Highlights
- अदाणी ग्रीन ने गुजरात के खावड़ा में नए BESS और सोलर प्रोजेक्ट शुरू किए
- कंपनी की कुल ऑपरेशनल रिन्यूएबल क्षमता 19,785.8 MW पहुंची
- बैटरी स्टोरेज क्षमता बढ़कर 3,366 MWh हुई
- शेयर ने एक महीने में 14% से ज्यादा रिटर्न दिया
नई दिल्ली। भारत की सबसे बड़ी रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों में शामिल Adani Green Energy ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने गुजरात के खावड़ा में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स को व्यावसायिक रूप से चालू करने का ऐलान किया है। इस घोषणा के बाद मंगलवार को कंपनी का शेयर निवेशकों के फोकस में रह सकता है।
दरअसल, अदाणी ग्रीन एनर्जी लगातार अपने रिन्यूएबल एनर्जी पोर्टफोलियो का विस्तार कर रही है। ऐसे समय में जब भारत सरकार 2030 तक बड़े ग्रीन एनर्जी लक्ष्य हासिल करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है, कंपनी की यह नई उपलब्धि निवेशकों के लिए काफी अहम मानी जा रही है।
खावड़ा प्रोजेक्ट क्यों है इतना खास?
गुजरात का खावड़ा क्षेत्र देश के सबसे बड़े रिन्यूएबल एनर्जी हब्स में गिना जा रहा है। यहां बड़े स्तर पर सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स विकसित किए जा रहे हैं। अदाणी ग्रीन ने इसी क्षेत्र में अब बैटरी स्टोरेज क्षमता को भी तेजी से बढ़ाना शुरू कर दिया है।
कंपनी की ओर से शेयर बाजार को दी गई जानकारी के मुताबिक, 26 मई 2026 से 1,990 MWh क्षमता वाले बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) प्रोजेक्ट्स को कमर्शियल ऑपरेशन में शामिल कर लिया गया है। इसके अलावा 50 मेगावाट का नया सोलर प्रोजेक्ट भी शुरू किया गया है।
ऊर्जा सेक्टर के जानकारों का मानना है कि आने वाले वर्षों में केवल सोलर या विंड क्षमता बढ़ाना ही काफी नहीं होगा, बल्कि बिजली स्टोर करने की क्षमता यानी बैटरी स्टोरेज सबसे बड़ा गेमचेंजर बन सकती है। यही वजह है कि BESS प्रोजेक्ट्स को बाजार काफी पॉजिटिव नजरिए से देख रहा है।
आखिर BESS क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
रिन्यूएबल एनर्जी की सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि सोलर और विंड से लगातार बिजली उत्पादन नहीं होता। रात में सोलर बंद हो जाता है और हवा की गति भी बदलती रहती है। ऐसे में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम अतिरिक्त बिजली को स्टोर करके जरूरत पड़ने पर ग्रिड को सप्लाई करता है। यानी भविष्य की ग्रीन एनर्जी रणनीति में BESS की भूमिका बेहद अहम होने वाली है। भारत सरकार भी बड़े स्तर पर स्टोरेज प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा दे रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अदाणी ग्रीन का यह कदम कंपनी को केवल सोलर कंपनी से आगे ले जाकर “इंटीग्रेटेड ग्रीन एनर्जी प्लेयर” के रूप में मजबूत कर सकता है।
किन कंपनियों के जरिए शुरू हुए प्रोजेक्ट?
इन नए प्रोजेक्ट्स को अदाणी ग्रीन की चार अलग-अलग एसपीवी (Special Purpose Vehicle) यूनिट्स के जरिए शुरू किया गया है. Adani Renewable Energy Thirty Six Limited, Adani Renewable Energy Thirty Seven Limited, Adani Renewable Energy Forty Three Limited, Adani Green Energy Twenty Four Limited. इन यूनिट्स के जरिए कंपनी अलग-अलग प्रोजेक्ट्स का संचालन करती है।
कितनी हो गई कुल क्षमता?
नए प्रोजेक्ट्स के चालू होने के बाद कंपनी की कुल ऑपरेशनल रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता बढ़कर 19,785.8 MW पहुंच गई है। वहीं कुल ऑपरेशनल BESS क्षमता अब 3,366 MWh हो गई है।
यह आंकड़ा दिखाता है कि कंपनी केवल क्षमता जोड़ने पर ही नहीं, बल्कि भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी तेजी से निवेश कर रही है।
शेयर में आएगी और तेजी?
सोमवार को अदाणी ग्रीन एनर्जी का शेयर 3.47% की तेजी के साथ 1,409 रुपये पर बंद हुआ। पिछले एक महीने में शेयर करीब 14.5% उछला है। वहीं 6 महीनों में इसने 36% से ज्यादा का रिटर्न दिया है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर कंपनी लगातार इसी तरह क्षमता विस्तार करती रही और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में सरकारी समर्थन बना रहा, तो लंबी अवधि में शेयर पर सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। हालांकि, निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में वैल्यूएशन काफी ऊंचे स्तर पर रहते हैं, इसलिए उतार-चढ़ाव भी तेज हो सकता है।
भारत के ग्रीन एनर्जी मिशन में बड़ी भूमिका
भारत ने 2030 तक 500 GW नॉन-फॉसिल फ्यूल क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में अदाणी ग्रीन जैसी कंपनियां इस मिशन में अहम भूमिका निभा रही हैं।
खावड़ा जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स भविष्य में भारत को दुनिया के बड़े ग्रीन एनर्जी हब के रूप में स्थापित करने में मदद कर सकते हैं। खास बात यह है कि अब कंपनियां केवल बिजली उत्पादन नहीं बल्कि स्टोरेज और ग्रिड स्थिरता पर भी काम कर रही हैं, जो ऊर्जा सेक्टर के अगले चरण का संकेत माना जा रहा है।
निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?
आने वाले समय में निवेशकों की नजर इन फैक्टर्स पर रहेगी कंपनी की नई क्षमता जोड़ने की रफ्तार, बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स से होने वाली कमाई, सरकारी ग्रीन एनर्जी नीतियां, फंडिंग और कर्ज की स्थिति, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के ट्रेंड. अगर कंपनी इन क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन करती है, तो शेयर में लंबी अवधि की मजबूती बनी रह सकती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें।
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