INS Nipun: भारतीय नौसेना की अंडरवॉटर ताकत को मिलेगी नई धार, पनडुब्बी रेस्क्यू से लेकर डीप-सी सैल्वेज तक करेगा काम
भारतीय नौसेना अपनी समुद्र के अंदर ऑपरेशन करने की क्षमता को लगातार मजबूत कर रही है। इसी कड़ी में हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) ने भारतीय नौसेना को दूसरा स्वदेशी Diving Support Vessel (DSV) ‘निपुण’ सौंप दिया है। यह पोत 30 जुलाई 2026 को विशाखापत्तनम में नौसेना को डिलीवर किया गया। INS निपुण को गहरे समुद्र में डाइविंग, अंडरवॉटर सर्च एंड रेस्क्यू, सैल्वेज और पनडुब्बी बचाव अभियानों के लिए तैयार किया गया है।
निपुण को करीब 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री के साथ तैयार किया गया है। भारतीय नौसेना के अनुसार यह पोत 300 मीटर तक डीप-सी सैचुरेशन डाइविंग में सक्षम है और जरूरत पड़ने पर Deep Submergence Rescue Vehicle (DSRV) के लिए मदर शिप की भूमिका भी निभा सकता है। इससे पनडुब्बी में किसी गंभीर आपात स्थिति के दौरान फंसे नौसैनिकों को बाहर निकालने की क्षमता और मजबूत होगी।
1. क्या है INS निपुण?
INS निपुण कोई सामान्य युद्धपोत नहीं बल्कि एक विशेष Diving Support Vessel है। ऐसे पोतों को पानी के भीतर जटिल और लंबे समय तक चलने वाले अभियानों के लिए तैयार किया जाता है। इनमें प्रशिक्षित गोताखोरों के साथ-साथ अंडरवॉटर उपकरण, रिमोटली ऑपरेटेड सिस्टम और रेस्क्यू सपोर्ट सुविधाएं होती हैं।
निपुण को भारतीय नौसेना के लिए HSL ने विशाखापत्तनम में डिजाइन और निर्मित किया है। यह INS निस्तार (Nistar) की बहन पोत है और इस श्रेणी का दूसरा DSV है। INS निस्तार को जुलाई 2025 में नौसेना में कमीशन किया गया था।
2. निपुण की डिलीवरी कब हुई?
Hindustan Shipyard Limited ने 30 जुलाई 2026 को विशाखापत्तनम में INS निपुण को भारतीय नौसेना को सौंपा। डिलीवरी के बाद पोत को मुंबई ले जाने की तैयारी की गई है, जहां इसके औपचारिक नौसैनिक कमीशनिंग समारोह की प्रक्रिया पूरी की जानी है। HSL से जुड़े दस्तावेजों में भी निपुण को मुंबई में हैंडओवर किए जाने के लिए विशेष समुद्री यात्रा का उल्लेख मिलता है।
इसका मतलब है कि फिलहाल निपुण की डिलीवरी हो चुकी है, जबकि डिलीवरी और औपचारिक कमीशनिंग को एक ही प्रक्रिया नहीं माना जाना चाहिए। नौसेना में किसी पोत की आधिकारिक कमीशनिंग के बाद ही वह नियमित रूप से ऑपरेशनल फ्लीट का हिस्सा बनता है।
3. गहरे समुद्र में 300 मीटर तक डाइविंग की क्षमता
INS निपुण की सबसे अहम खूबियों में इसकी Deep Sea Saturation Diving क्षमता शामिल है। भारतीय नौसेना के अनुसार यह पोत 300 मीटर तक की गहराई में सैचुरेशन डाइविंग अभियानों को सपोर्ट कर सकता है।
सैचुरेशन डाइविंग ऐसी तकनीक है जिसमें गोताखोरों को लंबे समय तक अधिक दबाव वाले वातावरण में काम करने के लिए विशेष सपोर्ट दिया जाता है। इसका इस्तेमाल समुद्र के भीतर ऐसी जगहों पर किया जाता है जहां सामान्य डाइविंग तकनीकों से काम करना मुश्किल हो सकता है।
इस क्षमता की मदद से नौसेना समुद्र के अंदर क्षतिग्रस्त संरचनाओं की जांच, सैल्वेज, खोज और अन्य विशेष अभियानों को ज्यादा प्रभावी तरीके से अंजाम दे सकती है।
4. पनडुब्बी रेस्क्यू में क्यों है खास?
निपुण की सबसे महत्वपूर्ण भूमिकाओं में से एक Submarine Rescue Operations को सपोर्ट करना है। समुद्र के भीतर किसी पनडुब्बी के दुर्घटनाग्रस्त होने या किसी अन्य आपात स्थिति में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है।
INS निपुण ऐसे अभियानों के दौरान Deep Submergence Rescue Vehicle (DSRV) के मदर शिप के तौर पर काम कर सकता है। DSRV को संबंधित क्षेत्र तक पहुंचाने, लॉन्च करने और वापस रिकवर करने में इस तरह का पोत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इससे भारतीय नौसेना की अपनी पनडुब्बी रेस्क्यू क्षमता और मजबूत होती है और किसी गंभीर समुद्री आपात स्थिति में बाहरी सहायता पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
5. ROV और आधुनिक डाइविंग सिस्टम से लैस
निपुण को सिर्फ गोताखोरों के लिए सपोर्ट शिप के तौर पर नहीं देखा जा सकता। इसमें आधुनिक अंडरवॉटर सिस्टम लगाए गए हैं, जिनमें Remotely Operated Vehicles (ROVs) भी शामिल हैं।
ROV को समुद्र के अंदर उन स्थानों तक भेजा जा सकता है जहां मानव गोताखोरों के लिए जाना मुश्किल या जोखिमपूर्ण हो सकता है। ये सिस्टम पानी के भीतर निगरानी, निरीक्षण और सैल्वेज जैसे कामों में मदद करते हैं।
पोत में डीप-सी डाइविंग के लिए विशेष उपकरण, साइड डाइविंग स्टेज और अन्य मिशन सपोर्ट सिस्टम भी उपलब्ध हैं। इससे यह एक तरह से समुद्र के अंदर होने वाले जटिल अभियानों के लिए चलती-फिरती सपोर्ट बेस की भूमिका निभाता है।
6. 118 मीटर लंबा और 8,560 टन से ज्यादा विस्थापन
INS निपुण आकार के मामले में भी एक बड़ा विशेषीकृत नौसैनिक पोत है। इसकी लंबाई करीब 118 मीटर है और इसका विस्थापन 8,560 टन से अधिक बताया गया है।
इस आकार का फायदा यह है कि पोत पर डाइविंग सिस्टम, रेस्क्यू उपकरण, ROVs और अन्य मिशन सपोर्ट सुविधाओं को एक साथ रखा जा सकता है।
इसके अलावा DSV जैसे पोत लंबे समय तक समुद्र में रहकर विशेष अभियानों को सपोर्ट करने के लिए बनाए जाते हैं। इसलिए इनका डिजाइन पारंपरिक हथियारबंद युद्धपोतों से अलग होता है। इनका मुख्य उद्देश्य समुद्र के भीतर रेस्क्यू, डाइविंग, सर्वे और सैल्वेज जैसे मिशनों को सक्षम बनाना है।
7. करीब 75% स्वदेशी सामग्री, आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा
INS निपुण की एक बड़ी उपलब्धि इसका स्वदेशी निर्माण है। भारतीय नौसेना के अनुसार इसमें करीब 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है। इसका निर्माण HSL ने इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (IRS) के वर्गीकरण नियमों के अनुरूप किया है।
इस तरह के जटिल पोत का देश में निर्माण भारत की बढ़ती रक्षा जहाज निर्माण क्षमता को दर्शाता है। इससे सिर्फ नौसेना की जरूरतें पूरी नहीं होतीं, बल्कि देश के घरेलू शिपबिल्डिंग इकोसिस्टम, इंजीनियरिंग कंपनियों और सप्लाई चेन को भी बढ़ावा मिलता है।
इस परियोजना में स्वदेशी उद्योग और MSME क्षेत्र की भागीदारी भी भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करने वाली कड़ी है। सरकार लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता घटाने और घरेलू निर्माण बढ़ाने पर जोर दे रही है।
8. INS निपुण से भारतीय नौसेना को क्या फायदा होगा?
निपुण के शामिल होने से भारतीय नौसेना को अंडरवॉटर ऑपरेशन के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण फायदे मिलेंगे।
पहला, नौसेना की डीप-सी डाइविंग क्षमता बढ़ेगी।
दूसरा, समुद्र में डूबे जहाजों या अन्य संरचनाओं से जुड़े सैल्वेज ऑपरेशन अधिक प्रभावी तरीके से किए जा सकेंगे।
तीसरा, पनडुब्बी दुर्घटनाओं के दौरान DSRV आधारित रेस्क्यू मिशनों को बेहतर सपोर्ट मिलेगा।
चौथा, ROV और आधुनिक डाइविंग सिस्टम की मदद से पानी के भीतर निगरानी और निरीक्षण की क्षमता मजबूत होगी।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निपुण और INS निस्तार जैसे DSV भारतीय नौसेना को समुद्र की सतह से नीचे होने वाले अभियानों के लिए एक समर्पित बुनियादी ढांचा देते हैं। भारतीय नौसेना पहले ही DSRV क्षमता विकसित कर चुकी है और DSV इस पूरे रेस्क्यू आर्किटेक्चर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
INS निपुण क्यों है रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण?
हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। ऐसे में सिर्फ सतह पर निगरानी और युद्ध क्षमता ही पर्याप्त नहीं है। पनडुब्बियां, अंडरवॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर और समुद्र की गहराई में होने वाले ऑपरेशन आधुनिक समुद्री सुरक्षा का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
INS निपुण इसी अंडरवॉटर क्षमता को मजबूत करता है। इसका इस्तेमाल केवल युद्ध जैसी परिस्थितियों में ही नहीं, बल्कि सर्च एंड रेस्क्यू, समुद्री दुर्घटनाओं, सैल्वेज और अन्य विशेष अंडरवॉटर मिशनों में भी किया जा सकता है।
इसके अलावा यह भारत के लिए एक तकनीकी उपलब्धि भी है। जटिल Diving Support Vessel को देश में डिजाइन और तैयार करना यह दिखाता है कि भारतीय रक्षा शिपबिल्डिंग अब केवल पारंपरिक युद्धपोतों तक सीमित नहीं है, बल्कि विशेष मिशन वाले अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म भी घरेलू स्तर पर तैयार किए जा रहे हैं।
INS निस्तार के बाद निपुण की एंट्री
INS निपुण को इस परियोजना की पहली पोत INS निस्तार के साथ देखा जाना चाहिए। दोनों DSV एक ही व्यापक क्षमता निर्माण का हिस्सा हैं। INS निस्तार को जुलाई 2025 में भारतीय नौसेना में कमीशन किया गया था और निपुण उसकी बहन पोत है।
दोनों पोतों की मौजूदगी से नौसेना को देश के अलग-अलग समुद्री क्षेत्रों में विशेष डाइविंग और रेस्क्यू क्षमताओं को तैनात करने में अधिक लचीलापन मिल सकता है।
निष्कर्ष
INS निपुण भारतीय नौसेना के लिए सिर्फ एक नया जहाज नहीं, बल्कि अंडरवॉटर रेस्क्यू और डीप-सी ऑपरेशन की महत्वपूर्ण क्षमता है। करीब 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री, 300 मीटर तक सैचुरेशन डाइविंग क्षमता, ROV सिस्टम और DSRV के मदर शिप के रूप में काम करने की क्षमता इसे बेहद खास बनाती है।
30 जुलाई 2026 को HSL द्वारा इसकी डिलीवरी भारत के स्वदेशी रक्षा जहाज निर्माण कार्यक्रम के लिए भी महत्वपूर्ण पड़ाव है। औपचारिक कमीशनिंग के बाद निपुण भारतीय नौसेना की अंडरवॉटर ऑपरेशनल क्षमता को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।


