AK-203 Sher Rifles: भारत ने छोटे हथियारों के घरेलू उत्पादन के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उत्तर प्रदेश के अमेठी स्थित कोरवा ऑर्डनेंस फैसिलिटी में पहली पूरी तरह स्वदेशी AK-203 असॉल्ट रायफल का निर्माण और सफल परीक्षण किया गया है। खास बात यह है कि इस रायफल को तैयार करने में भारतीय कंपोनेंट्स और देश में निर्मित कच्चे माल का इस्तेमाल किया गया है। इसे ‘शेर’ (Sher) नाम दिया गया है।
यह उपलब्धि भारत और रूस के संयुक्त उद्यम इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कंपनी अब स्वदेशी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और भारतीय सेना के लिए बड़े पैमाने पर AK-203 रायफलों की आपूर्ति की दिशा में आगे बढ़ रही है।
पहली 100% स्वदेशी AK-203 ‘शेर’ का सफल परीक्षण
#ShadowsAndSteel
In the Shadows, only Steel tells the Truth
Hear The Sher (AK-203) Roar – India’s new signature sound
Atmanirbhar Steel, Crafted in India
Tactical #ASMR pic.twitter.com/HZZA1lK0jv
— ADG PI – INDIAN ARMY (@adgpi) November 23, 2025 IRRPL के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर मेजर जनरल एसके शर्मा के मुताबिक, कंपनी ने 100% भारतीय सामग्री से तैयार पहली AK-203 रायफल का निर्माण पूरा कर लिया है। इस रायफल पर बर्स्ट फायरिंग समेत कई फायरिंग ट्रायल किए गए हैं और शुरुआती नतीजे उत्साहजनक बताए गए हैं।
इस उपलब्धि का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि AK-203 के निर्माण में अब विदेशी कंपोनेंट्स पर निर्भरता को कम करने की दिशा में भारत ने एक और कदम आगे बढ़ाया है। यह देश में छोटे हथियारों के स्वदेशी उत्पादन और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की कोशिशों को मजबूत करता है।
सितंबर 2026 में सेना को दिए जा सकते हैं प्रोटोटाइप
कंपनी अब भारतीय सेना के ट्रायल के लिए पूरी तरह स्वदेशी AK-203 प्रोटोटाइप तैयार कर रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन प्रोटोटाइप्स को सितंबर 2026 के दौरान भारतीय सेना को सौंपे जाने की उम्मीद है।
सेना के परीक्षण के बाद रायफल की गुणवत्ता, प्रदर्शन और परिचालन जरूरतों के अनुरूप इसकी आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
हर 100 सेकंड में एक AK-203 बनाने का लक्ष्य
IRRPL अब उत्पादन की रफ्तार बढ़ाने पर भी काम कर रही है। कंपनी का लक्ष्य भविष्य में हर 100 सेकंड में एक AK-203 ‘शेर’ रायफल तैयार करने की क्षमता हासिल करना है।
इसके लिए कंपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने, स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल बढ़ाने और उत्पादन प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाने पर काम कर रही है।
कंपनी के मुताबिक, उत्पादन क्षमता में सुधार के कारण भारतीय सेना के लिए निर्धारित लगभग 6 लाख AK-203 रायफलों की डिलीवरी तय कार्यक्रम से करीब एक साल पहले पूरी करने में भी मदद मिली है।
क्या हैं AK-203 ‘शेर’ की खासियतें?
AK-203, कलाश्निकोव प्लेटफॉर्म पर आधारित 7.62x39mm गैस-ऑपरेटेड असॉल्ट रायफल है। इसकी प्रमुख विशेषताओं में आधुनिक एर्गोनॉमिक्स और मॉड्यूलर एक्सेसरी रेल्स शामिल हैं।
इसके अलावा, उपलब्ध जानकारी के अनुसार:
- कैलिबर: 7.62x39mm
- फायरिंग रेट: लगभग 700 राउंड प्रति मिनट
- प्रभावी मारक क्षमता: लगभग 800 मीटर तक बताई जाती है
- प्लेटफॉर्म: कलाश्निकोव आधारित
- डिजाइन: आधुनिक एर्गोनॉमिक्स और मॉड्यूलर एक्सेसरी सपोर्ट
इन खूबियों के कारण AK-203 को भारतीय सेना की आधुनिक असॉल्ट रायफल जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म माना जा रहा है।
INSAS रायफलों की जगह लेगी AK-203
भारतीय सेना लंबे समय से अपनी पुरानी होती INSAS रायफलों को आधुनिक हथियारों से बदलने की प्रक्रिया में है। इसी क्रम में AK-203 को बड़ी संख्या में शामिल किया जा रहा है।
भारतीय सेना के लिए स्थानीय स्तर पर निर्मित 6 लाख से अधिक AK-203 रायफलों की योजना इस बदलाव का हिस्सा है। इससे न केवल पुराने हथियारों को आधुनिक प्लेटफॉर्म से बदलने में मदद मिलेगी, बल्कि घरेलू रक्षा विनिर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा।
भारत के रक्षा उत्पादन के लिए क्यों अहम है यह उपलब्धि?
AK-203 ‘शेर’ का पूरी तरह भारतीय सामग्री से तैयार होना भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है। स्वदेशी कंपोनेंट्स और कच्चे माल के बढ़ते इस्तेमाल से आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिलती है।
इसके साथ ही बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता विकसित होने से भारत के घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूती मिल सकती है। अमेठी में AK-203 का उत्पादन इसी व्यापक ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा का हिस्सा है।
अब सितंबर 2026 में भारतीय सेना को प्रस्तावित स्वदेशी प्रोटोटाइप सौंपे जाने के बाद इसके परीक्षण और आगे की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। यदि परीक्षण सफल रहते हैं, तो यह भारत में असॉल्ट रायफल के बड़े पैमाने पर स्वदेशी उत्पादन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है।


