Sugar Price: देश में चीनी की बढ़ती मांग और उत्पादन में कमी के बीच सरकार ने घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने एक्सपोर्ट के लिए रखी गई करीब 3.5 लाख टन चीनी को घरेलू बाजार में बेचने की अनुमति दे दी है। इसके अलावा करीब 10 लाख टन चीनी के ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की भी मंजूरी दी गई है। माना जा रहा है कि इन फैसलों से आने वाले त्योहारी सीजन में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
देश में चीनी की कीमतों में पिछले कुछ समय में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली थी। हालांकि, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में कीमतों में नरमी शुरू हो गई है। ऐसे में अगर घरेलू बाजार में अतिरिक्त चीनी जल्द पहुंचती है, तो ग्राहकों को आने वाले महीनों में और राहत मिल सकती है।
घरेलू बाजार में जल्द पहुंच सकती है 3.5 लाख टन चीनी
भारत में चीनी की घरेलू मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने एक्सपोर्ट के लिए निर्धारित कुछ चीनी को अब देश के बाजार में बेचने की अनुमति दी है। इसके तहत करीब 3.5 लाख टन चीनी घरेलू बाजार में उपलब्ध हो सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह स्टॉक करीब एक सप्ताह के भीतर बाजार में पहुंचना शुरू हो सकता है। इतनी मात्रा देश की लगभग पांच दिनों की कुल चीनी खपत के बराबर मानी जा रही है। ऐसे में अतिरिक्त सप्लाई से बाजार में मौजूद कमी कुछ हद तक दूर हो सकती है।
चीनी की उपलब्धता बढ़ने का सीधा असर कीमतों पर पड़ सकता है। खासकर ऐसे समय में जब त्योहारी सीजन नजदीक है और मिठाई, बेकरी, पैकेज्ड फूड तथा अन्य उत्पादों में चीनी की मांग बढ़ने वाली है।
इस साल चीनी की कमी क्यों हुई?
भारत दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक देशों में शामिल है। इसके बावजूद इस साल घरेलू बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। इसका एक बड़ा कारण चीनी उत्पादन का अनुमान से कम रहना है।
कई प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में मौसम की स्थिति उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। बारिश के पैटर्न में बदलाव के साथ कुछ इलाकों में फसल पर बीमारी का असर भी देखने को मिला। इससे गन्ने की पैदावार और उसकी गुणवत्ता प्रभावित हुई है।
जब उत्पादन घटता है और दूसरी तरफ खपत बढ़ती है, तो बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। यही वजह है कि चीनी की कीमतों में तेजी देखने को मिली और सरकार को घरेलू सप्लाई बढ़ाने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा।
त्योहारी सीजन में बढ़ती है चीनी की मांग
आने वाले महीनों में चीनी की खपत बढ़ने की संभावना है। अगस्त के अंत से लेकर जनवरी तक देश में कई बड़े त्योहार और शादी-ब्याह का सीजन रहता है। इस दौरान मिठाइयों, बेकरी उत्पादों, पेय पदार्थों और पैकेज्ड फूड की मांग बढ़ जाती है।
त्योहारी सीजन में घरेलू खपत बढ़ने का असर चीनी की कीमतों पर भी पड़ सकता है। अगर इस दौरान पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध नहीं रहा, तो कीमतों में दोबारा तेजी आने की आशंका रहती है।
इसी स्थिति को देखते हुए सरकार ने पहले से ही सप्लाई बढ़ाने के कदम उठाए हैं। एक्सपोर्ट वाली चीनी को घरेलू बाजार में बेचने की अनुमति और ड्यूटी फ्री इंपोर्ट इसी रणनीति का हिस्सा है।
सरकार ने लिए दो बड़े फैसले
चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार ने मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
1. 10 लाख टन ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की मंजूरी
सरकार ने करीब 10 लाख टन चीनी के ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की अनुमति दी है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में अतिरिक्त सप्लाई उपलब्ध कराना और कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद करना है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पूरा 10 लाख टन आयात निश्चित रूप से होगा। बाजार की कीमतें, अंतरराष्ट्रीय चीनी के भाव, आयात की लागत और घरेलू उपलब्धता जैसे कई कारक मिलर्स और रिफाइनर्स के फैसले को प्रभावित करेंगे।
2. एक्सपोर्ट के लिए रखी चीनी घरेलू बाजार में बेचने की अनुमति
सरकार ने रिफाइनर्स को कुछ ऐसी रिफाइंड चीनी घरेलू बाजार में बेचने की अनुमति दी है, जिसे पहले विदेश भेजे जाने की योजना थी।
इसके तहत करीब 3.5 लाख टन चीनी घरेलू बाजार में आ सकती है। इससे तत्काल सप्लाई बढ़ाने में मदद मिलेगी और बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर दबाव कम हो सकता है।
चीनी के दाम पहले ही हुए कम
सरकार के फैसलों का असर चीनी की कीमतों पर दिखाई देने लगा है। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रकाश नाइकनावरे के मुताबिक, देश में एक्स-मिल चीनी की औसत कीमत पिछले सप्ताह करीब ₹67 प्रति किलो तक पहुंच गई थी।
अब इसमें काफी गिरावट आई है और कीमत करीब ₹54-55 प्रति किलो तक आ गई है।
20 अगस्त को ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की घोषणा के बाद बाजार में राहत देखने को मिली। सप्लाई बढ़ने की उम्मीद से कारोबारियों के बीच कीमतों को लेकर तेजी की धारणा कमजोर हुई है।
अगर सरकार की ओर से घरेलू बाजार में अतिरिक्त चीनी जल्द उपलब्ध होती है और आयात की प्रक्रिया भी आगे बढ़ती है, तो आने वाले समय में कीमतों में और नरमी देखने को मिल सकती है।
पूरा 10 लाख टन आयात होना जरूरी नहीं
सरकार ने भले ही 10 लाख टन चीनी के ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की अनुमति दी है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक पूरा कोटा इस्तेमाल होने की संभावना कम है।
ट्रेडर्स, एनालिस्ट्स और मिलर्स के आकलन के अनुसार, अक्टूबर के अंत तक करीब 3 लाख से 6 लाख टन चीनी का आयात हो सकता है।
इसकी एक बड़ी वजह घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में आई नरमी है। जब घरेलू कीमतें नीचे आती हैं, तो आयात करके चीनी बेचने का मार्जिन कम हो जाता है। ऐसे में मिलर्स और रिफाइनर्स के लिए पूरा आयात कोटा इस्तेमाल करना उतना आकर्षक नहीं रह जाता।
यानी सरकार की अनुमति अधिकतम 10 लाख टन आयात की है, लेकिन वास्तविक आयात बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
ब्राजील से सप्लाई आने तक मिलेगी राहत
बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि एक्सपोर्ट के लिए रखी गई चीनी को घरेलू बाजार में उतारने से फिलहाल सप्लाई की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, यह कदम लंबे समय के लिए घरेलू उत्पादन की कमी को पूरी तरह खत्म नहीं करता। आने वाले समय में भारत को आयात की जरूरत बनी रह सकती है, खासकर तब तक जब तक ब्राजील से चीनी की नई खेप भारत पहुंचनी शुरू नहीं हो जाती।
इस बीच घरेलू बाजार में अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध कराने का उद्देश्य कीमतों में अचानक तेजी को रोकना और त्योहारी सीजन की मांग को पूरा करना है।
रिफाइनर्स को ड्यूटी फ्री कच्ची चीनी आयात की भी सुविधा
भारत में रिफाइनर्स को Advance Authorisation के तहत कच्ची चीनी को ड्यूटी फ्री आयात करने की अनुमति भी है। हालांकि, इस व्यवस्था के तहत आयात की गई चीनी को प्रोसेस करने के बाद निर्धारित नियमों के अनुसार एक्सपोर्ट करना होता है।
इस व्यवस्था और मौजूदा ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की अनुमति के बीच अंतर को समझना जरूरी है। सरकार के ताजा कदम का उद्देश्य घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाना है, जबकि Advance Authorisation के तहत आयात मुख्य रूप से एक्सपोर्ट से जुड़ी व्यवस्था का हिस्सा है।
आम ग्राहकों को क्या फायदा होगा?
अगर घरेलू बाजार में 3.5 लाख टन अतिरिक्त चीनी जल्दी पहुंचती है और ड्यूटी फ्री इंपोर्ट के तहत भी पर्याप्त मात्रा में चीनी आती है, तो सप्लाई की स्थिति बेहतर हो सकती है।
इसका फायदा खास तौर पर त्योहारी सीजन में मिल सकता है। चीनी की कीमतों में ज्यादा तेजी नहीं होने पर मिठाई, बेकरी और अन्य खाद्य उत्पाद बनाने की लागत पर भी दबाव कुछ कम रह सकता है।
हालांकि, खुदरा बाजार में कीमतों का असर तुरंत और पूरी तरह दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है। थोक और एक्स-मिल कीमतों में बदलाव के बाद खुदरा बाजार तक उसका असर पहुंचने में समय लग सकता है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल सरकार का फोकस घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने पर है। एक तरफ एक्सपोर्ट वाली चीनी को घरेलू बाजार में बेचने की अनुमति दी गई है, वहीं दूसरी तरफ ड्यूटी फ्री इंपोर्ट का रास्ता भी खोला गया है।
इन दोनों कदमों से त्योहारी सीजन के दौरान सप्लाई बढ़ने की उम्मीद है। अगर आयात और घरेलू सप्लाई समय पर बाजार में आती है, तो चीनी की कीमतों में मौजूदा नरमी आगे भी बनी रह सकती है।
हालांकि, कीमतों की दिशा आगे घरेलू उत्पादन, आयात की वास्तविक मात्रा, अंतरराष्ट्रीय चीनी कीमतों और त्योहारी सीजन की मांग पर निर्भर करेगी। इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि चीनी लंबे समय तक सस्ती रहेगी, लेकिन सरकार के ताजा फैसलों से तत्काल सप्लाई दबाव कम होने की उम्मीद जरूर बढ़ी है।


