Tata Power Shares: टाटा पावर के शेयरों में गुरुवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। सिंगापुर की अदालत से कंपनी को बड़ा झटका लगने के बाद शेयर 4% से ज्यादा टूटकर 7 महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच गया। मामला करीब $49 करोड़ यानी लगभग ₹4,700 करोड़ के आर्बिट्रेशन अवॉर्ड से जुड़ा है। आइए 9 प्वाइंट में समझते हैं कि पूरा मामला क्या है, इसकी शुरुआत कब हुई और अब टाटा पावर के सामने क्या विकल्प हैं।
1. टाटा पावर के शेयर में क्यों आई गिरावट?
टाटा पावर के शेयर गुरुवार के कारोबार में 4% से अधिक टूट गए। बीएसई पर शेयर 4.15% की गिरावट के साथ ₹350.20 के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि इंट्रा-डे में यह 4.69% गिरकर ₹348.20 तक पहुंच गया। इस गिरावट के साथ यह निफ्टी 500 के प्रमुख गिरने वाले शेयरों में शामिल हो गया।
2. करीब ₹4,700 करोड़ का मामला क्या है?
कंपनी को यह झटका एक पुराने कारोबारी विवाद से जुड़ा है। सिंगापुर की अदालत ने टाटा पावर की उस चुनौती को खारिज कर दिया, जिसमें कंपनी ने करीब $49 करोड़ के आर्बिट्रेशन अवॉर्ड को चुनौती दी थी। आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल ने पहले क्लेरोस के पक्ष में फैसला सुनाया था।
3. विवाद की शुरुआत कब हुई?
इस मामले की शुरुआत 2013 में हुई थी। उस समय क्लेरोस ने रूस में एक कोयला खदान के लिए टाटा पावर के साथ मिलकर बोली लगाने का प्रस्ताव रखा था। क्लेरोस के अनुमान के मुताबिक इस खदान में करीब $110 करोड़ का कोयला भंडार मौजूद था।
सितंबर 2013 में दोनों कंपनियों ने एक NDA यानी नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट भी किया था। इसका उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच साझा की जाने वाली गोपनीय जानकारी की सुरक्षा करना था।
4. टाटा पावर और क्लेरोस में मतभेद कैसे बढ़े?
साल 2015 में दोनों कंपनियों के बीच प्रस्तावित बोली की लीडरशिप और प्रोजेक्ट के मालिकाना ढांचे को लेकर मतभेद सामने आए। इसके बाद दोनों पक्षों की साझेदारी आगे नहीं बढ़ सकी और 2016 में यह सहयोग खत्म हो गया।
5. रूस की कोयला खदान के लिए बाद में किसने बोली लगाई?
क्लेरोस ने दिसंबर 2017 में रूस में हुई केंद्रीय नीलामी में हिस्सा नहीं लिया और बाद में रूस में अपना कारोबार भी बंद कर दिया। दूसरी तरफ, टाटा पावर ने अपनी रूसी सब्सिडियरी के जरिए उसी कोयला खदान के लिए बाद में बोली लगाई।
टाटा पावर की ओर से यह बोली उस समय लगाई गई जब दोनों कंपनियों के बीच हुआ NDA अपना निर्धारित समय पूरा कर चुका था।
6. टाटा पावर को खदान का लाइसेंस मिलने के बाद क्या हुआ?
टाटा पावर को माइनिंग लाइसेंस हासिल हो गया। हालांकि बाद में कंपनी ने आकलन किया कि यह प्रोजेक्ट कमर्शियल तौर पर फायदेमंद नहीं है। इसके बाद टाटा पावर ने माइनिंग लाइसेंस वापस कर दिया।
यहीं से दोनों पक्षों के बीच विवाद ने कानूनी रूप ले लिया।
7. क्लेरोस ने टाटा पावर पर क्या आरोप लगाया?
साल 2020 में क्लेरोस ने टाटा पावर के खिलाफ आर्बिट्रेशन प्रोसिडिंग्स शुरू कीं। क्लेरोस का आरोप था कि टाटा पावर ने उसके साथ साझा की गई गोपनीय जानकारी का इस्तेमाल किया और उसे प्रोजेक्ट से बाहर रखने के लिए अनुचित तरीके से काम किया।
मामले की सुनवाई के बाद आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल ने क्लेरोस के पक्ष में फैसला सुनाया और टाटा पावर को करीब $49 करोड़ का हर्जाना देने का आदेश दिया।
8. सिंगापुर की अदालत में टाटा पावर को क्या झटका लगा?
टाटा पावर ने साल 2025 में इस आर्बिट्रेशन अवॉर्ड को सिंगापुर की अदालत में चुनौती दी थी। कंपनी ने हर्जाने की रकम के साथ-साथ आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल के मेजारिटी डिसीजन की वैधता पर भी सवाल उठाए थे।
हालांकि अब सिंगापुर की अदालत से कंपनी को राहत नहीं मिली और उसकी चुनौती खारिज कर दी गई। यही खबर निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी और शेयर में तेज गिरावट देखने को मिली।
9. अब टाटा पावर के सामने क्या विकल्प हैं?
रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा पावर 28 दिनों के भीतर इस फैसले के खिलाफ अपील करने की तैयारी कर रही है। यानी अभी कंपनी के पास कानूनी विकल्प पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।
निवेशकों के लिए आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी इस मामले में क्या अगला कदम उठाती है और करीब ₹4,700 करोड़ के संभावित वित्तीय प्रभाव का कंपनी की वित्तीय स्थिति पर कितना असर पड़ता है।
एक साल में कैसी रही Tata Power Share की चाल?
टाटा पावर के शेयरों ने पिछले एक साल में काफी उतार-चढ़ाव देखा है। 27 जनवरी 2026 को शेयर ₹342.35 के भाव पर पहुंचा था, जो इस अवधि का रिकॉर्ड निचला स्तर था। इसके बाद शेयर में जोरदार रिकवरी आई और 28 अप्रैल 2026 को यह ₹464.80 तक पहुंच गया, जो एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल रहा।
यानी जनवरी के निचले स्तर से अप्रैल के हाई तक शेयर में करीब 35.77% की तेजी देखने को मिली थी। हालांकि इसके बाद शेयर पर दबाव बढ़ा और अब सिंगापुर अदालत के फैसले के बाद एक बार फिर तेज गिरावट देखने को मिली है।
निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
टाटा पावर से जुड़े इस विवाद में आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। आर्बिट्रेशन अवॉर्ड, अदालत के फैसले और संभावित अपील के नतीजे कंपनी पर पड़ने वाले वित्तीय प्रभाव को तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले अपनी रिसर्च करें और जरूरत पड़ने पर वित्तीय सलाहकार की सलाह लें। NewsJagran.in किसी भी निवेश को खरीदने या बेचने की सलाह नहीं देता।


