Nepal Flash Flood: नेपाल और चीन के सीमावर्ती इलाकों में आई अचानक बाढ़ के बाद दोनों देशों के संबंधों को लेकर बहस तेज हो गई है। तिब्बत की ओर से आए पानी के तेज बहाव ने नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में भारी तबाही मचाई। इस बीच नेपाली पत्रकार परशुराम काफ्ले ने चीन पर समय रहते पूर्व चेतावनी नहीं देने का आरोप लगाते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
नेपाली पत्रकार ने चीन पर साधा निशाना
विदेश और सामरिक मामलों के वरिष्ठ नेपाली पत्रकार परशुराम काफ्ले ने बाढ़ की घटना को लेकर चीन के खिलाफ अप्रत्यक्ष रूप से कड़ा रुख अपनाया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में उन्होंने नेपाल के उत्तरी पड़ोसी की ओर इशारा करते हुए कहा कि इतनी बड़ी आपदा से पहले नेपाल को पर्याप्त चेतावनी नहीं मिलना चिंता का विषय है।
काफ्ले के मुताबिक, नेपाल लगातार अपने पड़ोसियों की सुरक्षा चिंताओं को गंभीरता से लेता रहा है। इसके बावजूद उनका आरोप है कि उत्तरी सीमा की ओर से आने वाले संकटों के मामले में नेपाल को पर्याप्त और समय पर जानकारी नहीं मिल पाती।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर समय रहते बाढ़ की चेतावनी मिल जाती, तो क्या नेपाल में होने वाले नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सकता था?
‘एकतरफा प्यार की कीमत नेपाल ही क्यों चुकाए?’
काफ्ले ने नेपाल और चीन के संबंधों को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उनका कहना है कि नेपाल लंबे समय से चीन की चिंताओं और जरूरतों का ध्यान रखता आया है, लेकिन जब चीनी क्षेत्र से उत्पन्न होने वाले किसी संकट का असर नेपाल पर पड़ता है तो स्थिति अलग नजर आती है।
उन्होंने अपनी पोस्ट में सवाल किया कि आखिर इस कथित ‘एकतरफा प्यार’ की कीमत अकेले नेपाल को ही क्यों चुकानी पड़े?
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि पत्रकार का यह बयान एक आरोप और व्यक्तिगत टिप्पणी है। इससे यह स्वतः साबित नहीं होता कि बाढ़ चीन की किसी कार्रवाई का परिणाम थी या चीन ने जानबूझकर चेतावनी नहीं दी।
भोटेकोशी नदी में अचानक बढ़ा पानी
बाढ़ की घटना नेपाल के चीन से लगे रसुवा जिले में सामने आई। रिपोर्टों के अनुसार, बुधवार सुबह तिब्बती क्षेत्र की तरफ से अचानक पानी का तेज बहाव नेपाल की ओर आया और इसका असर भोटेकोशी नदी तथा आसपास के इलाकों में दिखाई दिया।
अचानक बढ़े जलस्तर ने सीमावर्ती टिमुरे और स्याप्रु बेसी जैसे क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित किया। तेज पानी की चपेट में सड़कें, वाहन, इमारतें और अन्य बुनियादी ढांचा आने की खबर है।
सीमावर्ती इलाका होने के कारण यहां अचानक आने वाली बाढ़ का असर काफी गंभीर हो सकता है। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में कुछ ही समय में नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए बहुत कम समय मिलता है।
सेना और पुलिस ने संभाला मोर्चा
आपदा के बाद नेपाल सरकार ने प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य और खोज अभियान को गति देने के निर्देश दिए।
रेस्क्यू ऑपरेशन में नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को लगाया गया है। सुरक्षाबलों की टीमें प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित निकालने और नुकसान का आकलन करने में जुटी हैं।
प्रशासन की ओर से स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। शुरुआती दौर में बाढ़ से हुए नुकसान और संभावित हताहतों की पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं थी, इसलिए अंतिम आंकड़ों के लिए आधिकारिक अपडेट का इंतजार जरूरी है।
चीन-नेपाल के बीच अर्ली वार्निंग सिस्टम पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर सीमा पार आपदा प्रबंधन और अर्ली वार्निंग सिस्टम की जरूरत को चर्चा में ला दिया है। सीमा के एक हिस्से में अचानक जलस्तर बढ़ने पर दूसरे हिस्से में रहने वाले लोगों को समय रहते जानकारी मिलना बेहद महत्वपूर्ण होता है।
नेपाल और चीन जैसे पहाड़ी सीमा साझा करने वाले देशों के लिए बाढ़, भूस्खलन और ग्लेशियर से जुड़ी घटनाओं की निगरानी तथा सूचना साझा करना खास महत्व रखता है।
अगर किसी संभावित खतरे की जानकारी पहले उपलब्ध हो, तो स्थानीय प्रशासन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने, सड़कों को बंद करने और राहत दलों को पहले से तैयार करने जैसे कदम उठा सकता है।
क्या बाढ़ के लिए चीन जिम्मेदार है?
यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। किसी आपदा के बाद पूर्व चेतावनी में कमी और बाढ़ के वास्तविक कारण को अलग-अलग देखना जरूरी है।
किसी पत्रकार द्वारा चीन पर चेतावनी नहीं देने का आरोप लगाए जाने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि बाढ़ चीन की वजह से आई। इसके लिए जल प्रवाह, मौसम संबंधी परिस्थितियों, बांध या जलाशय से जुड़े आंकड़ों और दोनों देशों की आधिकारिक सूचनाओं की स्वतंत्र जांच जरूरी होगी।
फिलहाल इस घटना का सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि सीमा पार अचानक आने वाली बाढ़ से लोगों को समय रहते कैसे बचाया जाए और दोनों देशों के बीच आपदा संबंधी सूचना साझा करने की व्यवस्था को कितना मजबूत किया जाए।
नेपाल-चीन रिश्तों के लिए बढ़ सकती है चुनौती
बाढ़ की इस घटना ने नेपाल में चीन के साथ संबंधों को लेकर नई बहस जरूर शुरू कर दी है। नेपाल लंबे समय से भारत और चीन दोनों के साथ अपने संबंधों में संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता रहा है।
ऐसे में यदि सीमावर्ती आपदाओं के दौरान समय पर सूचना साझा नहीं होने की शिकायतें बढ़ती हैं, तो इसका असर दोनों देशों के बीच भरोसे पर पड़ सकता है।
हालांकि, इस पूरे मामले में आगे आने वाले सरकारी बयान, मौसम और जल संसाधन संबंधी आंकड़े तथा जांच रिपोर्ट ज्यादा महत्वपूर्ण होंगी। इन्हीं से यह स्पष्ट हो सकेगा कि बाढ़ का वास्तविक कारण क्या था और क्या समय रहते नेपाल को कोई चेतावनी दी गई थी।
नोट: इस खबर में चीन की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों को आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है। स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि के बिना इन्हें तथ्य के तौर पर नहीं माना जाना चाहिए।


