भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने म्यूचुअल फंड कंपनियों के लिए इक्विटी कैश मार्केट में खरीद और बिक्री के लेनदेन के निपटान से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब म्यूचुअल फंड योजनाएं कुछ पात्र लेनदेन का निपटान नेट फंड्स आधार पर कर सकेंगी। यह व्यवस्था 1 अप्रैल 2027 से लागू होगी। इससे एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) को अस्थायी नकदी की जरूरत कम करने और सेटलमेंट प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाने में मदद मिलेगी।
नई दिल्ली। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए सेबी का यह फैसला परिचालन के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। 5 नवंबर 2026 को घोषित संशोधित निपटान ढांचे के तहत म्यूचुअल फंड योजनाओं को एक ही सेटलमेंट साइकल में किए गए पात्र शेयर खरीद और बिक्री के नकद दायित्वों को आपस में समायोजित करने की अनुमति दी गई है।
अभी तक म्यूचुअल फंड योजनाओं को शेयर खरीदने के लिए जरूरी पूरी रकम का अलग से इंतजाम करना पड़ता था। भले ही उसी सेटलमेंट साइकल में शेयर बेचकर पैसा मिलने वाला हो, लेकिन उस रकम का इस्तेमाल खरीद के भुगतान में सीधे नहीं किया जा सकता था। नए नियम लागू होने के बाद पात्र लेनदेन में इस व्यवस्था को बदल दिया जाएगा।
1 अप्रैल 2027 से लागू होगा नया सेटलमेंट फ्रेमवर्क
सेबी के संशोधित ढांचे का मुख्य उद्देश्य म्यूचुअल फंड योजनाओं की नकदी प्रबंधन प्रक्रिया को आसान बनाना है। इसके तहत इक्विटी कैश मार्केट में पात्र स्पष्ट खरीद और स्पष्ट बिक्री (Explicit Buy and Explicit Sell) से जुड़े नकद दायित्वों को नेट आधार पर निपटाने की अनुमति होगी।
यह सुविधा व्यक्तिगत म्यूचुअल फंड योजना के स्तर पर उपलब्ध होगी। इसका मतलब है कि एक योजना के खरीद और बिक्री के पात्र लेनदेन को आपस में समायोजित किया जा सकेगा, लेकिन अलग-अलग योजनाओं के बीच इस तरह की नेटिंग की अनुमति नहीं होगी।
हालांकि, इस बदलाव में एक महत्वपूर्ण शर्त भी है। नेटिंग की सुविधा केवल नकद भुगतान यानी फंड्स सेटलमेंट पर लागू होगी। शेयरों की वास्तविक डिलीवरी और प्राप्ति पहले की तरह ग्रॉस आधार पर ही होगी। यानी शेयरों का लेनदेन अलग-अलग दर्ज और निपटाया जाएगा, लेकिन पात्र नकद दायित्वों को आपस में समायोजित किया जा सकेगा।
100 करोड़ की खरीद और 80 करोड़ की बिक्री पर कैसे होगा फायदा?
सेबी के नए नियमों को एक उदाहरण से आसानी से समझा जा सकता है। मान लीजिए कि किसी म्यूचुअल फंड योजना ने एक ही सेटलमेंट साइकल में 100 करोड़ रुपये के पात्र शेयर खरीदे और 80 करोड़ रुपये के पात्र शेयर बेच दिए।
मौजूदा व्यवस्था में योजना को 100 करोड़ रुपये की पूरी खरीद राशि का भुगतान करने के लिए अलग से फंड की व्यवस्था करनी पड़ सकती है। वहीं, शेयरों की बिक्री से मिलने वाले 80 करोड़ रुपये का निपटान अलग प्रक्रिया के तहत होता है।
लेकिन 1 अप्रैल 2027 से लागू होने वाले नए ढांचे के तहत दोनों पात्र लेनदेन के नकद दायित्वों को समायोजित किया जा सकेगा। ऐसे में योजना को केवल 20 करोड़ रुपये की नेट नकद राशि का इंतजाम करना होगा।
| विवरण | राशि |
|---|---|
| शेयरों की कुल खरीद | ₹100 करोड़ |
| शेयरों की कुल बिक्री | ₹80 करोड़ |
| नेट नकद भुगतान | ₹20 करोड़ |
इससे म्यूचुअल फंड योजना को अस्थायी तौर पर कम पूंजी की जरूरत होगी। खासतौर पर उन योजनाओं को फायदा मिल सकता है, जिनमें रोजाना बड़े स्तर पर शेयरों की खरीद और बिक्री होती है।
सेबी ने नेटिंग सुविधा के लिए रखीं ये शर्तें
सेबी ने स्पष्ट किया है कि नेट सेटलमेंट की सुविधा सभी तरह के शेयर बाजार लेनदेन पर लागू नहीं होगी। इसके लिए कुछ निर्धारित शर्तों का पालन करना जरूरी होगा।
1. एक ही म्यूचुअल फंड योजना में होगी नेटिंग: खरीद और बिक्री के नकद दायित्वों का समायोजन केवल उसी म्यूचुअल फंड योजना के भीतर किया जा सकेगा। एक योजना के फंड का इस्तेमाल दूसरी योजना के खरीद दायित्वों को पूरा करने के लिए नहीं किया जा सकेगा।
2. एक ही सेटलमेंट साइकल जरूरी: खरीद और बिक्री दोनों लेनदेन एक ही निपटान चक्र के भीतर होने चाहिए। अलग-अलग सेटलमेंट साइकल के लेनदेन को आपस में समायोजित करने की अनुमति नहीं होगी।
3. पात्र लेनदेन होना जरूरी: खरीद और बिक्री के सौदों को सेबी की निर्धारित स्पष्ट लेनदेन की परिभाषा के तहत योग्य होना चाहिए। हर तरह के लेनदेन को इस सुविधा में शामिल नहीं किया जाएगा।
4. शेयरों की डिलीवरी अलग रहेगी: नेटिंग केवल नकद दायित्वों के लिए होगी। खरीदे गए और बेचे गए शेयरों की वास्तविक डिलीवरी और प्राप्ति ग्रॉस आधार पर ही जारी रहेगी।
5. एक ही शेयर की खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध: यदि कोई म्यूचुअल फंड योजना एक ही सेटलमेंट साइकल में किसी एक ही सिक्योरिटी को खरीदती और बेचती है, तो ऐसे लेनदेन को स्पष्ट खरीद और स्पष्ट बिक्री के रूप में पात्र नहीं माना जाएगा। इसलिए इन्हें नेटिंग की सुविधा से बाहर रखा जाएगा।
इसके अलावा, पात्र स्पष्ट बिक्री से प्राप्त अतिरिक्त रकम का इस्तेमाल गैर-पात्र खरीद लेनदेन के भुगतान को समायोजित करने के लिए नहीं किया जा सकेगा।
AMC और कस्टोडियनों को कैसे होगा फायदा?
म्यूचुअल फंड कंपनियां अपने पोर्टफोलियो को बेहतर बनाने और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार निवेश में बदलाव करने के लिए लगातार शेयरों की खरीद और बिक्री करती रहती हैं। खासतौर पर इक्विटी आधारित योजनाओं में यह गतिविधि काफी नियमित होती है।
पुरानी व्यवस्था में खरीद और बिक्री के लिए अलग-अलग नकदी की व्यवस्था करनी पड़ सकती थी। इससे कंपनियों को कुछ समय के लिए अतिरिक्त फंड की जरूरत होती थी, भले ही उसी सेटलमेंट साइकल में बिक्री से पर्याप्त रकम मिलने वाली हो।
नए नियमों से यह अस्थायी वित्तीय दबाव कम हो सकता है। एसेट मैनेजमेंट कंपनियों को अपने उपलब्ध फंड का अधिक प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही कस्टोडियनों के लिए भी सेटलमेंट से जुड़ी परिचालन प्रक्रियाएं अधिक सुविधाजनक हो सकती हैं।
हालांकि, वास्तविक फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि किसी योजना में पात्र खरीद और बिक्री के लेनदेन कितनी मात्रा और कितनी बार किए जाते हैं।
क्या म्यूचुअल फंड निवेशकों पर भी पड़ेगा असर?
सेबी के इस फैसले का सीधा असर म्यूचुअल फंड निवेशकों के रोजमर्रा के लेनदेन पर पड़ने की संभावना नहीं है। निवेशकों को अपनी म्यूचुअल फंड यूनिट खरीदने या रिडीम करने के तरीके में कोई तत्काल बदलाव नहीं करना होगा।
यह संशोधित ढांचा मुख्य रूप से म्यूचुअल फंड योजनाओं के आंतरिक शेयर बाजार सेटलमेंट से जुड़ा है। इससे नेट एसेट वैल्यू (NAV) की गणना, निवेश के उद्देश्य, रिडेम्पशन की व्यवस्था या योजनाओं के बाजार जोखिम में सीधे तौर पर कोई बदलाव नहीं किया गया है।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि नए नियमों से किसी म्यूचुअल फंड योजना का रिटर्न अपने आप नहीं बढ़ेगा। इसका प्रमुख लाभ परिचालन दक्षता और नकदी प्रबंधन में सुधार के रूप में सामने आ सकता है।
STT और स्टाम्प ड्यूटी के नियमों में बदलाव नहीं
सेबी ने स्पष्ट किया है कि नए नेट सेटलमेंट ढांचे के बावजूद सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और स्टाम्प ड्यूटी का मौजूदा प्रावधान बरकरार रहेगा।
इन शुल्कों का निर्धारण संबंधित लेनदेन और डिलीवरी के आधार पर पहले की तरह किया जाता रहेगा। यानी नकद दायित्वों को नेट करने की अनुमति मिलने का मतलब यह नहीं है कि शेयरों की खरीद-बिक्री पर लगने वाले मौजूदा टैक्स और शुल्क भी समाप्त हो जाएंगे।
म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
कुल मिलाकर, सेबी का यह संशोधित ढांचा म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए सेटलमेंट प्रक्रिया को अधिक लचीला बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे एएमसी और कस्टोडियनों को नकदी का बेहतर प्रबंधन करने तथा अस्थायी फंडिंग जरूरतों को कम करने में मदद मिल सकती है।
यह व्यवस्था 1 अप्रैल 2027 से लागू होगी। इस बीच म्यूचुअल फंड कंपनियों और बाजार से जुड़े अन्य प्रतिभागियों को अपनी तकनीकी और परिचालन प्रणालियों में जरूरी बदलाव करने का समय मिलेगा।
निवेशकों के लिए फिलहाल इस फैसले का सबसे अहम पहलू यह है कि इससे उनके म्यूचुअल फंड निवेश, NAV या रिडेम्पशन प्रक्रिया में सीधे बदलाव नहीं होगा। इसका प्राथमिक उद्देश्य म्यूचुअल फंड कंपनियों के लिए शेयर बाजार में खरीद-बिक्री के नकद निपटान को अधिक प्रभावी बनाना है।
अस्वीकरण: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। इसे निवेश सलाह न माना जाए। म्यूचुअल फंड में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले संबंधित योजना के दस्तावेजों को ध्यानपूर्वक पढ़ें।
सोर्स एवं कॉपीराइट नोट: यह लेख मूल रूप से Dalal Street Investment Journal में प्रकाशित जानकारी पर आधारित है। मूल सामग्री के सभी अधिकार संबंधित प्रकाशक के पास सुरक्षित हैं।


