Tata Group News: टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के फरवरी 2027 में कार्यकाल पूरा होने के बाद नए चेयरमैन की तलाश शुरू हो गई है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस दिशा में अनौपचारिक बातचीत शुरू कर दी है। इसी सिलसिले में उन्होंने HDFC के पूर्व चेयरमैन दीपक पारेख से मुलाकात की है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि टाटा संस की कमान अब किसके हाथ में जाएगी।
नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े औद्योगिक समूहों में शामिल टाटा ग्रुप में नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी शुरू हो गई है। टाटा संस के मौजूदा चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने फरवरी 2027 में अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद पद छोड़ने की घोषणा की है। इसके बाद अब टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने अगले चेयरमैन की तलाश को लेकर अनौपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सूत्रों के मुताबिक, नोएल टाटा ने बुधवार को मुंबई स्थित ताज वेलिंगटन म्यूज रेजिडेंस में HDFC के पूर्व चेयरमैन दीपक पारेख से मुलाकात की। इस बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के एक अन्य ट्रस्टी के शामिल होने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि, बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
टाटा संस की AGM में भी उठा था उत्तराधिकार का मुद्दा
नए चेयरमैन की तलाश ऐसे समय शुरू हुई है जब टाटा संस की AGM भी चर्चा में रही। मंगलवार को कंपनी की वार्षिक आम बैठक कोरम पूरा नहीं होने के कारण स्थगित करनी पड़ी। यह टाटा संस के इतिहास में पहली बार हुआ।
माना जा रहा है कि AGM से जुड़ी चर्चाओं में प्रस्तावित सक्सेशन कमिटी यानी उत्तराधिकार समिति का मुद्दा भी महत्वपूर्ण था। यही समिति टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के अगले चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाएगी।
टाटा संस के नियमों के मुताबिक, नए चेयरमैन के चयन के लिए ऐसी समिति का गठन जरूरी है। टाटा ग्रुप का आकार और टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी देखते हुए इस प्रक्रिया पर बाजार और कारोबारी जगत की भी नजर है।
दीपक पारेख का टाटा ग्रुप से पुराना संबंध
दीपक पारेख टाटा ग्रुप के लिए नए नाम नहीं हैं। HDFC ग्रुप के टाटा समूह के साथ लंबे समय से कारोबारी संबंध रहे हैं। पारेख खुद टाटा ग्रुप की प्रमुख हॉस्पिटैलिटी कंपनी इंडियन होटल्स कंपनी के बोर्ड का हिस्सा रह चुके हैं।
इसके अलावा, रतन टाटा और साइरस मिस्त्री के बीच विवाद के दौरान पारेख उन प्रमुख लोगों में शामिल थे जिन्होंने सार्वजनिक रूप से मिस्त्री का समर्थन किया था। साइरस मिस्त्री को 2016 में टाटा संस के चेयरमैन पद से हटा दिया गया था।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नोएल टाटा ने पारेख को प्रस्तावित उत्तराधिकार समिति में किसी भूमिका के लिए संपर्क किया है या नहीं। नोएल टाटा के कार्यालय की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।
क्या है उत्तराधिकार समिति का पेच?
टाटा संस के नियमों के अनुसार उत्तराधिकार समिति में कुल पांच सदस्य होने चाहिए। इनमें तीन सदस्यों को सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) और सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) द्वारा नामित किया जाना है, जबकि दो सदस्यों का चयन टाटा संस का बोर्ड करेगा।
टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है। ऐसे में नए चेयरमैन के चयन में ट्रस्ट्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बोर्ड की ओर से नामित दो सदस्यों में से एक टाटा संस का मौजूदा डायरेक्टर और दूसरा कोई बाहरी स्वतंत्र सदस्य हो सकता है। हालांकि, असली पेच ट्रस्ट्स की ओर से नामित किए जाने वाले तीन सदस्यों को लेकर है।
नियमों के मुताबिक इन तीन सदस्यों को SDTT और SRTT की ओर से संयुक्त रूप से नामित किया जाना चाहिए। लेकिन महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर की ओर से SRTT के फैसले लेने पर रोक लगाए जाने के कारण इस प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
यही वजह है कि टाटा संस के नए चेयरमैन के चयन की औपचारिक प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी, इसे लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
पहले भी अपनाया जा चुका है सर्च कमिटी मॉडल
टाटा संस में चेयरमैन चुनने के लिए सर्च कमिटी मॉडल नया नहीं है। 2012 में रतन टाटा के उत्तराधिकारी के तौर पर साइरस मिस्त्री के चयन में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई गई थी।
इसके बाद 2016 में साइरस मिस्त्री को चेयरमैन पद से हटाए जाने के बाद एक पांच सदस्यीय समिति बनाई गई थी। इसमें रतन टाटा, ट्रस्ट के ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन, ट्रस्ट के पूर्व ट्रस्टी अमित चंद्र, टाटा संस के पूर्व डायरेक्टर रोनेन सेन और प्रोफेसर कुमार भट्टाचार्य शामिल थे।
इसी समिति ने बाद में एन चंद्रशेखरन को टाटा संस के चेयरमैन पद के लिए चुना था।
अब किस पर टिकेगी टाटा संस की नजर?
एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल के बाद टाटा संस की कमान किसे मिलेगी, इस पर अभी कोई आधिकारिक नाम सामने नहीं आया है। दीपक पारेख के साथ नोएल टाटा की मुलाकात ने उत्तराधिकार प्रक्रिया को लेकर चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है।
हालांकि, जब तक उत्तराधिकार समिति का औपचारिक गठन और चयन प्रक्रिया शुरू नहीं होती, तब तक किसी एक व्यक्ति को अगला चेयरमैन मानना जल्दबाजी होगी। टाटा संस की विशाल कारोबारी हिस्सेदारी और टाटा ट्रस्ट्स की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए नए चेयरमैन का चयन टाटा ग्रुप के लिए बेहद अहम फैसला होगा।


