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    # UP के सरकारी इंजीनियर ने खड़ा किया था खरबों का JP साम्राज्य, फिर कर्ज ने किया बर्बाद; अब अदाणी के हाथों में कंपनी की कमान **JP Associates Story:** उत्तर प्रदेश के एक सरकारी इंजीनियर ने अपनी नौकरी छोड़कर कारोबार की दुनिया में कदम रखा और देखते ही देखते हजारों करोड़ रुपये का कारोबारी साम्राज्य खड़ा कर दिया। यह कहानी है जयप्रकाश गौड़ और जयप्रकाश एसोसिएट्स (JP Associates) की। यमुना एक्सप्रेसवे, बड़े बांध, सीमेंट प्लांट, बिजली परियोजनाएं और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने वाला यह समूह कभी देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबारियों में गिना जाता था। लेकिन जरूरत से ज्यादा कर्ज, आर्थिक मंदी और कारोबार में आई मुश्किलों ने इस साम्राज्य की नींव हिला दी। आखिरकार कंपनी दिवालिया प्रक्रिया में पहुंच गई और अब इसका अधिग्रहण अदाणी समूह ने कर लिया है। **बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली।** कारोबार की दुनिया में कई ऐसी कहानियां हैं, जहां एक छोटे से सफर की शुरुआत करने वाला व्यक्ति बड़ा कारोबारी साम्राज्य खड़ा कर देता है। लेकिन कभी-कभी यही साम्राज्य समय के साथ कर्ज और आर्थिक चुनौतियों के कारण ढह भी जाता है। जयप्रकाश एसोसिएट्स की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक समय उत्तर भारत में जेपी समूह का नाम बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए जाना जाता था। कंपनी ने सड़क निर्माण से लेकर बिजली उत्पादन, सीमेंट, होटल और रियल एस्टेट तक कई क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बनाई। ग्रेटर नोएडा से आगरा को जोड़ने वाला यमुना एक्सप्रेसवे भी इसी समूह की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा। जेपी समूह की पहचान केवल बड़े प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं थी। लाखों निवेशकों और कर्मचारियों का भी इस कंपनी से जुड़ाव था। लेकिन लगातार बढ़ते कर्ज और कारोबार में आई गिरावट ने कंपनी को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया, जहां से वापसी मुश्किल हो गई। अब अदाणी समूह ने दिवालिया समाधान प्रक्रिया के जरिए जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण का रास्ता साफ कर लिया है। आइए जानते हैं कि आखिर कैसे एक सरकारी इंजीनियर ने यह कारोबारी साम्राज्य खड़ा किया और फिर यह आर्थिक संकट में कैसे फंस गया। ## सरकारी इंजीनियर से कारोबारी बनने तक का सफर जयप्रकाश गौड़ का जन्म वर्ष 1931 में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में हुआ था। उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा हासिल किया और इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के तौर पर नौकरी शुरू की। सरकारी सेवा के दौरान उन्हें निर्माण और इंजीनियरिंग से जुड़ी परियोजनाओं को समझने का मौका मिला। हालांकि, उनके मन में खुद का कारोबार शुरू करने की इच्छा थी। करीब सात साल तक सरकारी नौकरी करने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और निर्माण कार्यों की ठेकेदारी शुरू कर दी। शुरुआत में उनके पास कारोबार के लिए बहुत ज्यादा पूंजी नहीं थी। उन्होंने अपनी करीब 10 हजार रुपये की बचत से छोटे-मोटे निर्माण और सड़क निर्माण के ठेके लेने शुरू किए। धीरे-धीरे अनुभव और काम के आधार पर उन्हें बड़ी परियोजनाएं मिलने लगीं। वर्ष 1979 में उन्होंने जयप्रकाश एसोसिएट्स की स्थापना की। शुरुआत में कंपनी का मुख्य कारोबार निर्माण और इंजीनियरिंग से जुड़ा था। समय के साथ कंपनी ने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अपनी जगह बनाई और जेपी समूह का विस्तार होता चला गया। ## बांध से लेकर बिजली और सीमेंट तक फैला कारोबार जेपी समूह ने निर्माण क्षेत्र में अपनी पहचान मजबूत करने के बाद जलविद्युत परियोजनाओं की तरफ कदम बढ़ाया। टिहरी बांध और विष्णुप्रयाग जलविद्युत परियोजना जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स से कंपनी की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई। इसके बाद समूह ने सीमेंट, बिजली उत्पादन, होटल और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में भी कारोबार शुरू किया। कंपनी का उद्देश्य केवल निर्माण ठेके लेने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के विकास और संचालन तक पहुंच गया। इस विस्तार ने जयप्रकाश एसोसिएट्स को देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर समूहों में शामिल कर दिया। कंपनी के पास अलग-अलग क्षेत्रों में कारोबार था और निवेशकों के बीच भी इसकी अच्छी पहचान बन गई थी। ## यमुना एक्सप्रेसवे ने दिलाई देशभर में पहचान जेपी समूह के इतिहास में यमुना एक्सप्रेसवे परियोजना को एक बड़ा पड़ाव माना जाता है। वर्ष 2003 में ग्रेटर नोएडा से आगरा के बीच एक्सप्रेसवे बनाने की परियोजना जेपी समूह को मिली। करीब 165 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का निर्माण समूह की कंपनी जेपी इंफ्राटेक ने किया। इस परियोजना के तहत सड़क निर्माण के साथ-साथ एक्सप्रेसवे के आसपास रियल एस्टेट विकास के अधिकार भी मिले। इससे कंपनी को इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रॉपर्टी कारोबार दोनों में विस्तार का अवसर मिला। वर्ष 2012 में यमुना एक्सप्रेसवे को आम लोगों के लिए खोल दिया गया। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच सड़क संपर्क बेहतर हुआ। इस परियोजना ने जेपी समूह को देशभर में पहचान दिलाई। इसी दौरान कंपनी ने ग्रेटर नोएडा में बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट का निर्माण भी किया। इस रेसिंग सर्किट पर वर्ष 2011 से 2013 तक फॉर्मूला-1 इंडियन ग्रां प्री का आयोजन हुआ। यह परियोजना भारत में मोटरस्पोर्ट्स के लिहाज से काफी चर्चित रही। ## 2008 की मंदी के बाद बिगड़ने लगे हालात तेजी से विस्तार कर रहे जेपी समूह के लिए वर्ष 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी बड़ा झटका साबित हुई। मंदी के बाद रियल एस्टेट बाजार में सुस्ती आने लगी। मकानों की बिक्री प्रभावित हुई और निर्माण परियोजनाओं से मिलने वाली रकम में देरी होने लगी। दूसरी तरफ बिजली और सीमेंट कारोबार में भी कंपनी को उम्मीद के मुताबिक कमाई नहीं हो रही थी। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश की जरूरत थी, जबकि कारोबार से पर्याप्त नकदी नहीं आ रही थी। बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट जैसी बड़ी परियोजनाओं पर हुआ निवेश भी कंपनी के वित्तीय दबाव को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल रहा। कंपनी ने अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए बड़ी रकम उधार ली थी, लेकिन आमदनी और नकदी का प्रवाह कर्ज चुकाने की रफ्तार के अनुरूप नहीं रहा। कर्ज का बोझ बढ़ने के साथ कंपनी को अपनी कई संपत्तियां और कारोबारी हिस्सेदारियां बेचनी पड़ीं। इसके बावजूद वित्तीय स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। धीरे-धीरे जेपी समूह का संकट गहराता चला गया। ## घर खरीदारों से लेकर बैंकों तक, हर कोई हुआ परेशान जेपी समूह का आर्थिक संकट केवल कंपनी और बैंकों तक सीमित नहीं रहा। इसका असर उन हजारों लोगों पर भी पड़ा, जिन्होंने कंपनी के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में अपने घर बुक किए थे। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में जेपी विशटाउन जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में बड़ी संख्या में घर खरीदारों का पैसा फंस गया। कई लोगों ने अपनी जीवनभर की बचत लगाकर घर खरीदे थे, लेकिन उन्हें तय समय पर फ्लैट नहीं मिल पाए। इस स्थिति ने जेपी समूह की मुश्किलें और बढ़ा दीं। एक तरफ बैंक और वित्तीय संस्थान अपना कर्ज वापस मांग रहे थे, वहीं दूसरी तरफ घर खरीदार अपने घरों का इंतजार कर रहे थे। ## 2017 में शुरू हुई दिवालिया प्रक्रिया जेपी समूह की मुश्किलें सबसे पहले उसकी सहायक कंपनी जेपी इंफ्राटेक के मामले में सामने आईं। अगस्त 2017 में कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू की गई। बाद में सुरक्षा समूह ने समाधान प्रक्रिया के तहत जेपी इंफ्राटेक के अधिग्रहण की जिम्मेदारी संभाली। हालांकि, इससे पूरे जेपी समूह की वित्तीय परेशानियां खत्म नहीं हुईं। समूह की प्रमुख कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड भी भारी कर्ज के कारण संकट में फंस गई। 3 जून 2024 को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की इलाहाबाद पीठ ने जयप्रकाश एसोसिएट्स के खिलाफ कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया। इस मामले में वित्तीय लेनदारों ने करीब 57,185 करोड़ रुपये के बकाये का दावा किया था। इसके बाद कंपनी के कारोबार और संपत्तियों के समाधान के लिए बोली प्रक्रिया शुरू हुई। कई बड़े कारोबारी समूहों ने कंपनी को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई। ## वेदांता ने लगाई बड़ी बोली, लेकिन अदाणी ने मारी बाजी जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण की प्रक्रिया में वेदांता समूह और अदाणी समूह समेत कई कंपनियों ने हिस्सा लिया। सितंबर 2025 में वेदांता समूह की 17,000 करोड़ रुपये से अधिक की बोली की खबर सामने आई थी। इससे माना जा रहा था कि कंपनी का नियंत्रण अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता समूह के पास जा सकता है। हालांकि, बाद में समाधान प्रक्रिया में स्थिति बदल गई। नवंबर 2025 में वित्तीय लेनदारों ने अदाणी एंटरप्राइजेज की 14,535 करोड़ रुपये की समाधान योजना को मंजूरी दे दी। इस प्रस्ताव को कर्जदाताओं के करीब 89 फीसदी वोट मिले। इसके बाद 17 मार्च 2026 को NCLT की इलाहाबाद पीठ ने अदाणी एंटरप्राइजेज की समाधान योजना को मंजूरी दे दी। इस फैसले के साथ जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया। हालांकि, वेदांता समूह ने इस फैसले को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में चुनौती दी थी। मई 2026 में NCLAT ने वेदांता की अपील खारिज कर दी। इससे अदाणी समूह के अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ने का रास्ता मिला। ## अब अदाणी समूह के नियंत्रण में जेपी की संपत्तियां जयप्रकाश एसोसिएट्स के समाधान के बाद समूह की कई संपत्तियां और कारोबार अदाणी समूह की रणनीति का हिस्सा बन गए हैं। अदाणी समूह की अलग-अलग कंपनियां जेपी समूह की विभिन्न कारोबारी इकाइयों और परिसंपत्तियों में हिस्सेदारी हासिल कर रही हैं। इसी क्रम में अदाणी पावर ने जेपी पावर से जुड़ी हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया। वहीं, जेपी समूह के कुछ सीमेंट प्लांटों को अदाणी समूह ने डालमिया भारत को बेचने का फैसला किया। इस तरह जिस जेपी समूह ने कभी उत्तर भारत में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई थी, उसका कारोबारी स्वरूप अब पूरी तरह बदल चुका है। जयप्रकाश गौड़ की कहानी कारोबार की दुनिया में बड़े सपने, तेजी से विस्तार और वित्तीय अनुशासन के महत्व को समझाती है। महज 10 हजार रुपये की बचत से शुरू हुआ सफर देश के बड़े कारोबारी साम्राज्य तक पहुंचा, लेकिन भारी कर्ज और नकदी की कमी ने अंततः इस साम्राज्य को दिवालिया प्रक्रिया तक पहुंचा दिया। **Source:** उपलब्ध कारोबारी रिपोर्टों और दिवालिया समाधान प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी पर आधारित। jp-associates-jayprakash-gaur-rise-fall-adani-takeover-story
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Adani Group News: ₹765 करोड़ की डील में अदाणी का बड़ा दांव, 100% हिस्सेदारी खरीदकर हासिल किया जमीन और लाइसेंस का कंट्रोल

Namam Sharma
Last updated: 2026/06/28 at 8:27 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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8 Min Read
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नई दिल्ली। गौतम अदाणी के नेतृत्व वाला अदाणी समूह एक बार फिर अपने विस्तार अभियान को लेकर चर्चा में है। हाल ही में दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही जेपी एसोसिएट्स के अधिग्रहण की खबरों के बीच अब समूह ने इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (AEL) की संयुक्त उद्यम कंपनी AdaniConneX Private Limited (ACX) ने मधुवंती बिल्ड एस्टेट लिमिटेड (MBEL) की 100 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी का अधिग्रहण पूरा कर लिया है।

Contents
765.25 करोड़ रुपये में हुआ पूरा अधिग्रहणकौन है मधुवंती बिल्ड एस्टेट लिमिटेड?अदाणी समूह को कैसे मिलेगा फायदा?AdaniConneX क्या करती है?अदाणी समूह की विस्तार रणनीति का हिस्सानिवेशकों के लिए क्या संकेत?आगे क्या?

कंपनी द्वारा शेयर बाजार को दी गई जानकारी के अनुसार यह सौदा 765.25 करोड़ रुपये के नकद प्रतिफल पर पूरा किया गया है। पहली नजर में यह डील एक छोटी कंपनी की खरीदारी लग सकती है, लेकिन इसके पीछे अदाणी समूह की दीर्घकालिक इंफ्रास्ट्रक्चर रणनीति छिपी हुई है।

765.25 करोड़ रुपये में हुआ पूरा अधिग्रहण

अदाणी एंटरप्राइजेज ने बीएसई और एनएसई को दी गई नियामकीय सूचना में बताया कि AdaniConneX ने मधुवंती बिल्ड एस्टेट लिमिटेड की पूरी इक्विटी हिस्सेदारी खरीद ली है। यह लेनदेन आर्म्स लेंथ आधार पर किया गया है, जिसका अर्थ है कि सौदा व्यावसायिक शर्तों के अनुरूप और नियामकीय नियमों के तहत हुआ है।

कंपनी ने स्पष्ट किया कि अधिग्रहण के लिए आवश्यक सभी प्रक्रियाएं पूरी की जा चुकी हैं और किसी अतिरिक्त सरकारी अथवा नियामकीय मंजूरी की जरूरत नहीं थी। इस घोषणा के बाद निवेशकों का ध्यान इस बात पर गया कि आखिर ऐसी कंपनी में 765 करोड़ रुपये का निवेश क्यों किया गया जिसका वर्तमान कारोबार शून्य है।

कौन है मधुवंती बिल्ड एस्टेट लिमिटेड?

मधुवंती बिल्ड एस्टेट लिमिटेड का पंजीकरण 11 नवंबर 2019 को अहमदाबाद, गुजरात में किया गया था। कंपनी का मुख्य उद्देश्य इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट से जुड़ी गतिविधियां करना है।

दिलचस्प बात यह है कि कंपनी ने अभी तक कोई व्यावसायिक संचालन शुरू नहीं किया है और उसका टर्नओवर भी शून्य है। इसके बावजूद यह कंपनी अदाणी समूह के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

कारण यह है कि कंपनी के पास महत्वपूर्ण भूमि संपत्तियां और इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियों के लिए आवश्यक लाइसेंस मौजूद हैं। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में जमीन और अनुमति हासिल करना अक्सर सबसे लंबी और जटिल प्रक्रिया होती है। ऐसे में पहले से उपलब्ध भूमि और लाइसेंस किसी भी परियोजना को तेज गति से शुरू करने में मदद करते हैं।

अदाणी समूह को कैसे मिलेगा फायदा?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह अधिग्रहण केवल एक कंपनी खरीदने का मामला नहीं है बल्कि भविष्य की परियोजनाओं के लिए आधार तैयार करने की रणनीति है।

भारत में डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स पार्क, औद्योगिक कॉरिडोर, वेयरहाउसिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग तेजी से बढ़ रही है। AdaniConneX पहले से ही डेटा सेंटर कारोबार में सक्रिय है। ऐसे में अतिरिक्त भूमि और आवश्यक अनुमतियां भविष्य के विस्तार में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

किसी नई परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण और लाइसेंस प्राप्त करने में कई वर्ष लग सकते हैं। लेकिन यदि किसी कंपनी के पास पहले से यह संसाधन मौजूद हों तो परियोजना का समय और लागत दोनों कम हो जाते हैं।

यही वजह है कि कई बड़े कॉर्पोरेट समूह ऐसी कंपनियों का अधिग्रहण करते हैं जिनके पास उपयोगी जमीन या महत्वपूर्ण अनुमतियां मौजूद होती हैं।

AdaniConneX क्या करती है?

AdaniConneX अदाणी समूह और वैश्विक डेटा सेंटर ऑपरेटर EdgeConneX का संयुक्त उद्यम है। इस कंपनी का उद्देश्य भारत में आधुनिक डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना है।

डिजिटल सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा स्टोरेज की बढ़ती जरूरतों के कारण भारत में डेटा सेंटर सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है। अदाणी समूह इस क्षेत्र को भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर श्रेणियों में मानता है।

पिछले कुछ वर्षों में AdaniConneX ने देश के विभिन्न शहरों में डेटा सेंटर परियोजनाओं की घोषणा की है। ऐसे में भूमि और लाइसेंस से जुड़ा यह अधिग्रहण कंपनी की विस्तार योजनाओं से जुड़ा माना जा रहा है।

अदाणी समूह की विस्तार रणनीति का हिस्सा

अदाणी समूह ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, सीमेंट, सड़क, डेटा सेंटर और ग्रीन एनर्जी सहित कई क्षेत्रों में बड़े निवेश किए हैं।

समूह की रणनीति केवल नए प्रोजेक्ट शुरू करने तक सीमित नहीं है बल्कि ऐसे परिसंपत्तियों का अधिग्रहण करना भी है जो भविष्य में तेज विकास का आधार बन सकें।

विशेषज्ञों के अनुसार, MBEL जैसी कंपनियों का अधिग्रहण समूह को परियोजनाओं पर पूर्ण नियंत्रण देता है और निर्णय लेने की प्रक्रिया को सरल बनाता है। 100 प्रतिशत हिस्सेदारी होने से किसी भी प्रकार की अल्पांश शेयरधारक संबंधी जटिलताएं भी समाप्त हो जाती हैं।

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

यह सौदा सीधे तौर पर अदाणी एंटरप्राइजेज के राजस्व में तत्काल वृद्धि नहीं करेगा क्योंकि अधिग्रहित कंपनी का वर्तमान कारोबार शून्य है। हालांकि, निवेशक इसे समूह की दीर्घकालिक इंफ्रास्ट्रक्चर रणनीति के रूप में देख रहे हैं।

यदि भविष्य में इस भूमि और लाइसेंस का उपयोग बड़े डेटा सेंटर, औद्योगिक या अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए किया जाता है, तो यह अधिग्रहण काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार को देखते हुए ऐसे परिसंपत्तियों का महत्व आने वाले वर्षों में और बढ़ सकता है।

आगे क्या?

अदाणी समूह ने फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया है कि MBEL की संपत्तियों का उपयोग किस विशेष परियोजना के लिए किया जाएगा। लेकिन कंपनी के बयान से साफ है कि अधिग्रहण का उद्देश्य भविष्य की इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं के विकास को गति देना है।

765.25 करोड़ रुपये की यह डील दिखाती है कि अदाणी समूह केवल मौजूदा कारोबार पर ही नहीं बल्कि भविष्य की संभावनाओं पर भी निवेश कर रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि MBEL की जमीन और लाइसेंस का उपयोग किस बड़े प्रोजेक्ट में किया जाता है और इससे अदाणी समूह की विकास रणनीति को कितनी मजबूती मिलती है।

(डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।)

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By Namam Sharma Senior Editor – Newsjagran
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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