Sammaan Capital Share Price: इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस से जुड़े पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने CBI और दिल्ली पुलिस की EOW से मामले की प्रगति पर नई स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। इस खबर के बीच Sammaan Capital के शेयर में दबाव देखने को मिला और स्टॉक 2 फीसदी से ज्यादा गिरकर बंद हुआ। हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा जांच उसके खिलाफ नहीं बल्कि पूर्व प्रमोटर से जुड़े आरोपों को लेकर है।
Sammaan Capital Share Price: इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस का नाम बदलकर अब Sammaan Capital हो चुका है। कंपनी से जुड़े करीब सात साल पुराने कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के बाद मंगलवार को शेयर पर दबाव देखने को मिला। NSE पर Sammaan Capital का शेयर 3.10 रुपये यानी 2.02 फीसदी गिरकर 150.23 रुपये पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान शेयर 145 रुपये के निचले स्तर तक भी पहुंच गया।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने CBI और दिल्ली पुलिस की Economic Offences Wing (EOW) की जांच की गति पर सवाल उठाए हैं। इससे पहले भी कोर्ट दोनों एजेंसियों से जांच की प्रगति पर जवाब मांग चुका है। जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने जांच में देरी को लेकर CBI और EOW को फटकार लगाई थी और दोनों से नई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिए?
इंडियाबुल्स से जुड़े मामले की सुनवाई Citizens Whistleblower Forum की याचिका पर हो रही है। याचिका में कंपनी के तत्कालीन प्रमोटर्स से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन और अन्य अनियमितताओं की जांच की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों को मामले में तेजी लाने और अपनी जांच की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। कोर्ट की चिंता मुख्य रूप से इस बात को लेकर रही है कि लंबे समय से चल रही जांच में एजेंसियों ने अब तक क्या कार्रवाई की है और आगे की जांच किस दिशा में जाएगी।
जुलाई में सुनवाई के दौरान CJI सूर्य कांत की अगुवाई वाली पीठ ने CBI और दिल्ली पुलिस EOW की जांच की धीमी गति पर नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि एजेंसियों की ओर से पर्याप्त प्रगति की जानकारी नहीं दी गई है। इसके बाद दोनों एजेंसियों को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय दिया गया।
मामले में कथित वित्तीय लेनदेन, फंड के राउंड-ट्रिपिंग, फंड के कथित डायवर्जन और कंपनी कानून से जुड़े आरोपों की जांच का मुद्दा सामने आया है। हालांकि, इन आरोपों को लेकर अंतिम निष्कर्ष अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
क्या Sammaan Capital पर भी आरोप है?
यह सबसे अहम सवाल है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई की खबर सामने आने के बाद शेयर में गिरावट देखने को मिली है।
Sammaan Capital ने पहले भी अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया है कि कंपनी खुद इस मामले में आरोपी नहीं है। कंपनी के अनुसार, मौजूदा कानूनी कार्यवाही का मुख्य फोकस पूर्व प्रमोटर और उनसे जुड़े कथित लेनदेन पर है।
कंपनी ने नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद जारी बयान में कहा था कि कोर्ट ने Sammaan Capital के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश नहीं दिया था और कंपनी के खिलाफ आरोपों के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की थी। कंपनी ने यह भी बताया था कि उसके पूर्व प्रमोटर ने 2023 में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच दी थी और कंपनी अब प्रोफेशनली मैनेज्ड एवं प्रमोटर-लेस संस्था है।
इसलिए निवेशकों के लिए यह अंतर समझना जरूरी है कि जांच से जुड़ी खबर और कंपनी के खिलाफ आरोप साबित होना दो अलग बातें हैं। सुप्रीम कोर्ट का जांच को आगे बढ़ाने का निर्देश अपने आप में कंपनी को दोषी ठहराने वाला फैसला नहीं है।
सात साल पुराने विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
इस पूरे मामले की शुरुआत Citizens Whistleblower Forum की याचिका से हुई। संगठन ने अदालत का रुख करते हुए इंडियाबुल्स से जुड़े कुछ वित्तीय लेनदेन पर सवाल उठाए थे।
याचिका में आरोपों के तौर पर कथित तौर पर लोन वितरण, फंड के इस्तेमाल, संबंधित पक्षों के बीच लेनदेन और शेयर बाजार में संभावित हेरफेर जैसे मुद्दे उठाए गए। इसके अलावा कुछ लोन को कथित रूप से एक ऐसे चक्र से जोड़कर देखा गया जिसमें पुराने कर्ज को नए कर्ज के जरिए संभालने की बात कही गई थी।
इसे आम भाषा में लोन की एवरग्रीनिंग कहा जाता है। इसमें किसी पुराने या तनावग्रस्त कर्ज को चुकाने के लिए नया कर्ज दिया जाता है। हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
सुप्रीम कोर्ट पहले भी इस मामले में जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठा चुका है। नवंबर 2025 के एक आदेश में कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि उसने Sammaan Capital के खिलाफ लगाए गए आरोपों के मेरिट पर कोई राय नहीं दी है।
ED के मामले में कंपनी को क्या राहत मिली?
यहां एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम भी सामने आया है। 13 अगस्त 2026 को कर्नाटक हाईकोर्ट ने Sammaan Capital के खिलाफ ED की मनी लॉन्ड्रिंग कार्रवाई को खारिज कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने माना कि जिस बुनियादी अपराध के आधार पर PMLA की कार्यवाही आगे बढ़ाई जा सकती थी, उसके कमजोर पड़ने के बाद ED की कार्रवाई का आधार भी कायम नहीं रहता।
यही वजह है कि मौजूदा घटनाक्रम को केवल कंपनी के खिलाफ कार्रवाई के तौर पर देखना सही नहीं होगा। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट में पूर्व प्रमोटर से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन की जांच को लेकर CBI और EOW से जवाब मांगा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ कंपनी ने अपने खिलाफ आरोपों से दूरी स्पष्ट की है।
शेयर में आज क्यों आई गिरावट?
Sammaan Capital के शेयर में आज की गिरावट को निवेशकों की सावधानी से जोड़कर देखा जा सकता है। कानूनी और नियामकीय मामलों से जुड़ी खबरें अक्सर NBFC और वित्तीय कंपनियों के शेयरों में सेंटीमेंट पर असर डालती हैं।
हालांकि, केवल एक दिन की गिरावट के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि कंपनी के कारोबार में कोई बड़ा बदलाव हो गया है। स्टॉक का प्रदर्शन बाजार के व्यापक रुख, कंपनी के वित्तीय नतीजों, लोन बुक, एसेट क्वालिटी, फंडिंग लागत और आगे आने वाले कानूनी घटनाक्रम पर भी निर्भर करेगा।
कंपनी की आधिकारिक घोषणाओं के मुताबिक, 2026 में उसकी क्रेडिट प्रोफाइल में भी सुधार देखने को मिला है। मई 2026 में ICRA ने Sammaan Capital की रेटिंग को AA+ तक अपग्रेड किए जाने की जानकारी दी थी और CARE Ratings ने भी कंपनी की रेटिंग में दो पायदान का सुधार किया था।
Sammaan Capital Share Price: शेयर की चाल कैसी रही?
आपके दिए गए बाजार आंकड़ों के मुताबिक, Sammaan Capital के शेयर में हाल के समय में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
- आज: 2.02 फीसदी गिरावट, बंद भाव 150.23 रुपये
- 1 हफ्ते में: 8.06 फीसदी गिरावट
- 1 महीने में: 8.18 फीसदी गिरावट
- 3 महीने में: 7.58 फीसदी तेजी
- 2026 में अब तक: 3.15 फीसदी तेजी
- 1 साल में: 26.77 फीसदी तेजी
- 3 साल में: 4.01 फीसदी निगेटिव रिटर्न
इससे साफ है कि शॉर्ट टर्म में शेयर पर दबाव जरूर बना है, लेकिन एक साल के आधार पर स्टॉक अभी भी सकारात्मक रिटर्न में है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
Sammaan Capital के शेयर को लेकर निवेशकों को फिलहाल सिर्फ सुप्रीम कोर्ट की खबर देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मौजूदा जांच का फोकस पूर्व प्रमोटर से जुड़े कथित मामलों पर है और कंपनी ने खुद को आरोपी नहीं बताया है।
दूसरी तरफ, सुप्रीम कोर्ट द्वारा CBI और EOW से जांच की प्रगति पर रिपोर्ट मांगना यह बताता है कि मामला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। इसलिए आगे आने वाली स्टेटस रिपोर्ट और अदालत की अगली कार्यवाही शेयर के लिए महत्वपूर्ण ट्रिगर हो सकती है।
साथ ही, 13 अगस्त को कर्नाटक हाईकोर्ट से ED मामले में मिली राहत भी कंपनी के लिए एक सकारात्मक कानूनी घटनाक्रम है।
निवेशकों को कंपनी के आगामी वित्तीय नतीजों, एसेट क्वालिटी, ग्रोथ, फंडिंग कॉस्ट और कानूनी मामलों की प्रगति को साथ में देखना चाहिए। केवल आज की 2 फीसदी गिरावट को आधार बनाकर Sell या Buy का फैसला लेना उचित नहीं होगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल समाचार और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


