Nifty Outlook: लगातार सात कारोबारी दिनों की गिरावट के बाद 20 अगस्त को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार रिकवरी देखने को मिली। निफ्टी और सेंसेक्स दोनों आधे फीसदी से ज्यादा चढ़कर बंद हुए। ग्लोबल बॉन्ड मार्केट में स्थिरता, अमेरिकी ट्रेजरी की ओर से लॉन्ग-टर्म बॉन्ड बायबैक बढ़ाने के ऐलान और आईटी व फाइनेंशियल शेयरों में खरीदारी ने बाजार की धारणा को मजबूत किया। हालांकि, एक्सपर्ट्स अभी इसे पूरी तरह सुरक्षित तेजी नहीं मान रहे हैं। निफ्टी के लिए 24,300 का स्तर बेहद अहम बन गया है, जबकि 24,000 के आसपास मजबूत सपोर्ट बना हुआ है।
7 दिन की गिरावट के बाद बाजार में लौटी रौनक
निफ्टी में लगातार सात कारोबारी सत्रों तक गिरावट आई थी। इस दौरान इंडेक्स करीब 2.1 फीसदी कमजोर हुआ, जो लगभग 11 महीनों में इसकी सबसे लंबी गिरावट रही। कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने शेयर बाजार पर दबाव बनाया था।
20 अगस्त को हालांकि माहौल बदला। एशियाई बाजारों में मजबूती और ग्लोबल बॉन्ड मार्केट में स्थिरता का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। आईटी और फाइनेंशियल शेयरों में खरीदारी ने निफ्टी को रिकवरी करने में मदद की।
अमेरिकी ट्रेजरी के फैसले से मिला सपोर्ट
हाल की गिरावट में बढ़ती बॉन्ड यील्ड एक बड़ी चिंता रही थी। ज्यादा बॉन्ड यील्ड की स्थिति में निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित डेट एसेट्स का आकर्षण बढ़ता है, जिससे इक्विटी में जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
अब अमेरिकी ट्रेजरी ने लॉन्ग-टर्म बॉन्ड्स के बायबैक को दोगुना करने का फैसला किया है। यह ऐलान ऐसे समय हुआ है जब 30 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड इस सप्ताह 2007 के बाद के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थी।
ग्लोबल यील्ड में नरमी आने और निवेशकों की रिस्क लेने की क्षमता बेहतर होने से भारतीय इक्विटी बाजार को आगे भी सपोर्ट मिल सकता है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और जियोपॉलिटिकल तनाव अभी भी बाजार के लिए बड़े जोखिम हैं।
क्या अब जारी रहेगी निफ्टी की तेजी?
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्राइम रिसर्च हेड देवर्ष वकील के मुताबिक, निफ्टी की तेजी तब तक कायम रह सकती है जब तक अप्रैल, जून और जुलाई के स्विंग लो से बन रही ऊपर की ओर जाती ट्रेंडलाइन बरकरार रहती है और करीब 24,000 का मजबूत सपोर्ट बना रहता है।
उनके मुताबिक निफ्टी का अहम रेजिस्टेंस अब 24,300 पर आ गया है। इस स्तर के ऊपर लगातार क्लोजिंग बाजार में स्थिरता का पहला संकेत होगी। इसके बाद निफ्टी में आगे की तेजी का रास्ता खुल सकता है।
24,300 के ऊपर टिकना क्यों जरूरी?
एक्सिस डायरेक्ट के रिसर्च हेड राजेश पलविया का मानना है कि शॉर्ट टर्म में बाजार का रुख सकारात्मक जरूर हुआ है, लेकिन निफ्टी के 24,300 के नीचे रहने तक निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए।
उनके मुताबिक:
- 24,300: अहम रेजिस्टेंस और ब्रेकआउट लेवल
- 24,450: 24,300 के ऊपर मजबूती आने पर अगला लक्ष्य
- 24,000: प्रमुख सपोर्ट
- 23,800: 24,000 टूटने पर अगला संभावित स्तर
अगर निफ्टी 24,300 के ऊपर लगातार ब्रेकआउट करता है तो इंडेक्स 24,450 की ओर बढ़ सकता है। दूसरी ओर, 24,000 का सपोर्ट टूटने पर बिकवाली बढ़ सकती है और निफ्टी 23,800 तक फिसल सकता है।
राजेश पलविया के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में संभावित नरमी बाजार के लिए एक अहम पॉजिटिव ट्रिगर साबित हो सकती है।
24,200-24,260 जोन पर नजर
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स के अनुसार, अगर निफ्टी 24,200-24,260 के ऊपर टिकता है तो मौजूदा पुलबैक आगे बढ़ सकता है।
उनके मुताबिक ऐसी स्थिति में निफ्टी के लिए 24,380 से 24,540 का जोन महत्वपूर्ण हो सकता है।
हालांकि, शॉर्ट-टर्म स्ट्रक्चर पॉजिटिव होने के बावजूद 24,060 के स्तर पर नजर रखना जरूरी है। अगर यह सपोर्ट टूटता है तो गिरावट दोबारा तेज हो सकती है और निफ्टी 23,575 तक फिसल सकता है।
Nifty के लिए अहम लेवल्स
| स्तर | महत्व |
|---|---|
| 24,540 | ऊपरी तरफ संभावित लक्ष्य |
| 24,450 | अगला प्रमुख रेजिस्टेंस |
| 24,380 | पुलबैक का अहम स्तर |
| 24,300 | तत्काल रेजिस्टेंस/ब्रेकआउट लेवल |
| 24,200-24,260 | शॉर्ट-टर्म सपोर्ट/ट्रिगर जोन |
| 24,060 | महत्वपूर्ण सपोर्ट |
| 24,000 | मजबूत सपोर्ट |
| 23,800 | 24,000 टूटने पर अगला सपोर्ट |
| 23,575 | कमजोरी बढ़ने पर संभावित स्तर |
बाजार में तेजी के बावजूद कहां है खतरा?
निफ्टी की सात दिनों की लगातार गिरावट के बाद आई रिकवरी निश्चित तौर पर बाजार के लिए राहत की खबर है। लेकिन सिर्फ एक मजबूत कारोबारी सत्र के आधार पर ट्रेंड पूरी तरह बदल गया है, ऐसा मानना जल्दबाजी होगी।
सबसे पहले निफ्टी को 24,300 के ऊपर टिकाऊ क्लोजिंग देनी होगी। इसके बाद 24,450 और 24,540 की तरफ बढ़ने की संभावना मजबूत होगी। वहीं 24,000 और खासकर 24,060 के नीचे कमजोरी आने पर मौजूदा रिकवरी फिर से दबाव में आ सकती है।
इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी। इसलिए मौजूदा तेजी में भी निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स को ध्यान में रखकर ही रणनीति बनाएं।
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