Sugar Stocks Crash: चीनी कंपनियों के शेयरों में 25 अगस्त को जोरदार बिकवाली देखने को मिली। Bajaj Hindustan Sugar के शेयर करीब 7 फीसदी तक टूट गए। इसके अलावा Balrampur Chini Mills, Triveni Engineering, Shree Renuka Sugars, Dalmia Bharat Sugar, Aavadh Sugar & Energy, Uttam Sugar, Dwarikesh Sugar और Magadh Sugar & Energies जैसे शेयर भी दबाव में रहे। शुगर स्टॉक्स में हाल की तेज तेजी के बाद निवेशकों की मुनाफावसूली को गिरावट की बड़ी वजह माना जा रहा है।
Bajaj Hindustan Sugar में करीब 7% की गिरावट
25 अगस्त को बाजार में कारोबार के दौरान Bajaj Hindustan Sugar के शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी नजर आई। दोपहर करीब 12:49 बजे कंपनी का शेयर 22.54 रुपये पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 6.97 फीसदी नीचे था। इस दौरान शेयर ने 22.42 रुपये का निचला स्तर भी छुआ।
शुगर सेक्टर के दूसरे शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली। Balrampur Chini Mills, Triveni Engineering, Shree Renuka Sugars, Dalmia Bharat, Aavadh Sugar & Energy, Uttam Sugar, Dwarikesh Sugar और Magadh Sugar & Energies में करीब 3.5 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई।
शुगर स्टॉक्स में पहले आई थी तेज तेजी
शुगर कंपनियों के शेयरों में यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब इस महीने सेक्टर के कई शेयरों में 20-30 फीसदी तक की तेजी देखने को मिली थी। चीनी की घरेलू कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से निवेशकों की दिलचस्पी शुगर कंपनियों में बढ़ी थी।
अब सरकार की ओर से चीनी की सप्लाई बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों के बाद निवेशक तेजी में मुनाफा निकालते नजर आ रहे हैं। यही वजह है कि शुगर स्टॉक्स में तेज बिकवाली का दबाव बना है।
ड्यूटी-फ्री रॉ शुगर इंपोर्ट में ढील का असर
चीनी की कीमतों में हालिया उछाल को देखते हुए सरकार ने रॉ शुगर के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट के नियमों में ढील दी है। इसके तहत कंपनियों के लिए रॉ शुगर का आयात करना आसान होगा। इसे रिफाइनिंग के बाद घरेलू बाजार में बेचने की अनुमति होगी।
सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों को नियंत्रित करना है। खासकर आने वाले त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए सप्लाई को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
अगर बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ती है और कीमतों में नरमी आती है, तो शुगर कंपनियों के शेयरों में हाल की तेजी को लेकर निवेशकों का उत्साह भी कम हो सकता है।
एक महीने में चीनी 48 रुपये से बढ़कर 63 रुपये किलो
चीनी की घरेलू कीमतों में पिछले एक महीने में काफी तेजी आई है। 20 जुलाई को चीनी का भाव करीब 48.18 रुपये प्रति किलो था, जो 24 अगस्त तक बढ़कर 63.05 रुपये प्रति किलो पहुंच गया।
यानी करीब एक महीने के दौरान कीमत में लगभग 31 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। चीनी की कीमतों में इस तेजी ने शुगर कंपनियों के शेयरों को भी सपोर्ट दिया था।
सरकार के मुताबिक चीनी उत्पादन उम्मीद से कम रहने की आशंका और गन्ने की फसल पर खराब मौसम के असर जैसे कारणों से कीमतों पर दबाव बढ़ा। इसके अलावा जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए स्टॉक लिमिट से जुड़े नियमों को भी सख्त किया गया है।
सरकार के कदम से चीनी की कीमतों पर दबाव संभव
रॉ शुगर के आयात को आसान बनाने और घरेलू सप्लाई बढ़ाने के सरकारी प्रयासों का असर आने वाले समय में चीनी की कीमतों पर पड़ सकता है। अगर सप्लाई बढ़ती है तो कीमतों में हालिया तेजी कुछ कम हो सकती है।
यही उम्मीद शुगर स्टॉक्स में मुनाफावसूली की एक वजह बन रही है। निवेशकों को आशंका है कि चीनी की कीमतों में नरमी आने पर कंपनियों को मिलने वाला मार्जिन सपोर्ट भी कम हो सकता है।
हालांकि, किसी भी शुगर कंपनी के शेयर पर फैसला लेने से पहले उसके उत्पादन, गन्ने की लागत, चीनी की कीमत, एक्सपोर्ट पॉलिसी और सरकारी नियमों का अलग-अलग असर देखना जरूरी है।
शेयर बाजार में भी दबाव
25 अगस्त को व्यापक शेयर बाजार में भी कमजोरी रही। दोपहर करीब 12:15 बजे Nifty 0.18 फीसदी यानी लगभग 44 अंक गिरकर 24,175 के आसपास कारोबार कर रहा था। वहीं Sensex करीब 0.05 फीसदी नीचे 77,328 के स्तर पर था।
ऐसे माहौल में जिन सेक्टर्स और शेयरों में पहले से तेज तेजी आ चुकी थी, वहां मुनाफावसूली का दबाव ज्यादा देखने को मिल सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
शुगर स्टॉक्स में मौजूदा गिरावट को फिलहाल हाल की तेजी के बाद प्रॉफिट बुकिंग और सरकार के सप्लाई बढ़ाने वाले कदमों के संदर्भ में देखा जा रहा है। चीनी की कीमतें आगे किस दिशा में जाती हैं, इसका सीधा असर पूरे सेक्टर के शेयरों पर पड़ सकता है।
निवेशकों को केवल एक दिन की तेजी या गिरावट देखकर फैसला लेने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल, वैल्यूएशन और सेक्टर से जुड़े सरकारी फैसलों पर नजर रखनी चाहिए। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है।


