प्याज की बढ़ती कीमतों के बीच महाराष्ट्र के लासलगांव रेलवे स्टेशन पर किसानों ने दिल्ली जा रही ‘कांदा एक्सप्रेस’ को करीब एक घंटे तक रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि किसानों से खरीदे गए अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज के बजाय खराब और सड़ा हुआ प्याज दिल्ली भेजा जा रहा है। पुलिस और RPF के हस्तक्षेप के बाद मालगाड़ी को रवाना किया गया।
नासिक: देश के कई हिस्सों में प्याज की कीमतें बढ़कर करीब 60-70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। बढ़ती कीमतों से उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए केंद्र सरकार अपने बफर स्टॉक से प्याज की सप्लाई बड़े शहरों में बढ़ा रही है। इसी क्रम में महाराष्ट्र के नासिक स्थित लासलगांव रेलवे स्टेशन से दिल्ली के लिए भेजी जा रही ‘कांदा एक्सप्रेस’ बुधवार को विवादों में आ गई।
महाराष्ट्र के किसानों ने प्याज की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाते हुए मालगाड़ी को रोक दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि ट्रेन में अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज के बजाय खराब और सड़े हुए प्याज को लोड किया जा रहा है। इस विरोध के कारण मालगाड़ी करीब एक घंटे तक लासलगांव रेलवे गुड्स यार्ड में खड़ी रही।
प्याज की कीमत 60-70 रुपये किलो तक पहुंची
घरेलू बाजार में प्याज की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। कई बाजारों में प्याज का भाव करीब 60 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। कीमतों में इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर पड़ रहा है।
प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने और बाजार में अतिरिक्त सप्लाई उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार अपने बफर स्टॉक से प्याज जारी कर रही है। सरकार का उद्देश्य बड़े शहरों में प्याज की उपलब्धता बढ़ाकर कीमतों पर दबाव कम करना है।
इसी पहल के तहत NAFED और NCCF ने लासलगांव से दिल्ली के लिए प्याज भेजने की व्यवस्था की। प्याज से लदी मालगाड़ी को ‘कांदा एक्सप्रेस’ या ‘अनियन एक्सप्रेस’ के तौर पर भेजा जा रहा था।
ट्रेन पहले ही करीब 16 घंटे लेट थी
जानकारी के मुताबिक, दिल्ली के लिए रवाना होने वाली यह मालगाड़ी पहले ही लगभग 16 घंटे की देरी का सामना कर चुकी थी। इसके पीछे जरूरी कागजी कार्रवाई और प्याज की पैकिंग में हुई देरी को वजह बताया गया।
बुधवार को जब ट्रेन को दिल्ली के लिए रवाना करने की तैयारी चल रही थी, तभी ‘प्रहार’ संगठन से जुड़े कार्यकर्ता गणेश निंबालकर ने NCCF के अधिकारियों से सवाल-जवाब शुरू किया।
निंबालकर ने ट्रेन में लोड किए जा रहे प्याज की गुणवत्ता पर आपत्ति जताई। उनका आरोप था कि किसानों से खरीदे गए अच्छे प्याज के बजाय खराब और सड़े हुए प्याज को दिल्ली भेजा जा रहा है।
ट्रेन के सामने बैठकर किया विरोध
मामला उस समय बढ़ गया जब गणेश निंबालकर ट्रेन के सामने बैठकर विरोध करने लगे। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर खराब प्याज को दिल्ली भेजा गया तो वह कुछ ही समय में और खराब हो सकता है।
प्रदर्शनकारी की ओर से यह भी दावा किया गया कि खराब गुणवत्ता वाले प्याज की सप्लाई से किसानों के हित प्रभावित हो सकते हैं। उनका तर्क था कि बाजार में बड़ी मात्रा में खराब या कम गुणवत्ता वाला प्याज आने से किसानों की अच्छी उपज के बाजार भाव पर भी असर पड़ सकता है।
विरोध के चलते प्याज से लदी मालगाड़ी करीब एक घंटे तक लासलगांव रेलवे गुड्स यार्ड में रुकी रही।
पुलिस और RPF ने संभाला मोर्चा
मालगाड़ी रोके जाने की सूचना मिलने के बाद RPF अधिकारियों और लासलगांव पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को रेलवे ट्रैक से हटाने की कोशिश की।
हालांकि, गणेश निंबालकर अपनी मांगों और आरोपों पर कायम रहे। इस दौरान गुड्स यार्ड में कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बनी रही।
प्रदर्शनकारियों की आपत्ति प्याज की गुणवत्ता के साथ-साथ किसानों को मिलने वाले बाजार भाव को लेकर भी थी। उनका कहना था कि किसानों की उपज की गुणवत्ता और उचित कीमत सुनिश्चित किए बिना केवल बाजार में प्याज की सप्लाई बढ़ाने से किसानों की समस्या का समाधान नहीं होगा।
दोपहर करीब 3 बजे दिल्ली के लिए रवाना हुई ‘कांदा एक्सप्रेस’
विरोध प्रदर्शन और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार प्याज से लदी मालगाड़ी को आगे बढ़ाया गया। जानकारी के अनुसार, दोपहर करीब 3 बजे ‘कांदा एक्सप्रेस’ दिल्ली के लिए रवाना हुई।
इस तरह करीब एक घंटे तक चले विरोध के बाद ट्रेन की आवाजाही बहाल हो गई। हालांकि, प्याज की गुणवत्ता को लेकर उठाए गए सवालों ने सरकार के बफर स्टॉक और किसानों के हितों के बीच संतुलन को लेकर बहस जरूर तेज कर दी है।
दिल्ली के अलावा इन शहरों में भी भेजा जाएगा बफर स्टॉक का प्याज
केंद्र सरकार सिर्फ दिल्ली में ही बफर स्टॉक से प्याज उपलब्ध कराने की तैयारी नहीं कर रही है। जानकारी के मुताबिक, कोलकाता, गुवाहाटी, चेन्नई और कोच्चि जैसे अन्य बड़े महानगरों में भी बफर स्टॉक का प्याज भेजने की तैयारी की जा रही है।
सरकार की कोशिश है कि अधिक सप्लाई के जरिए उन बाजारों में प्याज की उपलब्धता बढ़ाई जाए जहां कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। इससे खुदरा कीमतों में नरमी आने और उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, दूसरी ओर प्याज उत्पादक किसानों के बीच इस कदम को लेकर नाराजगी भी सामने आई है। किसानों और किसान संगठनों की चिंता यह है कि बाजार में सरकारी स्टॉक से बड़ी मात्रा में प्याज आने पर मंडियों में कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।
किसानों के उचित भाव का मुद्दा भी उठा
गणेश निंबालकर ने चेतावनी दी है कि अगर किसानों की उपज के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करने के बजाय बाजार कीमतों को प्रभावित करने की कोशिश की गई, तो ‘प्रहार’ संगठन अपने आंदोलन को और तेज कर सकता है।
यानी प्याज की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ उपभोक्ताओं को महंगे प्याज से राहत देना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ प्याज उत्पादक किसानों को उनकी उपज का उचित भाव दिलाना भी अहम है।
बफर स्टॉक से प्याज जारी करने का मकसद जहां ग्राहकों को राहत देना है, वहीं लासलगांव में हुआ विरोध यह दिखाता है कि इस कदम के असर को लेकर किसानों की अपनी चिंताएं हैं।
सरकार के सामने कीमत और किसान हित के बीच संतुलन की चुनौती
प्याज जैसी रोजमर्रा की जरूरी सब्जी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का असर सीधे आम परिवारों पर पड़ता है। इसलिए सरकार की ओर से बफर स्टॉक का इस्तेमाल कर बाजार में सप्लाई बढ़ाना कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश का हिस्सा है।
लेकिन लासलगांव की घटना ने एक महत्वपूर्ण सवाल भी सामने रखा है—क्या बाजार में प्याज की अतिरिक्त सप्लाई बढ़ाने के साथ किसानों की आय और उनकी उपज के उचित मूल्य का भी ध्यान रखा जा रहा है?
‘कांदा एक्सप्रेस’ को लेकर हुआ विवाद फिलहाल पुलिस के हस्तक्षेप के बाद समाप्त हो गया और ट्रेन दिल्ली के लिए रवाना हो गई। मगर प्याज की गुणवत्ता, किसानों को मिलने वाले भाव और बढ़ती खुदरा कीमतों को लेकर विवाद आगे भी जारी रहने की संभावना है।
आने वाले दिनों में दिल्ली और अन्य महानगरों में बफर स्टॉक के प्याज की सप्लाई बढ़ने के बाद बाजार कीमतों पर इसका कितना असर पड़ता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही किसानों की ओर से उठाई गई गुणवत्ता और उचित मूल्य की मांग पर सरकार और संबंधित एजेंसियों का रुख भी अहम रहेगा।


