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    7 नवम्बर 2026
    # UP के सरकारी इंजीनियर ने खड़ा किया था खरबों का JP साम्राज्य, फिर कर्ज ने किया बर्बाद; अब अदाणी के हाथों में कंपनी की कमान **JP Associates Story:** उत्तर प्रदेश के एक सरकारी इंजीनियर ने अपनी नौकरी छोड़कर कारोबार की दुनिया में कदम रखा और देखते ही देखते हजारों करोड़ रुपये का कारोबारी साम्राज्य खड़ा कर दिया। यह कहानी है जयप्रकाश गौड़ और जयप्रकाश एसोसिएट्स (JP Associates) की। यमुना एक्सप्रेसवे, बड़े बांध, सीमेंट प्लांट, बिजली परियोजनाएं और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने वाला यह समूह कभी देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबारियों में गिना जाता था। लेकिन जरूरत से ज्यादा कर्ज, आर्थिक मंदी और कारोबार में आई मुश्किलों ने इस साम्राज्य की नींव हिला दी। आखिरकार कंपनी दिवालिया प्रक्रिया में पहुंच गई और अब इसका अधिग्रहण अदाणी समूह ने कर लिया है। **बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली।** कारोबार की दुनिया में कई ऐसी कहानियां हैं, जहां एक छोटे से सफर की शुरुआत करने वाला व्यक्ति बड़ा कारोबारी साम्राज्य खड़ा कर देता है। लेकिन कभी-कभी यही साम्राज्य समय के साथ कर्ज और आर्थिक चुनौतियों के कारण ढह भी जाता है। जयप्रकाश एसोसिएट्स की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक समय उत्तर भारत में जेपी समूह का नाम बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए जाना जाता था। कंपनी ने सड़क निर्माण से लेकर बिजली उत्पादन, सीमेंट, होटल और रियल एस्टेट तक कई क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बनाई। ग्रेटर नोएडा से आगरा को जोड़ने वाला यमुना एक्सप्रेसवे भी इसी समूह की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा। जेपी समूह की पहचान केवल बड़े प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं थी। लाखों निवेशकों और कर्मचारियों का भी इस कंपनी से जुड़ाव था। लेकिन लगातार बढ़ते कर्ज और कारोबार में आई गिरावट ने कंपनी को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया, जहां से वापसी मुश्किल हो गई। अब अदाणी समूह ने दिवालिया समाधान प्रक्रिया के जरिए जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण का रास्ता साफ कर लिया है। आइए जानते हैं कि आखिर कैसे एक सरकारी इंजीनियर ने यह कारोबारी साम्राज्य खड़ा किया और फिर यह आर्थिक संकट में कैसे फंस गया। ## सरकारी इंजीनियर से कारोबारी बनने तक का सफर जयप्रकाश गौड़ का जन्म वर्ष 1931 में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में हुआ था। उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा हासिल किया और इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के तौर पर नौकरी शुरू की। सरकारी सेवा के दौरान उन्हें निर्माण और इंजीनियरिंग से जुड़ी परियोजनाओं को समझने का मौका मिला। हालांकि, उनके मन में खुद का कारोबार शुरू करने की इच्छा थी। करीब सात साल तक सरकारी नौकरी करने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और निर्माण कार्यों की ठेकेदारी शुरू कर दी। शुरुआत में उनके पास कारोबार के लिए बहुत ज्यादा पूंजी नहीं थी। उन्होंने अपनी करीब 10 हजार रुपये की बचत से छोटे-मोटे निर्माण और सड़क निर्माण के ठेके लेने शुरू किए। धीरे-धीरे अनुभव और काम के आधार पर उन्हें बड़ी परियोजनाएं मिलने लगीं। वर्ष 1979 में उन्होंने जयप्रकाश एसोसिएट्स की स्थापना की। शुरुआत में कंपनी का मुख्य कारोबार निर्माण और इंजीनियरिंग से जुड़ा था। समय के साथ कंपनी ने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अपनी जगह बनाई और जेपी समूह का विस्तार होता चला गया। ## बांध से लेकर बिजली और सीमेंट तक फैला कारोबार जेपी समूह ने निर्माण क्षेत्र में अपनी पहचान मजबूत करने के बाद जलविद्युत परियोजनाओं की तरफ कदम बढ़ाया। टिहरी बांध और विष्णुप्रयाग जलविद्युत परियोजना जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स से कंपनी की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई। इसके बाद समूह ने सीमेंट, बिजली उत्पादन, होटल और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में भी कारोबार शुरू किया। कंपनी का उद्देश्य केवल निर्माण ठेके लेने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के विकास और संचालन तक पहुंच गया। इस विस्तार ने जयप्रकाश एसोसिएट्स को देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर समूहों में शामिल कर दिया। कंपनी के पास अलग-अलग क्षेत्रों में कारोबार था और निवेशकों के बीच भी इसकी अच्छी पहचान बन गई थी। ## यमुना एक्सप्रेसवे ने दिलाई देशभर में पहचान जेपी समूह के इतिहास में यमुना एक्सप्रेसवे परियोजना को एक बड़ा पड़ाव माना जाता है। वर्ष 2003 में ग्रेटर नोएडा से आगरा के बीच एक्सप्रेसवे बनाने की परियोजना जेपी समूह को मिली। करीब 165 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का निर्माण समूह की कंपनी जेपी इंफ्राटेक ने किया। इस परियोजना के तहत सड़क निर्माण के साथ-साथ एक्सप्रेसवे के आसपास रियल एस्टेट विकास के अधिकार भी मिले। इससे कंपनी को इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रॉपर्टी कारोबार दोनों में विस्तार का अवसर मिला। वर्ष 2012 में यमुना एक्सप्रेसवे को आम लोगों के लिए खोल दिया गया। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच सड़क संपर्क बेहतर हुआ। इस परियोजना ने जेपी समूह को देशभर में पहचान दिलाई। इसी दौरान कंपनी ने ग्रेटर नोएडा में बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट का निर्माण भी किया। इस रेसिंग सर्किट पर वर्ष 2011 से 2013 तक फॉर्मूला-1 इंडियन ग्रां प्री का आयोजन हुआ। यह परियोजना भारत में मोटरस्पोर्ट्स के लिहाज से काफी चर्चित रही। ## 2008 की मंदी के बाद बिगड़ने लगे हालात तेजी से विस्तार कर रहे जेपी समूह के लिए वर्ष 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी बड़ा झटका साबित हुई। मंदी के बाद रियल एस्टेट बाजार में सुस्ती आने लगी। मकानों की बिक्री प्रभावित हुई और निर्माण परियोजनाओं से मिलने वाली रकम में देरी होने लगी। दूसरी तरफ बिजली और सीमेंट कारोबार में भी कंपनी को उम्मीद के मुताबिक कमाई नहीं हो रही थी। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश की जरूरत थी, जबकि कारोबार से पर्याप्त नकदी नहीं आ रही थी। बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट जैसी बड़ी परियोजनाओं पर हुआ निवेश भी कंपनी के वित्तीय दबाव को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल रहा। कंपनी ने अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए बड़ी रकम उधार ली थी, लेकिन आमदनी और नकदी का प्रवाह कर्ज चुकाने की रफ्तार के अनुरूप नहीं रहा। कर्ज का बोझ बढ़ने के साथ कंपनी को अपनी कई संपत्तियां और कारोबारी हिस्सेदारियां बेचनी पड़ीं। इसके बावजूद वित्तीय स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। धीरे-धीरे जेपी समूह का संकट गहराता चला गया। ## घर खरीदारों से लेकर बैंकों तक, हर कोई हुआ परेशान जेपी समूह का आर्थिक संकट केवल कंपनी और बैंकों तक सीमित नहीं रहा। इसका असर उन हजारों लोगों पर भी पड़ा, जिन्होंने कंपनी के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में अपने घर बुक किए थे। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में जेपी विशटाउन जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में बड़ी संख्या में घर खरीदारों का पैसा फंस गया। कई लोगों ने अपनी जीवनभर की बचत लगाकर घर खरीदे थे, लेकिन उन्हें तय समय पर फ्लैट नहीं मिल पाए। इस स्थिति ने जेपी समूह की मुश्किलें और बढ़ा दीं। एक तरफ बैंक और वित्तीय संस्थान अपना कर्ज वापस मांग रहे थे, वहीं दूसरी तरफ घर खरीदार अपने घरों का इंतजार कर रहे थे। ## 2017 में शुरू हुई दिवालिया प्रक्रिया जेपी समूह की मुश्किलें सबसे पहले उसकी सहायक कंपनी जेपी इंफ्राटेक के मामले में सामने आईं। अगस्त 2017 में कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू की गई। बाद में सुरक्षा समूह ने समाधान प्रक्रिया के तहत जेपी इंफ्राटेक के अधिग्रहण की जिम्मेदारी संभाली। हालांकि, इससे पूरे जेपी समूह की वित्तीय परेशानियां खत्म नहीं हुईं। समूह की प्रमुख कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड भी भारी कर्ज के कारण संकट में फंस गई। 3 जून 2024 को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की इलाहाबाद पीठ ने जयप्रकाश एसोसिएट्स के खिलाफ कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया। इस मामले में वित्तीय लेनदारों ने करीब 57,185 करोड़ रुपये के बकाये का दावा किया था। इसके बाद कंपनी के कारोबार और संपत्तियों के समाधान के लिए बोली प्रक्रिया शुरू हुई। कई बड़े कारोबारी समूहों ने कंपनी को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई। ## वेदांता ने लगाई बड़ी बोली, लेकिन अदाणी ने मारी बाजी जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण की प्रक्रिया में वेदांता समूह और अदाणी समूह समेत कई कंपनियों ने हिस्सा लिया। सितंबर 2025 में वेदांता समूह की 17,000 करोड़ रुपये से अधिक की बोली की खबर सामने आई थी। इससे माना जा रहा था कि कंपनी का नियंत्रण अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता समूह के पास जा सकता है। हालांकि, बाद में समाधान प्रक्रिया में स्थिति बदल गई। नवंबर 2025 में वित्तीय लेनदारों ने अदाणी एंटरप्राइजेज की 14,535 करोड़ रुपये की समाधान योजना को मंजूरी दे दी। इस प्रस्ताव को कर्जदाताओं के करीब 89 फीसदी वोट मिले। इसके बाद 17 मार्च 2026 को NCLT की इलाहाबाद पीठ ने अदाणी एंटरप्राइजेज की समाधान योजना को मंजूरी दे दी। इस फैसले के साथ जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया। हालांकि, वेदांता समूह ने इस फैसले को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में चुनौती दी थी। मई 2026 में NCLAT ने वेदांता की अपील खारिज कर दी। इससे अदाणी समूह के अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ने का रास्ता मिला। ## अब अदाणी समूह के नियंत्रण में जेपी की संपत्तियां जयप्रकाश एसोसिएट्स के समाधान के बाद समूह की कई संपत्तियां और कारोबार अदाणी समूह की रणनीति का हिस्सा बन गए हैं। अदाणी समूह की अलग-अलग कंपनियां जेपी समूह की विभिन्न कारोबारी इकाइयों और परिसंपत्तियों में हिस्सेदारी हासिल कर रही हैं। इसी क्रम में अदाणी पावर ने जेपी पावर से जुड़ी हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया। वहीं, जेपी समूह के कुछ सीमेंट प्लांटों को अदाणी समूह ने डालमिया भारत को बेचने का फैसला किया। इस तरह जिस जेपी समूह ने कभी उत्तर भारत में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई थी, उसका कारोबारी स्वरूप अब पूरी तरह बदल चुका है। जयप्रकाश गौड़ की कहानी कारोबार की दुनिया में बड़े सपने, तेजी से विस्तार और वित्तीय अनुशासन के महत्व को समझाती है। महज 10 हजार रुपये की बचत से शुरू हुआ सफर देश के बड़े कारोबारी साम्राज्य तक पहुंचा, लेकिन भारी कर्ज और नकदी की कमी ने अंततः इस साम्राज्य को दिवालिया प्रक्रिया तक पहुंचा दिया। **Source:** उपलब्ध कारोबारी रिपोर्टों और दिवालिया समाधान प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी पर आधारित। jp-associates-jayprakash-gaur-rise-fall-adani-takeover-story
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Reading: Adani Power Share Price: कर्नाटक से मिलने वाला है ₹1,005 करोड़ का चेक, बाजार की गिरावट में भी उछला शेयर
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शेयर बाज़ार

Adani Power Share Price: कर्नाटक से मिलने वाला है ₹1,005 करोड़ का चेक, बाजार की गिरावट में भी उछला शेयर

Namam Sharma
Last updated: 2026/08/18 at 11:12 पूर्वाह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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12 Min Read
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Adani Power Share Price: शेयर बाजार में मंगलवार को एक बार फिर दबाव देखने को मिला। सेंसेक्स लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है, जबकि निफ्टी में लगातार छठे दिन कमजोरी बनी हुई है। हालांकि, बाजार की इस गिरावट के बीच अडानी पावर के शेयरों में तेजी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में कंपनी का शेयर करीब 2 फीसदी तक चढ़ गया। शेयर में आई इस तेजी की बड़ी वजह कर्नाटक से जुड़े करीब ₹1,005 करोड़ के भुगतान विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला है।

Contents
2 फीसदी तक चढ़ा Adani Power का शेयरआखिर क्यों आई अडानी पावर के शेयर में तेजी?सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?क्या है ₹1,005 करोड़ का पूरा मामला?कर्नाटक की DISCOMs ने क्या दलील दी?अडानी पावर के लिए क्यों अहम है यह मामला?शेयर बाजार की गिरावट के बीच अडानी पावर मजबूत₹254 के हाई से अभी नीचे है शेयरनिवेशकों को क्या करना चाहिए?निष्कर्ष

2 फीसदी तक चढ़ा Adani Power का शेयर

मंगलवार के शुरुआती कारोबार में अडानी पावर के शेयर में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। पिछले कारोबारी सत्र में कंपनी का शेयर बीएसई पर ₹203.90 के भाव पर बंद हुआ था। मंगलवार को यह मामूली गिरावट के साथ ₹203.85 पर खुला, लेकिन इसके बाद शेयर में तेजी आ गई।

कारोबार के शुरुआती दौर में अडानी पावर का शेयर करीब 2 फीसदी उछलकर ₹207.75 तक पहुंच गया। शेयर में इस तेजी के साथ कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन भी करीब ₹4 लाख करोड़ के स्तर के आसपास पहुंच गया।

अडानी पावर के शेयर का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर ₹254.15 और 52 हफ्ते का निचला स्तर ₹116.67 है। यानी शेयर अपने 52-week high से अभी नीचे कारोबार कर रहा है, लेकिन पिछले एक साल के निचले स्तर की तुलना में इसमें काफी सुधार देखने को मिला है।

आखिर क्यों आई अडानी पावर के शेयर में तेजी?

अडानी पावर के शेयर में तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) से जुड़े ₹1,005 करोड़ के भुगतान का मामला है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें अडानी पावर की ओर से सरकारी पोर्टल पर अपलोड किए गए करीब ₹1,005 करोड़ के इनवॉइस पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

यह मामला बिजली खरीद से जुड़े भुगतान और बकाया रकम को लेकर है। सरकारी पोर्टल पर बिजली खरीद के लेनदेन को ट्रैक किया जाता है और संबंधित भुगतान की स्थिति पर नजर रखी जाती है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अडानी पावर के लिए सकारात्मक माना जा रहा है, क्योंकि इससे कंपनी के उस दावे को मजबूती मिलती है जिसमें उसने कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों से बकाया रकम के भुगतान की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (APTEL) के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इससे पहले APTEL ने भी संबंधित इनवॉइस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

अदालत ने APTEL को इस मामले में तीन महीने के भीतर अंतिम आदेश पारित करने के लिए कहा है।

इससे पहले केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग यानी CERC ने कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों को अडानी पावर द्वारा दावा की गई पूरी रकम का भुगतान करने का निर्देश दिया था। आयोग के निर्देश के अनुसार भुगतान 45 दिनों के भीतर किया जाना था।

मामले में सिर्फ मूल रकम ही नहीं, बल्कि भुगतान में हुई देरी से जुड़ी लागत और सरचार्ज का मुद्दा भी शामिल है। यही वजह है कि यह विवाद अडानी पावर और कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या है ₹1,005 करोड़ का पूरा मामला?

दरअसल, अडानी पावर और कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों के बीच बिजली खरीद से जुड़े भुगतान को लेकर विवाद काफी समय से चल रहा है।

CERC ने वर्ष 2023 में कर्नाटक की DISCOMs को उस अंतर की रकम पर कैरिंग कॉस्ट और लेट पेमेंट सरचार्ज का भुगतान करने का निर्देश दिया था। आयोग के मुताबिक यह भुगतान निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाना चाहिए था।

भुगतान को छह किस्तों में करने की व्यवस्था की गई थी। हालांकि, बाद में भुगतान और बकाया रकम को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया।

अडानी पावर का आरोप था कि कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियां आयोग के निर्देशों के मुताबिक भुगतान नहीं कर रही थीं। इसके बाद कंपनी ने मामले को CERC के सामने उठाया।

मामला आगे बढ़ते हुए अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी तक पहुंचा और इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई।

कर्नाटक की DISCOMs ने क्या दलील दी?

कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों की तरफ से पावर कंपनी ऑफ कर्नाटक के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी।

DISCOMs का कहना था कि उनके ऊपर अडानी पावर की बताई गई रकम का कोई बकाया नहीं है। उनका तर्क था कि संबंधित दावे और भुगतान की गणना को लेकर विवाद है।

कर्नाटक की DISCOMs ने यह भी दावा किया कि APTEL ने मामले के गुण-दोष पर पूरी तरह विचार किए बिना CERC के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

याचिका में बिजली वितरण कंपनियों ने यह दलील दी कि अगर उन्हें भुगतान करने का निर्देश दिया जाता है तो उनके पास पूरी रकम चुकाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल APTEL के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है और ट्रिब्यूनल को मामले में जल्द अंतिम फैसला देने का निर्देश दिया है।

अडानी पावर के लिए क्यों अहम है यह मामला?

अडानी पावर देश की बड़ी निजी बिजली उत्पादन कंपनियों में शामिल है। बिजली उत्पादन कंपनियों के लिए पावर सप्लाई के बदले समय पर भुगतान बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इससे कंपनी के कैश फ्लो और वर्किंग कैपिटल पर सीधा असर पड़ता है।

यदि कंपनी को लंबे समय से अटकी रकम का भुगतान मिलता है, तो इससे उसके नकदी प्रवाह को सहारा मिल सकता है। इसके अलावा, भुगतान में देरी के कारण मिलने वाली कैरिंग कॉस्ट और लेट पेमेंट सरचार्ज भी कंपनी के लिए वित्तीय रूप से महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट के ताजा घटनाक्रम को निवेशकों ने सकारात्मक संकेत के तौर पर लिया और अडानी पावर के शेयर में खरीदारी देखने को मिली।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मतलब यह नहीं है कि ₹1,005 करोड़ की पूरी रकम तुरंत अडानी पावर के खाते में आ गई है। मामले में APTEL को अंतिम आदेश देना है। इसलिए वास्तविक भुगतान और उसकी समयसीमा आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

शेयर बाजार की गिरावट के बीच अडानी पावर मजबूत

मंगलवार को व्यापक बाजार में कमजोरी देखने को मिली। सेंसेक्स लगातार तीसरे दिन दबाव में रहा, जबकि निफ्टी लगातार छठे सत्र में गिरावट की ओर बढ़ता दिखा।

ऐसे माहौल में अडानी पावर के शेयर का करीब 2 फीसदी तक चढ़ना निवेशकों का ध्यान खींच रहा है। इसका एक कारण कर्नाटक से जुड़े भुगतान विवाद में कंपनी के पक्ष में आया सुप्रीम कोर्ट का घटनाक्रम है।

हालांकि, किसी एक कारोबारी सत्र की तेजी को शेयर के लंबे समय के प्रदर्शन का संकेत नहीं माना जा सकता। अडानी पावर के शेयर पर आगे कंपनी के नतीजे, बिजली की मांग, कोयले की लागत, बिजली कीमतों, नियामकीय फैसलों और व्यापक बाजार की दिशा जैसे कई कारकों का असर पड़ सकता है।

₹254 के हाई से अभी नीचे है शेयर

अडानी पावर के शेयर का 52-week high ₹254.15 है, जबकि मंगलवार के शुरुआती कारोबार में यह करीब ₹207.75 तक पहुंचा। इसका मतलब है कि शेयर अभी अपने 52-week high से नीचे है।

दूसरी तरफ, 52-week low ₹116.67 रहा है। इस लिहाज से शेयर ने अपने एक साल के निचले स्तर से काफी रिकवरी की है।

निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि शेयर का मौजूदा भाव केवल एक कानूनी घटनाक्रम के आधार पर नहीं चलता। कंपनी के कारोबार और भविष्य की कमाई की संभावनाएं भी शेयर की दिशा तय करती हैं।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

अडानी पावर के शेयर में मंगलवार को आई तेजी को लेकर निवेशकों को सिर्फ एक खबर के आधार पर खरीदारी का फैसला नहीं करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का घटनाक्रम कंपनी के लिए सकारात्मक जरूर है, लेकिन ₹1,005 करोड़ के भुगतान का अंतिम परिणाम APTEL के फैसले और आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति, कर्ज, कैश फ्लो, बिजली उत्पादन क्षमता, बिजली बिक्री और आगामी तिमाही के नतीजों पर भी नजर रखनी चाहिए।

खासकर ऐसे शेयरों में जहां उतार-चढ़ाव ज्यादा हो सकता है, निवेश करने से पहले अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखना जरूरी है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, शेयर बाजार में कमजोरी के बावजूद Adani Power Share Price में मंगलवार को तेजी देखने को मिली। कंपनी के शेयर ने शुरुआती कारोबार में करीब 2 फीसदी की बढ़त हासिल की और ₹207.75 तक पहुंच गया।

शेयर में तेजी का प्रमुख कारण कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों के साथ चल रहे ₹1,005 करोड़ के भुगतान विवाद में सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश है। अदालत ने DISCOMs की याचिका खारिज करते हुए APTEL के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया और ट्रिब्यूनल को तीन महीने के भीतर अंतिम फैसला सुनाने को कहा है।

फिलहाल निवेशकों की नजर APTEL के अंतिम आदेश और उसके बाद होने वाले भुगतान पर रहेगी। यदि कंपनी के पक्ष में अंतिम फैसला आता है और भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो यह अडानी पावर के लिए सकारात्मक वित्तीय घटनाक्रम साबित हो सकता है। हालांकि, तब तक इसे संभावित भुगतान का मामला ही माना जाना चाहिए, न कि कंपनी को मिल चुकी रकम।

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By Namam Sharma Senior Editor – Newsjagran
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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