UP News: उत्तर प्रदेश में अब ₹100 करोड़ से ज्यादा लागत वाली बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की गुणवत्ता पर IIT के विशेषज्ञ नजर रखेंगे। IIT कानपुर, IIT-BHU वाराणसी और IIT रुड़की को अलग-अलग डिवीजन की जिम्मेदारी दी गई है।
UP News: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। अब ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाली सड़क, पुल, सीवरेज और जलापूर्ति जैसी प्रमुख परियोजनाओं की तकनीकी गुणवत्ता की जांच थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट (TPQA) के जरिए कराई जाएगी। इसके लिए देश के प्रतिष्ठित IIT संस्थानों के विशेषज्ञों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
नई व्यवस्था के तहत IIT कानपुर, IIT-BHU वाराणसी और IIT रुड़की के विशेषज्ञ परियोजनाओं की सिर्फ अंतिम स्थिति नहीं देखेंगे, बल्कि निर्माण शुरू होने से लेकर काम पूरा होने तक अलग-अलग चरणों में तकनीकी गुणवत्ता की समीक्षा करेंगे। सरकार का उद्देश्य निर्माण के दौरान ही कमियों को पहचानना और समय रहते उन्हें दूर करना है।
शुरुआत से अंत तक होगी प्रोजेक्ट की निगरानी
Unnao, Uttar Pradesh: Just 12 days after its inauguration, a large section of the main route of the Lucknow-Kanpur Greenfield National Elevated Expressway, built at a cost of 4200 crore rupees, has sunk due to rains. Following the emergence of a video of the road collapse on… pic.twitter.com/xfpN8UbD2z
— IANS (@ians_india) July 26, 2026 इस व्यवस्था में किसी सड़क, पुल या दूसरी बड़ी परियोजना के तैयार होने का इंतजार नहीं किया जाएगा। IIT के विशेषज्ञ प्रोजेक्ट के अलग-अलग चरणों में तकनीकी मानकों की जांच करेंगे।
इसमें मुख्य रूप से ये बिंदु शामिल होंगे—
- परियोजना के डिजाइन की तकनीकी समीक्षा
- निर्माण में इस्तेमाल की जा रही तकनीक की जांच
- निर्माण सामग्री की गुणवत्ता का परीक्षण
- निर्धारित मानकों और नियमों का पालन
- निर्माण कार्य की सुरक्षा व्यवस्था
- परियोजना के अलग-अलग चरणों में गुणवत्ता की जांच
- काम की प्रगति के दौरान तकनीकी खामियों की पहचान
इसका सीधा फायदा यह होगा कि निर्माण पूरा होने के बाद किसी बड़ी कमी का पता लगने की स्थिति को कम किया जा सकेगा। अगर किसी चरण में गुणवत्ता से जुड़ी समस्या सामने आती है तो उसे उसी समय ठीक करने का प्रयास किया जाएगा।
IIT कानपुर को 8 डिवीजन की जिम्मेदारी
सरकारी व्यवस्था के मुताबिक, IIT कानपुर को उत्तर प्रदेश के आठ डिवीजन में आने वाली पात्र बड़ी परियोजनाओं की तकनीकी गुणवत्ता जांच की जिम्मेदारी दी गई है।
इनमें कानपुर, लखनऊ, बांदा, प्रयागराज, अयोध्या, आगरा, झांसी और देवीपाटन डिवीजन शामिल हैं। इन क्षेत्रों में ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाली संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की जांच IIT कानपुर के विशेषज्ञों द्वारा की जाएगी।
IIT-BHU वाराणसी के जिम्मे ये डिवीजन
IIT-BHU वाराणसी को भी पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई है। इसके तहत बस्ती, गोरखपुर, आजमगढ़, वाराणसी और मिर्जापुर डिवीजन में आने वाली बड़ी परियोजनाओं की गुणवत्ता की निगरानी की जाएगी।
इन क्षेत्रों में सड़क, पुल, जलापूर्ति और सीवरेज जैसी परियोजनाओं में तकनीकी मानकों की जांच पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
IIT रुड़की को पांच डिवीजन की जिम्मेदारी
वहीं IIT रुड़की को उत्तर प्रदेश के पांच डिवीजन में बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की गुणवत्ता जांच की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, मेरठ और अलीगढ़ शामिल हैं।
इस तरह राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बड़े प्रोजेक्ट्स की स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा के लिए विशेषज्ञ संस्थानों की मदद ली जाएगी।
₹100 करोड़ से ज्यादा लागत वाले प्रोजेक्ट पर फोकस
नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसकी लागत सीमा है। ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाली प्रमुख परियोजनाएं थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट के दायरे में आएंगी।
ऑडिट में केवल यह नहीं देखा जाएगा कि परियोजना का काम तय समय पर हो रहा है या नहीं। बल्कि निर्माण की मजबूती, इस्तेमाल होने वाली सामग्री, डिजाइन, तकनीकी प्रक्रिया और सुरक्षा मानकों की भी जांच की जाएगी।
सरकार को उम्मीद है कि बाहरी विशेषज्ञ संस्थानों की निगरानी से निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही बढ़ेगी। साथ ही सरकारी धन से तैयार होने वाली बड़ी परियोजनाओं की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में सुधार होगा।
उन्नाव एक्सप्रेसवे हादसे के बाद बढ़ा गुणवत्ता पर फोकस
उत्तर प्रदेश सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब उन्नाव में ग्रीनफील्ड नेशनल एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के ढहने की घटना के बाद निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे थे।
रिपोर्टों के मुताबिक, करीब ₹4,200 करोड़ की लागत से तैयार इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को हुआ था। उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी मौजूद थे।
इसके कुछ ही दिनों बाद एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के ढहने की खबर सामने आई। घटना ने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में निर्माण गुणवत्ता, तकनीकी निगरानी और जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज कर दी।
सरकार का लक्ष्य सिर्फ प्रोजेक्ट पूरा करना नहीं
नई TPQA व्यवस्था से सरकार का फोकस केवल परियोजनाओं को तय समय और बजट में पूरा करने तक सीमित नहीं रहेगा। कोशिश यह सुनिश्चित करने की है कि तैयार होने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत, सुरक्षित और तकनीकी मानकों के अनुरूप भी हो।
IIT जैसे तकनीकी संस्थानों की स्वतंत्र विशेषज्ञता मिलने से निर्माण के दौरान सामने आने वाली कमियों की पहचान जल्दी हो सकती है। इससे भविष्य में बड़ी तकनीकी समस्याओं, अतिरिक्त मरम्मत खर्च और सुरक्षा संबंधी जोखिमों को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अब बड़ी परियोजनाओं पर रहेगी IIT की नजर
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में ₹100 करोड़ से ज्यादा लागत वाली बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की गुणवत्ता जांच के लिए IIT संस्थानों को शामिल करना सरकार की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अब परियोजना पूरी होने के बाद खामियां खोजने के बजाय निर्माण के दौरान ही तकनीकी कमियों को पकड़ने और सुधारने पर जोर रहेगा।


