाव बनाया।
बाजार में शेयरों की चाल से साफ रहा कि निवेशक इस समय चुनिंदा शेयरों में ही खरीदारी कर रहे हैं और कमजोर प्रदर्शन करने वाले सेक्टर्स से दूरी बना रहे हैं।
एफएमसीजी, मेटल और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव
सेक्टर के हिसाब से देखें तो गुरुवार का कारोबार कई महत्वपूर्ण इंडेक्स के लिए कमजोर रहा। एफएमसीजी, मेटल और रियल्टी सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स में एक फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
एफएमसीजी शेयरों में कमजोरी का असर इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि यह सेक्टर बाजार में अपेक्षाकृत डिफेंसिव माना जाता है। वहीं मेटल शेयरों में गिरावट वैश्विक कमोडिटी बाजार और आर्थिक गतिविधियों को लेकर निवेशकों की चिंता से भी जुड़ी हो सकती है।
रियल्टी शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली। इसके अलावा निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी ऑटो इंडेक्स भी आधे फीसदी से ज्यादा कमजोर रहे।
दूसरी तरफ बाजार के कुछ हिस्सों में खरीदारी बनी रही। इससे ब्रॉडर मार्केट में पूरी तरह एकतरफा गिरावट नहीं देखने को मिली।
मिडकैप लाल, स्मॉलकैप में खरीदारी
बड़े शेयरों में कमजोरी के बावजूद ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन पूरी तरह निराशाजनक नहीं रहा। निफ्टी मिडकैप 100 लाल निशान में बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 ने हरे निशान में कारोबार समाप्त किया।
इससे संकेत मिलता है कि बड़े शेयरों में बिकवाली के बीच कुछ छोटे और मिडकैप शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। हालांकि, ऐसे शेयरों में उतार-चढ़ाव सामान्य तौर पर अधिक होता है, इसलिए सिर्फ एक कारोबारी सत्र के प्रदर्शन के आधार पर किसी सेक्टर या स्टॉक के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
बीएसई पर 4,510 शेयरों में हुई ट्रेडिंग
गुरुवार को बीएसई पर कुल 4,510 शेयरों में कारोबार हुआ। इनमें से 2,044 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 2,266 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। वहीं 200 शेयरों की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ।
यह आंकड़ा बताता है कि भले ही सेंसेक्स और निफ्टी की गिरावट आधे फीसदी के आसपास रही, लेकिन पूरे बाजार में शेयरों की चाल मिश्रित थी। गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों से अधिक रही, जिससे बाजार की व्यापक धारणा कमजोर नजर आई।
हालांकि, कुछ शेयरों में मजबूत खरीदारी भी देखने को मिली और कई कंपनियों के शेयरों ने अपने एक साल के उच्चतम स्तर को छुआ।
185 शेयर 52 हफ्ते के हाई पर पहुंचे
कमजोर बाजार के बीच भी बीएसई पर 185 शेयर अपने एक साल के उच्चतम स्तर यानी 52-वीक हाई पर पहुंच गए। यह बताता है कि बाजार में गिरावट के बावजूद कुछ चुनिंदा कंपनियों में खरीदारी का रुझान मजबूत बना हुआ है।
दूसरी ओर 88 शेयर अपने एक साल के निचले स्तर यानी 52-वीक लो पर पहुंच गए। इस तरह बाजार में एक तरफ जहां कुछ स्टॉक्स में नई खरीदारी देखने को मिली, वहीं दूसरी तरफ कई शेयरों में बिकवाली इतनी तेज रही कि वे 52-वीक लो के करीब पहुंच गए।
इस तरह के आंकड़े निवेशकों को यह समझने में मदद करते हैं कि सिर्फ सेंसेक्स या निफ्टी देखकर पूरे बाजार की तस्वीर नहीं समझी जा सकती। अलग-अलग सेक्टर और शेयरों का प्रदर्शन एक-दूसरे से काफी अलग हो सकता है।
आगे बाजार के लिए क्या अहम रहेगा?
अब निवेशकों की नजर अगले कारोबारी सत्र में बाजार की दिशा पर रहेगी। निफ्टी के 24,500 के आसपास कारोबार करने के कारण यह स्तर शॉर्ट टर्म में बाजार के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि इंडेक्स इस स्तर के ऊपर मजबूती हासिल करता है तो खरीदारी का भरोसा लौट सकता है। वहीं, कमजोरी जारी रहने पर हालिया निचले स्तरों पर बाजार की नजर रहेगी।
सेंसेक्स के लिए भी 78,000 के आसपास का स्तर बाजार की धारणा के लिहाज से महत्वपूर्ण बना हुआ है। हालांकि, बाजार की अगली दिशा केवल तकनीकी स्तरों से तय नहीं होगी। ग्लोबल मार्केट, अमेरिकी बाजारों की चाल, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और आने वाले कॉरपोरेट अपडेट भी बाजार पर असर डाल सकते हैं।
निवेशकों को ऐसे समय में किसी एक दिन की तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना चाहिए। अलग-अलग कंपनियों के फंडामेंटल, वैल्यूएशन और सेक्टर की संभावनाओं को ध्यान में रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
बाजार में गिरावट के बीच भी दिखे चुनिंदा मौके
गुरुवार का कारोबारी सत्र भले ही सेंसेक्स और निफ्टी के लिए कमजोर रहा हो, लेकिन पूरे बाजार में एक जैसा प्रदर्शन नहीं देखने को मिला। सेंसेक्स के कुछ शेयरों में तेजी, निफ्टी स्मॉलकैप 100 का हरे निशान में बंद होना और 185 शेयरों का 52-वीक हाई बनाना दिखाता है कि बाजार में अभी भी चुनिंदा शेयरों के प्रति निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है।
यही वजह है कि बाजार की दिशा को केवल इंडेक्स के आधार पर समझने के बजाय सेक्टर और स्टॉक लेवल पर भी नजर रखना जरूरी है। आने वाले कारोबारी सत्रों में अगर वैश्विक संकेतों में सुधार आता है और घरेलू खरीदारी बढ़ती है तो बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है। इसके विपरीत, ग्लोबल स्तर पर अनिश्चितता बढ़ने और बिकवाली तेज होने पर उतार-चढ़ाव आगे भी जारी रह सकता है।
डिस्क्लेमर
यह लेख बाजार में उपलब्ध आंकड़ों और कारोबारी सत्र की गतिविधियों पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी केवल सूचना और सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर या सिक्योरिटी में निवेश करने से पहले अपनी रिसर्च करें और जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार की सलाह लें। NewsJagran.in किसी भी निवेशक को किसी विशेष शेयर को खरीदने या बेचने की व्यक्तिगत सलाह नहीं देता है।


