UP Expressway Projects: उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने ₹24,000 करोड़ से अधिक के बड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में दो नए एक्सप्रेसवे, सुल्तानपुर में इंडस्ट्रियल-लॉजिस्टिक्स क्लस्टर और 11 बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स से जुड़े प्रस्तावों को हरी झंडी मिली है। सरकार का फोकस एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार के साथ-साथ इनके आसपास औद्योगिक निवेश और रोजगार के अवसर तैयार करने पर है।
गंगा एक्सप्रेसवे पहुंचेगा हरिद्वार, ₹10,761 करोड़ होंगे खर्च
कैबिनेट ने ₹10,761 करोड़ की अनुमानित लागत से गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत छह लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे विकसित किया जाएगा। भविष्य में इसे आठ लेन तक विस्तारित करने का प्रावधान भी रखा जाएगा।
इस परियोजना की पूरी लागत उत्तर प्रदेश सरकार वहन करेगी। इसमें केंद्र सरकार की वित्तीय भागीदारी प्रस्तावित नहीं है। एक्सप्रेसवे के विस्तार से बिजनौर और हरिद्वार के बीच सड़क कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।
वर्तमान में इस रूट पर यातायात के लिए मुख्य रूप से NH-34 यानी मेरठ-बिजनौर-हरिद्वार हाईवे पर निर्भरता है। नया एक्सप्रेसवे तैयार होने के बाद बिजनौर को लखनऊ और प्रदेश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला एक्सप्रेसवे नेटवर्क और मजबूत हो सकता है।
प्रयागराज से हरिद्वार तक बनेगा अहम कॉरिडोर
गंगा एक्सप्रेसवे का हरिद्वार तक विस्तार केवल कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण नहीं है। इससे धार्मिक पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
हरिद्वार के जुड़ने के बाद एक्सप्रेसवे नेटवर्क प्रयागराज और हरिद्वार जैसे दो प्रमुख गंगा तटीय शहरों के बीच तेज और नियंत्रित सड़क संपर्क उपलब्ध कराएगा। इससे उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से और पूर्वी हिस्से के बीच यात्रा आसान होने के साथ पर्यटन गतिविधियों को भी फायदा मिल सकता है।
अब इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार की जाएगी। इसके बाद निर्माण से जुड़े अगले चरणों पर काम आगे बढ़ेगा।
₹7,968 करोड़ का झांसी लिंक एक्सप्रेसवे भी मंजूर
योगी कैबिनेट ने ₹7,968.30 करोड़ की अनुमानित लागत वाले झांसी लिंक एक्सप्रेसवे को भी मंजूरी दी है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी BIDA क्षेत्र और झांसी के आसपास विकसित हो रहे डिफेंस कॉरिडोर को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी देना है।
इस परियोजना का खर्च भी उत्तर प्रदेश सरकार उठाएगी और केंद्र से वित्तीय भागीदारी का प्रस्ताव नहीं है।
सरकार की योजना बुंदेलखंड के उभरते औद्योगिक क्षेत्रों को प्रदेश के दूसरे हिस्सों और देश के प्रमुख बाजारों से बेहतर सड़क नेटवर्क के जरिए जोड़ने की है। इससे माल की आवाजाही तेज होने और लॉजिस्टिक्स लागत को बेहतर ढंग से मैनेज करने में मदद मिल सकती है।
एक्सप्रेसवे के निर्माण से प्रत्यक्ष रोजगार के अलावा इसके आसपास औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने पर अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।
सुल्तानपुर में ₹272 करोड़ का मैन्युफैक्चरिंग-लॉजिस्टिक्स क्लस्टर
कैबिनेट ने सुल्तानपुर में ₹272.25 करोड़ के निवेश से इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (IMLC) के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को भी मंजूरी दी है।
यह क्लस्टर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के नजदीक विकसित किया जाएगा। एक्सप्रेसवे की निकटता के कारण यहां स्थापित होने वाली औद्योगिक इकाइयों को तेज सड़क कनेक्टिविटी का लाभ मिल सकता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। निर्माण एजेंसी के चयन के लिए ग्लोबल बिड आमंत्रित की जाएगी। सरकार को उम्मीद है कि इस क्लस्टर के जरिए मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में नए निवेश आकर्षित होंगे।
11 बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स को भी प्रोत्साहन
इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ राज्य कैबिनेट ने 11 बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स के लिए भी प्रोत्साहन को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में कुल प्रस्तावित निवेश ₹5,500 करोड़ से अधिक बताया गया है।
इनमें से आठ परियोजनाओं के लिए करीब ₹2,901.97 करोड़ के निवेश पर उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट एंड एम्प्लॉयमेंट प्रमोशन पॉलिसी-2022 के तहत लेटर ऑफ कंफर्ट जारी करने की मंजूरी दी गई है।
इन परियोजनाओं का विस्तार गौतम बुद्ध नगर (नोएडा), हमीरपुर, हाथरस, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, मथुरा और उन्नाव जैसे जिलों तक है।
प्रमुख औद्योगिक निवेश
| कंपनी | जिला | प्रस्तावित निवेश |
|---|---|---|
| सूर्या ग्लोबल सुपर फ्लेक्सिफिल्म्स | गौतम बुद्ध नगर | ₹605.37 करोड़ |
| शाल्विस स्पेशियलिटीज | हमीरपुर | ₹297.30 करोड़ |
| साउंड कास्टिंग्स | हाथरस | ₹225 करोड़ |
| वृंदावन बॉटलर्स | बाराबंकी | ₹436.12 करोड़ |
| जुआरी एनविएन बायोएनर्जी | लखीमपुर खीरी | ₹294.72 करोड़ |
| पसवारा पेपर्स | हाथरस | ₹315 करोड़ |
| CRD फूड्स एंड बेवरेजेज | मथुरा | ₹363.94 करोड़ |
| माउंट एवरेस्ट ब्रेवरीज | उन्नाव | ₹363.52 करोड़ |
पात्रता के आधार पर इन परियोजनाओं को नीति के तहत नेट SGST और कैपिटल सब्सिडी समेत विभिन्न प्रोत्साहन मिल सकते हैं।
तीन और प्रोजेक्ट्स में ₹2,606 करोड़ का निवेश
कैबिनेट ने तीन अन्य औद्योगिक परियोजनाओं के लिए भी लेटर ऑफ कंफर्ट को मंजूरी दी है। इनका कुल प्रस्तावित निवेश ₹2,606.04 करोड़ है। ये परियोजनाएं बिजनौर, उन्नाव और कानपुर देहात में स्थापित की जाएंगी।
उन्नाव में बनेगी एल्युमिनियम बेवरेज कैन फैक्ट्री
Canpack India उन्नाव में करीब ₹1,573.62 करोड़ का निवेश करेगी। कंपनी एल्युमिनियम बेवरेज कैन बनाने की इकाई स्थापित करेगी।
यह प्लांट करीब 26 हेक्टेयर क्षेत्र में UPEIDA द्वारा विकसित IMLC इंडस्ट्रियल कॉरिडोर क्षेत्र में लगाया जाएगा। इसकी अनुमानित वार्षिक उत्पादन क्षमता करीब 130 करोड़ यूनिट होगी।
बिजनौर में बनेगा फ्रेंच फ्राइज प्लांट
Agristo Masa बिजनौर में करीब ₹794.27 करोड़ का निवेश करेगी। कंपनी अपने मौजूदा पोटैटो फ्लेक्स कारोबार के विस्तार के साथ फ्रेंच फ्राइज बनाने की यूनिट स्थापित करेगी।
प्रस्तावित प्लांट की अधिकतम स्थापित क्षमता 75,000 टन प्रति वर्ष होगी। कंपनी की मौजूदा पोटैटो फ्लेक्स उत्पादन क्षमता करीब 7,332 टन सालाना बताई गई है।
कानपुर देहात में प्लास्टिक प्रोडक्ट्स का उत्पादन
Supreme Industries कानपुर देहात में करीब ₹238.15 करोड़ का निवेश करेगी। यहां वैल्यू-एडेड प्लास्टिक बिल्डिंग सॉल्यूशन उत्पादों का निर्माण किया जाएगा।
कंपनी की स्थापना 1942 में हुई थी और यह भारत की प्रमुख प्लास्टिक प्रोसेसिंग कंपनियों में शामिल है।
एक्सप्रेसवे के साथ इंडस्ट्रियल कॉरिडोर पर फोकस
उत्तर प्रदेश सरकार के इन फैसलों से राज्य की इंफ्रास्ट्रक्चर रणनीति की दिशा भी स्पष्ट होती है। सरकार अब एक्सप्रेसवे को सिर्फ परिवहन का माध्यम नहीं बल्कि औद्योगिक विकास के इंजन के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है।
झांसी लिंक एक्सप्रेसवे को बुंदेलखंड के औद्योगिक और डिफेंस कॉरिडोर से जोड़ने की योजना है। सुल्तानपुर का IMLC पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी का लाभ उठाएगा। वहीं गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक विस्तार से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरिद्वार के बीच आर्थिक एवं पर्यटन संपर्क मजबूत हो सकता है।
किन क्षेत्रों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
इन परियोजनाओं का संभावित असर उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है।
बुंदेलखंड: झांसी लिंक एक्सप्रेसवे से औद्योगिक और डिफेंस कॉरिडोर को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।
पूर्वांचल: सुल्तानपुर में इंडस्ट्रियल-लॉजिस्टिक्स क्लस्टर से मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स निवेश को बढ़ावा मिल सकता है।
पश्चिमी यूपी: गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक विस्तार से बिजनौर और आसपास के क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है।
औद्योगिक क्षेत्र: 11 बड़े प्रोजेक्ट्स के जरिए नोएडा से लेकर उन्नाव, मथुरा, हाथरस और लखीमपुर खीरी तक निवेश का दायरा बढ़ने की उम्मीद है।
रोजगार और निवेश पर क्या होगा असर?
बड़े एक्सप्रेसवे और औद्योगिक परियोजनाओं का असर केवल सड़क कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं रहता। इनके आसपास वेयरहाउसिंग, ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर और छोटे कारोबार के लिए भी अवसर बन सकते हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए निवेशकों के लिए लॉजिस्टिक्स को आसान बनाना और औद्योगिक गतिविधियों को प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाना है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और सहायक उद्योगों के विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
क्या बदलेगा उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर में?
कुल मिलाकर, ₹24,000 करोड़ से अधिक के इन प्रस्तावों में एक्सप्रेसवे, औद्योगिक क्लस्टर और मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट्स को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश दिखाई देती है।
गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार विस्तार से पश्चिमी यूपी और धार्मिक पर्यटन को फायदा मिल सकता है, जबकि झांसी लिंक एक्सप्रेसवे बुंदेलखंड के औद्योगिक और डिफेंस सेक्टर को नई कनेक्टिविटी दे सकता है। दूसरी ओर, सुल्तानपुर और अन्य जिलों में प्रस्तावित औद्योगिक निवेश राज्य के छोटे और उभरते शहरों को नए आर्थिक केंद्रों के रूप में विकसित करने में मदद कर सकता है।
उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के मुताबिक, कैबिनेट के फैसले एक्सप्रेसवे विस्तार और औद्योगिक विकास को साथ लेकर चलने की सरकार की रणनीति को दर्शाते हैं। सरकार को उम्मीद है कि बेहतर सड़क नेटवर्क के जरिए निवेश, व्यापार, रोजगार और पर्यटन को गति मिलेगी।


