Market Outlook: भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ समय से दबाव देखने को मिला है, लेकिन अब बाजार की तस्वीर धीरे-धीरे बदलती नजर आ रही है। कंपनियों की अर्निंग्स में सुधार, लार्जकैप शेयरों में बढ़ता भरोसा और विदेशी निवेशकों के फ्लो में सुधार से Nifty 50 को आगे सपोर्ट मिल सकता है। हालांकि, एक्सिस कैपिटल का मानना है कि बाजार में अचानक तेज उछाल की संभावना फिलहाल कम है और निफ्टी धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ सकता है।
भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाले दिनों में कंपनियों की कमाई और विदेशी निवेशकों का रुख सबसे अहम फैक्टर रहने वाला है। एक्सिस कैपिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर और हेड ऑफ इक्विटीज रमन जौहर के मुताबिक, निफ्टी 50 में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल सकता है। इसकी प्रमुख वजह कंपनियों की अर्निंग्स में हो रहा सुधार है।
हालांकि, बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती यह है कि विदेशी निवेशकों की ओर से भारत में आने वाली पूंजी का बड़ा हिस्सा आईपीओ यानी प्राइमरी मार्केट में जा रहा है। ऐसे में सेकेंडरी मार्केट में सीधे खरीदारी सीमित रहने पर निफ्टी की तेजी भी एक दायरे में रह सकती है।
Nifty 50 में धीरे-धीरे तेजी की उम्मीद
रमन जौहर के अनुसार, निफ्टी 50 के लिए मौजूदा स्तरों पर करीब 24,000 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट बना हुआ है। बाजार में कंपनियों की कमाई में सुधार होने के साथ-साथ निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हो रहा है।
पिछले दो-तीन वर्षों में पहली बार ऐसा माहौल बन रहा है, जब निवेशक एक बार फिर लार्जकैप कंपनियों की ग्रोथ को लेकर सकारात्मक नजर आ रहे हैं। बाजार को उम्मीद है कि बड़ी कंपनियों की आय में आगे भी डबल डिजिट ग्रोथ बनी रह सकती है।
यही वजह है कि निफ्टी में आगे धीरे-धीरे ऊपर की चाल देखने को मिल सकती है। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में अचानक बड़ी रैली की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी।
75 फीसदी स्टॉक्स ने उम्मीद के मुताबिक दिया प्रदर्शन
बाजार में रिकवरी के संकेत सिर्फ कुछ चुनिंदा बड़े शेयरों तक सीमित नहीं हैं। एक्सिस कैपिटल के कवरेज में शामिल करीब 75 फीसदी स्टॉक्स ने उम्मीद के मुताबिक या उससे बेहतर प्रदर्शन किया है।
यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पता चलता है कि बाजार में सुधार का दायरा व्यापक हो रहा है। यानी केवल चुनिंदा लार्जकैप शेयर ही नहीं, बल्कि अलग-अलग सेक्टर और मार्केट कैप वाले शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी लौट रही है।
अगर कंपनियों की कमाई में सुधार का यह सिलसिला आगे भी जारी रहता है तो इसका असर शेयरों के वैल्यूएशन और निफ्टी की दिशा पर भी देखने को मिल सकता है।
लार्जकैप शेयरों पर बढ़ा निवेशकों का भरोसा
पिछले कुछ वर्षों में बाजार में लार्जकैप और मिडकैप शेयरों के प्रदर्शन को लेकर अलग-अलग चरणों में बदलाव देखने को मिला। अब निवेशकों का ध्यान एक बार फिर बड़ी और मजबूत कंपनियों की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
जौहर के मुताबिक, निवेशकों को भरोसा है कि लार्जकैप कंपनियां आने वाले समय में डबल डिजिट ग्रोथ हासिल कर सकती हैं। कंपनियों के कारोबार में सुधार और बेहतर अर्निंग्स से बाजार में भरोसा मजबूत होने की संभावना है।
अगर अर्निंग्स ग्रोथ उम्मीद के मुताबिक बनी रहती है तो निफ्टी को भी इसका फायदा मिल सकता है। हालांकि, इसके लिए विदेशी निवेशकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण होगी।
घरेलू कंजम्प्शन सेक्टर पर Axis Capital का भरोसा
रमन जौहर ने घरेलू कंजम्प्शन को बाजार की सबसे महत्वपूर्ण थीम में से एक बताया है। उनके मुताबिक, कंजम्प्शन कंपनियों में पिछले करीब दो वर्षों में सबसे मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ देखने को मिली है।
खास तौर पर डिस्क्रेशनरी कंजम्प्शन, पेंट्स, क्विक सर्विस रेस्टोरेंट्स, न्यू एज कंपनियां, होटल्स और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में मांग मजबूत बनी हुई है।
शहरी और प्रीमियम कंजम्प्शन की ग्रोथ भी तेज बनी हुई है। इसका मतलब है कि देश के शहरी इलाकों में प्रीमियम प्रोडक्ट्स और सेवाओं पर खर्च करने की क्षमता और इच्छा अभी भी मजबूत है।
अगर घरेलू खपत में मजबूती बनी रहती है तो इसका सीधा फायदा इन सेक्टर्स की कंपनियों के रेवेन्यू और प्रॉफिट ग्रोथ को मिल सकता है। यही वजह है कि आने वाले समय में घरेलू कंजम्प्शन थीम बाजार के लिए अहम बनी रह सकती है।
रियल एस्टेट सेक्टर का आउटलुक भी सकारात्मक
रियल एस्टेट सेक्टर को लेकर भी एक्सिस कैपिटल का नजरिया सकारात्मक है। देश के सात प्रमुख शहरों में घरों की बिक्री में सालाना आधार पर करीब 11 फीसदी की ग्रोथ देखने को मिली है।
हालांकि, इस अवधि में नए घरों के लॉन्च में करीब 17 फीसदी की कमी आई है। इसका मतलब है कि डेवलपर्स की ओर से नई सप्लाई जोड़ने की रफ्तार फिलहाल बिक्री की तुलना में कमजोर है।
रमन जौहर का मानना है कि नए लॉन्च में आई सुस्ती आने वाले समय में कम हो सकती है। अगर बिक्री की रफ्तार बनी रहती है और नई परियोजनाओं की लॉन्चिंग बढ़ती है तो रियल एस्टेट सेक्टर में गतिविधियां और मजबूत हो सकती हैं।
रियल एस्टेट में बढ़ती मांग का फायदा इससे जुड़े दूसरे सेक्टर्स को भी मिल सकता है। खासकर सीमेंट, बिल्डिंग मटेरियल, कंस्ट्रक्शन और होम इम्प्रूवमेंट से जुड़ी कंपनियों के लिए मजबूत हाउसिंग डिमांड सकारात्मक संकेत दे सकती है।
मानसून के बाद सीमेंट सेक्टर को मिल सकता है फायदा
रियल एस्टेट के साथ सीमेंट सेक्टर पर भी नजर बनी हुई है। मानसून के दौरान निर्माण गतिविधियों की रफ्तार कुछ प्रभावित हो सकती है, लेकिन मौसम में सुधार के बाद कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी बढ़ने की उम्मीद रहती है।
अगर रियल एस्टेट में नई परियोजनाओं की शुरुआत और इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियां तेज होती हैं तो सीमेंट की मांग को भी सपोर्ट मिल सकता है।
इसलिए आने वाले महीनों में रियल एस्टेट और सीमेंट जैसे सेक्टर्स बाजार के लिए महत्वपूर्ण थीम बन सकते हैं।
विदेशी निवेशकों के रुख में आया सुधार
भारतीय बाजार के लिए एक और सकारात्मक संकेत विदेशी निवेशकों यानी FPI/FII के फ्लो में सुधार है। पिछले दो महीनों में विदेशी निवेशकों का फ्लो सकारात्मक रहा है।
यह बदलाव इसलिए अहम है क्योंकि विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भारतीय बाजार पर दबाव बनाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल रही है। अब अगर उनके निवेश का रुख लगातार सकारात्मक रहता है तो बाजार को अतिरिक्त सपोर्ट मिल सकता है।
हालांकि, रमन जौहर का मानना है कि केवल फ्लो के सकारात्मक होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि विदेशी निवेशक पूरी तरह भारतीय बाजार में वापस लौट चुके हैं।
इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि विदेशी पूंजी का एक बड़ा हिस्सा प्राइमरी मार्केट यानी आईपीओ में जा रहा है।
विदेशी निवेशकों का 40 फीसदी निवेश IPO में
अगस्त में भारत में विदेशी निवेशकों द्वारा किए गए कुल निवेश का करीब 40 फीसदी हिस्सा प्राइमरी मार्केट यानी आईपीओ में गया है। जुलाई में यह आंकड़ा करीब 50 फीसदी था।
इससे साफ है कि विदेशी निवेशकों की भारत में दिलचस्पी जरूर बढ़ी है, लेकिन उनका पैसा सीधे स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कंपनियों के शेयर खरीदने के बजाय आईपीओ में भी जा रहा है।
प्राइमरी और सेकेंडरी मार्केट के बीच पूंजी के लिए यह प्रतिस्पर्धा निफ्टी की तेजी को सीमित कर सकती है। अगर विदेशी निवेशक लगातार आईपीओ में बड़ी रकम लगाते हैं तो सेकेंडरी मार्केट में आने वाली पूंजी अपेक्षाकृत कम रह सकती है।
Nifty में तेजी के बावजूद क्यों रह सकती है सीमित?
यही वह सबसे बड़ा कारण है जिसकी वजह से एक्सिस कैपिटल फिलहाल निफ्टी में अचानक बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं कर रहा है।
एक तरफ कंपनियों की अर्निंग्स में सुधार हो रहा है, लार्जकैप शेयरों पर भरोसा बढ़ रहा है और विदेशी निवेशकों का फ्लो भी बेहतर हुआ है। दूसरी तरफ विदेशी निवेश का बड़ा हिस्सा आईपीओ बाजार में जा रहा है।
अगर कंपनियों की कमाई मजबूत होती है लेकिन सेकेंडरी मार्केट में विदेशी पूंजी का प्रवाह सीमित रहता है, तो निफ्टी की तेजी भी धीरे-धीरे आगे बढ़ सकती है।
इसका मतलब यह नहीं है कि बाजार में तेजी की संभावना खत्म हो गई है। बल्कि संकेत यह हैं कि बाजार में धीरे-धीरे और व्यापक रिकवरी देखने को मिल सकती है।
एशिया में भारत अभी विदेशी निवेशकों की पहली पसंद नहीं
विदेशी निवेशकों की ओर से भारत में निवेश बढ़ने के बावजूद एक महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत अभी एशिया में उनके लिए सबसे पसंदीदा निवेश डेस्टिनेशन नहीं बना है।
इसलिए आगे बाजार की दिशा तय करने में वैश्विक परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण रहेंगी। विदेशी निवेशकों का पैसा किन एशियाई बाजारों में जाता है, डॉलर की चाल कैसी रहती है और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर क्या रुख रहता है, इन सभी कारकों का असर भारतीय बाजार पर पड़ सकता है।
ऐसे में घरेलू कंपनियों की मजबूत अर्निंग्स भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक आधार तैयार कर सकती हैं, लेकिन विदेशी पूंजी का प्रवाह निफ्टी की तेजी की रफ्तार तय करने वाला महत्वपूर्ण फैक्टर बना रहेगा।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
एक्सिस कैपिटल के इस आउटलुक से संकेत मिलता है कि भारतीय शेयर बाजार में रिकवरी की संभावनाएं बनी हुई हैं। कंपनियों की अर्निंग्स में सुधार, लार्जकैप शेयरों पर बढ़ता भरोसा, घरेलू कंजम्प्शन की मजबूती और रियल एस्टेट में बनी मांग बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हैं।
हालांकि, निवेशकों को यह भी ध्यान रखना होगा कि विदेशी निवेशकों की पूंजी का बड़ा हिस्सा आईपीओ बाजार में जाने से सेकेंडरी मार्केट में तेजी की रफ्तार सीमित रह सकती है।
कुल मिलाकर, एक्सिस कैपिटल का नजरिया यह है कि Nifty 50 में आगे धीरे-धीरे ऊपर की चाल देखने को मिल सकती है, लेकिन फिलहाल किसी तेज और एकतरफा रैली की उम्मीद कम है। 24,000 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट बना हुआ है और कंपनियों की अर्निंग्स में सुधार बाजार की अगली दिशा के लिए सबसे अहम ट्रिगर हो सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख बाजार विशेषज्ञ के दिए गए आउटलुक और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


