Share Market Volatile: घरेलू शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार के दौरान जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी दिखाई दी, लेकिन ऊपरी स्तर पर बिकवाली हावी होने से दोनों प्रमुख इंडेक्स अपनी बढ़त गंवाने लगे। एक समय सेंसेक्स डे-हाई से करीब 286 अंक नीचे फिसल गया, जबकि निफ्टी की शुरुआती पूरी बढ़त गायब हो गई और इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गया।
हालांकि, व्यापक बाजार में माहौल अपेक्षाकृत मजबूत बना हुआ है। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में करीब आधे फीसदी की तेजी देखने को मिल रही है। ऐसे में बाजार की मौजूदा चाल को लेकर निवेशकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
सेंसेक्स और निफ्टी में क्या हुआ?
सुबह करीब 11:10 बजे सेंसेक्स 131.04 अंक यानी 0.17% की बढ़त के साथ 77,787.13 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 10.70 अंक यानी 0.04% की गिरावट के साथ 24,323.85 पर था।
इंट्रा-डे कारोबार में सेंसेक्स ने 330.75 अंक की छलांग लगाकर 77,986.84 का हाई बनाया था। हालांकि, ऊपरी स्तरों पर बिकवाली के कारण यह हाई से करीब 285.66 अंक नीचे फिसलकर 77,701.18 तक पहुंच गया।
इसी तरह निफ्टी भी शुरुआती कारोबार में 44.05 अंक चढ़कर 24,378.60 तक पहुंचा था, लेकिन बाद में 84.35 अंक तक टूटकर 24,294.25 पर आ गया। यानी शुरुआती तेजी के बाद बाजार में मुनाफावसूली और बिकवाली का दबाव साफ नजर आया।
बाजार में क्यों है इतनी Volatility?
घरेलू शेयर बाजार की चाल पर इस समय कई घरेलू और वैश्विक फैक्टर्स एक साथ असर डाल रहे हैं। जहां कुछ संकेत बाजार को ऊपर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं कुछ निगेटिव संकेत निवेशकों को सतर्क कर रहे हैं।
1. सरकारी बैंकों में तेजी से बाजार को सहारा
सेक्टर के हिसाब से देखें तो पब्लिक सेक्टर बैंकिंग शेयरों में मजबूत खरीदारी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत बनी हुई है। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में 1% से ज्यादा की तेजी देखने को मिल रही है।
सरकारी बैंकों में खरीदारी से बाजार के व्यापक रुझान को सपोर्ट मिल रहा है। हालांकि, दूसरी तरफ आईटी और ऑटो शेयरों में बिकवाली ने बेंचमार्क इंडेक्स की तेजी को सीमित कर दिया है। इन दोनों सेक्टरों में कमजोरी के चलते सेंसेक्स और निफ्टी ऊपरी स्तरों पर टिक नहीं पा रहे हैं।
इस तरह सेक्टरों के बीच अलग-अलग दिशा में चल रही ट्रेडिंग बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा रही है।
2. India VIX में गिरावट से मिली राहत
बाजार में Volatility का सबसे अहम संकेत India VIX को माना जाता है। बुधवार को इसमें नरमी देखने को मिली, जिससे बाजार को कुछ राहत मिली है।
फिलहाल India VIX करीब 2.39% गिरकर 10.81 के स्तर पर है। सामान्य तौर पर VIX में तेजी का मतलब होता है कि निकट अवधि में बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव की आशंका है। वहीं VIX में गिरावट बाजार में अपेक्षाकृत कम घबराहट का संकेत देती है।
हालांकि, सिर्फ VIX में गिरावट के आधार पर बाजार की दिशा तय नहीं की जा सकती। दूसरे घरेलू और वैश्विक संकेत भी इंडेक्स की चाल को प्रभावित कर रहे हैं।
3. कच्चे तेल की कीमतों में नरमी
बाजार के लिए एक और राहत की खबर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट है। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 2% टूटकर 86 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में क्रूड की कीमतों में नरमी से भारत के आयात बिल और व्यापक स्तर पर महंगाई के दबाव को लेकर कुछ राहत मिल सकती है।
यही वजह है कि कच्चे तेल में गिरावट को भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। हालांकि, दूसरी तरफ वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम इस तस्वीर को कभी भी बदल सकता है।
4. ईरान पर अमेरिका की सख्ती ने बढ़ाई चिंता
बाजार पर दबाव बनाने वाला एक प्रमुख फैक्टर अमेरिका और ईरान से जुड़ा घटनाक्रम है। अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर अपनी सख्ती बढ़ाई है और ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों को भी चेतावनी दी है।
ईरान से जुड़े प्रतिबंधों का असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक व्यापार, ऊर्जा बाजार और भू-राजनीतिक जोखिम पर भी पड़ सकता है।
निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि अमेरिका की आगे की कार्रवाई क्या होती है और इसका कच्चे तेल तथा वैश्विक बाजारों पर कितना असर पड़ता है। इसी अनिश्चितता के कारण घरेलू बाजार में ऊपरी स्तरों पर सतर्कता बनी हुई है।
5. एशियाई बाजारों से मिला पॉजिटिव सपोर्ट
घरेलू बाजार को फिलहाल ज्यादातर एशियाई बाजारों से भी सपोर्ट मिल रहा है। एशियाई बाजारों में सकारात्मक रुख के कारण भारतीय शेयर बाजार की शुरुआती धारणा मजबूत रही।
ताइवान वेटेड इंडेक्स में करीब 1.5% की तेजी रही, जबकि दक्षिण कोरिया का KOSPI करीब 1% मजबूत हुआ। जापान का Nikkei 225, हॉन्ग कॉन्ग का Hang Seng, चीन का Shanghai Composite और थाईलैंड का SET Composite भी करीब आधे फीसदी या उससे अधिक की बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए।
वहीं इंडोनेशिया का Jakarta Composite लगभग सपाट रहा।
एशियाई बाजारों की मजबूती से भारतीय इक्विटी मार्केट के सेंटीमेंट को सहारा मिला, लेकिन घरेलू स्तर पर आईटी और ऑटो शेयरों में कमजोरी तथा ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली ने इस तेजी को सीमित कर दिया।
बाजार की मौजूदा तस्वीर क्या बता रही है?
बुधवार के कारोबार में बाजार की दिशा फिलहाल किसी एक तरफ साफ नहीं दिख रही है। एक तरफ पीएसयू बैंक, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी दिखाई दे रही है, जबकि दूसरी तरफ आईटी और ऑटो जैसे प्रमुख सेक्टरों में दबाव बना हुआ है।
इसके अलावा कच्चे तेल की नरमी और India VIX में गिरावट बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हैं। वहीं ईरान को लेकर अमेरिका की सख्ती और वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितता निवेशकों को सतर्क बनाए हुए है।
यही वजह है कि सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी आने के बाद तुरंत बिकवाली देखने को मिल रही है। फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों, सेक्टरवार खरीदारी और विदेशी बाजारों की दिशा पर बनी हुई है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
मौजूदा बाजार में तेज उतार-चढ़ाव को देखते हुए निवेशकों को सिर्फ एक-दो संकेतों के आधार पर ट्रेडिंग या निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। बाजार की दिशा पर घरेलू आर्थिक आंकड़ों के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमत, वैश्विक बाजारों की चाल, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी असर डाल सकते हैं।
खासकर शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए बाजार में अचानक आने वाली तेजी और गिरावट जोखिम बढ़ा सकती है। इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले कंपनी के फंडामेंटल, वैल्यूएशन और अपनी जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है।
डिस्क्लेमर
यह लेख बाजार में मौजूदा गतिविधियों और उपलब्ध आंकड़ों की जानकारी देने के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। NewsJagran.in किसी भी शेयर या निवेश में पैसा लगाने की सलाह नहीं देता।


