Vedanta Green Energy: वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कंपनी की ग्रीन एनर्जी पहल को लेकर बड़ी उपलब्धि साझा की है। उन्होंने कहा कि कभी जिस काम को असंभव माना जाता था, वेदांता ने उसे हकीकत में बदलकर दिखाया है। कंपनी ने एल्यूमीनियम, जिंक और दूसरे ऊर्जा-गहन प्लांट्स को रिन्यूएबल एनर्जी के जरिए 24 घंटे चलाने की दिशा में बड़ी प्रगति की है।
नई दिल्ली: वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए कंपनी की रिन्यूएबल एनर्जी रणनीति पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि वेदांता को इस बात पर गर्व है कि कंपनी अपने एल्यूमीनियम, जिंक और अन्य प्लांट्स में ज्यादा से ज्यादा स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल कर रही है।
करीब 2 GW तक पहुंची रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता
At Vedanta, we are so proud of the huge initiative taken to run our aluminium, zinc and other plants on more and more renewable energy. With 2 GW capacity, we are leaders in our peer group in India, up to 5 times more than others. Globally, also, we are among top 2 or 3 of our… pic.twitter.com/hbZJUAJoZq
— Anil Agarwal (@AnilAgarwal_Ved) August 20, 2026 अनिल अग्रवाल के मुताबिक, वेदांता के पास भारत में करीब 2 गीगावाट यानी 2,000 मेगावाट की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता है। उनका दावा है कि यह क्षमता भारतीय प्रतिस्पर्धी कंपनियों की तुलना में करीब पांच गुना तक अधिक है। वैश्विक स्तर पर भी वेदांता को अपने क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में शामिल बताया गया है।
वेदांता का फोकस खास तौर पर उन उद्योगों को स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने पर है, जहां लगातार और भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है। एल्यूमीनियम और जिंक जैसे धातु उद्योग इसी श्रेणी में आते हैं।
कभी असंभव माना जाता था 24×7 रिन्यूएबल एनर्जी से संचालन
अनिल अग्रवाल ने कहा कि पहले यह माना जाता था कि ऊर्जा की भारी खपत करने वाली और 24 घंटे चलने वाली इंडस्ट्री को केवल रिन्यूएबल एनर्जी के सहारे चलाना संभव नहीं होगा। हालांकि, वेदांता और उसकी सहयोगी कंपनी Serentica ने तकनीक और इनोवेशन के जरिए इस चुनौती का समाधान तलाशने की कोशिश की है।
उनके मुताबिक, कंपनी ने दिखाया है कि बड़े और ऊर्जा-गहन औद्योगिक प्लांट्स में भी रिन्यूएबल एनर्जी का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। यह उपलब्धि भारत के ऊर्जा बदलाव और इंडस्ट्री के डीकार्बोनाइजेशन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ग्रीन एल्यूमीनियम और जिंक की बढ़ रही मांग
अनिल अग्रवाल ने यह भी बताया कि वेदांता के नए ग्रीन प्रोडक्ट्स को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। खासकर ग्रीन एल्यूमीनियम और जिंक की मांग बढ़ रही है।
दुनिया भर की कंपनियां अपने कार्बन उत्सर्जन को कम करने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे में कम कार्बन फुटप्रिंट के साथ तैयार होने वाले मेटल्स की मांग आने वाले समय में और बढ़ सकती है। वेदांता इसी बदलती मांग को अपने कारोबार के लिए एक बड़ा अवसर मान रही है।
नेट-जीरो ट्रांजिशन में 1 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश
वेदांता ने पिछले पांच वर्षों में अपने नेट-जीरो ट्रांजिशन से जुड़ी पहलों पर 1 अरब डॉलर यानी करीब 9,500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। कंपनी का उद्देश्य अपने ऑपरेशंस में कार्बन उत्सर्जन को कम करना और रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़ाना है।
फिलहाल कंपनी के पास लगभग 2,000 मेगावाट की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता है। वेदांता ने इसे साल 2030 तक बढ़ाकर 2,500 मेगावाट करने की योजना बनाई है।
शेयरहोल्डर्स के लिए भी अहम कदम
अनिल अग्रवाल ने कहा कि कंपनी जिस दिशा में आगे बढ़ रही है, उससे शेयरहोल्डर्स भी खुश हैं। वेदांता के लिए ग्रीन एनर्जी में निवेश सिर्फ पर्यावरण से जुड़ा कदम नहीं है, बल्कि यह भविष्य के औद्योगिक कारोबार और वैश्विक बाजार की बदलती जरूरतों के हिसाब से खुद को तैयार करने की रणनीति भी है।
उन्होंने भरोसा जताया कि भारत आर्थिक विकास के साथ-साथ स्वच्छ और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ सकता है। वेदांता की यह पहल इसी बदलाव में औद्योगिक क्षेत्र की भूमिका को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
एल्यूमीनियम, जिंक और अन्य मेटल इंडस्ट्री में बिजली की खपत काफी अधिक होती है। ऐसे में इन प्लांट्स को रिन्यूएबल एनर्जी से चलाना कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद कर सकता है। अगर बड़े उद्योग इस मॉडल को अपनाते हैं, तो इससे भारत के नेट-जीरो लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में भी मदद मिल सकती है।
वेदांता अब अपनी रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता को और बढ़ाने की तैयारी कर रही है। ऐसे में कंपनी का 2,000 मेगावाट से 2,500 मेगावाट तक पहुंचने का लक्ष्य आने वाले वर्षों में उसके ग्रीन ट्रांजिशन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।


