Noida Airport News: एस्कॉर्ट्स कुबोटा ने उत्तर प्रदेश के यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में अपने नए मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की नींव रख दी है। 154 एकड़ में बनने वाले इस प्लांट पर शुरुआती तौर पर ₹2,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश किया जाएगा। पहले फेज में सालाना 60,000 ट्रैक्टर और 15,000 कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट यूनिट्स बनाने की क्षमता विकसित की जाएगी।
Noida Airport News: एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड ने उत्तर प्रदेश के यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में अपने महत्वाकांक्षी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का शिलान्यास कर दिया है। गौतम बुद्ध नगर जिले के सेक्टर-10 में 19 अगस्त को हुए भूमि पूजन के साथ कंपनी ने इस प्रोजेक्ट के लिए ₹2,000 करोड़ से अधिक के शुरुआती निवेश का ऐलान किया है।
यह प्रोजेक्ट सिर्फ कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत को ग्लोबल एग्रीकल्चर और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम माना जा रहा है।
154 एकड़ में तैयार होगा विशाल मैन्युफैक्चरिंग कैंपस
एक रिपोर्ट के मुताबिक, एस्कॉर्ट्स कुबोटा का नया प्लांट करीब 154 एकड़ जमीन में विकसित किया जाएगा। यह कंपनी की ओर से अब तक किए गए सबसे बड़े कैपिटल और इंफ्रास्ट्रक्चर कमिटमेंट में से एक है।
इस इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग कैंपस को कई चरणों में विकसित किया जाएगा। पहले फेज में सालाना 60,000 ट्रैक्टर और 15,000 कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट यूनिट्स बनाने की क्षमता तैयार की जाएगी।
कंपनी का प्लान इस कैंपस में ट्रैक्टर के साथ-साथ कृषि उपकरण, कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट और इंजन जैसे प्रोडक्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग करने का है। इससे कंपनी को घरेलू मांग पूरी करने के साथ-साथ एक्सपोर्ट मार्केट के लिए भी उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
कंपनी के मुताबिक, प्रोजेक्ट के सभी चरण पूरे होने के बाद यह कुबोटा ग्रुप के दुनिया भर में मौजूद प्रमुख और बड़े मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स में शामिल हो सकता है।
नोएडा एयरपोर्ट के पास प्लांट बनाने का क्या है फायदा?
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसकी लोकेशन भी है। प्लांट यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे YEIDA क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है और यह जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के करीब है।
नोएडा एयरपोर्ट के विकसित होने के साथ इस पूरे इलाके में लॉजिस्टिक्स और कार्गो इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार की उम्मीद है। ऐसे में एस्कॉर्ट्स कुबोटा को भविष्य में अपने उत्पादों की आवाजाही और एक्सपोर्ट में बेहतर कनेक्टिविटी का फायदा मिल सकता है।
इसके अलावा दिल्ली-NCR के बड़े इंजीनियरिंग और ऑटो कंपोनेंट सप्लायर नेटवर्क की मौजूदगी भी कंपनी के लिए अहम एडवांटेज होगी। इससे सप्लाई चेन को मजबूत करने और उत्पादन लागत को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद मिल सकती है।
भारत पर कुबोटा का बड़ा दांव
एस्कॉर्ट्स कुबोटा का यह प्रोजेक्ट जापान की कुबोटा कॉरपोरेशन की मिड-टर्म बिजनेस प्लान 2030 की रणनीति से भी जुड़ा हुआ है। इस रणनीति में भारत को ग्रुप के प्रमुख ग्रोथ मार्केट्स में शामिल किया गया है।
कुबोटा कॉरपोरेशन के सीईओ शिंगो हानाडा के मुताबिक, नए प्लांट का पैमाना यह दिखाता है कि कुबोटा की ग्लोबल ग्रोथ स्ट्रैटेजी में भारत की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो गई है।
भारत अब कंपनी के लिए केवल एक बड़ा ट्रैक्टर बाजार नहीं है। कंपनी भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और इंजीनियरिंग हब के तौर पर भी विकसित करना चाहती है।
पहले से चल रही थी बड़े प्रोजेक्ट की तैयारी
इस प्रोजेक्ट की पृष्ठभूमि भी काफी महत्वपूर्ण है। नवंबर 2025 में YEIDA ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ अगस्त 2024 में हुए एमओयू के आधार पर एस्कॉर्ट्स कुबोटा को ट्रैक्टर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए करीब 200 एकड़ जमीन आवंटित की थी।
उस समय प्रस्तावित प्रोजेक्ट का कुल निवेश करीब ₹4,500 करोड़ बताया गया था और इससे लगभग 4,000 रोजगार पैदा होने का अनुमान था।
अब जिस प्रोजेक्ट का शिलान्यास हुआ है, उसे उसी बड़े विजन के तहत एक संशोधित और फेज्ड स्कोप के तौर पर देखा जा रहा है। कंपनी शुरुआत में ₹2,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश करेगी और आगे प्रोजेक्ट के विस्तार के साथ क्षमता बढ़ाई जा सकती है।
फार्म मेकेनाइजेशन को 2030-31 तक नई दिशा देने की तैयारी
एस्कॉर्ट्स कुबोटा के सीएमडी निखिल नंदा के मुताबिक कंपनी अब प्रोडक्ट-लीड ग्रोथ पर फोकस कर रही है। कंपनी ने इस साल अपने तीन प्रमुख ब्रांड्स के तहत 42 नए प्रोडक्ट्स लॉन्च किए हैं, जबकि पिछले दो वर्षों में 50 से ज्यादा नए प्रोडक्ट्स बाजार में उतारे गए हैं।
इन नए प्रोडक्ट्स के जरिए कंपनी धान की खेती, फोर-व्हील-ड्राइव ट्रैक्टर और दूसरे खास कृषि सेगमेंट्स में मौजूद जरूरतों को पूरा करने की कोशिश कर रही है।
अप्रैल से जुलाई के बीच कंपनी ने अपने पैन-इंडिया नेटवर्क के जरिए लगातार मार्केट शेयर बढ़ाने की दिशा में भी काम किया है।
कंपनी का लक्ष्य 2030-31 तक भारत में एक ऐसा फुल-सॉल्यूशन एग्रीकल्चर प्लेटफॉर्म तैयार करना है, जिसमें किसान को केवल ट्रैक्टर ही नहीं, बल्कि खेती से जुड़ी अलग-अलग जरूरतों के लिए एक व्यापक समाधान मिल सके।
AI और डिजिटल टेक्नोलॉजी पर भी रहेगा फोकस
एस्कॉर्ट्स कुबोटा के भविष्य के प्लान में सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाना ही शामिल नहीं है। कंपनी कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटलाइजेशन और स्मार्ट एग्रीकल्चर को भी बढ़ावा देने की तैयारी में है।
कंपनी का मानना है कि आने वाले वर्षों में खेती में मशीनरी के इस्तेमाल के साथ डेटा, डिजिटल टेक्नोलॉजी और ऑटोमेशन की भूमिका भी बढ़ेगी। ऐसे में नया मैन्युफैक्चरिंग कैंपस कंपनी को अगली पीढ़ी के कृषि उपकरण और मशीनरी तैयार करने के लिए मजबूत आधार दे सकता है।
एस्कॉर्ट्स कुबोटा और कुबोटा की ग्लोबल मौजूदगी
एस्कॉर्ट्स कुबोटा की स्थापना वर्ष 1944 में हुई थी। कंपनी भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में Farmtrac, Powertrac और Kubota जैसे ब्रांड्स के तहत ट्रैक्टर और कृषि उपकरण बेचती है।
वहीं जापान की Kubota Corporation की शुरुआत वर्ष 1890 में ओसाका में हुई थी। कंपनी दुनिया के 120 से अधिक देशों में कृषि, कंस्ट्रक्शन और इंजन कारोबार में मौजूद है और एस्कॉर्ट्स कुबोटा में इसकी बहुमत हिस्सेदारी है।
क्या बदलेगा इस प्रोजेक्ट से?
एस्कॉर्ट्स कुबोटा का नोएडा एयरपोर्ट के पास यह मेगा प्लांट उत्तर प्रदेश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है। बड़े पैमाने पर ट्रैक्टर और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट उत्पादन से स्थानीय सप्लायर नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स, इंजीनियरिंग और रोजगार को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
वहीं कंपनी के लिए यह प्लांट भारत की बढ़ती कृषि मशीनरी मांग को पूरा करने के साथ-साथ ग्लोबल एक्सपोर्ट को बढ़ाने का रणनीतिक केंद्र बन सकता है।
अगर प्रोजेक्ट की योजना के मुताबिक अलग-अलग फेज में क्षमता बढ़ती है, तो आने वाले वर्षों में यह नोएडा एयरपोर्ट-यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र को देश के प्रमुख एग्रीकल्चर और इंजीनियरिंग मैन्युफैक्चरिंग हब्स में शामिल करने में अहम भूमिका निभा सकता है।


