Market Outlook: भारतीय शेयर बाजार मंगलवार, 18 अगस्त को गिरावट के साथ बंद हुआ। IT, रियल्टी, मेटल और FMCG शेयरों में बिकवाली के चलते निफ्टी 24,200 के स्तर से नीचे फिसल गया। सेंसेक्स भी करीब 493 अंक टूटकर बंद हुआ। अब निवेशकों की नजर 19 अगस्त के कारोबार पर है। टेक्निकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बाजार की अगली दिशा अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों पर निर्भर करेगी।
गिरावट के साथ बंद हुआ शेयर बाजार
18 अगस्त को सेंसेक्स 492.70 अंक यानी 0.63% गिरकर 77,235.46 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 132.75 अंक यानी 0.55% की गिरावट के साथ 24,154.90 पर रहा। कारोबारी सत्र में करीब 1,860 शेयरों में तेजी, 2,258 शेयरों में गिरावट और 172 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
निफ्टी पर एशियन पेंट्स, इंफोसिस, HCL टेक्नोलॉजीज, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स और विप्रो सबसे ज्यादा दबाव में रहे। दूसरी ओर एक्सिस बैंक, मैक्स हेल्थकेयर, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, M&M और पावर ग्रिड कॉर्प बढ़त वाले प्रमुख शेयरों में रहे।
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो ऑटो, मीडिया और ऑयल एंड गैस इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। वहीं IT इंडेक्स में 1.9%, रियल्टी में 1.4%, FMCG में 0.7% और मेटल इंडेक्स में 0.6% की गिरावट रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.4% नीचे रहा, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स लगभग सपाट बंद हुआ।
कच्चे तेल और ग्लोबल संकेतों ने बढ़ाई चिंता
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती ने बाजार के सेंटीमेंट पर सबसे ज्यादा असर डाला। इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और कमजोर वैश्विक संकेतों ने भारतीय बाजार में जोखिम से बचने का माहौल बनाया।
अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी सीजफायर खत्म होने के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने की उम्मीदों को झटका लगा है। इससे निवेशकों के बीच महंगाई दोबारा बढ़ने की चिंता पैदा हुई है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने उभरते बाजारों के प्रति निवेशकों का आकर्षण भी प्रभावित किया।
IT शेयरों में अपेक्षाकृत ज्यादा बिकवाली देखने को मिली। आशंका है कि लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें रहने से वैश्विक टेक्नोलॉजी खर्च पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि, घरेलू अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल अभी मजबूत हैं, लेकिन महंगा कच्चा तेल और बढ़ती इनपुट लागत कंपनियों की कमाई पर असर डाल सकती है।
19 अगस्त को कैसी रह सकती है निफ्टी की चाल?
Hedged.in के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट-HNI एंड डेरिवेटिव्स रियांक अरोड़ा के अनुसार, हालिया तेजी के बाद बाजार में प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिली है। कुछ हैवीवेट शेयरों में बिकवाली ने सेंटीमेंट को कमजोर किया, लेकिन इसके बावजूद बाजार का व्यापक स्ट्रक्चर अभी पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है।
निफ्टी के लिए 24,100-24,050 तत्काल सपोर्ट जोन माना जा रहा है। इसके नीचे 23,900 अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट हो सकता है। दूसरी तरफ 24,250-24,350 का क्षेत्र अहम रेजिस्टेंस रहेगा। अगर निफ्टी इस रेंज के ऊपर टिकता है तो बाजार में दोबारा तेजी की गुंजाइश बन सकती है।
24,000 के नीचे फिसला तो बढ़ सकता है दबाव
SBI सिक्योरिटीज के हेड-टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च सुदीप शाह का कहना है कि निफ्टी के लिए 24,030-24,000 का जोन महत्वपूर्ण सपोर्ट एरिया है। इस स्तर के आसपास ऊपर की ओर बने चैनल की बढ़ती ट्रेंडलाइन भी मौजूद है।
अगर निफ्टी 24,000 के नीचे निर्णायक रूप से टूटता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और इंडेक्स 23,850 के स्तर की ओर जा सकता है।
ऊपर की तरफ 24,280-24,300 का जोन अहम रेजिस्टेंस है। जब तक निफ्टी 24,300 के नीचे कारोबार करता है, तब तक शॉर्ट टर्म में बाजार का रुख कमजोर रहने की संभावना बनी हुई है।
50 EMA के नीचे आया निफ्टी
LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे के मुताबिक, निफ्टी की कमजोरी का एक कारण वीकली ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी भी है। इंडेक्स कई दिनों के बाद पहली बार 50 EMA के नीचे आया है, जिससे शॉर्ट टर्म सेंटीमेंट पर दबाव बढ़ा है।
RSI में भी बेयरिश क्रॉसओवर बना हुआ है और इसमें कमजोरी जारी है। ऐसे में निफ्टी में गिरावट आगे बढ़ती है तो 24,050-24,000 का क्षेत्र शुरुआती सपोर्ट दे सकता है। वहीं 24,240 के आसपास तत्काल रेजिस्टेंस नजर आ रहा है।
बैंक निफ्टी का क्या है आउटलुक?
बैंक निफ्टी मंगलवार को भी कमजोरी के साथ बंद हुआ। सुदीप शाह के मुताबिक, पिछले करीब 10 ट्रेडिंग सेशन से इंडेक्स 57,119-58,077 की सीमित रेंज में कारोबार कर रहा है। इससे फिलहाल किसी स्पष्ट दिशा की कमी दिखाई देती है।
लंबे समय तक एक सीमित दायरे में रहने के कारण प्रमुख मूविंग एवरेज भी लगभग सपाट हो गए हैं। मोमेंटम इंडिकेटर्स और ऑसिलेटर्स भी कंसोलिडेशन का संकेत दे रहे हैं। डेली RSI भी पिछले 29 ट्रेडिंग सेशन से सीमित दायरे में बना हुआ है।
बैंक निफ्टी के लिए 57,500-57,600 का जोन अहम रेजिस्टेंस है, जहां 20-डे EMA मौजूद है। वहीं नीचे की तरफ 56,900-56,800 का क्षेत्र तत्काल सपोर्ट के तौर पर देखा जा रहा है, जो 100-डे EMA के आसपास है।
बैंक निफ्टी में आगे किसी बड़े ट्रेंड के लिए इन दोनों जोन में से किसी एक का निर्णायक ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन जरूरी होगा।
निवेशकों को क्या रणनीति अपनानी चाहिए?
मंगलवार की गिरावट को फिलहाल बड़े ट्रेंड में बदलाव के बजाय प्रॉफिट बुकिंग के तौर पर देखा जा सकता है, लेकिन इसके लिए निफ्टी और बैंक निफ्टी के अहम सपोर्ट लेवल का बचा रहना जरूरी है।
19 अगस्त को निवेशकों को खास तौर पर निफ्टी के 24,000-24,050 सपोर्ट और 24,250-24,300 रेजिस्टेंस जोन पर नजर रखनी चाहिए। 24,000 के नीचे कमजोरी बढ़ सकती है, जबकि 24,300 के ऊपर मजबूती लौटने पर बाजार में सकारात्मक मोमेंटम बन सकता है।
ऐसे बाजार में अच्छी कंपनियों के शेयरों में गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनाई जा सकती है, लेकिन ग्लोबल संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और प्रमुख तकनीकी स्तरों को देखते हुए रिस्क मैनेजमेंट को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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