MSME Loan: देश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए कर्ज की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) से कहा है कि वह ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में एमएसएमई तक ज्यादा वित्तीय सहायता पहुंचाने के लिए क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) के व्यापक नेटवर्क का इस्तेमाल करे। इससे छोटे कारोबारियों और उद्यमियों को उनके आसपास ही लोन की सुविधा मिलने की उम्मीद है।
नई दिल्ली: एमएसएमई सेक्टर को अब ज्यादा और आसानी से लोन उपलब्ध कराने की तैयारी है। सरकार का मानना है कि छोटे कारोबारों तक वित्तीय सहायता की पहुंच बढ़ने से मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार को भी गति मिल सकती है। देश की अर्थव्यवस्था में एमएसएमई सेक्टर की अहम भूमिका है और जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी करीब 31 फीसदी बताई जाती है।
SIDBI और RRB मिलकर बढ़ाएंगे लोन की पहुंच
केंद्र सरकार ने SIDBI को निर्देश दिया है कि वह देश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में एमएसएमई को अधिक ऋण उपलब्ध कराने के लिए अपनी गतिविधियों का विस्तार करे। इसके लिए क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) के व्यापक नेटवर्क का इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया है।
बुधवार को जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव संजय लोहिया ने SIDBI और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में एमएसएमई सेक्टर तक वित्तीय सहायता की पहुंच बढ़ाने और दोनों संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल पर चर्चा हुई।
संजय लोहिया ने कहा कि SIDBI और RRB की ताकतों को एक साथ लाने की जरूरत है। SIDBI को एमएसएमई की वित्तीय जरूरतों और इस सेक्टर की कार्यप्रणाली की बेहतर समझ है, जबकि RRB का नेटवर्क छोटे शहरों, कस्बों और गांवों तक फैला हुआ है।
ऐसे में दोनों संस्थानों के सहयोग से उन छोटे कारोबारियों तक भी कर्ज पहुंचाया जा सकता है, जिनके लिए बड़े बैंकिंग नेटवर्क तक पहुंच बनाना मुश्किल हो सकती है।
गांव-कस्बों के कारोबारियों को होगा फायदा
इस पहल का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में काम करने वाले छोटे कारोबारियों को मिल सकता है। RRB की स्थानीय मौजूदगी का इस्तेमाल करके एमएसएमई के लिए वित्तीय सेवाओं को ज्यादा सुलभ बनाया जा सकता है।
कर्ज की उपलब्धता बढ़ने से छोटे उद्यमी कारोबार बढ़ाने, नई मशीनरी खरीदने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नए रोजगार पैदा करने के लिए पूंजी जुटा सकेंगे।
सरकार का फोकस सिर्फ मौजूदा कारोबारों तक कर्ज पहुंचाने पर नहीं, बल्कि देश के छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा देने पर भी है।
RRB के लोन पोर्टफोलियो में आएगी विविधता
सरकार के मुताबिक, इस सहयोग से क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को भी फायदा होगा। अभी RRB का एक बड़ा हिस्सा कृषि क्षेत्र को ऋण देने से जुड़ा है। एमएसएमई को ज्यादा कर्ज देने से उनके लोन पोर्टफोलियो में विविधता आएगी।
इससे RRB की व्यावसायिक गतिविधियां मजबूत हो सकती हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि के साथ-साथ गैर-कृषि कारोबारों को भी वित्तीय समर्थन मिल सकेगा।
डिजिटल अंडरराइटिंग पर भी जोर
बैठक में नियम-आधारित डिजिटल अंडरराइटिंग प्रणाली के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया। ऐसी व्यवस्था से लोन लेने वाले कारोबारियों के जोखिम का आकलन अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकता है।
सरकार का मानना है कि डिजिटल प्रक्रियाओं के इस्तेमाल से लोन की प्रक्रिया को तेज करने के साथ परिसंपत्तियों की गुणवत्ता बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है।
एमएसएमई के लिए लोन प्रक्रिया जितनी सरल और तेज होगी, छोटे उद्यमियों के लिए कारोबार के विस्तार के फैसले लेना उतना ही आसान होगा।
रोजगार मेलों में भी शामिल होंगे RRB
सरकार ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को रोजगार मेलों में सक्रिय भागीदारी करने का सुझाव भी दिया है। राज्य सरकारों की ओर से आयोजित रोजगार मेलों के जरिए RRB छोटे कारोबारियों और एमएसएमई उद्यमियों के बीच वित्तीय जागरूकता बढ़ा सकते हैं।
इसके अलावा, बैंकों से भारत को अगली पीढ़ी के विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाने को कहा गया है।
MSME सेक्टर के लिए क्यों अहम है यह कदम?
एमएसएमई सेक्टर देश में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण आधार है। छोटे कारोबारों को समय पर पर्याप्त कर्ज मिलने से वे अपने कारोबार का विस्तार कर सकते हैं। इसके साथ ही उत्पादन, निवेश और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
SIDBI की विशेषज्ञता और RRB के ग्रामीण नेटवर्क का इस्तेमाल सरकार की इस रणनीति का अहम हिस्सा है। अगर दोनों संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल बनता है, तो गांवों और छोटे कस्बों में मौजूद कारोबारियों के लिए औपचारिक बैंकिंग चैनल से कर्ज हासिल करना पहले के मुकाबले आसान हो सकता है।
कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम एमएसएमई वित्तपोषण को ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे छोटे कारोबारियों को पूंजी मिलने के साथ देश के विनिर्माण और रोजगार क्षेत्र को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।


