PM Modi in Uzbekistan: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च राजकीय सम्मानों में शामिल ‘ऑर्डर ऑफ ओली दराजाली दोस्तलिक’ (Order of Oliy Darajali Dustlik) से सम्मानित किया गया है। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने रविवार, 30 अगस्त को ताशकंद में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में पीएम मोदी को यह सम्मान प्रदान किया। यह प्रधानमंत्री मोदी को मिला 36वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है।
प्रधानमंत्री मोदी इन दिनों उज्बेकिस्तान के दो दिवसीय दौरे पर हैं। इस यात्रा का फोकस दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, रक्षा, डिजिटल टेक्नोलॉजी और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर है। सम्मान मिलने के बाद पीएम मोदी ने इसे भारत और उज्बेकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों को समर्पित किया।
‘दोस्तलिक’ सम्मान मिलने पर क्या बोले पीएम मोदी?
A proud moment for every Indian!
Hon'ble PM Shri @narendramodi ji being conferred Uzbekistan's highest honour, the ‘Oliy Darajali Do’stlik’ Order, is yet another recognition of India's growing stature and influence on the global stage.
With 35 global honours now bestowed upon… pic.twitter.com/M4v37lLZ7D
— Kiren Rijiju (@KirenRijiju) August 30, 2026 सम्मान प्राप्त करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे अपने लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा कि उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान मिलना उनके लिए बेहद सम्मान और खुशी की बात है।
पीएम मोदी ने कहा कि इस सम्मान को वह व्यक्तिगत उपलब्धि के तौर पर नहीं देखते, बल्कि इसे भारत के 1.4 अरब लोगों का सम्मान मानते हैं। उन्होंने उज्बेकिस्तान की जनता, सरकार और राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव का आभार व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री ने ‘दोस्तलिक’ शब्द का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में इस शब्द का अर्थ लगभग हर व्यक्ति समझता है। ‘दोस्तलिक’ का अर्थ मित्रता है और यही भावना भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों की बुनियाद में मौजूद है।
पीएम मोदी ने कहा कि वह इस सर्वोच्च सम्मान को दोनों देशों के सदियों पुराने दोस्ताना संबंधों और साझा ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को समर्पित करते हैं।
भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को मिला नया रणनीतिक आयाम
पीएम मोदी और राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के बीच हुई अहम बैठक के बाद भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने रिश्तों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ (Comprehensive Strategic Partnership) के स्तर तक ले जाने का फैसला किया है।
इसका मतलब है कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा केवल व्यापार और कूटनीति तक सीमित नहीं रहेगा। रक्षा, सुरक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, तकनीक, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और डिजिटल क्षेत्र में भी साझेदारी को विस्तार दिया जाएगा।
दोनों नेताओं की बातचीत में क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों के साथ-साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा हुई।
2030 तक 5 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य
भारत और उज्बेकिस्तान ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, फिलहाल दोनों देशों के बीच सालाना द्विपक्षीय व्यापार का मूल्य 1 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है। नए लक्ष्य के तहत दोनों देश व्यापार और निवेश के नए अवसर तलाशेंगे।
इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, खनन, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्नोलॉजी और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
यूरेनियम सप्लाई पर भी बनी सहमति
पीएम मोदी और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव की बातचीत में यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति का मुद्दा भी अहम रहा। दोनों देशों ने इसके लिए एक व्यवस्था विकसित करने पर सहमति जताई है।
भारत शांतिपूर्ण और असैन्य उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा उत्पादन में उज्बेकिस्तान से यूरेनियम खरीदने पर विचार कर रहा है। परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में यह सहयोग भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
UPI और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ेगा सहयोग
दोनों देशों के बीच बातचीत में डिजिटल क्षेत्र को भी विशेष महत्व दिया गया। भारत अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और UPI जैसे डिजिटल भुगतान समाधानों के अनुभव को उज्बेकिस्तान के साथ साझा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इसके अलावा टेक्नोलॉजी, डिजिटल सेवाओं और नवाचार के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
खनन और महत्वपूर्ण खनिजों पर भी फोकस
भारत और उज्बेकिस्तान के लिए खनन और महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) भी रणनीतिक महत्व रखते हैं। वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, सेमीकंडक्टर और आधुनिक तकनीकों के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
ऐसे में दोनों देशों के बीच खनन क्षेत्र में सहयोग भविष्य में सप्लाई चेन को मजबूत करने में भूमिका निभा सकता है।
बौद्ध स्थलों के संरक्षण पर समझौता
पीएम मोदी की यात्रा में भारत और उज्बेकिस्तान के साझा सांस्कृतिक संबंधों को भी प्रमुखता दी गई। दोनों पक्षों ने उज्बेकिस्तान में स्थित प्राचीन बौद्ध स्थलों फयाज तेपा और कारा तेपा के पुनरुद्धार और संरक्षण के लिए एक आशय पत्र पर सहमति जताई।
इन ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण भारत और मध्य एशिया के बीच प्राचीन सांस्कृतिक एवं बौद्ध संपर्कों को सामने लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कई क्षेत्रों में समझौतों का आदान-प्रदान
दोनों नेताओं की मौजूदगी में खनन, संस्कृति, शिक्षा, पर्यटन और आयुर्वेद समेत कई क्षेत्रों से जुड़े समझौतों और दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया गया।
इससे साफ है कि भारत और उज्बेकिस्तान अपने संबंधों को बहुआयामी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। आर्थिक सहयोग के साथ-साथ सांस्कृतिक और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
SCO शिखर सम्मेलन में भी शामिल होंगे पीएम मोदी
उज्बेकिस्तान दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए किर्गिस्तान की यात्रा करेंगे। यह सम्मेलन 31 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित होना है।
SCO में भारत की सक्रिय भूमिका को देखते हुए पीएम मोदी की यह यात्रा क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी और मध्य एशियाई देशों के साथ भारत के संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होगी।
पीएम मोदी को अब तक मिल चुके हैं 36 अंतरराष्ट्रीय सम्मान
उज्बेकिस्तान का ‘ऑर्डर ऑफ ओली दराजाली दोस्तलिक’ सम्मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिलने वाला 36वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान बताया गया है।
पिछले कुछ वर्षों में पीएम मोदी को विभिन्न देशों की सरकारों और राष्ट्राध्यक्षों की ओर से सर्वोच्च नागरिक एवं राजकीय सम्मान दिए गए हैं। उज्बेकिस्तान का यह सम्मान भारत और मध्य एशिया के बीच बढ़ते रणनीतिक एवं कूटनीतिक संबंधों को भी दर्शाता है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है उज्बेकिस्तान?
मध्य एशिया में उज्बेकिस्तान भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश है। ऊर्जा, यूरेनियम, महत्वपूर्ण खनिज, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग भारत की दीर्घकालिक आर्थिक और रणनीतिक जरूरतों से जुड़ा हुआ है।
वहीं, भारत की डिजिटल टेक्नोलॉजी, फार्मास्यूटिकल्स, शिक्षा और आयुर्वेद जैसी क्षमताएं उज्बेकिस्तान के लिए उपयोगी हो सकती हैं। दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी से आने वाले वर्षों में इन क्षेत्रों में सहयोग और तेज होने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, पीएम मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा सिर्फ एक राजनयिक यात्रा नहीं है। सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किए जाने के साथ ही दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा, खनन, डिजिटल टेक्नोलॉजी, शिक्षा, संस्कृति और सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश की है। 2030 तक 5 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य और यूरेनियम सप्लाई पर सहमति इस साझेदारी के आर्थिक और रणनीतिक महत्व को और बढ़ाती है।


