Railway Project: केंद्र सरकार ने रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने के लिए करीब 9,450 करोड़ रुपये की लागत वाली चार मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं से करीब 410 किलोमीटर रेल नेटवर्क का विस्तार होगा। सरकार के मुताबिक, इससे सड़क से रेल की ओर माल ढुलाई बढ़ेगी, करीब 13 करोड़ लीटर तेल के आयात की बचत हो सकती है और 65 करोड़ किलोग्राम CO2 उत्सर्जन कम होगा।
नई दिल्ली: भारतीय रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर को विस्तार देने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) की बैठक में करीब 9,450 करोड़ रुपये की लागत वाली चार मल्टी-ट्रैकिंग रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव कम करने के साथ-साथ माल ढुलाई की क्षमता बढ़ाना है।
सरकार के मुताबिक, इन चार परियोजनाओं के पूरा होने के बाद देश के रेलवे नेटवर्क में करीब 410 किलोमीटर का विस्तार होगा। इसका फायदा पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को मिलेगा। खास बात यह है कि इन परियोजनाओं से केवल रेल कनेक्टिविटी ही बेहतर नहीं होगी, बल्कि सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होने से ईंधन की खपत और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आने की उम्मीद है।
13 करोड़ लीटर तेल आयात में हो सकती है बचत
भारत में बड़ी मात्रा में माल की ढुलाई अभी भी सड़क मार्ग से होती है। रेलवे की क्षमता बढ़ने और अतिरिक्त रेल लाइनें उपलब्ध होने से ज्यादा माल को सड़क से रेल नेटवर्क की ओर स्थानांतरित किया जा सकेगा।
इससे डीजल और अन्य पेट्रोलियम ईंधनों की खपत कम करने में मदद मिल सकती है। सरकार के अनुमान के अनुसार, इन परियोजनाओं से करीब 13 करोड़ लीटर तेल के आयात में कमी आ सकती है।
इसका सीधा फायदा देश के आयात बिल पर पड़ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में परिवहन क्षेत्र में ईंधन की खपत घटाना विदेशी मुद्रा की बचत के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
65 करोड़ किलोग्राम कम होगा CO2 उत्सर्जन
रेलवे के विस्तार का एक बड़ा फायदा पर्यावरण के मोर्चे पर भी देखने को मिलेगा। सरकार का अनुमान है कि इन चार परियोजनाओं के कारण हर साल करीब 65 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन कम किया जा सकता है।
सरकार ने इस पर्यावरणीय लाभ की तुलना करीब 2.6 करोड़ पेड़ लगाने से होने वाले फायदे से की है। यानी रेलवे में अतिरिक्त क्षमता तैयार होने से परिवहन के क्षेत्र में ईंधन की खपत और प्रदूषण दोनों को कम करने में मदद मिलेगी।
किन रेलवे परियोजनाओं को मिली मंजूरी?
केंद्र सरकार ने जिन चार मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है, उनमें मौजूदा रेल मार्गों पर अतिरिक्त लाइनें बिछाई जाएंगी। इनका विवरण इस प्रकार है:
1. खड़गपुर-भद्रक (रानीताल) चौथी लाइन
इस परियोजना की लंबाई करीब 173 किलोमीटर होगी। यह पश्चिम बंगाल और ओडिशा के बीच रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी। इस रूट पर अतिरिक्त लाइन बनने से मौजूदा रेल यातायात को संभालने की क्षमता बढ़ेगी।
2. भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन
ओडिशा में आने वाली इस परियोजना की लंबाई करीब 75 किलोमीटर है। अतिरिक्त लाइन से इस क्षेत्र में माल और यात्री ट्रेनों के संचालन को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
3. गुम्मिडिपुंडी-गुडूर तीसरी और चौथी लाइन
आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को जोड़ने वाली इस परियोजना की लंबाई करीब 90 किलोमीटर है। इस मार्ग पर तीसरी और चौथी लाइन बनने से दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर की क्षमता बढ़ेगी।
4. कटक-पारादीप (बड़ाबंधा) तीसरी और चौथी लाइन
ओडिशा में प्रस्तावित इस परियोजना की लंबाई करीब 72 किलोमीटर है। पारादीप क्षेत्र के औद्योगिक और बंदरगाह आधारित माल परिवहन को देखते हुए इस रेल कनेक्टिविटी का महत्व काफी अधिक है।
410 किलोमीटर बढ़ेगा रेल नेटवर्क
चारों परियोजनाओं को मिलाकर करीब 410 किलोमीटर अतिरिक्त रेल नेटवर्क तैयार होगा। इससे मौजूदा रेल मार्गों पर ट्रेनों की आवाजाही को अधिक सुचारु बनाने में मदद मिलेगी।
मल्टी-ट्रैकिंग का एक प्रमुख फायदा यह होता है कि एक ही रूट पर अलग-अलग दिशाओं में चलने वाली यात्री और मालगाड़ियों के लिए ज्यादा क्षमता उपलब्ध हो जाती है। इससे ट्रेनों को रास्ते में रोकने की जरूरत कम हो सकती है और मालगाड़ियों की औसत गति में भी सुधार की संभावना रहती है।
माल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर
सरकार लंबे समय से लॉजिस्टिक्स लागत घटाने और माल परिवहन को अधिक कुशल बनाने के लिए रेलवे की क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही है। अतिरिक्त रेल लाइनें इसी रणनीति का हिस्सा हैं।
रेल के जरिए बड़ी मात्रा में माल लंबी दूरी तक अपेक्षाकृत कम ईंधन में पहुंचाया जा सकता है। इसलिए कोयला, खनिज, औद्योगिक सामान और अन्य भारी माल की ढुलाई को सड़क से रेल की ओर स्थानांतरित करने से परिवहन लागत और ईंधन की खपत दोनों कम करने में मदद मिल सकती है।
पीएम गति शक्ति के तहत होंगी परियोजनाएं
इन चारों परियोजनाओं को पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य देश में अलग-अलग बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की एकीकृत योजना और बेहतर कनेक्टिविटी को बढ़ावा देना है।
रेलवे के इन प्रोजेक्ट से औद्योगिक क्षेत्रों, बंदरगाहों और प्रमुख परिवहन मार्गों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है। इससे न केवल यात्रियों को फायदा मिल सकता है, बल्कि कारोबार और लॉजिस्टिक्स से जुड़े क्षेत्रों को भी बेहतर परिवहन सुविधा मिल सकती है।
रेलवे के लिए क्यों अहम है यह विस्तार?
इन परियोजनाओं को केवल नई रेल लाइन बिछाने की योजना के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इनके जरिए रेलवे की क्षमता, माल ढुलाई, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरणीय प्रदर्शन में सुधार करने का लक्ष्य है।
एक तरफ अतिरिक्त ट्रैक से व्यस्त रूट पर ट्रेनों का दबाव कम होगा, वहीं दूसरी तरफ ज्यादा माल रेल से भेजे जाने पर सड़क परिवहन में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की खपत घट सकती है। इसी वजह से सरकार ने इन परियोजनाओं से होने वाली तेल आयात बचत और CO2 उत्सर्जन में कमी को भी प्रमुख लाभों में शामिल किया है।
कुल मिलाकर, 9,450 करोड़ रुपये के निवेश से 410 किलोमीटर रेल नेटवर्क का विस्तार देश के परिवहन ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार के अनुमान के अनुसार, इससे करीब 13 करोड़ लीटर तेल आयात की बचत और 65 करोड़ किलोग्राम CO2 उत्सर्जन में कमी संभव है। पर्यावरणीय लाभ को करीब 2.6 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर बताया गया है।


