Subhash Chandra Mukesh Ambani Controversy: एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने NCLT से जुड़े विवाद को लेकर रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और उनके मीडिया नेटवर्क पर गंभीर आरोप लगाए हैं। चंद्रा ने दावा किया है कि उनके ऊपर ₹22,000 करोड़ के कर्ज से जुड़ा गलत आंकड़ा और कथित तौर पर एकतरफा नैरेटिव चलाया जा रहा है। हालांकि, रिलायंस ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए उन्हें निराधार बताया है।
सुभाष चंद्रा और मुकेश अंबानी के बीच यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब एस्सेल ग्रुप से जुड़े मामलों को लेकर NCLT में कानूनी और वित्तीय गतिविधियां चर्चा में हैं। चंद्रा ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने मामले को लेकर मुकेश अंबानी से सीधे संपर्क करने की कोशिश की और उन्हें पत्र भी लिखा था। उनका कहना है कि जब उनके खिलाफ कथित तौर पर गलत जानकारी सार्वजनिक की जा रही है, तो उनके लिए अपना पक्ष सामने रखना जरूरी हो गया है।
₹22,000 करोड़ के कर्ज के दावे पर क्या बोले सुभाष चंद्रा?
सुभाष चंद्रा ने अपने बयान में सबसे प्रमुख तौर पर ₹22,000 करोड़ के कर्ज से जुड़े आंकड़े पर सवाल उठाया। उनका दावा है कि उनके ऊपर कर्ज की जो रकम बताई जा रही है, वह सही नहीं है और इसे लेकर गलत जानकारी प्रसारित की जा रही है।
चंद्रा ने आरोप लगाया कि रिलायंस से जुड़े कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने उनके खिलाफ ऐसा नैरेटिव तैयार किया, जिसे वह ‘विच हंटिंग’ के तौर पर देखते हैं। उन्होंने TV18, CNBC और News18 जैसे मीडिया संस्थानों का नाम लेते हुए इस कथित कवरेज पर सवाल उठाए।
हालांकि, ये सभी आरोप सुभाष चंद्रा के बयान पर आधारित हैं। रिलायंस ने इन्हें खारिज किया है और कहा है कि उसके मीडिया संस्थानों के खिलाफ लगाए गए आरोपों में कोई आधार नहीं है।
2019 के Zee संकट का भी किया जिक्र
सुभाष चंद्रा ने अपने बयान में 2019 में Zee के सामने आए वित्तीय संकट का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जनवरी 2019 में Zee के शेयर में एक ही दिन में करीब 40 फीसदी की भारी गिरावट देखने को मिली थी।
चंद्रा ने दावा किया कि उस समय कंपनी के शेयरों में आई गिरावट के पीछे अप्रत्यक्ष रूप से कुछ शेल कंपनियों की भूमिका थी। हालांकि, उनके इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि इस बयान से नहीं होती है।
उन्होंने बताया कि उस दौर में वह अपने कर्ज को चुकाने के लिए Zee में हिस्सेदारी बेचने के विकल्प तलाश रहे थे और इसी सिलसिले में उन्होंने मुकेश अंबानी से संपर्क किया था।
मुकेश अंबानी से बातचीत को लेकर क्या कहा?
सुभाष चंद्रा के मुताबिक, Zee से जुड़े संकट के दौरान उन्होंने मुकेश अंबानी से बात करने की कोशिश की थी। चंद्रा ने दावा किया कि बातचीत के दौरान उन्हें कथित तौर पर सलाह दी गई कि बैंकों के पैसे और ब्याज का भुगतान करना जरूरी नहीं है।
यह दावा सुभाष चंद्रा के बयान का हिस्सा है और रिलायंस ने उनके इन आरोपों को खारिज किया है। ऐसे में इस बातचीत से जुड़े दावे को आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
‘मैंने धीरूभाई अंबानी से बहुत कुछ सीखा’
अपने बयान में सुभाष चंद्रा ने मुकेश अंबानी के पिता और रिलायंस के संस्थापक धीरूभाई अंबानी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने धीरूभाई अंबानी से व्यवसाय और जीवन को लेकर बहुत कुछ सीखा है।
हालांकि, चंद्रा ने आरोप लगाया कि मुकेश अंबानी ने अपने पिता के बताए सिद्धांतों को उसी तरह नहीं अपनाया। उन्होंने मुकेश अंबानी को सीधे संबोधित करते हुए अपने बयान में कॉरपोरेट व्यवहार और कारोबारी प्रतिस्पर्धा को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
चंद्रा ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें निशाना बनाया जा रहा है, जबकि उनके पास अब खोने के लिए बहुत कम बचा है। उन्होंने कथित तौर पर मुकेश अंबानी से अपील की कि यदि मनोज मोदी उनके नियंत्रण में हैं, तो उन्हें इस कथित प्रचार को रोकने के लिए कहा जाना चाहिए।
सुभाष चंद्रा ने दी चुप न बैठने की चेतावनी
सुभाष चंद्रा ने अपने बयान में साफ संकेत दिया कि अगर कथित ‘विच हंटिंग’ जारी रही तो वह चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने मुकेश अंबानी से भारत में इस तरह के कथित कॉरपोरेट खेल को रोकने की अपील भी की।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब एस्सेल ग्रुप से जुड़े वित्तीय और कानूनी विवाद पहले से ही सार्वजनिक चर्चा में हैं। इस वजह से चंद्रा के आरोपों ने दोनों कारोबारी समूहों के बीच पुराने मतभेदों को फिर से चर्चा में ला दिया है।
रिलायंस ने सुभाष चंद्रा के आरोपों को बताया निराधार
सुभाष चंद्रा के आरोपों पर रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। कंपनी के प्रवक्ता ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि रिलायंस ग्रुप उनके बयानों से बेहद आहत है।
रिलायंस के अनुसार, एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन द्वारा रिलायंस से जुड़े मीडिया संस्थानों के खिलाफ लगाए गए आरोप और संकेत निराधार हैं। कंपनी ने इन आरोपों को स्वीकार करने से साफ इनकार किया।
हालांकि, रिलायंस ने अपने बयान में सुभाष चंद्रा के कारोबारी योगदान का सम्मान करने की बात भी कही। कंपनी ने उन्हें एक व्यवसायी और उद्यमी के रूप में सम्मान देने की बात कही और उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
क्या है पूरा विवाद?
फिलहाल इस विवाद के केंद्र में तीन प्रमुख बातें हैं—₹22,000 करोड़ के कर्ज से जुड़ा दावा, मीडिया कवरेज को लेकर सुभाष चंद्रा के आरोप और रिलायंस की ओर से इन आरोपों का खंडन।
एक तरफ सुभाष चंद्रा का कहना है कि उनके खिलाफ गलत जानकारी और कथित तौर पर एकतरफा नैरेटिव चलाया जा रहा है। दूसरी तरफ रिलायंस ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए साफ तौर पर खारिज कर दिया है।
ऐसे में इस पूरे मामले में दोनों पक्षों के बयानों को अलग-अलग समझना जरूरी है। जब तक संबंधित आरोपों पर आधिकारिक या न्यायिक स्तर पर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आता, तब तक इन्हें संबंधित पक्षों के दावों और आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।


