Gold Silver Price: घरेलू वायदा बाजार में मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। ग्लोबल बुलियन कीमतों में नरमी, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और निवेशकों की सतर्कता के कारण दोनों कीमती धातुओं पर दबाव बना। हालांकि, भारत में आने वाले त्योहारों और शादी के सीजन से सोने की फिजिकल डिमांड को सहारा मिलने की उम्मीद है।
MCX पर सोना-चांदी हुए सस्ते
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना ₹544 यानी 0.35% गिरकर ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया। इन कॉन्ट्रैक्ट्स में करीब 9,895 लॉट का कारोबार हुआ।
इसी तरह दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी ₹2,535 यानी 1.04% गिरकर ₹2.41 लाख प्रति किलोग्राम पर आ गई। चांदी के इन कॉन्ट्रैक्ट्स में करीब 4,317 लॉट का कारोबार हुआ।
घरेलू बाजार में आई इस गिरावट का असर ग्लोबल बुलियन मार्केट में कमजोरी के कारण भी देखने को मिला। न्यूयॉर्क में सोने का वायदा भाव 0.36% गिरकर 4,457.60 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं चांदी की कीमत 1.78% गिरकर 65.01 डॉलर प्रति औंस रह गई।
सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट क्यों आई?
जानकारों के मुताबिक भारतीय बाजार में सोने की कीमतों में नरमी की एक बड़ी वजह स्पॉट मार्केट में कमजोर मांग है। इसके अलावा बाजार में निवेशकों की ओर से पोजीशन कम करने का असर भी चांदी की कीमतों पर पड़ा है।
Lemonn के रिसर्च हेड गौरव गर्ग के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से जुड़ी महंगाई की चिंताओं ने निवेशकों को सतर्क किया है। इसका असर बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों यानी सोने और चांदी की मांग पर पड़ा।
इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी भी भारतीय बाजार में सोने की कीमतों को प्रभावित कर रही है। रुपया करीब ₹95.68 प्रति डॉलर के स्तर पर था। वहीं कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने भारतीय मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव बनाया।
फेड की ब्याज दरों पर नजर
सोने और चांदी की आगे की दिशा के लिए निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले फैसलों और आर्थिक आंकड़ों पर बनी हुई है।
रिद्धि-सिद्धि बुलियंस के मैनेजिंग डायरेक्टर और इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट पृथ्वीराज कोठारी के मुताबिक सितंबर में अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों में कमी से कीमती धातुओं की कीमतों में नरमी देखने को मिली है।
बाजार अब अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक के मिनट्स और आने वाले आर्थिक संकेतों का इंतजार कर रहा है। हालिया अमेरिकी जॉब्स, महंगाई और रिटेल सेल्स के आंकड़ों ने ब्याज दरों को स्थिर रखने की उम्मीद को मजबूत किया है।
अगर आगे ब्याज दरों को लेकर नरम रुख सामने आता है, तो यह सोने के लिए सकारात्मक संकेत हो सकता है। ब्याज दरों में कमी या कटौती की उम्मीद बढ़ने पर बॉन्ड यील्ड पर दबाव आ सकता है, जिससे सोने जैसी बिना यील्ड वाली संपत्ति का आकर्षण बढ़ता है।
क्या त्योहारों में बढ़ेगी सोने की मांग?
भारत में सोने की कीमतें भले ही ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, लेकिन जानकारों का मानना है कि आने वाला त्योहार और शादी का सीजन फिजिकल गोल्ड डिमांड को बढ़ावा दे सकता है।
एस्पेक्ट बुलियन एंड रिफाइनरी के CEO दर्शन देसाई के अनुसार, ऊंची कीमतों के बावजूद कीमती धातुओं की फिजिकल डिमांड मजबूत बनी हुई है। भारत में सोने की खरीद सिर्फ निवेश के लिए ही नहीं, बल्कि त्योहारों, शादियों, गिफ्टिंग और पारंपरिक जरूरतों से भी जुड़ी है।
हालांकि, ऊंची कीमतों का असर ग्राहकों की खरीदारी के तरीके पर पड़ सकता है। ग्राहक भारी ज्वेलरी की जगह हल्की ज्वेलरी, सिक्के और कम वजन वाले गोल्ड प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता दे सकते हैं।
देसाई के मुताबिक हालिया तेजी के बाद सोने में कुछ समय के लिए कंसोलिडेशन और प्रॉफिट-बुकिंग देखने को मिल सकती है। इसके बावजूद कीमती धातुओं का व्यापक नजरिया सकारात्मक बना हुआ है।
चांदी का क्या है आउटलुक?
चांदी में सोने की तुलना में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। इसकी वजह यह है कि चांदी की मांग केवल निवेश से नहीं, बल्कि इंडस्ट्रियल सेक्टर से भी जुड़ी है।
मौजूदा समय में चांदी निवेशकों की धारणा और औद्योगिक मांग से जुड़े अनुमानों, दोनों से प्रभावित हो रही है। अगर औद्योगिक गतिविधियों में मजबूती आती है और निवेश मांग बढ़ती है, तो चांदी को दोहरा फायदा मिल सकता है।
दर्शन देसाई के मुताबिक चांदी की निवेश एसेट और औद्योगिक कमोडिटी, दोनों के रूप में भूमिका इसे आने वाले समय में दिलचस्प बना सकती है।
हालांकि भारतीय बाजार में चांदी की कीमतों का रुख ग्लोबल बुलियन कीमतों, रुपये-डॉलर विनिमय दर और घरेलू फिजिकल डिमांड पर निर्भर करेगा।
निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?
सोने और चांदी में आगे की चाल को समझने के लिए निवेशकों को कुछ प्रमुख संकेतकों पर नजर रखनी चाहिए:
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व का ब्याज दरों पर रुख
- अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर इंडेक्स
- भारत में रुपये की चाल
- कच्चे तेल की कीमतें
- त्योहारी और शादी के सीजन में फिजिकल गोल्ड डिमांड
- ग्लोबल स्पॉट गोल्ड और सिल्वर की कीमतें
- केंद्रीय बैंकों की गोल्ड खरीदारी
क्या अभी सोना खरीदना सही है?
सोने की कीमतों में हालिया गिरावट को लेकर निवेशकों को जल्दबाजी में कोई फैसला लेने के बजाय अपने निवेश उद्देश्य और समयावधि पर ध्यान देना चाहिए। अगर खरीदारी का उद्देश्य त्योहार या शादी जैसी जरूरत है, तो कीमतों में छोटी अवधि की चाल से ज्यादा महत्वपूर्ण जरूरत और बजट हो सकता है।
वहीं निवेश के नजरिए से सोने में एकमुश्त निवेश के बजाय चरणबद्ध खरीदारी का विकल्प जोखिम को संतुलित करने में मदद कर सकता है। चांदी में उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है, इसलिए इसमें निवेश करते समय जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है।
निष्कर्ष
Gold Silver Price: घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में आज की गिरावट के पीछे ग्लोबल बुलियन कीमतों में कमजोरी, अमेरिकी यील्ड में बढ़ोतरी और निवेशकों की सतर्कता प्रमुख कारण रहे। हालांकि, भारत में आगामी त्योहार और शादी का सीजन फिजिकल गोल्ड डिमांड को मजबूत कर सकता है।
आगे सोने और चांदी की दिशा अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर-रुपये की चाल, कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू मांग जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगी। इसलिए आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी बाजार में उपलब्ध आंकड़ों और विशेषज्ञों के विचारों पर आधारित है। यह निवेश की सलाह नहीं है। सोने, चांदी या किसी अन्य एसेट में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखें तथा जरूरत पड़ने पर प्रमाणित वित्तीय सलाहकार की सलाह लें।


