India-Nepal Power Deal: नेपाल में हालिया बाढ़ ने बिजली उत्पादन क्षमता को बड़ा झटका दिया है। देश में करीब 550 MW बिजली उत्पादन क्षमता प्रभावित होने के बाद बिजली की उपलब्धता को लेकर दबाव बढ़ गया है। ऐसे में भारत ने नेपाल की मदद के लिए अतिरिक्त बिजली आपूर्ति की तैयारी शुरू कर दी है। नेपाल ने सामान्य समय से करीब एक महीने पहले, यानी सितंबर से ही भारत से बिजली आयात की अनुमति मांगी है।
भारत और नेपाल के बीच पहले से बिजली का द्विपक्षीय कारोबार होता है। जरूरत पड़ने पर भारत नेपाल को बिजली उपलब्ध कराता है, जबकि नेपाल से भी भारत को बिजली की आपूर्ति होती है। मौजूदा स्थिति में नेपाल की बढ़ी हुई जरूरत को देखते हुए भारत अतिरिक्त बिजली निर्यात की संभावनाओं पर काम कर रहा है।
सितंबर से बिजली आयात करना चाहता है नेपाल
आमतौर पर नेपाल भारत से अक्टूबर से बिजली आयात शुरू करता है। इस अवधि में नेपाल में घरेलू बिजली उत्पादन और उपलब्धता पर दबाव बढ़ जाता है। लेकिन इस साल अगस्त में आई बाढ़ ने बिजली से जुड़े बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है।
इसी वजह से नेपाल ने भारत से सितंबर से ही अतिरिक्त बिजली आयात की अनुमति देने का अनुरोध किया है। मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, भारतीय अधिकारी नेपाल की मांग पर मौजूदा नियमों और निर्धारित व्यवस्था के तहत प्रक्रिया आगे बढ़ा रहे हैं।
अतिरिक्त बिजली की खरीद के लिए भारतीय पावर एक्सचेंजों के डे-अहेड मार्केट (DAM) और रियल-टाइम मार्केट (RTM) जैसे विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
बाढ़ से करीब 550 MW बिजली क्षमता प्रभावित
26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ ने नेपाल के कई हिस्सों में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया। बिजली उत्पादन से जुड़े कई प्रोजेक्ट और इकाइयां भी इसकी चपेट में आईं।
उद्योग से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार, बाढ़ के कारण नेपाल की घरेलू बिजली उत्पादन क्षमता में करीब 550 MW की कमी आई है। उत्पादन क्षमता प्रभावित होने का सीधा असर बिजली की उपलब्धता पर पड़ा है।
नेपाल की उत्पादन क्षमता घटने का असर भारत को होने वाले बिजली निर्यात पर भी पड़ा है। पहले नेपाल से भारत को बिजली आपूर्ति का स्तर करीब 950-1,000 MW तक पहुंच गया था। अब यह आपूर्ति घटकर लगभग 400 MW रह गई है।
इस तरह नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा का असर दोनों देशों के बीच चल रहे बिजली कारोबार पर भी दिखाई दे रहा है।
भारत के पावर ग्रिड पर कितना असर?
नेपाल में बिजली उत्पादन घटने के बावजूद भारत के राष्ट्रीय बिजली ग्रिड पर इसका प्रभाव फिलहाल सीमित माना जा रहा है। अधिकारियों और बिजली उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि भारत के पास पर्याप्त उत्पादन क्षमता और मजबूत ग्रिड व्यवस्था है, जिससे इस अस्थायी कमी को आसानी से संभाला जा सकता है।
बिजली मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार, भारत को अपनी घरेलू बिजली जरूरतें पूरी करने के लिए फिलहाल किसी विशेष आपातकालीन खरीद या वैकल्पिक व्यवस्था की आवश्यकता दिखाई नहीं दे रही है।
भारत का बड़ा राष्ट्रीय बिजली ग्रिड, पर्याप्त बिजली उत्पादन क्षमता और उपलब्ध रिजर्व मार्जिन करीब 400 MW की अस्थायी कमी को बिना किसी बड़ी परेशानी के संभालने में सक्षम है।
भारत-नेपाल के बीच चलता है दोतरफा बिजली कारोबार
भारत और नेपाल के बीच बिजली व्यापार केवल एकतरफा नहीं है। दोनों देशों के बीच दोतरफा बिजली कारोबार होता है। परिस्थितियों के अनुसार भारत नेपाल को बिजली निर्यात करता है और नेपाल भी भारत को बिजली उपलब्ध कराता है।
मौजूदा बाढ़ की स्थिति में नेपाल की घरेलू उत्पादन क्षमता प्रभावित होने के कारण उसे भारत से अतिरिक्त बिजली की जरूरत पड़ रही है। यदि आवश्यक मंजूरी और प्रक्रियाएं पूरी होती हैं, तो सितंबर से नेपाल को अतिरिक्त बिजली आपूर्ति शुरू हो सकती है।
नेपाल के लिए भारत की बिजली क्यों महत्वपूर्ण?
नेपाल में बिजली की मांग को पूरा करने के लिए घरेलू उत्पादन के साथ-साथ भारत से होने वाला बिजली आयात भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बाढ़ के कारण जब स्थानीय उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है, तब भारत से अतिरिक्त बिजली मिलना नेपाल के लिए बिजली संकट को नियंत्रित करने में मददगार हो सकता है।
वहीं, भारत के लिए नेपाल की मांग पूरी करना दोनों देशों के बीच बढ़ते ऊर्जा सहयोग का हिस्सा है। मौजूदा घटनाक्रम से यह भी स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के पावर ग्रिड और बिजली बाजार एक-दूसरे के लिए कितने महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।
निष्कर्ष: नेपाल में बाढ़ के कारण करीब 550 MW बिजली उत्पादन क्षमता प्रभावित होने के बाद भारत अतिरिक्त बिजली आपूर्ति की तैयारी कर रहा है। नेपाल ने सितंबर से ही बिजली आयात की अनुमति मांगी है, जबकि सामान्य तौर पर आयात अक्टूबर से शुरू होता है। भारत की मजबूत बिजली व्यवस्था के कारण नेपाल से बिजली निर्यात में आई अस्थायी कमी का घरेलू ग्रिड पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है।


