नई दिल्ली: देश में चीनी की कीमतों में हाल के दिनों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। त्योहारी सीजन से ठीक पहले चीनी के दाम बढ़ने से सरकार की चिंता भी बढ़ी है। ऐसे समय में चीनी उद्योग ने कीमतों को स्थिर रखने के लिए नए सीजन में उत्पादन जल्द शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) का कहना है कि अगर सरकार कुछ जरूरी राहत देती है, तो चीनी मिलें तय समय से करीब 15-20 दिन पहले पेराई और उत्पादन शुरू कर सकती हैं।
ISMA के डायरेक्टर जनरल दीपक बल्लानी ने बताया कि उद्योग नए सीजन में अक्टूबर की शुरुआत से ही उत्पादन शुरू करने के लिए तैयार है। इससे बाजार में नई चीनी की उपलब्धता जल्दी बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इंडस्ट्री का कहना है कि अक्टूबर में जल्दी उत्पादन शुरू करने पर मिलों को रिकवरी में नुकसान हो सकता है। इस नुकसान की भरपाई के लिए सरकार से टैक्स छूट और अतिरिक्त रिलीज कोटा देने की मांग की गई है।
30 सितंबर तक कितना रहेगा चीनी का स्टॉक?
मौजूदा शुगर सीजन 30 सितंबर को समाप्त होगा। उद्योग के अनुमान के मुताबिक, सीजन खत्म होने तक देश में करीब 40 लाख टन चीनी का स्टॉक बचा रह सकता है। अक्टूबर महीने में घरेलू खपत करीब 24-25 लाख टन रहने का अनुमान है। इस हिसाब से अक्टूबर के दौरान खपत के बाद भी लगभग 15 लाख टन चीनी उपलब्ध रह सकती है।
इसके अलावा नए सीजन में महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में मिलें आमतौर पर 15-20 अक्टूबर के आसपास चालू होने लगती हैं। इसके बाद बाजार में नई चीनी की आवक शुरू हो जाती है। देश के बाकी हिस्सों में भी चीनी मिलों के नवंबर के मध्य तक चालू होने की उम्मीद रहती है।
इससे उद्योग का तर्क है कि देश में चीनी की उपलब्धता को लेकर तत्काल किसी बड़ी कमी की स्थिति नहीं बननी चाहिए। हालांकि, बाजार में कीमतों में तेजी की वजह से स्टॉक को लेकर अटकलें लगातार बनी हुई हैं।
चीनी के दाम आखिर क्यों बढ़े?
चीनी की कीमतों में मौजूदा तेजी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इस सीजन में महाराष्ट्र और कर्नाटक में चीनी का उत्पादन उम्मीद के मुकाबले कम रहा। ये दोनों राज्य देश के प्रमुख चीनी उत्पादक क्षेत्रों में शामिल हैं। उत्पादन कम रहने से बाजार में आगे चलकर आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी।
इसके अलावा इस सीजन में चीनी का निर्यात भी हुआ। करीब 8 लाख टन चीनी का निर्यात किए जाने के बाद सरकार ने मई में आगे की घरेलू उपलब्धता को लेकर सतर्कता दिखाई और 30 सितंबर तक निर्यात रोकने का फैसला किया।
निर्यात पर रोक के बावजूद पिछले कुछ समय में एक्स-मिल कीमतों में तेजी देखने को मिली। इसका एक बड़ा कारण बाजार में यह धारणा रही कि देश में पर्याप्त चीनी स्टॉक उपलब्ध नहीं है। त्योहारी मांग बढ़ने की संभावना ने भी कीमतों को लेकर चिंता बढ़ाई है।
क्या जल्दी शुरू होगा चीनी का उत्पादन?
चीनी उद्योग ने सरकार के सामने नए सीजन में मिलों को सामान्य समय से पहले शुरू करने का प्रस्ताव रखा है। उद्योग का मानना है कि अगर मिलें 10-15 दिन पहले चालू हो जाती हैं, तो बाजार में नई चीनी की सप्लाई जल्दी पहुंचाई जा सकती है।
इससे त्योहारी सीजन के दौरान मांग बढ़ने पर बाजार में उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी। साथ ही, अगर नई चीनी समय से पहले बाजार में आती है तो स्टॉक को लेकर बनी अटकलें भी कम हो सकती हैं।
हालांकि, जल्दी पेराई शुरू करने में एक समस्या है। अक्टूबर की शुरुआत में गन्ने की रिकवरी सामान्य समय की तुलना में कम हो सकती है। इसका मतलब है कि उतनी ही मात्रा के गन्ने से मिलों को कम चीनी मिल सकती है। इससे चीनी मिलों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
यही वजह है कि उद्योग ने सरकार से इस नुकसान की भरपाई के लिए विशेष राहत की मांग की है।
ISMA ने सरकार के सामने रखी टैक्स छूट की शर्त
ISMA के मुताबिक, अगर सरकार चाहती है कि चीनी मिलें अक्टूबर में ही उत्पादन शुरू कर दें, तो उद्योग को कुछ वित्तीय राहत देनी होगी।
उद्योग ने सरकार से मांग की है कि अक्टूबर में होने वाले चीनी उत्पादन पर सेंट्रल GST में 2.5 प्रतिशत की छूट दी जाए। ISMA का कहना है कि जल्दी उत्पादन शुरू करने से होने वाले रिकवरी लॉस को इस टैक्स राहत से कुछ हद तक संतुलित किया जा सकता है।
इसके अलावा अक्टूबर में अतिरिक्त उत्पादन करने वाली मिलों को रिलीज कोटा में भी अतिरिक्त कोटा देने की मांग की गई है। इससे मिलों को अतिरिक्त चीनी बेचने का अवसर मिलेगा और जल्दी उत्पादन शुरू करने का आर्थिक नुकसान कम किया जा सकेगा।
इंडस्ट्री का मानना है कि अगर सरकार इन मांगों पर सहमति देती है तो मिलें उत्पादन शुरू करने में ज्यादा तेजी दिखा सकती हैं।
एथेनॉल उत्पादन पर भी नजर
चीनी उद्योग में सिर्फ चीनी की उपलब्धता ही मुद्दा नहीं है। एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने और चीनी के इस्तेमाल को लेकर भी संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
ISMA के मुताबिक, देश में सालाना करीब 1,200 करोड़ लीटर एथेनॉल की जरूरत होती है। इसके उत्पादन में गन्ने के अलावा चावल, मक्का और डैमेज्ड फूडग्रेन जैसे स्रोतों का भी इस्तेमाल किया जाता है।
उद्योग का कहना है कि एथेनॉल कार्यक्रम पहले से तय है और उपलब्ध कच्चे माल के हिसाब से अलग-अलग स्रोतों का इस्तेमाल घट या बढ़ सकता है। लेकिन अगले एक साल में घरेलू चीनी खपत करीब 285 लाख टन रहने का अनुमान है। इसलिए सबसे पहले घरेलू जरूरत के मुताबिक पर्याप्त चीनी उपलब्ध कराना जरूरी होगा।
इसके साथ ही देश में करीब 40-45 लाख टन बफर स्टॉक रखने की जरूरत भी बताई गई है। घरेलू खपत और जरूरी बफर स्टॉक की व्यवस्था करने के बाद जो अतिरिक्त मात्रा उपलब्ध होगी, उसका इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन के लिए किया जा सकता है।
अगले सीजन की गन्ने की फसल पर नजर
अगले शुगर सीजन में गन्ने की उपज कितनी रहेगी, इसका अभी स्पष्ट अनुमान सामने नहीं आया है। मौसम की स्थिति भी फसल के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है।
ISMA के अनुसार, सितंबर के दूसरे या तीसरे सप्ताह तक फसल की स्थिति का बेहतर आकलन हो सकेगा। इसके बाद ही अगले सीजन में गन्ने की उपलब्धता और चीनी उत्पादन को लेकर तस्वीर ज्यादा साफ होगी।
मौसम से जुड़ा जोखिम भी उद्योग के लिए चिंता का विषय है। अगर गन्ने की पैदावार अनुमान से कम रहती है, तो आने वाले सीजन में चीनी उत्पादन और घरेलू आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।
सरकार के सामने अब क्या विकल्प हैं?
चीनी की कीमतों में तेजी को नियंत्रित करने के लिए सरकार के सामने एक तरफ घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ किसानों, चीनी मिलों और एथेनॉल उद्योग के हितों के बीच संतुलन बनाना भी जरूरी है।
अगर मिलों को जल्द उत्पादन शुरू करने की अनुमति मिलती है और इसके साथ टैक्स राहत तथा अतिरिक्त रिलीज कोटा दिया जाता है, तो बाजार में नई चीनी की उपलब्धता समय से पहले बढ़ सकती है। इससे त्योहारी सीजन के दौरान कीमतों में ज्यादा तेजी को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है।
दूसरी ओर, सरकार को यह भी देखना होगा कि घरेलू खपत के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहे और एथेनॉल कार्यक्रम के लिए जरूरी कच्चा माल भी मिलता रहे।
फिलहाल उद्योग का कहना है कि देश में तत्काल चीनी की कमी जैसी स्थिति नहीं है। मौजूदा तेजी काफी हद तक उत्पादन, स्टॉक और भविष्य की आपूर्ति को लेकर बाजार की धारणा से जुड़ी हुई है। ऐसे में अगर सरकार और उद्योग मिलकर जल्द उत्पादन शुरू करने की योजना पर सहमति बनाते हैं, तो आने वाले त्योहारी सीजन में चीनी की आपूर्ति को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।
निष्कर्ष
चीनी की कीमतों में हालिया तेजी के बीच ISMA ने सरकार के सामने उत्पादन जल्दी शुरू करने का रास्ता रखा है। मिलें सामान्य समय से करीब 10-15 दिन पहले शुरू हो सकती हैं, लेकिन उद्योग इसके लिए 2.5 प्रतिशत सेंट्रल GST छूट और अतिरिक्त रिलीज कोटा चाहता है। वहीं, घरेलू खपत, बफर स्टॉक और एथेनॉल की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए अहम रहेगा। अगले कुछ हफ्तों में गन्ने की फसल की स्थिति स्पष्ट होने के बाद चीनी बाजार की दिशा को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है।


