Noel Tata RBI Meeting: टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग को लेकर लंबे समय से चल रही अनिश्चितता अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकती है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा इस महीने के अंत से पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात कर सकते हैं। इस बैठक में टाटा संस को अनलिस्टेड कंपनी बनाए रखने और लिस्टिंग से जुड़े नियामकीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
यह मुलाकात ऐसे समय में अहम मानी जा रही है, जब टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन फरवरी 2027 में अपने पद से हटने का ऐलान कर चुके हैं। ऐसे में टाटा समूह के भविष्य के कॉर्पोरेट ढांचे और टाटा संस की स्थिति को लेकर नोएल टाटा की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है।
अब नोएल टाटा संभालेंगे RBI से बातचीत की कमान
अब तक टाटा संस के अधिकारी और बोर्ड के कुछ सदस्य RBI के साथ कंपनी की लिस्टिंग से जुड़े मुद्दों पर बातचीत कर रहे थे। लेकिन अब नोएल टाटा खुद बोर्ड सदस्य और बहुसंख्यक शेयरधारक के प्रतिनिधि के तौर पर केंद्रीय बैंक के अधिकारियों से बातचीत कर सकते हैं।
नोएल टाटा पहले ही इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं। उन्होंने मई 2025 में RBI को पत्र लिखकर टाटा संस को अनलिस्टेड बनाए रखने की इच्छा जाहिर की थी। अब माना जा रहा है कि वह पिछले कुछ वर्षों से चले आ रहे नियामकीय मुद्दे का स्थायी समाधान निकालने की कोशिश करेंगे।
क्यों जरूरी है टाटा संस की लिस्टिंग?
टाटा संस को सितंबर 2022 में RBI ने ‘Upper Layer NBFC’ के रूप में वर्गीकृत किया था। RBI के नियमों के तहत ऐसी कंपनी के लिए तय समयसीमा के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना जरूरी था। टाटा संस के मामले में यह समयसीमा सितंबर 2025 में पूरी होनी थी।
हालांकि, कंपनी ने लिस्टिंग की अनिवार्यता से बाहर निकलने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें कंपनी का कर्ज चुकाना और RBI को कुछ महत्वपूर्ण आश्वासन देना शामिल है।
टाटा संस ने उठाए ये बड़े कदम
कंपनी हुई कर्ज मुक्त: टाटा संस ने बैंकिंग सेक्टर से लिया गया अपना पूरा बाहरी कर्ज चुका दिया है। इससे कंपनी की वित्तीय स्थिति और नियामकीय स्थिति को लेकर उसका पक्ष मजबूत हुआ है।
RBI को दिया आश्वासन: कंपनी ने RBI को आश्वासन दिया है कि वह टाटा समूह की दूसरी कंपनियों को लोन देने के लिए नया कर्ज नहीं लेगी। इसके अलावा फीस लेकर कॉर्पोरेट गारंटी देने से भी दूरी बनाए रखने की बात कही गई है।
NBFC-CIC दर्जा खत्म करने की मांग: टाटा संस ने दिसंबर 2024 में RBI के पास आवेदन देकर अपना Core Investment Company यानी NBFC-CIC दर्जा रद्द करने की मांग की थी। यदि RBI इस आवेदन को मंजूरी देता है, तो कंपनी पर लागू अनिवार्य लिस्टिंग की शर्त खत्म होने का रास्ता साफ हो सकता है।
SP Group की हिस्सेदारी भी बन सकती है अहम मुद्दा
टाटा संस की लिस्टिंग का मामला सिर्फ टाटा समूह के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है। शापूरजी पालोनजी (SP) ग्रुप की टाटा संस में करीब 18 फीसदी हिस्सेदारी है। समूह पर भारी कर्ज होने के कारण टाटा संस में उसकी हिस्सेदारी से जुड़ा मुद्दा भी महत्वपूर्ण है।
31 मार्च 2026 तक SP Group पर करीब 60,000 करोड़ रुपये का कर्ज बताया गया था। ऐसे में टाटा संस के IPO या शेयर बायबैक जैसे विकल्प SP Group के लिए अपनी हिस्सेदारी से लिक्विडिटी हासिल करने का माध्यम बन सकते हैं।
यदि नोएल टाटा और RBI अधिकारियों के बीच होने वाली बैठक में यह मुद्दा उठता है, तो SP Group की हिस्सेदारी और उसके संभावित एग्जिट प्लान पर भी चर्चा हो सकती है।
RBI के सामने क्या है सबसे बड़ा सवाल?
टाटा संस को अनलिस्टेड रखने के लिए सिर्फ कंपनी की ओर से अनुरोध काफी नहीं होगा। RBI की चिंता टाटा समूह के भीतर इस फैसले को लेकर व्यापक सहमति और नियामकीय नियमों के पालन से जुड़ी हो सकती है।
अब नोएल टाटा की प्रस्तावित बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया चल रही है। एन चंद्रशेखरन फरवरी 2027 में चेयरमैन पद छोड़ने की घोषणा कर चुके हैं। ऐसे समय में टाटा संस की लिस्टिंग, उसकी होल्डिंग संरचना और भविष्य की नियामकीय स्थिति पर फैसला समूह के लिए लंबे समय तक असर डाल सकता है।
क्या टाटा संस की लिस्टिंग टल सकती है?
फिलहाल अंतिम फैसला RBI के रुख पर निर्भर करेगा। नोएल टाटा की बैठक का उद्देश्य टाटा संस को अनलिस्टेड बनाए रखने के लिए कंपनी की स्थिति और उठाए गए कदमों को केंद्रीय बैंक के सामने रखना माना जा रहा है।
अगर RBI टाटा संस के NBFC-CIC दर्जे से बाहर निकलने और कंपनी की ओर से दिए गए आश्वासनों को स्वीकार करता है, तो अनिवार्य लिस्टिंग से राहत का रास्ता बन सकता है। दूसरी ओर, यदि नियामक लिस्टिंग को जरूरी मानता है, तो टाटा संस को शेयर बाजार में आने की दिशा में आगे बढ़ना पड़ सकता है।
इसलिए नोएल टाटा और RBI के बीच होने वाली संभावित बैठक को टाटा संस के भविष्य के कॉर्पोरेट ढांचे के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, जब तक RBI की ओर से कोई औपचारिक निर्णय सामने नहीं आता, तब तक टाटा संस की लिस्टिंग या अनलिस्टेड बने रहने को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।


