Nepal-Tibet Flood: नेपाल और तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहे ईशा फाउंडेशन से जुड़े श्रद्धालुओं का एक समूह भी इस आपदा की चपेट में आया। सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने बताया कि समूह के 77 सदस्य तिब्बत के ग्यिरोंग स्थित इमिग्रेशन सेंटर पर थे, जब अचानक बाढ़ और मलबे ने इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। घटना के बाद से इन लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है।
सद्गुरु ने वीडियो जारी कर जताई चिंता
आध्यात्मिक गुरु और ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर इस घटना पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वह खुद प्रभावित इलाके तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वहां जाने वाले रास्ते बाधित हैं और संचार व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई है।
सद्गुरु ने कहा कि फोन और टेलीकम्युनिकेशन सेवाएं बंद होने के कारण प्रभावित लोगों से संपर्क करना बेहद मुश्किल है। उन्होंने भारतीय, चीनी और अमेरिकी अधिकारियों के माध्यम से घटनास्थल तक पहुंचने की अनुमति हासिल करने की कोशिश की है, ताकि राहत और बचाव अभियान में मदद की जा सके।
80 लोगों के समूह में 77 श्रद्धालुओं से संपर्क टूटा
— Sadhguru (@SadhguruJV) August 27, 2026 सद्गुरु के मुताबिक, जिस समूह की जानकारी सामने आई है, उसमें कुल 80 लोग थे। इनमें 34 पुरुष और 46 महिलाएं शामिल थीं। समूह में अलग-अलग देशों के लोग थे।
बताया गया है कि यह दल कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी करने के बाद वापसी के दौरान ग्यिरोंग के इमिग्रेशन सेंटर पहुंचा था। इसी दौरान अचानक फ्लैश फ्लड और मलबे का तेज बहाव वहां पहुंच गया।
ईशा फाउंडेशन और अलग-अलग रिपोर्टों में 77 श्रद्धालुओं के लापता होने की जानकारी दी गई है, जबकि कुछ रिपोर्टों में पूरे 80 सदस्यीय समूह का उल्लेख किया गया है। इसलिए इस समय 77 का आंकड़ा लापता श्रद्धालुओं के तौर पर अधिक स्पष्ट रूप से सामने आया है।
सुबह 9:05 बजे आया था आखिरी संदेश
सद्गुरु ने बताया कि हादसे से कुछ मिनट पहले तक स्थिति सामान्य थी। समूह के लीडर ने सुबह करीब 9:05 बजे संदेश भेजकर जानकारी दी थी कि वे इमिग्रेशन सेंटर पहुंच चुके हैं और आगे की प्रक्रिया शुरू करने वाले हैं।
इसके कुछ ही मिनट बाद हालात पूरी तरह बदल गए। करीब 9:14 बजे के आसपास समूह से संपर्क टूट गया। इसके बाद लगातार कोशिशों के बावजूद सदस्यों से संपर्क नहीं हो पाया।
सद्गुरु ने बताया कि नेपाल की ओर भी संचार सेवाएं प्रभावित हुई हैं और सड़कें भूस्खलन तथा मलबे के कारण बंद हैं। ऐसे में समूह के सदस्यों की स्थिति के बारे में आधिकारिक जानकारी जुटाना बेहद कठिन हो गया है।
‘हमें भी वहां जाने दो’, भावुक हुए सद्गुरु
वीडियो में सद्गुरु ने कहा कि वह और उनकी टीम प्रभावित क्षेत्र में जाकर राहत एवं बचाव कार्य में मदद करना चाहते हैं। उन्होंने अधिकारियों से वहां पहुंचने की अनुमति देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि जब किसी आपदा में लोग फंसे हों तो सबसे जरूरी है कि किसी तरह घटनास्थल तक पहुंचा जाए और यह पता लगाया जाए कि कौन सुरक्षित है और किसे मदद की जरूरत है।
सद्गुरु ने यह भी कहा कि वह जोखिम की परवाह किए बिना बचाव प्रयासों में सहयोग करने के लिए तैयार हैं। उनके बयान में लापता श्रद्धालुओं के परिवारों की चिंता साफ नजर आई।
हादसे के वक्त इमिग्रेशन सेंटर पर था समूह
ईशा फाउंडेशन की ओर से सामने आई जानकारी के मुताबिक, यात्रा के लिए बनाए गए कई समूहों में से कुछ लोग पहले ही सुरक्षित लौट चुके थे। एक रिपोर्ट के अनुसार, 495 तीर्थयात्री सुरक्षित लौट चुके थे, जबकि कुछ श्रद्धालु अभी तिब्बत और नेपाल में थे।
लापता समूह के सदस्य चीन-नेपाल सीमा के पास स्थित इमिग्रेशन सुविधा पर मौजूद थे। बाढ़ के तेज बहाव के कारण इमारत और आसपास के इलाके को भारी नुकसान पहुंचा।
इस घटना के बाद लापता लोगों के परिवारों में चिंता बढ़ गई है और अधिकारी उनकी स्थिति का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
नेपाल-तिब्बत में बड़ी तबाही, सैकड़ों लोग लापता
नेपाल और तिब्बत के सीमा क्षेत्र में आई इस प्राकृतिक आपदा ने बड़े इलाके को प्रभावित किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, नेपाल की ओर बड़ी संख्या में लोग लापता हैं और कई भारतीय पर्यटकों तथा तीर्थयात्रियों से भी संपर्क नहीं हो पाया है।
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल और तिब्बत में मिलाकर मृतकों की संख्या 160 से अधिक हो चुकी है, जबकि लापता लोगों की संख्या इससे कहीं अधिक बताई जा रही है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, आपदा के बाद 1,300 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
बाढ़ ने कई सड़कें, पुल, मकान और दूसरी इमारतें तबाह कर दी हैं। कई इलाकों में मलबा जमा होने के कारण राहत टीमों के लिए पहुंचना मुश्किल बना हुआ है।
भूकंप नहीं, ग्लेशियर से जुड़ी घटना बनी वजह
शुरुआती रिपोर्टों में इस आपदा से पहले भूकंप आने की बात कही गई थी, लेकिन बाद के वैज्ञानिक विश्लेषण में इसे ग्लेशियर या बर्फ-चट्टान के बड़े हिस्से के खिसकने से जुड़ी घटना बताया गया।
एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के विश्लेषण में फ्लैश फ्लड के पीछे ग्लेशियर से जुड़ी घटना की संभावना सामने आई। अचानक बड़ी मात्रा में पानी और मलबा नदी में पहुंचा, जिसके बाद तेज बहाव ने नीचे के इलाकों में भारी तबाही मचा दी।
राहत और बचाव अभियान के सामने बड़ी चुनौती
आपदा के बाद राहत एवं बचाव अभियान जारी है। लेकिन सड़कें टूटने, संचार व्यवस्था ठप होने और जगह-जगह मलबा जमा होने के कारण बचाव दलों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
लापता श्रद्धालुओं के मामले में भी सबसे बड़ी समस्या यही है कि प्रभावित इलाके से लगातार और भरोसेमंद जानकारी हासिल नहीं हो पा रही है। ऐसे में परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है।
फिलहाल ईशा फाउंडेशन की टीम अधिकारियों के संपर्क में है और लापता लोगों की जानकारी हासिल करने तथा राहत कार्य में शामिल होने की कोशिश कर रही है। सद्गुरु ने भी प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचने की अनुमति देने की अपील की है।
डिस्क्लेमर: लापता लोगों की संख्या और उनकी स्थिति को लेकर राहत एवं बचाव अभियान के दौरान आंकड़े बदल सकते हैं। इस रिपोर्ट में उपलब्ध ताजा आधिकारिक और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर जानकारी दी गई है।


