कोलकाता के करीब 30 साल के एक तकनीकी कर्मचारी की सालाना 1-2 लाख रुपये की कमाई ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। माता-पिता के साथ रहने के कारण उन्हें किराए का खर्च नहीं उठाना पड़ता, इसके बावजूद उनका कहना है कि इतनी सीमित आय में अपनी पसंद की जिंदगी जीना और सुविधाएं जुटाना मुश्किल हो रहा है। उनकी परेशानी सुनकर कई लोगों ने अपनी शुरुआती नौकरी के अनुभव साझा किए और कमाई बढ़ाने के व्यावहारिक तरीके बताए।
कम सैलरी के साथ लंबे समय तक काम करना आज कई युवाओं के लिए चुनौती बनता जा रहा है। कुछ ऐसा ही मामला कोलकाता के एक करीब 30 वर्षीय टेक कर्मचारी का सामने आया है। तकनीकी क्षेत्र में काम करने के बावजूद उनकी सालाना आय महज 1 से 2 लाख रुपये है।
माता-पिता के साथ रहने की वजह से उन्हें घर का किराया नहीं देना पड़ता। इसके बावजूद उनका कहना है कि सीमित आमदनी में जिंदगी का आनंद लेना और अपनी जरूरतों के अलावा दूसरी चीजों पर खर्च करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर लोगों से पूछा कि इतनी कम आय में दूसरे लोग अपने खर्च, करियर और निजी जिंदगी के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं।

उनकी पोस्ट के बाद कई लोगों ने अपने करियर की शुरुआत से जुड़े अनुभव साझा किए। कुछ लोगों ने बताया कि उन्होंने भी बेहद कम वेतन से शुरुआत की थी, लेकिन लगातार नए कौशल सीखने और बेहतर अवसर तलाशने से कुछ वर्षों में उनकी आय कई गुना बढ़ गई।
हफ्ते में साढ़े पांच दिन काम, फिर भी कम कमाई
Reddit पर कर्मचारी ने बताया कि वह सोमवार से शुक्रवार तक रोज करीब 8.5 घंटे काम करते हैं। इसके अलावा शनिवार को भी उन्हें आधे दिन काम करना पड़ता है। यानी सप्ताह का बड़ा हिस्सा नौकरी में बीत जाता है।
काम के घंटों और कम वेतन के बीच संतुलन न बन पाने की वजह से वह अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। यही वजह है कि उन्होंने दूसरे लोगों से जानना चाहा कि कम आय में वे अपने खर्च और निजी जिंदगी को कैसे संभालते हैं।
उनकी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कई लोगों ने कहा कि शुरुआती वेतन को करियर की अंतिम मंजिल मानने के बजाय उसे सीखने और अनुभव हासिल करने के चरण के रूप में देखना चाहिए।
2.4 लाख रुपये से शुरुआत, 9 साल में 40 लाख की कमाई
चर्चा में एक Reddit यूजर ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उसने करीब नौ साल पहले 2.4 लाख रुपये सालाना वेतन से करियर की शुरुआत की थी। समय के साथ उसने अपनी स्किल्स विकसित कीं और बेहतर अवसर तलाशे।
उसके मुताबिक, करीब नौ साल बाद उसकी सालाना आय बढ़कर 40 लाख रुपये हो गई।
उसने सलाह दी कि मौजूदा कमाई से निराश होने के बजाय लगातार नई चीजें सीखने पर ध्यान देना चाहिए। इसके साथ ही जब बाजार में बेहतर अवसर उपलब्ध हों तो नौकरी बदलने से भी नहीं घबराना चाहिए।
इस अनुभव से यह बात सामने आती है कि शुरुआती सैलरी कम होने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि भविष्य में आय भी उतनी ही सीमित रहेगी।
10 हजार रुपये महीने से शुरू किया करियर, अब 15 लाख से ज्यादा कमाई
एक अन्य यूजर ने बताया कि उसने अपने करियर की शुरुआत सिर्फ 10 हजार रुपये प्रति महीने की आय से की थी। यानी उसकी शुरुआती सालाना कमाई करीब 1.2 लाख रुपये थी।
बाद में उसे एहसास हुआ कि बाजार में समान काम करने वाले कई लोग उससे ज्यादा पैसा कमा रहे हैं। इसके बाद उसने अपने कौशल को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया और बेहतर वेतन वाली कंपनियों में जाने के लिए नौकरी बदलता रहा।
उसके अनुसार, लगातार सीखने और बेहतर अवसर तलाशने के बाद उसकी मौजूदा सालाना आय 15 लाख रुपये से ज्यादा हो चुकी है।
आज के समय में 1-2 लाख रुपये सालाना में गुजारा कितना मुश्किल?
Reddit की चर्चा में कुछ लोगों ने महंगाई को भी मुद्दा बनाया। एक यूजर का कहना था कि आज के दौर में 1-2 लाख रुपये सालाना की आय में स्वतंत्र रूप से जीवन चलाना बेहद मुश्किल है।
उसके मुताबिक, कम से कम 3-4 लाख रुपये सालाना की आय तक पहुंचना जरूरी है, क्योंकि 20-30 हजार रुपये महीने की कमाई भी कई शहरों में सिर्फ जरूरी खर्चों को पूरा करने में ही खत्म हो सकती है।
हालांकि, कुछ लोगों ने यह भी कहा कि खर्चों को नियंत्रित करके कम आय में भी कुछ समय तक गुजारा किया जा सकता है। कम कीमत वाले खाने और रोजमर्रा की जरूरतों पर कम खर्च करने जैसे उपायों का भी सुझाव दिया गया।
कम सैलरी वाली नौकरी कब तक करनी चाहिए?
इस चर्चा में एक कर्मचारी ने अलग नजरिया रखा। उसने बताया कि करीब तीन साल पहले उसने 1.5 लाख रुपये सालाना वेतन से नौकरी शुरू की थी। इससे पहले वह उसी कंपनी में करीब 3 हजार रुपये प्रति महीने की इंटर्नशिप कर रहा था।
उसके मुताबिक, कम वेतन वाली नौकरी को तुरंत छोड़ना हमेशा जरूरी नहीं है। अगर उस नौकरी में नए कौशल सीखने, महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर काम करने और वास्तविक अनुभव हासिल करने का मौका मिल रहा है, तो कुछ समय तक वहां रहना करियर के लिए फायदेमंद हो सकता है।
उसने बताया कि उसने दो परियोजनाओं पर शुरुआत से लेकर अंत तक काम किया। उसके लिए इस अनुभव की अहमियत सिर्फ मिलने वाली सैलरी से ज्यादा थी, क्योंकि इससे उसे आगे बेहतर अवसर हासिल करने में मदद मिली।
Reddit की चर्चा से क्या सीख मिलती है?
पूरी चर्चा का सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि कम शुरुआती सैलरी को करियर का अंत नहीं समझना चाहिए। अगर नौकरी में सीखने और कौशल विकसित करने का अवसर मिल रहा है, तो उस अनुभव का इस्तेमाल आगे बेहतर अवसर हासिल करने के लिए किया जा सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह भी नहीं है कि कम वेतन पर अनिश्चितकाल तक काम करते रहना चाहिए। जब किसी कर्मचारी के कौशल और अनुभव बढ़ जाएं, तो उसे बाजार में अपनी वैल्यू को समझना चाहिए और बेहतर वेतन वाली नौकरियों के लिए प्रयास करना चाहिए।
कोलकाता के इस टेक कर्मचारी की परेशानी यह भी दिखाती है कि आज कई युवा कर्मचारियों के सामने सिर्फ नौकरी हासिल करने की चुनौती नहीं है। कम वेतन, बढ़ते खर्च और लंबे कामकाजी घंटों के बीच बेहतर जीवनशैली और करियर ग्रोथ का संतुलन बनाना भी बड़ी चुनौती बन गया है।
ऐसे में करियर के शुरुआती वर्षों में नई स्किल सीखना, अपने काम में विशेषज्ञता हासिल करना, बाजार में उपलब्ध वेतन को समझना और समय-समय पर बेहतर अवसर तलाशना आय बढ़ाने की दिशा में अहम कदम हो सकते हैं।


