HDFC Bank New CEO: देश के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर बैंकों में शामिल HDFC Bank जल्द ही अपने अगले मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) के नाम का ऐलान कर सकता है। मौजूदा MD और CEO शशिधर जगदीशन का कार्यकाल अक्टूबर 2026 में समाप्त होने वाला है। ऐसे में बैंक के अगले प्रमुख को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर कैजाद भरूचा इस पद की दौड़ में प्रमुख नाम हो सकते हैं। हालांकि, बैंक की ओर से अभी तक उनके नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसके अलावा HDFC Bank एक बाहरी उम्मीदवार की तलाश भी कर रहा है।
कैजाद भरूचा क्यों हैं मजबूत दावेदार?
कैजाद भरूचा HDFC Bank के अनुभवी अधिकारियों में शामिल हैं और बैंक के कारोबार की अच्छी समझ रखते हैं। वह रिटेल और होलसेल बैंकिंग, दोनों से जुड़े कारोबार की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
यही वजह है कि उन्हें शशिधर जगदीशन के संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है। उनके पक्ष में एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि उनका रिटायरमेंट 2029 में होना है। इससे उन्हें बैंक के शीर्ष पद पर पर्याप्त समय मिल सकता है।
RBI की मंजूरी होगी अहम
HDFC Bank के नए CEO की नियुक्ति केवल बैंक के बोर्ड के फैसले से नहीं होगी। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के मुताबिक, बैंक को CEO पद के लिए एक से अधिक उम्मीदवारों के नाम प्रस्तावित करने होते हैं। इसके बाद अंतिम नियुक्ति पर RBI फैसला करता है।
RBI के नियमों के तहत किसी फुल-टाइम डायरेक्टर का अधिकतम कार्यकाल 15 साल तक हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, भरूचा 2029 में इस सीमा तक पहुंच सकते हैं। हालांकि, कुछ परिस्थितियों में कार्यकाल बढ़ाने के लिए नियामकीय मंजूरी का रास्ता भी मौजूद है।
बैंक बाहरी उम्मीदवार क्यों तलाश रहा है?
HDFC Bank केवल अंदरूनी उम्मीदवार पर निर्भर नहीं रहना चाहता। बैंक बाहरी उम्मीदवारों को भी संभावित विकल्प के तौर पर देख रहा है। इसका मतलब है कि अंतिम फैसला कैजाद भरूचा और किसी बाहरी अनुभवी बैंकिंग प्रोफेशनल के बीच हो सकता है।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बैंक किन बाहरी उम्मीदवारों के नाम पर विचार कर रहा है। HDFC Bank और कैजाद भरूचा ने इस मामले पर टिप्पणी नहीं की है।
शशिधर जगदीशन ने दोबारा कार्यकाल लेने से किया इनकार
HDFC Bank ने शनिवार को बताया कि शशिधर जगदीशन ने दोबारा नियुक्ति नहीं लेने का फैसला किया है। वह अक्टूबर 2020 से बैंक के MD और CEO के पद पर हैं।
उनका मौजूदा कार्यकाल 26 अक्टूबर 2026 को समाप्त होगा। बैंक ने यह नहीं बताया कि जगदीशन ने दूसरे कार्यकाल के लिए अपनी उम्मीदवारी क्यों नहीं रखी।
उनके कार्यकाल में HDFC Bank और HDFC Ltd का ऐतिहासिक विलय भी हुआ। यह मर्जर भारतीय बैंकिंग सेक्टर के सबसे बड़े कॉरपोरेट सौदों में से एक था।
पिछले छह महीने में बैंक के नेतृत्व पर उठे सवाल
HDFC Bank के लिए पिछले कुछ महीने नेतृत्व और गवर्नेंस के लिहाज से चुनौतीपूर्ण रहे हैं। मार्च 2026 में बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
चक्रवर्ती ने उस समय कहा था कि बैंक की कुछ प्रथाएं उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिक मानकों से मेल नहीं खातीं। उनके इस्तीफे के बाद बैंक की कॉरपोरेट गवर्नेंस और टॉप मैनेजमेंट को लेकर सवाल उठे।
बाद में इन आरोपों की बाहरी कानूनी समीक्षा कराई गई। समीक्षा में गवर्नेंस से जुड़े आरोपों को साबित करने वाला कोई सबूत नहीं मिला।
डिपॉजिट प्राइसिंग मामले ने भी बढ़ाया दबाव
इसके बावजूद बैंक के सामने एक अलग मामला भी सामने आया। पिछले महीने बड़े डिपॉजिट की प्राइसिंग से जुड़े मामले में शशिधर जगदीशन समेत चार अधिकारियों पर कार्रवाई की गई।
ऐसे समय में CEO पद के लिए नए व्यक्ति का चुनाव HDFC Bank के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। बैंक को न केवल कारोबार की निरंतरता बनाए रखनी होगी, बल्कि गवर्नेंस और निवेशकों के भरोसे से जुड़े सवालों को भी संभालना होगा।
HDFC Bank के शेयर में भी आई बड़ी गिरावट
HDFC Bank के नेतृत्व में बदलाव ऐसे समय हो रहा है जब बैंक के शेयर पर भी दबाव रहा है। इस साल अब तक बैंक के शेयर में करीब 27 फीसदी की गिरावट बताई गई है।
मार्च में चेयरमैन के इस्तीफे के बाद शेयर में गिरावट और तेज हुई थी। जून के अंत तक बैंक में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी थी। ऐसे में निवेशकों का भरोसा बैंक के लिए काफी महत्वपूर्ण है।
2023 में HDFC Ltd के साथ हुए मर्जर के बाद निवेशकों को बैंक से बड़ी उम्मीदें थीं। हालांकि, अब तक शेयर प्रदर्शन और मर्जर से मिलने वाले फायदे उम्मीद के अनुरूप नहीं दिखे हैं।
नए CEO के सामने होंगी ये बड़ी चुनौतियां
HDFC Bank के नए CEO के सामने केवल नेतृत्व परिवर्तन की जिम्मेदारी नहीं होगी, बल्कि उन्हें कई मोर्चों पर काम करना पड़ेगा।
पहली चुनौती शेयर में गिरावट को संभालना होगी। निवेशकों का भरोसा वापस लाना नए CEO के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में से एक हो सकता है।
दूसरी चुनौती HDFC Ltd के मर्जर का पूरा लाभ हासिल करना होगी। बैंक को मर्जर से मिलने वाली कारोबारी संभावनाओं को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करना होगा।
तीसरी चुनौती गवर्नेंस और मैनेजमेंट स्थिरता बनाए रखना होगी। पिछले कुछ महीनों में शीर्ष स्तर पर हुए बदलावों के बाद बैंक को एक मजबूत और स्पष्ट नेतृत्व की जरूरत है।
चौथी चुनौती कारोबार की ग्रोथ बनाए रखना होगी। देश के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर बैंकों में शामिल होने के कारण HDFC Bank पर प्रतिस्पर्धा और प्रदर्शन का लगातार दबाव रहता है।
क्या कैजाद भरूचा बनेंगे अगले CEO?
फिलहाल कैजाद भरूचा का नाम सबसे प्रमुख संभावित उम्मीदवारों में माना जा रहा है, लेकिन इसे अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। बैंक बाहरी उम्मीदवारों पर भी विचार कर रहा है और RBI की मंजूरी भी प्रक्रिया का अहम हिस्सा होगी।
इसलिए HDFC Bank के अगले CEO के तौर पर किसे चुना जाता है, इसका स्पष्ट जवाब आधिकारिक घोषणा के बाद ही मिलेगा। अगर भरूचा को जिम्मेदारी मिलती है, तो उनके सामने बैंक की मौजूदा चुनौतियों को संभालते हुए निवेशकों का भरोसा मजबूत करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
Disclaimer: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी स्टॉक या निवेश में पैसा लगाने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें। NewsJagran.in किसी भी निवेशक को किसी विशेष शेयर में निवेश करने की सलाह नहीं देता।


