Bobby Deol: बॉलीवुड एक्टर बॉबी देओल इन दिनों अपने करियर की दूसरी पारी में लगातार सुर्खियां बटोर रहे हैं। ‘आश्रम’ में बाबा निराला के किरदार से लेकर संदीप रेड्डी वांगा की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘एनिमल’ में अबरार हक के रोल तक, बॉबी ने अपने नेगेटिव किरदारों से दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी है। खास बात यह है कि उनकी विलेन वाली छवि को दर्शकों ने काफी पसंद किया। हालांकि, अब एक्टर इस इमेज से बाहर निकलकर अलग तरह के किरदार निभाना चाहते हैं।
दिल्ली में आयोजित जागरण फिल्म फेस्टिवल के दौरान बॉबी देओल ने अपने करियर और लगातार मिल रहे विलेन के किरदारों को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि जब किसी कलाकार को किसी खास तरह के रोल में सफलता मिलती है, तो इंडस्ट्री में उसे उसी तरह के किरदार ऑफर होने लगते हैं। हालांकि, बॉबी का कहना है कि वह खुद को एक ही तरह के किरदार तक सीमित नहीं रखना चाहते और इससे बाहर निकलने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
‘सफलता के बाद उसी तरह के रोल मिलते रहते हैं’
बॉबी देओल ने अपने टाइपकास्ट होने को लेकर कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में यह एक सामान्य प्रक्रिया है। अगर कोई कलाकार किसी खास तरह के किरदार में सफल हो जाता है, तो निर्माता और निर्देशक उसे उसी तरह के रोल में देखना पसंद करने लगते हैं।
एक्टर के मुताबिक, किसी खास भूमिका में सफलता मिलने के बाद उसी तरह के किरदारों के ऑफर लगातार आते रहते हैं। बॉबी ने बताया कि वह इस स्थिति को समझते हैं, लेकिन साथ ही अलग तरह के किरदार चुनने की कोशिश भी कर रहे हैं।
बॉबी के करियर को देखें तो उनकी वापसी के बाद उनकी स्क्रीन इमेज में काफी बदलाव आया है। कभी रोमांटिक और एक्शन हीरो के तौर पर पहचान बनाने वाले बॉबी अब अपनी दमदार और खतरनाक स्क्रीन प्रेजेंस के लिए पहचाने जाते हैं।
‘आश्रम’ ने बदली बॉबी देओल की दूसरी पारी
बॉबी देओल की दूसरी पारी में प्रकाश झा की वेब सीरीज ‘आश्रम’ को बेहद अहम माना जाता है। इस सीरीज में उन्होंने बाबा निराला का किरदार निभाया था। यह किरदार एक ऐसे व्यक्ति का था जो खुद को भगवान का दूत बताकर लोगों का भरोसा जीतता है और उसके पीछे कई आपराधिक गतिविधियां छिपी होती हैं।
बॉबी ने इस किरदार को जिस अंदाज में निभाया, उससे उनकी एक्टिंग का एक नया पक्ष सामने आया। ‘आश्रम’ की लोकप्रियता ने बॉबी को ओटीटी पर भी एक मजबूत पहचान दिलाई। इसके बाद उन्हें फिल्मों में भी पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण और नेगेटिव भूमिकाएं मिलने लगीं।
‘एनिमल’ के बाद विलेन के तौर पर बढ़ी डिमांड
साल 2023 में रिलीज हुई ‘एनिमल’ बॉबी देओल के करियर का एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। फिल्म में उनका स्क्रीन टाइम सीमित था, लेकिन अबरार हक के किरदार ने दर्शकों के बीच जबरदस्त प्रभाव छोड़ा। बिना ज्यादा संवाद बोले भी बॉबी ने अपने एक्सप्रेशन और बॉडी लैंग्वेज से किरदार को यादगार बना दिया।
‘एनिमल’ की सफलता के बाद बॉबी देओल को बड़े बजट की फिल्मों में नेगेटिव और ग्रे शेड वाले किरदार मिलने लगे। इसके बाद वह ‘कंगुवा’, ‘डाकू महाराज’, ‘अल्फा’ और ‘जना नायकन’ जैसे प्रोजेक्ट्स से जुड़े, जहां उनके किरदारों में विलेन या एंटी-हीरो के शेड्स देखने को मिले।
इस तरह एक्टर की नई पहचान एक ऐसे कलाकार की बन गई जो बड़े पर्दे पर खतरनाक और प्रभावशाली विलेन का किरदार निभा सकता है।
‘मैं इस छवि से बाहर निकलने की पूरी कोशिश करता हूं’
बॉबी देओल ने बताया कि वह लगातार अलग तरह के प्रोजेक्ट्स करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह विलेन की इमेज से बाहर निकलना चाहते हैं और इसी दिशा में उन्होंने कुछ अलग फिल्मों और वेब सीरीज पर काम किया है।
एक्टर ने अपने हालिया प्रोजेक्ट ‘बंदर’ का उदाहरण देते हुए बताया कि यह फिल्म उनके लिए काफी अलग अनुभव रही। अनुराग कश्यप के निर्देशन में बनी इस फिल्म में बॉबी ने एक उम्रदराज स्टार की भूमिका निभाई। कहानी में उसके ऊपर उसकी एक्स-गर्लफ्रेंड की ओर से रेप का आरोप लगाया जाता है।
यह किरदार बॉबी के अब तक निभाए गए कई चर्चित नेगेटिव किरदारों से काफी अलग था। फिल्म को लेकर समीक्षकों की प्रतिक्रिया भी सकारात्मक रही और इसने यह दिखाया कि बॉबी देओल केवल एक्शन या विलेन वाले किरदारों तक सीमित नहीं हैं।
‘विलेन के भी अलग-अलग शेड्स होते हैं’
बॉबी देओल ने यह भी साफ किया कि उन्हें विलेन के किरदार निभाने में परेशानी नहीं है। उनके लिए समस्या केवल एक ही तरह की भूमिका बार-बार निभाना है। एक्टर का मानना है कि नेगेटिव किरदारों में भी काफी विविधता हो सकती है।
उनके अनुसार, अलग-अलग फिल्मों में विलेन के व्यक्तित्व, सोच और कहानी में उनकी भूमिका अलग होती है। इसलिए वह ऐसे किरदारों को भी पसंद करते हैं जिनमें कुछ नया करने का मौका मिले।
यही वजह है कि बॉबी अब ऐसे प्रोजेक्ट चुनने की कोशिश कर रहे हैं जहां उन्हें अपने अभिनय के अलग-अलग रंग दिखाने का अवसर मिले। फिल्मों के साथ-साथ वह कुछ नई वेब सीरीज में भी नजर आने वाले हैं।
90 और 2000 के दशक में बॉबी थे लीड हीरो
बॉबी देओल की मौजूदा स्क्रीन इमेज उनके शुरुआती करियर से काफी अलग है। 90 और 2000 के दशक में वह बॉलीवुड के लोकप्रिय लीड एक्टर्स में शामिल थे। ‘बरसात’, ‘गुप्त’, ‘सोल्जर’, ‘बादल’, ‘बिच्छू’ और ‘अजनबी’ जैसी फिल्मों में उन्होंने मुख्य भूमिकाएं निभाईं।
उनकी पहचान एक रोमांटिक और एक्शन हीरो के रूप में बनी थी। हालांकि, समय के साथ उन्हें फिल्मों में पहले जैसी प्रमुख भूमिकाएं मिलनी कम हुईं। इसके बाद कुछ समय तक उनका करियर अपेक्षाकृत धीमा रहा।
लेकिन ओटीटी के दौर में ‘आश्रम’ और फिर ‘एनिमल’ जैसी फिल्मों ने उनके करियर को नई दिशा दे दी। अब बॉबी देओल की दूसरी पारी को बॉलीवुड में कमबैक की सफल कहानियों में गिना जाता है।
अब अलग तरह के किरदारों पर है फोकस
बॉबी देओल की बातों से साफ है कि वह अपनी मौजूदा लोकप्रियता का फायदा उठाते हुए खुद को केवल विलेन के रूप में स्थापित नहीं करना चाहते। उनका लक्ष्य ऐसे किरदार करना है जिनमें अभिनय की ज्यादा गुंजाइश हो और दर्शकों को उनका नया रूप देखने को मिले।
‘बंदर’ जैसे प्रोजेक्ट इस दिशा में उनके लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। वहीं, अलग-अलग भाषाओं और बड़े बजट की फिल्मों में लगातार काम मिलने से उनकी पहुंच भी पहले के मुकाबले काफी बढ़ी है।
एक्टर का मानना है कि करियर के इस पड़ाव पर उन्हें ऐसे किरदार चुनने चाहिए जो उन्हें चुनौती दें। यही वजह है कि वह एक तरफ नेगेटिव किरदारों में अलग-अलग शेड्स तलाश रहे हैं, तो दूसरी तरफ पूरी तरह अलग कहानियों और वेब सीरीज का हिस्सा भी बन रहे हैं।
‘तीन कौवे’ में नजर आएंगे बॉबी देओल
वर्कफ्रंट की बात करें तो बॉबी देओल जल्द ही प्राइम वीडियो की स्पाई ड्रामा सीरीज ‘तीन कौवे’ में नजर आने वाले हैं। इस प्रोजेक्ट की शूटिंग जारी है। सीरीज में बॉबी के साथ सिद्धांत गुप्ता, फातिमा सना शेख और पावेल गुलाटी जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे।
‘तीन कौवे’ को लेकर इसलिए भी उम्मीदें हैं क्योंकि बॉबी देओल पिछले कुछ वर्षों में लगातार ऐसे किरदारों में नजर आए हैं, जिनमें उनकी स्क्रीन प्रेजेंस को काफी पसंद किया गया है। हालांकि, इस सीरीज में उनका किरदार किस तरह का होगा, इसे लेकर दर्शकों की उत्सुकता बनी हुई है।
कुल मिलाकर बॉबी देओल की दूसरी पारी फिलहाल शानदार दौर से गुजर रही है। ‘आश्रम’ और ‘एनिमल’ ने उन्हें नई पहचान दी, लेकिन अब एक्टर इस पहचान को अपनी सीमा नहीं बनाना चाहते। वह लगातार अलग तरह की भूमिकाओं की तलाश में हैं। ऐसे में आने वाले समय में दर्शकों को बॉबी देओल का एक नया और पहले से अलग अंदाज देखने को मिल सकता है।


