नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। बाढ़ के तेज बहाव में कई लोग बह गए, जबकि कुछ लोगों ने ऐसी परिस्थितियों में जिंदगी बचाई, जिसे किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा सकता। 24 साल के मजदूर बिबेक कुमाल की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने अपनी आंखों के सामने उस मकान को तबाह होते देखा, जहां वह काम कर रहे थे।
Nepal Flash Flood: नेपाल में बुधवार को हिमालयी क्षेत्र और तिब्बत सीमा के पास आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। तेज पानी के साथ कीचड़ और मलबे के बहाव ने कई इलाकों में सड़कों, घरों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। इस आपदा के बीच उन लोगों की कहानियां भी सामने आ रही हैं, जिन्होंने मौत को बेहद करीब से देखा और किसी तरह अपनी जान बचाई।
ऐसी ही कहानी 24 साल के मजदूर बिबेक कुमाल की है। बिबेक उस वक्त बिदुर इलाके में मजदूरी कर रहे थे, जब अचानक तेज आवाज के साथ बाढ़ का पानी उनकी तरफ बढ़ा। वह एक निर्माणाधीन मकान के बाहर शौचालय के लिए गड्ढा खोद रहे थे। तभी ऊपर काम कर रहे उनके साथियों ने उन्हें तुरंत वहां से निकलने के लिए आवाज लगाई।
आम के पेड़ ने बचाई बिबेक की जिंदगी
बिबेक के मुताबिक, वह गड्ढे से बाहर निकलकर भागने लगे, लेकिन कुछ ही पलों में पानी की बेहद तेज धारा ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। उन्होंने इस भयावह मंजर को याद करते हुए बताया कि पानी की विशाल लहर इतनी तेजी से आई, जैसे भूकंप के साथ कोई बड़ी तबाही सामने आ गई हो।
बाढ़ के पानी के साथ कीचड़ और मलबा भी बह रहा था। बिबेक खुद भी पानी के तेज बहाव में बहने लगे। इसी दौरान वह एक आम के पेड़ में जाकर अटक गए। उन्होंने पेड़ को पकड़ लिया और अपनी पूरी ताकत से उससे चिपके रहे।
बिबेक ने बताया कि अगर वह आम का पेड़ नहीं होता तो शायद वह भी पानी के साथ बह जाते। पेड़ से लटके हुए उन्होंने अपनी आंखों के सामने उस मकान को तबाह होते देखा, जहां वह काम कर रहे थे।
बाद में पुलिस की मदद से उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस हादसे में उनके दाहिने पैर में गंभीर चोट आई। पानी के तेज बहाव के साथ आए एक बड़े पत्थर ने भी उन्हें चोट पहुंचाई।
कीचड़ का सैलाब घर में घुसा, पत्नी बह गईं
इस आपदा में कई लोगों ने अपने परिवार के सदस्यों को अपनी आंखों के सामने खो दिया। 68 वर्षीय केशव प्रसाद बराल की कहानी भी बेहद दर्दनाक है।
केशव ने बताया कि अचानक उन्होंने अपने घर की तरफ कीचड़ का एक विशाल सैलाब आते देखा। कीचड़ इतनी तेजी से उनकी ओर बढ़ रहा था कि संभलने का मौका तक नहीं मिला।
जब कीचड़ उनके घर में घुसा तो केशव अपनी पत्नी का हाथ पकड़कर उन्हें छत की ओर ले जाने की कोशिश करने लगे। लेकिन पानी और कीचड़ का तेज बहाव उनकी पत्नी को अपने साथ खींच ले गया।
बाद में केशव को हेलीकॉप्टर की मदद से सुरक्षित निकाला गया। हालांकि उनकी पत्नी का अब तक पता नहीं चल सका है और उनके मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है।
घर बचा, लेकिन पीने का पानी तक नहीं बचा
बाढ़ से प्रभावित एक अन्य बस्ती में रहने वाली दीपिका ने भी इस तबाही को बेहद करीब से देखा। वह सुबह करीब 9:30 बजे अपने घर के बाहर बर्तन धो रही थीं। तभी उन्होंने त्रिशूली नदी का पानी अचानक बेहद तेज गति से बढ़ते देखा।
घर के बाहर होने के कारण वह तुरंत स्थिति को समझ गईं और अपने परिवार को सतर्क कर दिया। इसके बाद परिवार के सदस्य घर की छत पर पहुंच गए।
कुछ ही देर में बाढ़ का पानी और कीचड़ घर की पहली मंजिल में भर गया। परिवार के लोग तो बच गए, लेकिन घर में रखा सामान और जमा की गई पूंजी मलबे में दब गई।
दीपिका के मुताबिक, हालात इतने खराब थे कि उनके पास पीने के लिए एक गिलास पानी तक नहीं बचा था। जिस जगह उनका पानी का मटका रखा रहता था, वहां भी बाढ़ के बाद केवल मलबा दिखाई दे रहा था।
परिवार के कई सदस्यों को आंखों के सामने बहते देखा
बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि कई परिवारों ने अपने करीबियों को अपनी आंखों के सामने पानी में बहते देखा।
पीड़िता कल्पना मल्ला ने बताया कि उन्होंने अपने पिता, मां, बहन और बहन के बच्चों को पानी के तेज बहाव में बहते देखा। वह अपने बेटे के साथ किसी तरह एक मकान की छत पर पहुंचने में कामयाब रहीं।
उनके मुताबिक, उस समय हालात ऐसे थे कि बचने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था। उन्होंने कहा कि बाढ़ अपने साथ सब कुछ बहाकर ले गई, लेकिन वह और उनका बेटा किसी तरह छत पर पहुंचकर अपनी जान बचाने में सफल रहे।
कई इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी
बाढ़ का पानी कम होने के बाद प्रभावित इलाकों में लापता लोगों की तलाश तेज कर दी गई है। कई परिवार अपने रिश्तेदारों की जानकारी हासिल करने के लिए राहत एवं बचाव केंद्रों के बाहर पहुंच रहे हैं।
हेलीकॉप्टरों के जरिए प्रभावित क्षेत्रों में रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस लापता लोगों की जानकारी जुटा रही है और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
फ्लैश फ्लड ने सड़क और बिजली के बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
ग्लेशियर ढहने की आशंका, तबाही का आकलन जारी
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO के शुरुआती विश्लेषण में नेपाल-तिब्बत सीमा के पास रसुवा जिले में आई बाढ़ के पीछे ऊपरी हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर के ढहने की संभावना जताई गई है।
हालांकि इस आपदा के कारणों और नुकसान का अंतिम आकलन अभी जारी है। राहत एवं बचाव अभियान के साथ-साथ लापता लोगों की तलाश भी की जा रही है।
बिबेक कुमाल जैसे लोगों की कहानी बताती है कि ऐसी प्राकृतिक आपदा में कुछ सेकंड भी जिंदगी और मौत के बीच का फर्क बन सकते हैं। बिबेक के लिए वह आम का पेड़ सिर्फ एक पेड़ नहीं था, बल्कि वही उनकी जिंदगी और मौत के बीच आखिरी सहारा बन गया।


