GDP Share of Delhi-NCR: देश की आर्थिक तस्वीर में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ वर्षों में जहां दिल्ली की देश की जीडीपी में हिस्सेदारी कम हुई है, वहीं दिल्ली-एनसीआर के ही नोएडा और गाजियाबाद जैसे शहरों की हिस्सेदारी बढ़ी है। इससे संकेत मिलता है कि राष्ट्रीय राजधानी से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों का एक हिस्सा अब आसपास के शहरों की ओर शिफ्ट हो रहा है।
देश की जीडीपी में बड़े महानगरों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है। हालांकि, अलग-अलग शहरों की हिस्सेदारी में समय के साथ बदलाव भी देखने को मिल रहा है। कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल यानी CAG की रिपोर्ट के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि FY18 से FY24 के बीच देश की जीडीपी में दिल्ली की हिस्सेदारी कम हुई है। इसके उलट मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे प्रमुख महानगरों की हिस्सेदारी बढ़ी।
सबसे दिलचस्प बदलाव दिल्ली-एनसीआर में देखने को मिला है। दिल्ली की हिस्सेदारी भले ही घटी हो, लेकिन नोएडा और गाजियाबाद की हिस्सेदारी बढ़ी है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या राष्ट्रीय राजधानी की कुछ आर्थिक गतिविधियां अब धीरे-धीरे एनसीआर के दूसरे शहरों में स्थानांतरित हो रही हैं?
देश की जीडीपी में दिल्ली की हिस्सेदारी कितनी घटी?
CAG की रिपोर्ट के आधार पर किए गए विश्लेषण के मुताबिक, FY18 में देश की जीडीपी में दिल्ली की हिस्सेदारी 4.12 फीसदी थी। FY24 तक यह घटकर 3.82 फीसदी रह गई।
यानी करीब छह वर्षों के दौरान दिल्ली की हिस्सेदारी में 0.30 प्रतिशत अंक की कमी आई। हालांकि, हिस्सेदारी घटने के बावजूद दिल्ली देश के प्रमुख महानगरों में जीडीपी योगदान के मामले में अभी भी सबसे आगे है।
यहां यह समझना जरूरी है कि हिस्सेदारी कम होने का मतलब यह नहीं है कि दिल्ली की अर्थव्यवस्था का आकार सीधे तौर पर घट गया है। किसी राज्य या शहर की राष्ट्रीय जीडीपी में हिस्सेदारी कई वजहों से कम हो सकती है। इनमें दूसरे शहरों की अर्थव्यवस्था का तेज गति से बढ़ना, आर्थिक गतिविधियों का भौगोलिक विस्तार और विभिन्न सेक्टरों का नए कारोबारी केंद्रों की ओर जाना शामिल है।
मुंबई और बेंगलुरु की हिस्सेदारी बढ़ी
दिल्ली की हिस्सेदारी में कमी के विपरीत देश के कुछ अन्य बड़े महानगरों ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है।
बेंगलुरु इसका एक प्रमुख उदाहरण है। FY18 में देश की जीडीपी में बेंगलुरु की हिस्सेदारी 2.88 फीसदी थी, जो FY24 में बढ़कर 3.23 फीसदी हो गई। यानी इस अवधि में बेंगलुरु की हिस्सेदारी में 0.35 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई।
बेंगलुरु को भारत का प्रमुख आईटी और टेक्नोलॉजी हब माना जाता है। आईटी सर्विसेज, स्टार्टअप, ग्लोबल कंपनियों के ऑफिस और टेक्नोलॉजी से जुड़ी गतिविधियों ने शहर की आर्थिक भूमिका को मजबूत किया है।
इसी तरह मुंबई की हिस्सेदारी भी बढ़ी। मुंबई की गणना में ठाणे और पालघर को शामिल नहीं किया गया है। इस आधार पर FY18 में देश की जीडीपी में मुंबई की हिस्सेदारी 2.57 फीसदी थी, जो FY24 में बढ़कर 2.75 फीसदी हो गई।
मुंबई देश का प्रमुख वित्तीय और कारोबारी केंद्र है। बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, कॉरपोरेट गतिविधियां, मीडिया और मनोरंजन समेत कई बड़े सेक्टर शहर की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
चेन्नई की जीडीपी हिस्सेदारी भी बढ़ी
दक्षिण भारत के प्रमुख औद्योगिक और कारोबारी केंद्र चेन्नई की हिस्सेदारी में भी वृद्धि दर्ज की गई है।
FY18 में देश की जीडीपी में चेन्नई की हिस्सेदारी 1.02 फीसदी थी। FY24 में यह बढ़कर 1.09 फीसदी हो गई।
चेन्नई ऑटोमोबाइल, मैन्युफैक्चरिंग, आईटी, लॉजिस्टिक्स और पोर्ट से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र है। पिछले कुछ वर्षों में औद्योगिक निवेश और सर्विस सेक्टर की गतिविधियों ने इसकी अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है।
इस तरह बड़े महानगरों के आंकड़ों को देखें तो दिल्ली की हिस्सेदारी में गिरावट के मुकाबले मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई में बढ़ोतरी दिखाई देती है।
नोएडा ने भी बढ़ाया देश की जीडीपी में योगदान
दिल्ली की हिस्सेदारी घटने के बीच नोएडा का प्रदर्शन खास ध्यान खींचता है। नोएडा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण कारोबारी, आईटी और औद्योगिक केंद्र बन चुका है।
CAG के आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, FY18 में देश की जीडीपी में नोएडा की हिस्सेदारी 0.84 फीसदी थी। FY24 में यह बढ़कर 0.87 फीसदी हो गई।
यानी छह साल में नोएडा की हिस्सेदारी में करीब 0.03 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई।
नोएडा में आईटी कंपनियों, कॉरपोरेट ऑफिस, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, रियल एस्टेट और अन्य कारोबारी गतिविधियों के विस्तार ने इसे एनसीआर के प्रमुख आर्थिक केंद्रों में शामिल किया है।
दिल्ली में जमीन और ऑफिस स्पेस की लागत बढ़ने के साथ कई कारोबारी गतिविधियों के लिए नोएडा जैसे शहर अधिक आकर्षक विकल्प बन सकते हैं। हालांकि, केवल इन आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि दिल्ली से हर प्रकार की आर्थिक गतिविधि नोएडा में चली गई है।
गाजियाबाद की हिस्सेदारी में सबसे खास बदलाव
एनसीआर के आंकड़ों में गाजियाबाद का बदलाव भी महत्वपूर्ण है। FY18 में देश की जीडीपी में गाजियाबाद की हिस्सेदारी करीब 0.24 फीसदी थी, जो FY24 में बढ़कर 0.39 फीसदी हो गई।
इसका मतलब है कि छह साल में गाजियाबाद की हिस्सेदारी में 0.15 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई।
नोएडा की तुलना में गाजियाबाद की हिस्सेदारी में वृद्धि अधिक रही है। यह आंकड़ा इस बात की ओर संकेत कर सकता है कि एनसीआर में आर्थिक गतिविधियां सिर्फ दिल्ली और नोएडा तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि आसपास के शहर भी आर्थिक विस्तार का लाभ उठा रहे हैं।
गाजियाबाद की दिल्ली से नजदीकी, बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक आधार, रियल एस्टेट और बढ़ते शहरीकरण ने इसे एनसीआर की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान दिया है।
क्या दिल्ली से NCR के दूसरे शहरों में शिफ्ट हो रही हैं कंपनियां?
दिल्ली की जीडीपी हिस्सेदारी में गिरावट और नोएडा-गाजियाबाद की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी को साथ रखकर देखें तो एक महत्वपूर्ण तस्वीर सामने आती है।
संभावना है कि राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद कुछ आर्थिक गतिविधियां अब एनसीआर के दूसरे शहरों की ओर स्थानांतरित हो रही हों। हालांकि, इसे सीधे तौर पर कंपनियों के दिल्ली छोड़ने के रूप में देखना सही नहीं होगा।
दिल्ली में जमीन और किराए की बढ़ती लागत कारोबार के लिए एक चुनौती हो सकती है। बड़े ऑफिस, वेयरहाउस, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और अन्य कारोबारी गतिविधियों के लिए नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और आसपास के क्षेत्र अपेक्षाकृत अधिक जगह उपलब्ध करा सकते हैं।
इसके अलावा दिल्ली में प्रदूषण से जुड़े सख्त नियम भी कुछ प्रकार की औद्योगिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में कुछ मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों के लिए एनसीआर के दूसरे हिस्से अधिक अनुकूल विकल्प बन सकते हैं।
आर्थिक गतिविधियां खत्म नहीं, बल्कि स्थानांतरित हो सकती हैं
इन आंकड़ों की सबसे महत्वपूर्ण व्याख्या यही हो सकती है कि दिल्ली की हिस्सेदारी में गिरावट का एक हिस्सा आर्थिक गतिविधियों के भौगोलिक पुनर्वितरण से जुड़ा हो।
यदि दिल्ली की हिस्सेदारी कम हो रही है और उसी समय एनसीआर के शहरों की हिस्सेदारी बढ़ रही है, तो इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की कुल आर्थिक क्षमता कमजोर होने के बजाय अधिक व्यापक हो रही है।
दूसरे शब्दों में, पहले जिस आर्थिक गतिविधि का केंद्र दिल्ली था, उसका कुछ हिस्सा अब नोएडा, गाजियाबाद और एनसीआर के अन्य इलाकों में दिखाई दे सकता है।
यह बदलाव आने वाले वर्षों में रियल एस्टेट, ऑफिस स्पेस, इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसपोर्ट और रोजगार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
चंडीगढ़ की हिस्सेदारी लगभग स्थिर
देश के अन्य शहरों और केंद्र शासित क्षेत्रों के आंकड़ों में भी अलग-अलग तरह के बदलाव दिखाई देते हैं।
FY18 से FY24 के बीच देश की जीडीपी में चंडीगढ़ की हिस्सेदारी लगभग अपरिवर्तित रही। इसका मतलब है कि इस अवधि में राष्ट्रीय जीडीपी के मुकाबले चंडीगढ़ की आर्थिक हिस्सेदारी में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ।
वहीं पुद्दुचेरी की हिस्सेदारी FY18 के 0.17 फीसदी से घटकर FY24 में 0.15 फीसदी रह गई।
इसी तरह जम्मू-कश्मीर की हिस्सेदारी भी FY18 के 0.81 फीसदी से घटकर FY24 में 0.76 फीसदी हो गई।
दिल्ली अभी भी सबसे बड़ा योगदानकर्ता
दिल्ली की हिस्सेदारी में कमी जरूर आई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में दिल्ली का महत्व कम हो गया है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मेट्रो शहरों में दिल्ली की देश की जीडीपी में हिस्सेदारी अभी भी सबसे अधिक है। दिल्ली भारत की राजनीतिक राजधानी होने के साथ-साथ सर्विस सेक्टर, व्यापार, वित्त, रिटेल, रियल एस्टेट और कॉरपोरेट गतिविधियों का बड़ा केंद्र है।
हालांकि, FY18 से FY24 के बीच के आंकड़े यह जरूर बताते हैं कि भारत के प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच विकास की गति समान नहीं रही है।
NCR की बदलती आर्थिक तस्वीर का क्या मतलब?
दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद के आंकड़ों को एक साथ देखें तो NCR की आर्थिक तस्वीर पहले से अधिक विकेंद्रीकृत होती हुई नजर आती है।
दिल्ली अब भी सबसे बड़ा आर्थिक केंद्र है, लेकिन नोएडा और गाजियाबाद जैसे शहरों की बढ़ती हिस्सेदारी यह संकेत देती है कि एनसीआर का विकास अब केवल राजधानी पर निर्भर नहीं है।
बेहतर सड़क और मेट्रो कनेक्टिविटी, एक्सप्रेसवे, नए कमर्शियल हब, आईटी कंपनियों का विस्तार, औद्योगिक निवेश और रियल एस्टेट विकास आने वाले वर्षों में इस बदलाव को और तेज कर सकते हैं।
ऐसे में भविष्य में दिल्ली-एनसीआर को एक ऐसे बड़े आर्थिक क्षेत्र के रूप में देखा जा सकता है, जहां अलग-अलग शहर अलग-अलग सेक्टरों की ताकत बनकर उभरें।
निष्कर्ष
FY18 से FY24 के बीच देश की जीडीपी में दिल्ली की हिस्सेदारी 4.12 फीसदी से घटकर 3.82 फीसदी हो गई। वहीं बेंगलुरु, मुंबई और चेन्नई की हिस्सेदारी बढ़ी। खास बात यह रही कि दिल्ली-एनसीआर के नोएडा और गाजियाबाद ने भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई।
इन आंकड़ों से यह संकेत मिलता है कि देश की आर्थिक गतिविधियों का विस्तार अब पारंपरिक महानगरों से आगे बढ़कर उनके आसपास के शहरों तक हो रहा है। दिल्ली की हिस्सेदारी घटने के बावजूद एनसीआर की आर्थिक ताकत खत्म नहीं हुई है, बल्कि संभव है कि उसका एक हिस्सा आसपास के शहरों में अधिक व्यापक रूप से फैल रहा हो।


