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    # UP के सरकारी इंजीनियर ने खड़ा किया था खरबों का JP साम्राज्य, फिर कर्ज ने किया बर्बाद; अब अदाणी के हाथों में कंपनी की कमान **JP Associates Story:** उत्तर प्रदेश के एक सरकारी इंजीनियर ने अपनी नौकरी छोड़कर कारोबार की दुनिया में कदम रखा और देखते ही देखते हजारों करोड़ रुपये का कारोबारी साम्राज्य खड़ा कर दिया। यह कहानी है जयप्रकाश गौड़ और जयप्रकाश एसोसिएट्स (JP Associates) की। यमुना एक्सप्रेसवे, बड़े बांध, सीमेंट प्लांट, बिजली परियोजनाएं और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने वाला यह समूह कभी देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबारियों में गिना जाता था। लेकिन जरूरत से ज्यादा कर्ज, आर्थिक मंदी और कारोबार में आई मुश्किलों ने इस साम्राज्य की नींव हिला दी। आखिरकार कंपनी दिवालिया प्रक्रिया में पहुंच गई और अब इसका अधिग्रहण अदाणी समूह ने कर लिया है। **बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली।** कारोबार की दुनिया में कई ऐसी कहानियां हैं, जहां एक छोटे से सफर की शुरुआत करने वाला व्यक्ति बड़ा कारोबारी साम्राज्य खड़ा कर देता है। लेकिन कभी-कभी यही साम्राज्य समय के साथ कर्ज और आर्थिक चुनौतियों के कारण ढह भी जाता है। जयप्रकाश एसोसिएट्स की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक समय उत्तर भारत में जेपी समूह का नाम बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए जाना जाता था। कंपनी ने सड़क निर्माण से लेकर बिजली उत्पादन, सीमेंट, होटल और रियल एस्टेट तक कई क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बनाई। ग्रेटर नोएडा से आगरा को जोड़ने वाला यमुना एक्सप्रेसवे भी इसी समूह की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा। जेपी समूह की पहचान केवल बड़े प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं थी। लाखों निवेशकों और कर्मचारियों का भी इस कंपनी से जुड़ाव था। लेकिन लगातार बढ़ते कर्ज और कारोबार में आई गिरावट ने कंपनी को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया, जहां से वापसी मुश्किल हो गई। अब अदाणी समूह ने दिवालिया समाधान प्रक्रिया के जरिए जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण का रास्ता साफ कर लिया है। आइए जानते हैं कि आखिर कैसे एक सरकारी इंजीनियर ने यह कारोबारी साम्राज्य खड़ा किया और फिर यह आर्थिक संकट में कैसे फंस गया। ## सरकारी इंजीनियर से कारोबारी बनने तक का सफर जयप्रकाश गौड़ का जन्म वर्ष 1931 में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में हुआ था। उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा हासिल किया और इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के तौर पर नौकरी शुरू की। सरकारी सेवा के दौरान उन्हें निर्माण और इंजीनियरिंग से जुड़ी परियोजनाओं को समझने का मौका मिला। हालांकि, उनके मन में खुद का कारोबार शुरू करने की इच्छा थी। करीब सात साल तक सरकारी नौकरी करने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और निर्माण कार्यों की ठेकेदारी शुरू कर दी। शुरुआत में उनके पास कारोबार के लिए बहुत ज्यादा पूंजी नहीं थी। उन्होंने अपनी करीब 10 हजार रुपये की बचत से छोटे-मोटे निर्माण और सड़क निर्माण के ठेके लेने शुरू किए। धीरे-धीरे अनुभव और काम के आधार पर उन्हें बड़ी परियोजनाएं मिलने लगीं। वर्ष 1979 में उन्होंने जयप्रकाश एसोसिएट्स की स्थापना की। शुरुआत में कंपनी का मुख्य कारोबार निर्माण और इंजीनियरिंग से जुड़ा था। समय के साथ कंपनी ने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अपनी जगह बनाई और जेपी समूह का विस्तार होता चला गया। ## बांध से लेकर बिजली और सीमेंट तक फैला कारोबार जेपी समूह ने निर्माण क्षेत्र में अपनी पहचान मजबूत करने के बाद जलविद्युत परियोजनाओं की तरफ कदम बढ़ाया। टिहरी बांध और विष्णुप्रयाग जलविद्युत परियोजना जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स से कंपनी की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई। इसके बाद समूह ने सीमेंट, बिजली उत्पादन, होटल और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में भी कारोबार शुरू किया। कंपनी का उद्देश्य केवल निर्माण ठेके लेने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के विकास और संचालन तक पहुंच गया। इस विस्तार ने जयप्रकाश एसोसिएट्स को देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर समूहों में शामिल कर दिया। कंपनी के पास अलग-अलग क्षेत्रों में कारोबार था और निवेशकों के बीच भी इसकी अच्छी पहचान बन गई थी। ## यमुना एक्सप्रेसवे ने दिलाई देशभर में पहचान जेपी समूह के इतिहास में यमुना एक्सप्रेसवे परियोजना को एक बड़ा पड़ाव माना जाता है। वर्ष 2003 में ग्रेटर नोएडा से आगरा के बीच एक्सप्रेसवे बनाने की परियोजना जेपी समूह को मिली। करीब 165 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का निर्माण समूह की कंपनी जेपी इंफ्राटेक ने किया। इस परियोजना के तहत सड़क निर्माण के साथ-साथ एक्सप्रेसवे के आसपास रियल एस्टेट विकास के अधिकार भी मिले। इससे कंपनी को इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रॉपर्टी कारोबार दोनों में विस्तार का अवसर मिला। वर्ष 2012 में यमुना एक्सप्रेसवे को आम लोगों के लिए खोल दिया गया। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच सड़क संपर्क बेहतर हुआ। इस परियोजना ने जेपी समूह को देशभर में पहचान दिलाई। इसी दौरान कंपनी ने ग्रेटर नोएडा में बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट का निर्माण भी किया। इस रेसिंग सर्किट पर वर्ष 2011 से 2013 तक फॉर्मूला-1 इंडियन ग्रां प्री का आयोजन हुआ। यह परियोजना भारत में मोटरस्पोर्ट्स के लिहाज से काफी चर्चित रही। ## 2008 की मंदी के बाद बिगड़ने लगे हालात तेजी से विस्तार कर रहे जेपी समूह के लिए वर्ष 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी बड़ा झटका साबित हुई। मंदी के बाद रियल एस्टेट बाजार में सुस्ती आने लगी। मकानों की बिक्री प्रभावित हुई और निर्माण परियोजनाओं से मिलने वाली रकम में देरी होने लगी। दूसरी तरफ बिजली और सीमेंट कारोबार में भी कंपनी को उम्मीद के मुताबिक कमाई नहीं हो रही थी। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश की जरूरत थी, जबकि कारोबार से पर्याप्त नकदी नहीं आ रही थी। बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट जैसी बड़ी परियोजनाओं पर हुआ निवेश भी कंपनी के वित्तीय दबाव को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल रहा। कंपनी ने अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए बड़ी रकम उधार ली थी, लेकिन आमदनी और नकदी का प्रवाह कर्ज चुकाने की रफ्तार के अनुरूप नहीं रहा। कर्ज का बोझ बढ़ने के साथ कंपनी को अपनी कई संपत्तियां और कारोबारी हिस्सेदारियां बेचनी पड़ीं। इसके बावजूद वित्तीय स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। धीरे-धीरे जेपी समूह का संकट गहराता चला गया। ## घर खरीदारों से लेकर बैंकों तक, हर कोई हुआ परेशान जेपी समूह का आर्थिक संकट केवल कंपनी और बैंकों तक सीमित नहीं रहा। इसका असर उन हजारों लोगों पर भी पड़ा, जिन्होंने कंपनी के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में अपने घर बुक किए थे। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में जेपी विशटाउन जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में बड़ी संख्या में घर खरीदारों का पैसा फंस गया। कई लोगों ने अपनी जीवनभर की बचत लगाकर घर खरीदे थे, लेकिन उन्हें तय समय पर फ्लैट नहीं मिल पाए। इस स्थिति ने जेपी समूह की मुश्किलें और बढ़ा दीं। एक तरफ बैंक और वित्तीय संस्थान अपना कर्ज वापस मांग रहे थे, वहीं दूसरी तरफ घर खरीदार अपने घरों का इंतजार कर रहे थे। ## 2017 में शुरू हुई दिवालिया प्रक्रिया जेपी समूह की मुश्किलें सबसे पहले उसकी सहायक कंपनी जेपी इंफ्राटेक के मामले में सामने आईं। अगस्त 2017 में कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू की गई। बाद में सुरक्षा समूह ने समाधान प्रक्रिया के तहत जेपी इंफ्राटेक के अधिग्रहण की जिम्मेदारी संभाली। हालांकि, इससे पूरे जेपी समूह की वित्तीय परेशानियां खत्म नहीं हुईं। समूह की प्रमुख कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड भी भारी कर्ज के कारण संकट में फंस गई। 3 जून 2024 को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की इलाहाबाद पीठ ने जयप्रकाश एसोसिएट्स के खिलाफ कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया। इस मामले में वित्तीय लेनदारों ने करीब 57,185 करोड़ रुपये के बकाये का दावा किया था। इसके बाद कंपनी के कारोबार और संपत्तियों के समाधान के लिए बोली प्रक्रिया शुरू हुई। कई बड़े कारोबारी समूहों ने कंपनी को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई। ## वेदांता ने लगाई बड़ी बोली, लेकिन अदाणी ने मारी बाजी जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण की प्रक्रिया में वेदांता समूह और अदाणी समूह समेत कई कंपनियों ने हिस्सा लिया। सितंबर 2025 में वेदांता समूह की 17,000 करोड़ रुपये से अधिक की बोली की खबर सामने आई थी। इससे माना जा रहा था कि कंपनी का नियंत्रण अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता समूह के पास जा सकता है। हालांकि, बाद में समाधान प्रक्रिया में स्थिति बदल गई। नवंबर 2025 में वित्तीय लेनदारों ने अदाणी एंटरप्राइजेज की 14,535 करोड़ रुपये की समाधान योजना को मंजूरी दे दी। इस प्रस्ताव को कर्जदाताओं के करीब 89 फीसदी वोट मिले। इसके बाद 17 मार्च 2026 को NCLT की इलाहाबाद पीठ ने अदाणी एंटरप्राइजेज की समाधान योजना को मंजूरी दे दी। इस फैसले के साथ जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया। हालांकि, वेदांता समूह ने इस फैसले को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में चुनौती दी थी। मई 2026 में NCLAT ने वेदांता की अपील खारिज कर दी। इससे अदाणी समूह के अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ने का रास्ता मिला। ## अब अदाणी समूह के नियंत्रण में जेपी की संपत्तियां जयप्रकाश एसोसिएट्स के समाधान के बाद समूह की कई संपत्तियां और कारोबार अदाणी समूह की रणनीति का हिस्सा बन गए हैं। अदाणी समूह की अलग-अलग कंपनियां जेपी समूह की विभिन्न कारोबारी इकाइयों और परिसंपत्तियों में हिस्सेदारी हासिल कर रही हैं। इसी क्रम में अदाणी पावर ने जेपी पावर से जुड़ी हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया। वहीं, जेपी समूह के कुछ सीमेंट प्लांटों को अदाणी समूह ने डालमिया भारत को बेचने का फैसला किया। इस तरह जिस जेपी समूह ने कभी उत्तर भारत में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई थी, उसका कारोबारी स्वरूप अब पूरी तरह बदल चुका है। जयप्रकाश गौड़ की कहानी कारोबार की दुनिया में बड़े सपने, तेजी से विस्तार और वित्तीय अनुशासन के महत्व को समझाती है। महज 10 हजार रुपये की बचत से शुरू हुआ सफर देश के बड़े कारोबारी साम्राज्य तक पहुंचा, लेकिन भारी कर्ज और नकदी की कमी ने अंततः इस साम्राज्य को दिवालिया प्रक्रिया तक पहुंचा दिया। **Source:** उपलब्ध कारोबारी रिपोर्टों और दिवालिया समाधान प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी पर आधारित। jp-associates-jayprakash-gaur-rise-fall-adani-takeover-story
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Reading: UPI पर MDR का रास्ता खुला, कारोबारियों के लिए भी 2040 तक बदले नियम; नए टैक्स कानून में क्या-क्या बदला?
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UPI पर MDR का रास्ता खुला, कारोबारियों के लिए भी 2040 तक बदले नियम; नए टैक्स कानून में क्या-क्या बदला?

Namam Sharma
Last updated: 2026/08/18 at 11:24 पूर्वाह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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11 Min Read
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Taxation & Other Laws Amendment Act 2026: केंद्र सरकार ने टैक्स और बिजनेस से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव करते हुए Taxation & Other Laws (Amendment) Act, 2026 को मंजूरी दे दी है। लोकसभा में 4 अगस्त को पेश किए गए इस बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी 17 अगस्त 2026 को मिल गई। इसके साथ ही यह कानून बन गया है।

Contents
नए टैक्स कानून में क्या-क्या बदला?1. UPI पर MDR का रास्ता खुला, लेकिन अभी पेमेंट फ्रीकारोबारियों पर क्या असर होगा?2. इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को 10 साल तक टैक्स इंसेंटिवइलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स से जुड़ी विदेशी कंपनियों को भी राहत3. डायमंड कारोबारियों को बड़ी राहत, 2040-41 तक टैक्स छूट4. विदेशी निवेशकों के लिए नियम होंगे आसानआम लोगों के लिए इसका क्या मतलब है?कारोबारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कानून?UPI पर अभी कोई चार्ज नहीं, यह बात समझना जरूरीनिष्कर्ष

इस नए कानून में Payment and Settlement Systems Act, Income Tax Act और Finance Act से जुड़े कई प्रावधानों में बदलाव किया गया है। इसका असर खास तौर पर UPI पेमेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डायमंड कारोबार और विदेशी निवेश से जुड़े क्षेत्रों पर पड़ने वाला है।

सबसे ज्यादा चर्चा UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को लेकर है। नए कानून ने UPI पर MDR लगाने का कानूनी रास्ता जरूर खोल दिया है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि अब UPI पेमेंट पर तत्काल कोई चार्ज लगने जा रहा है। सरकार ने फिलहाल UPI को मुफ्त ही रखा है।

नए टैक्स कानून में क्या-क्या बदला?

नए कानून में कई ऐसे प्रावधान हैं जिनका असर आम लोगों के साथ-साथ कारोबारियों और विदेशी कंपनियों पर भी पड़ सकता है। आइए एक-एक करके समझते हैं कि इस कानून में क्या बदलाव किए गए हैं।

1. UPI पर MDR का रास्ता खुला, लेकिन अभी पेमेंट फ्री

UPI को लेकर सबसे बड़ा बदलाव Merchant Discount Rate (MDR) से जुड़ा है। लंबे समय से यह चर्चा चल रही थी कि सरकार UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने की अनुमति दे सकती है।

नए कानून में Payment and Settlement Systems Act में संशोधन किया गया है। इससे भविष्य में UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने का कानूनी रास्ता खुल गया है।

हालांकि, यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी UPI पर कोई MDR लागू नहीं किया गया है और न ही इसकी कोई दर तय की गई है।

यानी आम ग्राहक जिस तरह अभी UPI के जरिए दुकानदार, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या किसी अन्य कारोबारी को भुगतान कर रहा है, फिलहाल उसके लिए व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं हुआ है। UPI पेमेंट अभी भी मुफ्त है।

सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि अगर भविष्य में MDR लागू करने का फैसला लिया जाता है तो आम लोगों के हितों को ध्यान में रखा जाएगा। इसलिए नए कानून को UPI पर तत्काल चार्ज लगाने वाला कानून समझना सही नहीं होगा।

कारोबारियों पर क्या असर होगा?

MDR का मुद्दा मुख्य रूप से व्यापारियों और पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़ा है। यदि भविष्य में MDR लागू होता है तो इसके तहत डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले कारोबारियों पर शुल्क का असर पड़ सकता है।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि भविष्य में MDR लागू किया जाएगा या नहीं, और यदि किया गया तो इसकी दर कितनी होगी। इसलिए फिलहाल कारोबारियों के लिए UPI पेमेंट की मौजूदा व्यवस्था में कोई तत्काल बदलाव नहीं है।

2. इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को 10 साल तक टैक्स इंसेंटिव

नए कानून में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए भी बड़ा प्रावधान किया गया है। सरकार ने देश में इलेक्ट्रॉनिक सामानों के उत्पादन को बढ़ावा देने और Make in India को मजबूत करने के लिए टैक्स इंसेंटिव की अवधि बढ़ा दी है।

पहले यह प्रोत्साहन FY2030-31 तक उपलब्ध था। अब इसकी अवधि बढ़ाकर FY2040-41 तक कर दी गई है।

इसका मतलब है कि पात्र इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कारोबारियों को लंबे समय तक टैक्स से जुड़े प्रोत्साहनों का लाभ मिल सकेगा। सरकार का उद्देश्य देश में उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स की सप्लाई चेन को भारत में मजबूत करना है।

इस दायरे में मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, टैबलेट, सर्वर, वियरेबल्स और हियरएबल्स जैसे कई इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद शामिल हैं।

भारत पिछले कुछ वर्षों में मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ा है। ऐसे में लंबी अवधि के टैक्स इंसेंटिव से कंपनियों को भारत में उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नई निवेश योजनाएं बनाने में मदद मिल सकती है।

इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स से जुड़ी विदेशी कंपनियों को भी राहत

नए कानून में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स की सप्लाई चेन से जुड़ी पात्र विदेशी कंपनियों के लिए भी टैक्स राहत का प्रावधान किया गया है।

इन कंपनियों को कस्टम-बॉन्डेड वेयरहाउसिंग से जुड़े कुछ टैक्स लाभ मिलेंगे। इसका उद्देश्य भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स की सप्लाई चेन को मजबूत करना और वैश्विक कंपनियों के लिए भारत को अधिक आकर्षक मैन्युफैक्चरिंग बेस बनाना है।

3. डायमंड कारोबारियों को बड़ी राहत, 2040-41 तक टैक्स छूट

नए टैक्स कानून में डायमंड सेक्टर के लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। खास तौर पर भारत में रफ डायमंड के कारोबार को बढ़ावा देने के लिए योग्य विदेशी कंपनियों को टैक्स राहत देने की व्यवस्था की गई है।

1 अक्टूबर 2026 से नोटिफाइड स्पेशल जोन्स में काम करने वाली पात्र विदेशी कंपनियों को रफ डायमंड की बिक्री से होने वाली आय पर टैक्स छूट दी जाएगी।

यह लाभ FY2040-41 तक जारी रहने का प्रावधान है।

भारत का डायमंड कटिंग और पॉलिशिंग उद्योग दुनियाभर में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। खास तौर पर सूरत डायमंड प्रोसेसिंग और ट्रेडिंग का बड़ा केंद्र है। ऐसे में रफ डायमंड कारोबार से जुड़ी विदेशी कंपनियों को टैक्स राहत मिलने से भारत में इस कारोबार को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

सरकार का उद्देश्य भारत को वैश्विक डायमंड ट्रेड के लिए और मजबूत केंद्र बनाना है। लंबे समय की टैक्स छूट विदेशी कंपनियों को भारत में कारोबार स्थापित करने या मौजूदा गतिविधियों का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है।

4. विदेशी निवेशकों के लिए नियम होंगे आसान

नए कानून में विदेशी निवेश से जुड़े कुछ प्रावधानों को भी सरल बनाया गया है। इसका उद्देश्य भारत में विदेशी पूंजी और निवेश को आकर्षित करना है।

योग्य फंड्स के लिए इंडियन पार्टिसिपेशन की 5 फीसदी सीमा से जुड़ी व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही नए फंड्स के लिए ₹25 करोड़ तक की विशेष राहत का प्रावधान भी किया गया है।

सरकार की कोशिश है कि विदेशी फंड्स के लिए भारत में निवेश और कारोबार से जुड़े टैक्स नियम अधिक स्पष्ट और आसान हों।

इसके अलावा Foreign Institutional Investors (FIIs) और Bank for International Settlements (BIS) से जुड़े ब्याज और कैपिटल गेन्स पर भी टैक्स से संबंधित राहत के प्रावधान किए गए हैं।

आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब है?

नए कानून के ज्यादातर प्रावधान सीधे आम उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित नहीं करते। UPI को लेकर जरूर बड़ी चर्चा है, लेकिन फिलहाल आम लोगों के लिए इसमें कोई तत्काल बदलाव नहीं हुआ है।

UPI पेमेंट अभी भी मुफ्त है। केवल कानून में भविष्य में MDR लागू किए जाने की संभावना के लिए कानूनी ढांचा तैयार किया गया है।

वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में लंबी अवधि के टैक्स इंसेंटिव का अप्रत्यक्ष फायदा उपभोक्ताओं को मिल सकता है। यदि भारत में उत्पादन और कंपोनेंट सप्लाई चेन बढ़ती है तो लंबे समय में इलेक्ट्रॉनिक सामानों की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और उपलब्धता मजबूत हो सकती है।

कारोबारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कानून?

कारोबारियों के नजरिए से देखें तो यह कानून कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है। UPI के मामले में भविष्य में MDR से जुड़े बदलावों की संभावना खुली है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स और डायमंड सेक्टर को लंबे समय के लिए टैक्स प्रोत्साहन दिया गया है।

इससे कंपनियों को निवेश और विस्तार की लंबी अवधि की योजना बनाने में मदद मिल सकती है। खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में 2040-41 तक इंसेंटिव जारी रहने से भारत में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए कंपनियों को ज्यादा स्पष्टता मिलती है।

UPI पर अभी कोई चार्ज नहीं, यह बात समझना जरूरी

Taxation & Other Laws Amendment Act, 2026 को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम UPI MDR को लेकर हो सकता है। इसलिए इसे साफ तौर पर समझना जरूरी है।

नए कानून ने MDR लगाने का रास्ता खोला है, लेकिन MDR लगाया नहीं है।

न तो अभी कोई MDR दर घोषित हुई है और न ही आम लोगों से UPI भुगतान के लिए कोई नया शुल्क लिया जा रहा है। इसलिए UPI यूजर्स के लिए फिलहाल पहले जैसी ही व्यवस्था जारी है।

भविष्य में यदि सरकार MDR लागू करने का फैसला करती है तो उसकी दर, भुगतान का तरीका और इसका बोझ किस पर पड़ेगा, इन सबकी जानकारी उस समय सामने आएगी।

निष्कर्ष

Taxation & Other Laws (Amendment) Act, 2026 भारत के टैक्स और बिजनेस नियमों में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। इस कानून के जरिए सरकार ने एक तरफ UPI पर MDR लागू करने के लिए कानूनी ढांचा तैयार किया है, वहीं दूसरी तरफ फिलहाल डिजिटल भुगतान को मुफ्त रखा है।

इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए टैक्स इंसेंटिव को FY2040-41 तक बढ़ाना, रफ डायमंड कारोबार से जुड़ी पात्र विदेशी कंपनियों को टैक्स राहत देना और विदेशी निवेशकों के लिए नियमों को आसान बनाना सरकार की व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा है।

आम UPI यूजर के लिए फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि UPI पेमेंट पर अभी कोई नया चार्ज नहीं लगा है। वहीं कारोबारियों और कंपनियों के लिए यह कानून आने वाले वर्षों में निवेश, टैक्स प्लानिंग और कारोबार के विस्तार को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है।

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By Namam Sharma Senior Editor – Newsjagran
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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