Adani Power Share Price: शेयर बाजार में मंगलवार को एक बार फिर दबाव देखने को मिला। सेंसेक्स लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है, जबकि निफ्टी में लगातार छठे दिन कमजोरी बनी हुई है। हालांकि, बाजार की इस गिरावट के बीच अडानी पावर के शेयरों में तेजी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में कंपनी का शेयर करीब 2 फीसदी तक चढ़ गया। शेयर में आई इस तेजी की बड़ी वजह कर्नाटक से जुड़े करीब ₹1,005 करोड़ के भुगतान विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला है।
2 फीसदी तक चढ़ा Adani Power का शेयर
मंगलवार के शुरुआती कारोबार में अडानी पावर के शेयर में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। पिछले कारोबारी सत्र में कंपनी का शेयर बीएसई पर ₹203.90 के भाव पर बंद हुआ था। मंगलवार को यह मामूली गिरावट के साथ ₹203.85 पर खुला, लेकिन इसके बाद शेयर में तेजी आ गई।
कारोबार के शुरुआती दौर में अडानी पावर का शेयर करीब 2 फीसदी उछलकर ₹207.75 तक पहुंच गया। शेयर में इस तेजी के साथ कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन भी करीब ₹4 लाख करोड़ के स्तर के आसपास पहुंच गया।
अडानी पावर के शेयर का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर ₹254.15 और 52 हफ्ते का निचला स्तर ₹116.67 है। यानी शेयर अपने 52-week high से अभी नीचे कारोबार कर रहा है, लेकिन पिछले एक साल के निचले स्तर की तुलना में इसमें काफी सुधार देखने को मिला है।
आखिर क्यों आई अडानी पावर के शेयर में तेजी?
अडानी पावर के शेयर में तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) से जुड़े ₹1,005 करोड़ के भुगतान का मामला है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें अडानी पावर की ओर से सरकारी पोर्टल पर अपलोड किए गए करीब ₹1,005 करोड़ के इनवॉइस पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
यह मामला बिजली खरीद से जुड़े भुगतान और बकाया रकम को लेकर है। सरकारी पोर्टल पर बिजली खरीद के लेनदेन को ट्रैक किया जाता है और संबंधित भुगतान की स्थिति पर नजर रखी जाती है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अडानी पावर के लिए सकारात्मक माना जा रहा है, क्योंकि इससे कंपनी के उस दावे को मजबूती मिलती है जिसमें उसने कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों से बकाया रकम के भुगतान की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (APTEL) के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इससे पहले APTEL ने भी संबंधित इनवॉइस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
अदालत ने APTEL को इस मामले में तीन महीने के भीतर अंतिम आदेश पारित करने के लिए कहा है।
इससे पहले केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग यानी CERC ने कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों को अडानी पावर द्वारा दावा की गई पूरी रकम का भुगतान करने का निर्देश दिया था। आयोग के निर्देश के अनुसार भुगतान 45 दिनों के भीतर किया जाना था।
मामले में सिर्फ मूल रकम ही नहीं, बल्कि भुगतान में हुई देरी से जुड़ी लागत और सरचार्ज का मुद्दा भी शामिल है। यही वजह है कि यह विवाद अडानी पावर और कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या है ₹1,005 करोड़ का पूरा मामला?
दरअसल, अडानी पावर और कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों के बीच बिजली खरीद से जुड़े भुगतान को लेकर विवाद काफी समय से चल रहा है।
CERC ने वर्ष 2023 में कर्नाटक की DISCOMs को उस अंतर की रकम पर कैरिंग कॉस्ट और लेट पेमेंट सरचार्ज का भुगतान करने का निर्देश दिया था। आयोग के मुताबिक यह भुगतान निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाना चाहिए था।
भुगतान को छह किस्तों में करने की व्यवस्था की गई थी। हालांकि, बाद में भुगतान और बकाया रकम को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया।
अडानी पावर का आरोप था कि कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियां आयोग के निर्देशों के मुताबिक भुगतान नहीं कर रही थीं। इसके बाद कंपनी ने मामले को CERC के सामने उठाया।
मामला आगे बढ़ते हुए अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी तक पहुंचा और इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई।
कर्नाटक की DISCOMs ने क्या दलील दी?
कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों की तरफ से पावर कंपनी ऑफ कर्नाटक के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी।
DISCOMs का कहना था कि उनके ऊपर अडानी पावर की बताई गई रकम का कोई बकाया नहीं है। उनका तर्क था कि संबंधित दावे और भुगतान की गणना को लेकर विवाद है।
कर्नाटक की DISCOMs ने यह भी दावा किया कि APTEL ने मामले के गुण-दोष पर पूरी तरह विचार किए बिना CERC के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
याचिका में बिजली वितरण कंपनियों ने यह दलील दी कि अगर उन्हें भुगतान करने का निर्देश दिया जाता है तो उनके पास पूरी रकम चुकाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल APTEL के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है और ट्रिब्यूनल को मामले में जल्द अंतिम फैसला देने का निर्देश दिया है।
अडानी पावर के लिए क्यों अहम है यह मामला?
अडानी पावर देश की बड़ी निजी बिजली उत्पादन कंपनियों में शामिल है। बिजली उत्पादन कंपनियों के लिए पावर सप्लाई के बदले समय पर भुगतान बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इससे कंपनी के कैश फ्लो और वर्किंग कैपिटल पर सीधा असर पड़ता है।
यदि कंपनी को लंबे समय से अटकी रकम का भुगतान मिलता है, तो इससे उसके नकदी प्रवाह को सहारा मिल सकता है। इसके अलावा, भुगतान में देरी के कारण मिलने वाली कैरिंग कॉस्ट और लेट पेमेंट सरचार्ज भी कंपनी के लिए वित्तीय रूप से महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट के ताजा घटनाक्रम को निवेशकों ने सकारात्मक संकेत के तौर पर लिया और अडानी पावर के शेयर में खरीदारी देखने को मिली।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मतलब यह नहीं है कि ₹1,005 करोड़ की पूरी रकम तुरंत अडानी पावर के खाते में आ गई है। मामले में APTEL को अंतिम आदेश देना है। इसलिए वास्तविक भुगतान और उसकी समयसीमा आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
शेयर बाजार की गिरावट के बीच अडानी पावर मजबूत
मंगलवार को व्यापक बाजार में कमजोरी देखने को मिली। सेंसेक्स लगातार तीसरे दिन दबाव में रहा, जबकि निफ्टी लगातार छठे सत्र में गिरावट की ओर बढ़ता दिखा।
ऐसे माहौल में अडानी पावर के शेयर का करीब 2 फीसदी तक चढ़ना निवेशकों का ध्यान खींच रहा है। इसका एक कारण कर्नाटक से जुड़े भुगतान विवाद में कंपनी के पक्ष में आया सुप्रीम कोर्ट का घटनाक्रम है।
हालांकि, किसी एक कारोबारी सत्र की तेजी को शेयर के लंबे समय के प्रदर्शन का संकेत नहीं माना जा सकता। अडानी पावर के शेयर पर आगे कंपनी के नतीजे, बिजली की मांग, कोयले की लागत, बिजली कीमतों, नियामकीय फैसलों और व्यापक बाजार की दिशा जैसे कई कारकों का असर पड़ सकता है।
₹254 के हाई से अभी नीचे है शेयर
अडानी पावर के शेयर का 52-week high ₹254.15 है, जबकि मंगलवार के शुरुआती कारोबार में यह करीब ₹207.75 तक पहुंचा। इसका मतलब है कि शेयर अभी अपने 52-week high से नीचे है।
दूसरी तरफ, 52-week low ₹116.67 रहा है। इस लिहाज से शेयर ने अपने एक साल के निचले स्तर से काफी रिकवरी की है।
निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि शेयर का मौजूदा भाव केवल एक कानूनी घटनाक्रम के आधार पर नहीं चलता। कंपनी के कारोबार और भविष्य की कमाई की संभावनाएं भी शेयर की दिशा तय करती हैं।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
अडानी पावर के शेयर में मंगलवार को आई तेजी को लेकर निवेशकों को सिर्फ एक खबर के आधार पर खरीदारी का फैसला नहीं करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का घटनाक्रम कंपनी के लिए सकारात्मक जरूर है, लेकिन ₹1,005 करोड़ के भुगतान का अंतिम परिणाम APTEL के फैसले और आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति, कर्ज, कैश फ्लो, बिजली उत्पादन क्षमता, बिजली बिक्री और आगामी तिमाही के नतीजों पर भी नजर रखनी चाहिए।
खासकर ऐसे शेयरों में जहां उतार-चढ़ाव ज्यादा हो सकता है, निवेश करने से पहले अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखना जरूरी है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, शेयर बाजार में कमजोरी के बावजूद Adani Power Share Price में मंगलवार को तेजी देखने को मिली। कंपनी के शेयर ने शुरुआती कारोबार में करीब 2 फीसदी की बढ़त हासिल की और ₹207.75 तक पहुंच गया।
शेयर में तेजी का प्रमुख कारण कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों के साथ चल रहे ₹1,005 करोड़ के भुगतान विवाद में सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश है। अदालत ने DISCOMs की याचिका खारिज करते हुए APTEL के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया और ट्रिब्यूनल को तीन महीने के भीतर अंतिम फैसला सुनाने को कहा है।
फिलहाल निवेशकों की नजर APTEL के अंतिम आदेश और उसके बाद होने वाले भुगतान पर रहेगी। यदि कंपनी के पक्ष में अंतिम फैसला आता है और भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो यह अडानी पावर के लिए सकारात्मक वित्तीय घटनाक्रम साबित हो सकता है। हालांकि, तब तक इसे संभावित भुगतान का मामला ही माना जाना चाहिए, न कि कंपनी को मिल चुकी रकम।


