BSE Share Price: बीएसई के शेयरों में 18 अगस्त को लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। शेयर 0.70 फीसदी फिसलकर ₹3,308 पर बंद हुआ। पिछले एक सप्ताह में इसमें 7 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। इस कमजोरी की बड़ी वजह ब्रोकरेज फर्मों की ओर से रेटिंग और टारगेट प्राइस में कटौती को माना जा रहा है। हालांकि, इसके बावजूद शेयर इस साल अब तक करीब 26 फीसदी चढ़ा हुआ है। ऐसे में निवेशकों के सामने सवाल है कि मौजूदा स्तर पर शेयर बेचें, होल्ड करें या गिरावट का फायदा उठाकर खरीदारी करें।
बीएसई के शेयर में क्यों आई गिरावट?
बीएसई के शेयर में हालिया गिरावट से पहले जोरदार तेजी देखने को मिली थी। एलकेपी सिक्योरिटीज के टेक्निकल एनालिस्ट वत्सल भुवा के मुताबिक, शेयर का भाव करीब ₹2,676 से बढ़कर ₹4,455 तक पहुंच गया था। इतनी तेज तेजी के बाद स्टॉक में मुनाफावसूली और करेक्शन देखने को मिलना स्वाभाविक है।
टेक्निकल संकेतकों की बात करें तो शेयर ने 38.2 फीसदी और 61.8 फीसदी फिबोनाकी रिट्रेसमेंट लेवल को पार किया है। वहीं, शेयर 20-DMA और 50-DMA के आसपास कारोबार कर रहा है। इससे फिलहाल स्टॉक में कमजोर मोमेंटम और बिकवाली दबाव के संकेत मिल रहे हैं।
शेयर का RSI भी करीब 32.5 के स्तर पर है। RSI में 30 के आसपास का स्तर ओवरसोल्ड जोन माना जाता है। इसलिए मौजूदा स्तर पर शेयर काफी कमजोर दिख रहा है, लेकिन अगर बिकवाली और बढ़ती है तो निवेशकों को महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल पर नजर रखनी होगी।
Nuvama ने घटाई BSE पर रेटिंग
बीएसई के शेयर में कमजोरी बढ़ने की एक प्रमुख वजह Nuvama Institutional Equities की रिपोर्ट भी रही। ब्रोकरेज ने शेयर की रेटिंग को पहले की ‘Buy’ से घटाकर ‘Hold’ कर दिया है।
इसके साथ ही Nuvama ने शेयर का टारगेट प्राइस भी घटाया है। ब्रोकरेज ने लक्ष्य में करीब 21 फीसदी की कटौती करते हुए इसे ₹3,240 कर दिया है। यानी 18 अगस्त के ₹3,308 के बंद भाव से देखें तो ब्रोकरेज का नया टारगेट बहुत सीमित संभावित बढ़त दिखाता है।
Nuvama ने वित्त वर्ष 2027 के लिए कंपनी के प्रति शेयर आय यानी EPS अनुमान में 6.3 फीसदी की कटौती की है। वहीं, FY28 के EPS अनुमान को 15 फीसदी कम किया गया है। अनुमान में यह बदलाव निवेशकों के सेंटीमेंट पर दबाव डाल सकता है।
Jefferies ने भी रेटिंग घटाई
Nuvama से पहले Jefferies ने भी बीएसई के शेयर को लेकर अपना रुख कमजोर किया था। ब्रोकरेज ने स्टॉक की रेटिंग घटाकर ‘Underperform’ कर दी और टारगेट प्राइस में करीब 16 फीसदी की कटौती की।
ब्रोकरेज की ओर से लगातार नकारात्मक रुख सामने आने के कारण शेयर में बिकवाली का दबाव बढ़ा है। खासतौर पर तेज तेजी के बाद ऊंचे स्तरों पर बैठे निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू की, जिससे शेयर लगातार पांच कारोबारी सत्रों तक कमजोर रहा।
एवरेज ट्रेडिंग वॉल्यूम में भी गिरावट
बीएसई के शेयर के लिए एक और चिंता ट्रेडिंग वॉल्यूम से जुड़ी है। उपलब्ध ब्रोकरेज टिप्पणी के मुताबिक, कंपनी का एवरेज डेली ट्रेडेड वॉल्यूम घटकर करीब ₹18,100 करोड़ रह गया है। यह जून 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर बताया गया है।
बीएसई के कारोबार में ट्रेडिंग वॉल्यूम और बाजार गतिविधि महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में औसत ट्रेडिंग वॉल्यूम में लगातार गिरावट स्टॉक के लिए नकारात्मक संकेत माना जा सकता है।
क्या BSE का शेयर बेच देना चाहिए?
मौजूदा हालात को देखते हुए जल्दबाजी में पूरी होल्डिंग बेचने का फैसला करना उचित नहीं होगा। शेयर में शॉर्ट टर्म में कमजोरी बनी रह सकती है, लेकिन इसमें पहले भी तेज गिरावट के बाद रिकवरी देखने को मिली है।
मास्टर कैपिटल सर्विसेज के चीफ रिसर्च ऑफिसर रवि सिंह के मुताबिक, अचानक पूरी तरह बेयरिश रुख अपनाने के बजाय शेयर पर Hold की रणनीति बेहतर हो सकती है। उनका मानना है कि अगर बिकवाली का दबाव कम होता है तो बीएसई के शेयर में दोबारा तेज रिकवरी की संभावना बन सकती है।
नए निवेशक क्या करें?
नए निवेशकों के लिए मौजूदा स्तर पर तुरंत बड़ी रकम लगाने के बजाय सावधानी बरतना बेहतर होगा। शेयर में हालिया गिरावट के बावजूद वैल्यूएशन और ब्रोकरेज रेटिंग में बदलाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
टेक्निकल एनालिसिस के आधार पर लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए ₹3,000 का स्टॉपलॉस महत्वपूर्ण बताया गया है। अगर शेयर इस स्तर के नीचे लगातार कमजोरी दिखाता है तो आगे और करेक्शन का जोखिम बढ़ सकता है।
वहीं, अगर शेयर यहां से सपोर्ट लेकर दोबारा ऊपर की ओर बढ़ता है और ट्रेडिंग वॉल्यूम में सुधार आता है, तो निवेशकों का सेंटीमेंट बेहतर हो सकता है।
इस साल 26 फीसदी चढ़ा है BSE Share
हालिया गिरावट के बावजूद बीएसई का शेयर 2026 में अब तक करीब 26 फीसदी मजबूत हुआ है। हालांकि, पिछले एक महीने में इसमें 9 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है।
इससे साफ है कि शेयर ने लंबी अवधि में मजबूत रिटर्न दिया है, लेकिन हालिया तेजी के बाद फिलहाल इसमें करेक्शन का दौर चल रहा है। निवेशकों को केवल एक-दो कारोबारी सत्रों की गिरावट देखकर फैसला लेने के बजाय कंपनी के कारोबार, ट्रेडिंग वॉल्यूम, वैल्यूएशन और तकनीकी स्तरों पर नजर रखनी चाहिए।
BSE Share Price: बेचें, होल्ड करें या खरीदें?
कुल मिलाकर, मौजूदा संकेतों को देखते हुए मौजूदा निवेशकों के लिए Hold, जबकि नए निवेशकों के लिए गिरावट में चरणबद्ध तरीके से खरीदारी पर विचार करने की रणनीति ज्यादा संतुलित नजर आती है। हालांकि, ₹3,000 का स्तर टूटने पर जोखिम बढ़ सकता है।
ब्रोकरेज फर्मों की रेटिंग में कटौती और ट्रेडिंग वॉल्यूम में कमजोरी फिलहाल चिंता का विषय है। दूसरी ओर, शेयर में पहले तेज करेक्शन के बाद रिकवरी का इतिहास रहा है। इसलिए निवेशकों को जोखिम क्षमता के अनुसार फैसला लेना चाहिए और केवल ब्रोकरेज टारगेट के आधार पर निवेश निर्णय नहीं लेना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


