Vedanta Oil Production: भारत अपनी कच्चे तेल की आयात निर्भरता कम करने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। इसी बीच अरबपति अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता से जुड़ी एक बड़ी योजना सामने आई है। वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड (VOGL) वित्त वर्ष 2027 तक उत्तरी राजस्थान में तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए करीब 200 मिलियन डॉलर यानी लगभग ₹1,908 करोड़ का निवेश करने की योजना बना रही है।
कंपनी का यह निवेश मुख्य रूप से राजस्थान स्थित मंगला ऑयल फील्ड में तेल की रिकवरी बढ़ाने, उत्पादन क्षमता को बेहतर करने और संसाधनों को रिजर्व में बदलने की प्रक्रिया को तेज करने पर केंद्रित होगा। अगर कंपनी अपने लक्ष्य में सफल रहती है, तो इससे भारत के घरेलू कच्चे तेल उत्पादन को बढ़ावा मिल सकता है और आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है।
मंगला फील्ड में क्यों लगाया जा रहा है इतना बड़ा निवेश?
राजस्थान के बाड़मेर में स्थित मंगला फील्ड भारत के महत्वपूर्ण ऑनशोर हाइड्रोकार्बन क्षेत्रों में शामिल है। वेदांता की सब्सिडियरी केयर्न द्वारा इस क्षेत्र में बड़ी तेल खोज के बाद यहां लंबे समय से उत्पादन किया जा रहा है।
मंगला फील्ड में फर्स्ट ऑयल यानी पहली बार व्यावसायिक स्तर पर तेल उत्पादन शुरू हुए 17 साल पूरे हो चुके हैं। इतने लंबे समय बाद भी कंपनी का मानना है कि इस क्षेत्र में उत्पादन और रिकवरी बढ़ाने की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं।
वेदांता अब इसी क्षमता को बेहतर तकनीक और नए ऑपरेशनल तरीकों के जरिए इस्तेमाल करने की तैयारी में है।
570 MMboe के संभावित संसाधन का अनुमान
साल 2004 में खोजा गया मंगला ऑयलफील्ड राजस्थान के प्रमुख हाइड्रोकार्बन एसेट्स में शामिल हो चुका है। राजस्थान के इस एसेट में मंगला, भाग्यम और ऐश्वर्या (MBA) फील्ड शामिल हैं।
कंपनी के अनुमान के मुताबिक, इन फील्ड्स में कुल करीब 570 MMboe (मिलियन बैरल ऑयल इक्विवेलेंट) के संभावित संसाधन मौजूद हैं। यही वजह है कि राजस्थान वेदांता के लिए तेल उत्पादन बढ़ाने की रणनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
तेल रिकवरी 30% से बढ़ाकर 60% करने का लक्ष्य
वेदांता के लिए सबसे बड़ा लक्ष्य सिर्फ नए कुएं खोदना नहीं, बल्कि मौजूदा संसाधनों से ज्यादा तेल निकालना है। कंपनी मंगला फील्ड में तेल की रिकवरी दर को मौजूदा करीब 30% से बढ़ाकर 60% तक ले जाने की कोशिश कर रही है।
इसके लिए कंपनी कई आधुनिक तकनीकों और ऑपरेशनल उपायों का इस्तेमाल करेगी। इनमें शामिल हैं:
- एडवांस्ड ऑयल रिकवरी टेक्नोलॉजी
- टार्गेटेड वर्कओवर
- साइडट्रैकिंग
- वेल इंटरवेंशन
- बेहतर सब-सरफेस विजिबिलिटी
- ASP यानी अल्कलाइन सर्फेक्टेंट पॉलिमर इंजेक्शन
इन तकनीकों का उद्देश्य पुराने और मौजूदा कुओं से भी ज्यादा मात्रा में तेल निकालना और फील्ड की उत्पादकता को लंबे समय तक बनाए रखना है।
राजस्थान से 200-300 MMboe और मिलने की उम्मीद
कंपनी के मुताबिक राजस्थान एसेट में अभी भी काफी संभावनाएं मौजूद हैं। राजस्थान एसेट बेस में करीब 100-200 MMboe टाइट ऑयल की संभावना बताई गई है।
इसके अलावा कंपनी के रिसोर्स-टू-रिजर्व कन्वर्जन प्रोग्राम के जरिए आने वाले वर्षों में करीब 200-300 MMboe अतिरिक्त संसाधनों को रिजर्व में बदलने की उम्मीद है।
अगर इन संसाधनों का व्यावसायिक उत्पादन संभव होता है, तो राजस्थान में वेदांता के तेल कारोबार की दीर्घकालिक क्षमता और मजबूत हो सकती है।
मंगला फील्ड पर कंपनी का फोकस क्यों अहम है?
भारत अपनी जरूरत के बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है। ऐसे में देश के भीतर मौजूद तेल और गैस संसाधनों से उत्पादन बढ़ाना ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
मंगला जैसे बड़े ऑनशोर फील्ड में उत्पादन बढ़ने से कई स्तरों पर फायदा हो सकता है। घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी से तेल आयात की जरूरत कुछ हद तक कम हो सकती है। इससे देश के विदेशी मुद्रा खर्च पर भी दबाव घटाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, घरेलू उत्पादन में किसी एक परियोजना का योगदान भारत की कुल तेल जरूरत के मुकाबले सीमित हो सकता है, लेकिन कई घरेलू फील्ड्स में उत्पादन बढ़ने पर इसका सामूहिक असर बड़ा हो सकता है।
वेदांता के लिए भी महत्वपूर्ण है यह निवेश
₹1,908 करोड़ का निवेश सिर्फ भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि वेदांता के ऑयल एंड गैस कारोबार के लिए भी रणनीतिक कदम है।
कंपनी का फोकस मौजूदा एसेट्स से ज्यादा उत्पादन हासिल करने, रिकवरी बढ़ाने और उपलब्ध संसाधनों को लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर है। इससे नई खोजों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय मौजूदा फील्ड की क्षमता का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।
मंगला में फर्स्ट ऑयल के 17 साल पूरे होने के बाद अब कंपनी इसके अगले विकास चरण पर जोर दे रही है। एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और नए रिकवरी तरीकों के इस्तेमाल से अगर रिकवरी रेट में बड़ा सुधार आता है, तो यह फील्ड आने वाले वर्षों में भी वेदांता के तेल कारोबार का अहम आधार बना रह सकता है।
भारत को क्या फायदा होगा?
वेदांता की इस योजना का सबसे बड़ा संभावित फायदा घरेलू कच्चे तेल उत्पादन में बढ़ोतरी के रूप में सामने आ सकता है। भारत के लिए यह इसलिए अहम है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर देश के आयात बिल पर पड़ता है।
घरेलू उत्पादन बढ़ने से:
- कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
- देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है।
- विदेशी मुद्रा के खर्च पर कुछ राहत मिल सकती है।
- राजस्थान में तेल और गैस से जुड़ी औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
- मौजूदा हाइड्रोकार्बन संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल संभव होगा।
इस तरह राजस्थान का मंगला फील्ड सिर्फ वेदांता की एक परियोजना नहीं, बल्कि भारत के घरेलू तेल उत्पादन को मजबूत करने की बड़ी कोशिश का हिस्सा बन सकता है।
निष्कर्ष: वेदांता का करीब ₹1,908 करोड़ का निवेश राजस्थान के मंगला फील्ड की उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है। कंपनी का लक्ष्य तेल रिकवरी को 30% से बढ़ाकर 60% करना है। इसके अलावा टाइट ऑयल और नए रिसोर्स-टू-रिजर्व कन्वर्जन से अतिरिक्त संभावनाएं तलाशने की योजना है। यदि ये प्रयास सफल रहते हैं, तो राजस्थान भारत के घरेलू तेल उत्पादन और ऊर्जा सुरक्षा की कहानी में आने वाले वर्षों में और महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


