Tejas Networks Order: तेजस नेटवर्क्स को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से ₹1,537 करोड़ का बड़ा ऑर्डर मिला है। इस ऑर्डर के तहत कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के 4G नेटवर्क का विस्तार करेगी। खास बात यह है कि यह ऑर्डर जून के अंत में कंपनी की कुल ₹1,529 करोड़ की ऑर्डर बुक से भी बड़ा है। ऐसे समय में मिला यह कॉन्ट्रैक्ट कंपनी के लिए काफी अहम माना जा रहा है, जब कुछ महीने पहले ही तेजस नेटवर्क्स के को-फाउंडर अर्णब रॉय ने मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO की जिम्मेदारी संभाली है।
सोमवार को कारोबारी सत्र के दौरान तेजस नेटवर्क्स के शेयर में तेजी देखने को मिली। दोपहर 3 बजे के करीब शेयर 1.84 फीसदी की बढ़त के साथ ₹560.25 पर कारोबार कर रहा था। इस साल अब तक शेयर में करीब 24 फीसदी की तेजी आ चुकी है।
₹1,537 करोड़ का ऑर्डर क्यों है खास?
BSNL के 4G नेटवर्क के विस्तार से जुड़ा यह ऑर्डर तेजस नेटवर्क्स के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है। सबसे बड़ी बात यह है कि ऑर्डर की वैल्यू कंपनी की जून तिमाही के अंत की पूरी ऑर्डर बुक से ज्यादा है।
इससे कंपनी को आने वाले समय में रेवेन्यू विजिबिलिटी मिल सकती है। हालांकि, सिर्फ एक बड़े ऑर्डर से कंपनी की सभी वित्तीय चुनौतियां खत्म हो जाएंगी, ऐसा मानना जल्दबाजी होगी। तेजस को अपनी ऑर्डर बुक बढ़ाने के साथ-साथ मुनाफे, कैश फ्लो और कर्ज की स्थिति पर भी काम करना होगा।
HFCL और STL से पीछे क्यों है Tejas Networks?
तेजस नेटवर्क्स ने पिछले कुछ वर्षों में टेलीकॉम इक्विपमेंट का मजबूत पोर्टफोलियो तैयार किया है। इसके बावजूद व्यावसायिक प्रदर्शन के मामले में कंपनी HFCL और Sterlite Technologies (STL) जैसी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से पीछे रह गई है।
जून तिमाही के आंकड़े इस अंतर को साफ दिखाते हैं। तेजस नेटवर्क्स का रेवेन्यू ₹402 करोड़ रहा, लेकिन कंपनी को इस दौरान ₹202 करोड़ का घाटा हुआ। वहीं, तिमाही के अंत में उसकी ऑर्डर बुक ₹1,529 करोड़ थी।
कंपनी के लिए चिंता की एक और बड़ी वजह उसका बढ़ता कर्ज है। जून के अंत तक तेजस नेटवर्क्स का नेट डेट बढ़कर ₹4,277 करोड़ हो गया।
इसके मुकाबले HFCL का रेवेन्यू सालाना आधार पर करीब 120 फीसदी बढ़कर ₹1,915 करोड़ रहा। STL का रेवेन्यू भी 87 फीसदी बढ़कर ₹1,910 करोड़ पहुंच गया। STL की ऑर्डर बुक बढ़कर ₹18,618 करोड़ हो गई थी।
HFCL ने बदली बिजनेस स्ट्रेटेजी
HFCL ने अपने कारोबार में कम मार्जिन वाले टर्नकी प्रोजेक्ट्स पर निर्भरता घटाने की रणनीति अपनाई है। कंपनी का फोकस अब ऑप्टिकल फाइबर केबल, टेलीकॉम इक्विपमेंट, पैसिव कनेक्टिविटी सॉल्यूशंस और डिफेंस जैसे क्षेत्रों पर अधिक है।
FY26 में HFCL के कुल रेवेन्यू में प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी करीब 62 फीसदी थी। उम्मीद है कि अगले वित्त वर्ष में यह हिस्सेदारी 70 फीसदी से ज्यादा हो सकती है।
कंपनी की एक खासियत उसका ग्राहक आधार भी है। उसके रेवेन्यू में प्राइवेट सेक्टर के ग्राहकों की हिस्सेदारी करीब 84 फीसदी है। इससे किसी एक सरकारी प्रोजेक्ट पर अत्यधिक निर्भरता कम होती है।
STL का AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर दांव
दूसरी तरफ Sterlite Technologies यानी STL तेजी से बढ़ते AI इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर बाजार पर फोकस बढ़ा रही है।
ग्लोबल सर्विसेज बिजनेस के डीमर्जर के बाद STL ने ऑप्टिकल फाइबर, ऑप्टिकल कनेक्टिविटी और डेटा सेंटर से जुड़े प्रोडक्ट्स पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। मई में कंपनी की एक सब्सिडियरी को 1 अरब डॉलर से ज्यादा का ऑर्डर भी मिला था।
इससे संकेत मिलता है कि टेलीकॉम कंपनियां पारंपरिक नेटवर्क विस्तार के साथ-साथ AI और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर से पैदा होने वाली नई मांग को भी भुनाने की कोशिश कर रही हैं।
2023 का ₹7,492 करोड़ BSNL ऑर्डर बना दोधारी तलवार
तेजस नेटवर्क्स की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए उसके 2023 के बड़े ऑर्डर को देखना जरूरी है।
अगस्त 2023 में कंपनी को TCS से ₹7,492 करोड़ का ऑर्डर मिला था। इसके तहत तेजस को करीब 1 लाख BSNL साइट्स के लिए 4G/5G रेडियो एक्सेस नेटवर्क (RAN) इक्विपमेंट उपलब्ध कराना था।
इस बड़े कॉन्ट्रैक्ट ने कंपनी के रेवेन्यू को तेजी से बढ़ाया। तेजस नेटवर्क्स का रेवेन्यू FY23 में करीब ₹922 करोड़ से बढ़कर FY24 में ₹2,471 करोड़ हो गया। इसके बाद FY25 में रेवेन्यू बढ़कर ₹8,923 करोड़ तक पहुंच गया।
लेकिन यही बड़ा प्रोजेक्ट बाद में कंपनी के लिए एक बड़ी चुनौती भी बन गया।
एक ग्राहक पर निर्भरता बनी बड़ी समस्या
BSNL प्रोजेक्ट के कारण तेजस नेटवर्क्स के कारोबार में कंसंट्रेशन रिस्क काफी बढ़ गया। यानी कंपनी की कमाई का बड़ा हिस्सा एक ही ग्राहक और बड़े प्रोजेक्ट पर निर्भर हो गया।
जब यह प्रोजेक्ट पूरा होने की तरफ बढ़ा, तब कंपनी को दूसरे बड़े ग्राहकों से पर्याप्त नए ऑर्डर नहीं मिल पाए। इसका सीधा असर रेवेन्यू पर पड़ा।
FY26 में कंपनी का रेवेन्यू 88 फीसदी गिरकर ₹1,103 करोड़ रह गया। इसी दौरान कंपनी को करीब ₹909 करोड़ का घाटा हुआ।
यही वजह है कि नया ₹1,537 करोड़ का ऑर्डर तेजस नेटवर्क्स के लिए सिर्फ एक सामान्य कॉन्ट्रैक्ट नहीं है। यह कंपनी को दोबारा ग्रोथ ट्रैक पर लाने में मदद कर सकता है, लेकिन असली चुनौती यह होगी कि कंपनी आगे BSNL के अलावा दूसरे ग्राहकों से भी लगातार बड़े ऑर्डर हासिल करे।
क्या नए ऑर्डर से सुधरेगी Tejas Networks की सेहत?
₹1,537 करोड़ का नया ऑर्डर निश्चित रूप से तेजस नेटवर्क्स के लिए सकारात्मक खबर है। इससे कंपनी की ऑर्डर बुक को मजबूत करने और भविष्य के रेवेन्यू को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, निवेशकों को केवल ऑर्डर की वैल्यू देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। कंपनी के सामने अभी बढ़ता नेट डेट, लगातार घाटा, कमजोर ऑर्डर बुक और ग्राहक एकाग्रता जैसी चुनौतियां हैं।
इसलिए आगे कंपनी के लिए तीन चीजें सबसे महत्वपूर्ण होंगी—ऑर्डर बुक में लगातार बढ़ोतरी, घाटे में कमी और कर्ज पर नियंत्रण। अगर तेजस नेटवर्क्स इन मोर्चों पर सुधार दिखाती है, तो BSNL का यह नया ऑर्डर कंपनी के टर्नअराउंड की शुरुआत साबित हो सकता है। लेकिन अगर नए ऑर्डर फिर से कुछ चुनिंदा ग्राहकों तक सीमित रहे, तो पुरानी समस्या दोबारा सामने आ सकती है।
नोट: यह लेख उपलब्ध कारोबारी आंकड़ों और दी गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। शेयर बाजार में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


