Monsoon-El Nino Effect: भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर दौर से गुजर रहा है। अब तक सामान्य से करीब 14% कम बारिश दर्ज की गई है। अगले दो सप्ताह भी बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है, जबकि सितंबर तक मानसून में बड़े सुधार के संकेत नहीं हैं। ऐसे में किसानों और कृषि क्षेत्र की चिंता बढ़ गई है।
Monsoon-El Nino Effect: भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमजोर स्थिति ने चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दो सप्ताह में देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है। इसका असर खासतौर पर उन क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है जहां पहले से ही बारिश की कमी बनी हुई है।
मौजूदा स्थिति का सीधा असर खेती, मिट्टी की नमी, जलाशयों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट ने भी अपने मानसून अनुमान में बड़ी कटौती की है और कुल मौसमी बारिश सामान्य के मुकाबले करीब 85% रहने का अनुमान जताया है। एजेंसी ने सूखे की स्थिति की संभावना को लेकर भी चिंता जताई है।
हालांकि, किसी पूरे देश में सूखे या भुखमरी जैसी स्थिति को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी। बारिश का वितरण क्षेत्रवार अलग होता है और आने वाले दिनों में बनने वाली मौसम प्रणालियां कुछ इलाकों में बारिश की कमी को कम कर सकती हैं।
अब तक 14% कम बारिश
मानसून की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए बारिश के आंकड़े काफी अहम हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, देश में अब तक करीब 548.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश लगभग 635.4 मिलीमीटर होनी चाहिए थी।
इस हिसाब से बारिश में करीब 14% की कमी बनी हुई है। अगर अगले कुछ सप्ताह भी मानसून कमजोर रहता है तो यह अंतर और बढ़ सकता है।
बारिश की कमी सिर्फ मौसम का आंकड़ा नहीं है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में मानसून की स्थिति का सीधा असर फसल उत्पादन, ग्रामीण मांग और जल संसाधनों पर पड़ता है।
अगले दो सप्ताह भी कमजोर रह सकता है मानसून
मौसम विभाग के आकलन के अनुसार, अगले दो सप्ताह में देश के बड़े हिस्से में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कई क्षेत्रों में मानसूनी गतिविधियां कमजोर रह सकती हैं।
इसका मतलब यह है कि जिन इलाकों में पहले से बारिश की कमी है, वहां किसानों को पर्याप्त नमी मिलने में परेशानी हो सकती है। हालांकि, क्षेत्रवार बारिश की स्थिति अलग हो सकती है और कुछ राज्यों में भारी बारिश भी देखने को मिल सकती है।
सितंबर तक बड़े सुधार के संकेत नहीं
मानसून के लिए अगस्त और सितंबर दोनों महीने बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। मौजूदा अनुमान के मुताबिक सितंबर तक मानसून में किसी बड़े और व्यापक सुधार के संकेत स्पष्ट नहीं हैं।
अगर बारिश की रफ्तार कमजोर रहती है तो खरीफ फसलों पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा रबी सीजन की तैयारी के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी और जल संसाधनों की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण होगी।
हालांकि, पूरे मानसून सीजन का अंतिम असर बारिश की मात्रा के साथ-साथ उसके वितरण पर भी निर्भर करेगा। कुछ इलाकों में सामान्य या अधिक बारिश होने से स्थानीय स्थिति बेहतर रह सकती है।
किसानों के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
कमजोर मानसून का सबसे सीधा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है। कई इलाकों में किसान सिंचाई के लिए मानसूनी बारिश पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में बारिश की कमी से खेतों में मिट्टी की नमी घट सकती है और फसलों की उत्पादकता प्रभावित हो सकती है।
खासकर मध्य भारत के वर्षा-आधारित कृषि क्षेत्रों में लगातार कम बारिश चिंता का विषय बन सकती है। खरीफ फसलों के लिए अगस्त और सितंबर की बारिश महत्वपूर्ण होती है। बारिश में लंबे समय तक कमी रहने पर फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
जलाशयों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी असर
मानसून की कमजोर बारिश का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं रहता। बारिश कम होने पर जलाशयों में पानी की आवक प्रभावित हो सकती है। इसका असर सिंचाई, पेयजल और कुछ क्षेत्रों में बिजली उत्पादन पर भी पड़ सकता है।
इसके अलावा ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मानसून पर काफी निर्भर रहती है। अच्छी बारिश से कृषि आय और ग्रामीण मांग को सहारा मिलता है, जबकि लंबे समय तक बारिश कम रहने पर किसानों और ग्रामीण कारोबार पर दबाव बढ़ सकता है।
हिमालयी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में अलग स्थिति
मानसून की स्थिति पूरे देश में एक जैसी नहीं है। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून ट्रफ के हिमालय की तलहटी के करीब रहने से हिमालयी क्षेत्र, पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की संभावना बनी रह सकती है।
इसका अर्थ है कि एक तरफ कुछ क्षेत्रों में बारिश की कमी बनी रह सकती है, वहीं दूसरी तरफ कुछ राज्यों में भारी बारिश और जलभराव जैसी स्थिति भी देखने को मिल सकती है। इसलिए देश की औसत बारिश का आंकड़ा हर राज्य की स्थानीय स्थिति को पूरी तरह नहीं बताता।
बंगाल की खाड़ी में बन सकता है कम दबाव
उत्तर बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना भी मौसम के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इसके प्रभाव से ओडिशा और छत्तीसगढ़ समेत आसपास के कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश हो सकती है।
अगर यह मौसम प्रणाली प्रभावी रहती है तो कुछ क्षेत्रों में बारिश की कमी कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका असर कितने इलाकों तक और कितनी अवधि तक रहेगा, यह सिस्टम की मजबूती और उसकी दिशा पर निर्भर करेगा।
क्या सच में 70% सूखे का खतरा है?
स्काईमेट के अनुमान में मौसमी बारिश को सामान्य के करीब 85% रहने का अनुमान लगाया गया है और सूखे की स्थिति की संभावना को लेकर भी चेतावनी दी गई है। लेकिन इसे पूरे भारत में निश्चित रूप से सूखा पड़ने की घोषणा नहीं माना जाना चाहिए।
सूखे का आकलन केवल देश की कुल बारिश से नहीं होता। इसके लिए क्षेत्रवार बारिश, बारिश का वितरण, मिट्टी की नमी, जलाशयों की स्थिति और कृषि पर प्रभाव जैसे कई कारकों को देखा जाता है।
इसलिए फिलहाल सबसे बड़ी चिंता मानसून की लगातार कमजोरी और बारिश की कमी के बढ़ने की संभावना है।
El Nino का कितना असर?
El Nino और भारतीय मानसून के बीच ऐतिहासिक संबंध देखा गया है, लेकिन हर El Nino वर्ष में भारत में एक जैसी बारिश नहीं होती। मानसून पर समुद्र की सतह का तापमान, हिंद महासागर की स्थिति, वायुमंडलीय परिस्थितियां और कई अन्य मौसम प्रणालियां भी प्रभाव डालती हैं।
इसलिए मौजूदा बारिश की कमी को केवल El Nino के प्रभाव से जोड़ना सही नहीं होगा। मानसून की वास्तविक तस्वीर समझने के लिए आने वाले सप्ताहों के मौसम पैटर्न और क्षेत्रवार बारिश के आंकड़ों पर नजर रखना जरूरी है।
आगे क्या देखना होगा?
अब मानसून की दिशा के लिए अगले कुछ सप्ताह बेहद अहम हैं। खासकर उत्तर-पश्चिम, मध्य और प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की गतिविधि पर नजर रहेगी।
अगर इन क्षेत्रों में लगातार सामान्य से कम बारिश होती है तो कृषि और जल संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर, बंगाल की खाड़ी में बनने वाली मौसम प्रणालियां अगर प्रभावी रहती हैं तो कुछ राज्यों को राहत मिल सकती है।
फिलहाल 14% बारिश की कमी और अगले दो सप्ताह सामान्य से कम बारिश का अनुमान चिंता का विषय जरूर है, लेकिन इसे देशव्यापी सूखे या भुखमरी का निश्चित संकेत मानना उचित नहीं होगा। मानसून की आगे की चाल और सितंबर की बारिश ही स्थिति की वास्तविक तस्वीर साफ करेगी।


